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छत्तीसगढ़ राज्य सौर ऊर्जा नीति , 2012

छत्तीसगढ़ राज्य सौर ऊर्जा नीति , 2012

प्रस्तावना

पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा सुरक्षा के  प्रति बढ़ रही वैश्विक जागरूकता के परिप्रेक्ष्य में भारत की परिदृष्टि भी ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर  अपनी निर्भरता को कम करने और अपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों में अग्रणी होने की दिशा में विकसित हो रही है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए भविष्य में जीवाश्म आधारित ईधन के आयात पर निर्भरता को सुनियोजित तरीके से समाप्त करने एवं पर्यावरण संतुलन को कायम रखते हुए बिजली के क्षेत्र में मांग व पूति के अंतर को दूर करने के लिए निर्णायक रणनीतियों में गैर परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों और तकनीक को बढ़ावा देना एक महत्वपूर्ण रणनीति है।

भारत में सौर ऊर्जा भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए प्रेरक बनेगी। सौर ऊर्जा एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिसका दोहन अभी भी देश में क्षमता के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। भारत में प्रत्येक वर्ष के औसतन 300 धुप वाले दिनों में प्रतिदिन 5.5 किलोवाट प्रति वर्ग मीटर की औसत दर से सौर विकिरण उपलब्ध रहता है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2010 में जवाहर लाल नेहरु राष्ट्रीय सोलर मिशन का शुभारंभ करते हुए, राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2020 तक 20 हजार मेगावाट की सौर विधुत क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पर्यावरण पर बदलाव के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिये निर्मित राष्ट्रीय कार्ययोजना के 8 लक्ष्यों (मिशन) में भी इसे सम्मिलित किया गया है। प्रकृति में सहजता से उपलब्ध सौर प्रकाश का दोहन कर ,ऊर्जा का उत्पादन करने के लिये यह एक प्रभावी पहल है, जिससे परिस्थितियों के अनुरूप कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने व ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करने में सहायता मिलेगी।

बड़े पैमाने पर सौर –ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ को सौर विकिरण की उच्च तीव्रता वाला राज्य होने का सौभाग्य प्राप्त है। भारत के प्रमुक सौर विधुत उत्पादन केन्द्र के रूप में छत्तीसगढ़ के विकसित होने की संभावना मौजूद है। सौर ऊर्जा उत्पादन की विपुल क्षमता के कारण सौर उपस्कर उत्पादन का भविष्य भी बहुत उज्जवल है और इसमें जबरदस्त वृद्धि संभावित है।छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा उत्पादन से संबंधित संयंत्रो के निर्माण इकाईयों की स्थापना के लिए विशिष्ट लाभप्रद स्थितियां  विधमान हैं

छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ में नवीकरणीय ऊर्जा के दोहन हेतु वर्ष 2002 में एक नीति जारी की थी। विगत कुछ वर्षों में अपनाए गए प्रगतिशील दृष्टिकोण और विधि तथा विनियमों मे परिवर्तनों के आधार पर आने वाले 5 से 10 वर्षो के भीतर बड़े पैमाने पर सौर विधुत परियोजनाएं लगाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य की तैयारियां उन्नत चरण में हैं

छत्तीसगढ़ राज्य की विधुत पारेषण कंपनी (CSPTC) द्वारा राज्य में मज़बूत विधुत पारेषण प्रणाली, जिसमें 400 के. व्ही., 220 के. व्ही. तथा 132 के. व्ही. विधुत लाइनें  सम्मिलित हैं, विकसित की गई हैं तथा पारेषण प्रणाली के और भी उन्नयन हेतु अधोसंरचना के कार्य प्रस्तावित हैं, जिससे दूरस्थ अंचलों में सौर विधुत की प्रस्तावित परियोजनाओं से बिजली का पारेषण किया जा सकेगा

प्रदेश में सौर ऊर्जा की उभरती हुई क्रान्ति की क्षमताओं का उपयोग करने और राष्ट्रीय मिशन से लाभान्वित होने के लिए राज्य सरकार एतद्  द्वारा छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा नीति 2012 जारी करती हैं

उद्देश्य

राज्य सरकार निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा नीति 2012 लागू करती हैं :-

(अ.) विधुत की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने की दृष्टि से पर्यावरणीय और आर्थिक रूप से स्थायी ढंग से राज्य में सौर विधुत उत्पादन को प्रेरित ,विकसित और प्रोत्साहित करना

(ब.) सौर विधुत उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़वा देना।

(स.) राज्य में सौर उत्पादन क्षमताओं के विकास हेतु अनुकूल वातावरण निर्मित करना।

(द.) कोयले जैसे पारंपरिक तापीय ऊर्जा के स्रोतों पर निर्भरता को क्रमशः कम करते हुए छत्तीसगढ़ की दीर्घ अवधि ऊर्जा और पारिस्थितिकीय सुरक्षा में योगदान करना।

(इ.) प्रदेश के दूरस्थ व पहुंच विहीन क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों की विधुत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्थानीय आधार पर ग्रिड से प्रथक सौर अनुप्रयोगों को प्रोत्साहित करना।

(प.) सर्व प्रयोजन हेतु स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करना।

(फ.) राज्य में विकेन्द्रीकृत उत्पादन और वितरण को प्रोत्साहित करना।

(ब.) सौर ऊर्जा उत्पादन ,निर्माण और संबंधित सहायक उधोगों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार संभावनाओं का  सृजन करना

(भ.)  सौर ऊर्जा उत्पादन हेतु राज्य में उपलब्ध पड़त /गैर औधोगीकृत अनुपयोगी भूमि का उत्पादन ढंग से उपयोग करना ।

(म.)  एस क्षेत्र के लिए कुशल और अर्द्ध कुशल मानव संसाधन का विकास करना ।

(य.)  सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन से संबंधित अभिनव परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना ।

प्रचलन की अवधि

यह नीति, जारी होने की तिथि से 31मार्च 2017 तक प्रभावशील रहेगी ।उक्त अवधि में स्वीकृत, स्थापित एवं प्रारम्भ होने वाले सौर विधुत संयंत्र को ही इस नीति के लाभों को प्राप्त करने की पात्रता होगी ।

पात्र विकासकर्ता

कोई व्यक्ति, पंजीकृत कंपनी, केन्द्रीय और राज्य विधुत उत्पादन और वितरण कंपनियां और सर्वजनिक /निजी क्षेत्र के सौर विधुत परियोजना विकासकर्ता (सौर फोटोवोल्टेक/सौर तापीय )और सौर विधुत परियोजनाओं से संबंधित उपस्करों की निर्माणकर्ता इकाईयों और सहायक उधोग, समय –समय पर यथासंशोधित विधुत परियोजनाओं से संबंधित उपस्करों की निर्माणकर्ता इकाइयां और सहायक उधोग, समय – समय पर यथासंशोधित विधुत अधिनियम 2003 के अनुसरण में सौर विधुत परियोजनाओं, चाहे वे केप्टिव उपयोग और /  अथवा विधुत के विक्रय के उद्देश्य से हों, को स्थापित करने हेतु पात्र होगें ।

लक्षित क्षमता

राज्य शासन द्वारा  मार्च 2017 तक लगभग 500 से 1000 मेगावाट क्षमता के सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना का प्रयास किया जाएगा

ग्रिड  से सम्बद्ध  सौर विधुत संयंत्र की स्थापना स्वयं के उपयोग के लिए अथवा राज्य के बाहर सीधे किसी लाइसेंसी या अन्य किसी व्यक्ति को बिजली बेचने के लिए की जा सकेगी:

राज्य द्वारा सौर ऊर्जा विधुत परियोजना के विकासकर्ताओं को राज्य में स्वयं के उपयोग अथवा छतीसगढ़ राज्य के बाहर बिजली के विक्रय हेतु सौर विधुत संयंत्र की स्थापना हेतु प्रोत्साहित किया जावेगा ।

ग्रिड से सम्बद्ध सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन परियोजना को अक्षय ऊर्जा (सोलर ) सर्टिफिकेट (Renewable Energy Certificate-REC)  प्रणाली के माध्यम से बिजली क्रय की अनुमति:-

राज्य शासन द्वारा सौर ऊर्जा उत्पादकताओं को सौर विधुत संयंत्र स्थापित करके उत्पादित बिजली को आरईसी (सोलर )मैकेनिजिम अंतर्गत बेचने हेतु बढ़वा दिया जाएगा ।इन विधुत उत्पादन संयंत्रों से उत्पादित बिजली का क्रय राज्य की विधुत वितरण कंपनी द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य  विधुत नियामक आयोग द्वारा समय –समय पर निधारित पूल कॉस्ट पर किया जाएगा ।राज्य में बिजली की मांग एवं आपूर्ति की स्थिति के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य विधुत वितरण कंपनी द्वारा बिजली क्रय हेतु अंतिम निर्णय लिया जाएगा ।सौर ऊर्जा उत्पादनकर्ताओं द्वारा आरईसी (सोलर ) सर्टिफिकेट का विक्रय छत्तीसगढ़ राज्य विधुत नियामक आयोग अथवा उपयुक्त विधुत नियामक आयोग के द्वारा बनाये गये रेग्युलेशन के अंतगर्त किया जा सकेगा ।

वितरण कंपनी को बिजली का विक्रय, अक्षय ऊर्जा क्रय प्रतिबद्धता के अंतर्गत किया जाएगा ।

सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन परियोजनाओं के प्रकार

राज्य सरकार निम्नलिखित सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन परियोजना के विकास में सहायक और प्रोत्साहन प्रदान करेगी :

ग्रिड संयोजित सौर ऊर्जा उत्पादन :

समुचित वोल्टेज स्तर पर ग्रिड आधारित सौर ऊर्जा उत्पादन परियोजना

सौर-पार्क : राज्य शासन द्वारा सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन संयंत्र एवं इनसे संबंधित निर्माणी सुविधा के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सौर पार्क का विकास किया जाएगा ।सौर पार्क में सभी सामान्य सुविधाएं जैसे उपयुक्त भूमि, से जोड़ने के लिए विधुत पारेषण लाइने ,जल की उपलब्धता एवं आंतरिक पहुंच  हेतु सड़क एवं अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित की जायेगी ।

उपरोक्त सौर पार्क की स्थापना राज्य में चिन्हित किये गये स्थलों पर निजी निवेशकों द्वारा स्वयं के ब्यय पर अथवा निजी- सार्वजनिक भागीदारी में लागत में हिस्सेदारी के आधार पर की जा सकेगी ।

भवनों की छत पर स्थापित होने वाली सौर विधुत  परियोजनाए:

भवनों की छत पर सौर विधुत उत्पादन एक महत्वपूर्ण उदीयमान क्षेत्र हैं और राज्य सरकार इस निमित्त भारत सरकार के सहयोग से एक प्रायोगिक परियोजना प्रारंभ कर सकेगी ।नवीन एवं नवीकरणीय स्त्रोत मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दिये जाने वाले प्रोत्साहन इस स्कीम के अंतगर्त परियोजना विकासकर्ताओं को उपलब्ध कराये जायेंगे ।

छत्तीसगढ़ की औधोगिक नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ राज्य की औधोगिक नीति 2009-14 में अपरंपरागत स्त्रोत आधारित विधुत उत्पादन को प्राथमिकता वाले उधोग की श्रेणी में रखा गया हैं ।इस परिभाषा के अंतर्गत सौर विधुत उत्पादन के लिए इस नीति में विभिन्न रियायते दी गई हैं ।तदनुसार सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन हेतु ब्याज में अनुदान ,स्थाई पूंजी निवेश सब्सिडी ,विधुत शुल्क में भुगतान से छुट ,स्टाम्प शुल्क में छुट ,भूमि के क्रय हेतु निर्धारित दरों में छुट / रियायत ,परियोजना प्रतिवेदन सब्सिडी तथा तकनीकी पेटेंट सब्सिडी सहित अनेक प्रोत्साहन सम्मिलित है ।

कृपया अधिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य की औधोगिक नीति 2009-14 देखें ।(www.cg.gov.in)

उपरोक्त रियायते सौर ऊर्जा नीति के परिप्रेक्ष्य में मार्च 2017 तक स्थापित होने वाली परियोजनाओं के लिये प्रभावशील रहेंगी ।

विधुत शुल्क में भुगतान से छुट

प्रत्येक सौर ऊर्जा विधुत परियोजना द्वारा संयंत्र की स्वयं की खपत व राज्य के भीतर की गई केप्टिव खपत पर विधुत शुल्क के भुगतान से छुट रहेगी ।

विधुत शुल्क में भुगतान से छुट सौर ऊर्जा नीति के परिपेछ्य में मार्च 2017 तक स्थापित होने वाली परियोजनाओं के लिये प्रभावशील रहेंगी ।

औधोगिक नीति में प्रावधानित प्रोत्साहन / रियायतें  सौर ऊर्जा नीति की तुलना में निम्नतर होने पर सौर ऊर्जा नीति के प्रावधान लागू रहेंगे  ।

अतिरिक्त प्रोत्साहन

सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन परियोजनाओं के ऐसे विकासकर्ताओं जो अपने सौर विधुत उत्पादन संयंत्र को मार्च 2017 तक प्रारंभ कर देंगे को निम्नलिखित प्रोत्साहन उपलब्ध कराये ज़ायेगे ।ये प्रोत्साहन परियोजना के क्रियान्वयन की तिथि से सात वर्ष की अवधि तक प्रवर्तन में रहेंगे ।

मूल्य संवर्धित कर (VAT):

“ नवीन सोलर पावर प्लांट की स्थापना में लगने वाले प्लांट मशीनरी एवं उपकरण जो कि ऊर्जा निभाग द्वारा अधिसूचित किए जाएंगे को छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम के अंतगर्त वैट की देयता से मुक्त रखा जाएगा ।”

तृतीय पक्ष विक्रय हेतु खुली पहुंच  (Open Access):

यदि किसी विकासकर्ता को खुली पहुंच की अनुमति प्रदान की जाती है तो वह राज्य के बाहर तृतीय पछ को विधुत के विक्रय हेतु राज्य विधुत नियामक आयोग या केन्द्रीय नियामक आयोग द्वारा समय –समय पर प्रयोज्य खुली छुट प्रभार(Open Access Charges) और हानियों का भुगतान करेगा ।

व्हीलिंग और पारेषण प्रभार :

विक्रय हेतु व्हीलिंग और पारेषण प्रभार छत्तीसगढ़ राज्य विधुत नियामक आयोग द्वारा बनाये गये विनियमों के अनुसार होंगे ।

क्रास सब्सिडी प्रभार :                                                                      राज्य के भीतर किसी तीसरी पार्टी को बिजली के विक्रय पर क्रास सब्सिडी चार्जेस देय नहीं होगा बशर्ते संबंधित संस्थान राज्य की विधुत वितरण कंपनी के साथ  निष्पादित अनुबंध में विहित अनुबंधित मांग के अनुरूप बिजली विधुत वितरण कंपनी से प्राप्त कर रही है ।क्रास सब्सिडी से छुट का लाभ स्वयं के (केप्टिव )उपयोग पर प्रयोज्य नहीं होगा ।

बिजली बैंकिंग की सुविधा :

आपसी सहमति की शर्तो के अधीन बैंकिंग की अनुमति रहेगी ।आवश्यकतानुसार उपयुक्त विधुत नियामक आयोग से अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा ।

अक्षय ऊर्जा प्रमाण पत्र (REC):

ऊपर कंडिका 4 (अ)व 4 (ब) के अंतगर्त स्थापित प्रत्येक परियोजना को अक्षय ऊर्जा प्रमाण पत्र (REC) लाभ प्राप्त करने की पात्रता रहेगी ।ऐसे सौर विधुत उत्पादक को स्वयं के एकमेव ग्रिड में स्वयं के उपयोग हेतु डाली गई (Inject) विधुत पर राज्य विधुत नियामक आयोग द्वारा जारी दिशा निदेशों के तहत आरईसी के लाभ की पात्रता रहेगी ।

ग्रिड संयोजकता और उसमें विधुत संयोजन की सुविधा :

सौर विधुत संयंत्र से उत्पादित विधुत को ग्रिड संहिता की  शर्तो के अधीन निकटतम छत्तीसगढ़ राज्य विधुत पारेषण /वितरण लाइसेंसी के सब स्टेशन में  इंजेक्ट  करने की सुविधा रहेगी ।विधुत के पारेषण हेतु सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन संयंत्र के अंतर संयोजन बिन्दु (इंटर कनेक्शन पाईट ) से ग्रिड उपकेन्द्र (सब स्टेशन ) तक विधुत लाइन की स्थापना छत्तीसगढ़ राज्य की पारेषण कंपनी या वितरण कंपनी द्वारा परियोजना विकासकर्ता के व्यय पर की जायेगी ।यदि परियोजना विकासकर्ता स्वयं के व्यय पर विधुत पारेषण लाइन की स्थापना करना चाहता है तो ऐसी स्तिथि में उसे छत्तीसगढ़ विधुत पारेषण / वितरण कंपनी को परिवेक्षण  शुल्क का भुगतान नहीं होगा ।छत्तीसगढ़ राज्य की पारेषण /वितरण  कंपनी द्वारा विधुत के पारेषण हेतु तकनीकी क्षमता की उपलब्धता की पुष्टि ,आवेदन प्राप्त होने के 21 कार्य दिवसों के भीतर करेगी ।

ग्रिड संयोजकता परियोजना के लिये भूमि :

परियोजना के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता का दायित्व परियोजना विकासकर्ता का होगा ।परियोजना विकासकर्ता को शासकीय भूमि के उपलब्ध होने की स्तिथि में प्रभावशील विधियों ,राज्य के नियम ,तथा प्रचलित नीतियों के अंतगर्त किया जा सकेगा।इसी प्रकार निजी भूमि का अधिग्रहण प्रभावशील विधियों ,राज्य के नियम तथा प्रचलित नीतियों के अंतगर्त किया जा सकेगा ।

शासन द्वारा निजी भूमि अधिग्रहित कर उपलब्ध करने की दशा में इससे संबंधित राज्य की आदर्श पुनर्वास नीति लागू होगी ।सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन संयंत्र की स्थापना हेतु वैधानिक स्वीकृतियों  /अनुमतियों को प्राप्त करने का दायित्व परियोजना विकासकर्ता पर होगा ।

अक्षय  ऊर्जा क्रय प्रतिबद्धता (RPO)

विधुत वितरण कंपनी प्रतिस्पर्धात्मक खुली निविदा से निर्धारित विधुत दरों के अनुसार अक्षय ऊर्जा क्रय प्रतिबद्धता हेतु विधुत का क्रय करेगी ।विधुत वितरण कंपनी द्वारा सुविधा अनुसार अक्षय ऊर्जा प्रमाण पत्र (REC) प्रणाली के तहत उपयुक्त आयोग द्वारा समय – समय पर स्वीकृत विधुत की संयुक्त (पुल्ड ) लागत दरों पर ऐसा क्रय किया जा सकेगा ।

परियोजना के क्रियान्वयन हेतु समय सीमा

विकासकर्ता को आवंटित सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन परियोजनाओं को समयबध्द ढंग से 24 माह के अवधि में पूर्ण करना होगा ।

जीवाश्म ईधन के उपयोग पर प्रतिबंध

सौर विधुत संयंत्र में किसी भी तरह के जीवाश्म आधारित ईधन कोयला ,गैस ,लिग्नाईट , नेपथा ,लकड़ी आदि का उपयोग करना प्रतिबंधित रहेगा ।यदि सोलर थर्मल संयंत्र किसी इकाई के परिसर में स्थापित होता है तो इसे पूर्व से स्थापित जीवाश्म ईधन आधारित विधुत संयंत्र से भौतिक रूप से पृथक परिसर में रखना होगा  ।

संपर्क अभिकरण (नोडल एजेन्सी ) की भूमिका

संपर्क अभिकरण परियोजना विकासकर्ताओं को साहयता और मार्गदर्शन उपलब्ध करायेगा और इस नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये निम्नलिखित गतिविधियां  संचलित करेगा :

राज्य में सौर विधुत संयंत्र की स्थापना हेतु निविदाओं के आमंत्रण की प्रक्रिया से संबंधित सभी कार्य जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य विधुत उत्पादन कंपनी ,छत्तीसगढ़ राज्य विधुत वितरण कंपनी एवं अन्य विभागों के पास उपलब्ध भूमि /स्थान के आवंटन के लिए निविदा आमंत्रित करना सम्मिलित है ।संपर्क अभिकरण (नोडल एजेन्सी ) इस कार्य हेतु नाममात्र की दरों पर सेवा शुल्क वसूल कर सकेगा ।

स्थल का चिन्हांकन एवं भूमि बैंक का गठन ।

राज्य शासन अथवा उसकी एजेंसियों के पास उपलब्ध भूमि / स्थान के आवंटन में सहायता ।

मार्ग अधिकार (राईट आफ वे ), जल आपूर्ति एवं सड़क तक पहुँच आदि में सहायता ।

प्रशिक्षण और शिक्षण संस्थाओं के सहयोग से समुचित मानव संसाधन का विकास ।

एकल खिड़की स्वकृति प्रणाली

निम्नलिखित गतिविधियों के लिए एकल खिड़की स्वीकृति प्रणाली के तौर पर सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन परियोजनाओं की स्वीकृति के लिये छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा ) संपर्क अभिकरण के रूप में कार्य करेगा :

यह सुनिश्चित करना कि इस नीति के अनुरूप संबंधित विभागों द्वारा समस्त सुसंगत शासकीय आदेश समय रहते जाती हो जायें।

राज्य सरकार और उसके अभिकरणों से वांछित समस्त अनापत्तियां, अनुमतियां ,अनुमोदन और सहमतियां जारी करना।

यह सुनिचित करना कि राज्य की सुसंगत नीतियों के अंतगर्त औधोगिक इकाईयों को उपलब्ध समस्त रियायतें सौर विधुत उत्पादकों हेतु प्रयोज्य की जायें ।

आने वाले सौर ऊर्जा विधुत उत्पादन संयंत्रों हेतु निष्क्रमण (इवेक्युवेशन) अधोसंरचना के विकास को समय रहते सुनिश्चित करना।

ग्रिड की अंत: क्रियाशील प्रणालियों के संधारण को बढ़वा देना जिससे संयंत्र क्षमता का पूरा –पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

राज्य सरकार और इसके अभिकरणों द्वारा भूमि के आबंटन को सुगम बनाना ।

लंबित अनापत्तियों  की समीक्षा समय – समय पर सशक्त समिति द्वारा की जायेगी ।

सशक्त समिति

इस नीति के परिणामस्वरूप उदभूत होने वाले विभिन्न मुददों पर नजर रखने , निगरानी करने और उनका समाधान करने हेतु राज्य के मुख्य सचिव की  अध्यक्षता में एक सशक्त समिति गठित की जायेगी ।समिति के अन्य सदस्य

निम्नानुसार है :

  1. अपर मुख्य सचिव वित्त
  2. प्रमुख सचिव / सचिव , उधोग
  3. प्रमुख सचिव  / सचिव , राजस्व
  4. प्रमुख सचिव  / सचिव , ऊर्जा
  5. प्रमुख सचिव  / सचिव ,वित्त
  6. प्रबंध निदेशक , छत्तीसगढ़ राज्य विधुत पारेषण कंपनी
  7. प्रबंध निदेशक ,छत्तीसगढ़ राज्य विधुत वितरण कंपनी
  8. निदेशक ,छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा )-सदस्य सचिव

सशक्त समिति की बैठकें आवश्यकतानुसार आयोजित की जायेगी ।समिति  निम्नलिखित विषयों पर विचार –विमर्श करेगी और निर्णय लेगी :

  1. एकल खिड़की प्रणाली की निगरानी ( मॉनिटरिंग )
  2. समय – समय पर उत्पन्न हो सकने वाले अंतविभागीय मुद्दों का समाधान
  3. सौर ऊर्जा नीति के क्रियान्वयन में कठिनाईयों को दूर करना।
  4. अन्य कोई सुसंगत विषय।


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