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घरेलू नवाचार

पंपरहित स्टोव में मिट्टी के तेल से उत्पन्न ताप

आविष्कारक: सैफुद्दीन और अमानुद्दी काजी

शहर: जलगांव

राज्य: महाराष्ट्र

नवाचार के लाभ:

  • मिट्टी के तेल के दो लीटर के साथ स्टोव आठ घंटे तक लगातार जला सकते हैं। स्टोव का उपयोग प्रकाश प्रदान करने के लिए नहीं किया जाता है। यह नौ घंटे तक के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
  • स्टोव की लागत लगभग 1000 रुपये है।
  • यह स्टोव एक नीले रंग की लौ के साथ जलता है और यह वाहिकाओं काला नहीं करता है।
  • यह स्टोव पारंपरिक स्टोव से भी अधिक सुरक्षित है क्योंकि प्रारंभिक पम्पिग से स्टोव में प्रकाश पैदा करता है और इस चूल्हे में स्थिर दबाव बनाए रखता है।
  • यह स्टोव ध्वनि रहित है और पारंपरिक स्टोव की तरह इसमें ज्यादा सफाई की जरूरत नहीं होती है। सिर्फ प्रारंभ करते समय स्टोव को पंप करने की जरुरत होती है और इसमें ज्यादा मेहनत की जरुरत नहीं होती है।
  • इस स्टोव द्वारा उत्सर्जित धुआं ज्यादा भभक के साथ बाहर नहीं आता है जिससे साँस लेना धूम्रपान करने के कारण उत्पन्न खतरों और बीमारियों को कम धुएं से खतरों और बीमारी की संभावना कम हो जाती है।

दूध निकालने की मशीन

श्री वी. ए. जॉनी, शहर - एर्नाकुलम, राज्य - केरल

श्री जॉनी विद्याथिल पिछले 15 वर्षो से कोझीपीली दुग्ध संस्थान में कृत्रिम वीर्यारोपण कार्यकर्त्ता के रूप में कार्य कर रहे है।

दूध मशीन

  • गाय दूहने के कार्य में मानव श्रम में कमी
  • निम्न आय वर्ग के किसानों के लिए खरीदना संभव तथा उपयोग सरल
  • बिना किसी परेशानी के इससे गायों को दूहना या दूध निकालना संभव
  • इस मशीन को संचालित करने लिए बिजली की आवश्यकता नही होती तथा इसकी सफाई करना भी आसान
  • यह निर्वात के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसमें वॉल्व के साथ पम्प, प्लास्टिक की ट्यूब और रबर का अस्तर (बुश) लगा होता है। पम्प का एक सिरा गाय के थन में तथा दूसरा सिरा दूध बोतल से जोड़ दिया जाता है, उसके बाद दूध निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

सूखे क्षेत्रों में ईमली की खेती

श्री ए. आय. नाडकट्टन, शहर - धारवाड़, राज्य - कर्नाटका

श्री नाडकट्टन एक शौकिया मैकेनिक और पेशेवर सामाजिक कार्यकर्त्ता व पर्यावरणविद् हैं।

जल संरक्षण

  • 100 X 100 फीट आकार का एक तालाब खोदा जाता है। बरसात के मौसम में कँआ व खेतों में जमा पानी को तालाब में इकठ्ठा किया जाता है और बाद में उसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है।
  • चार इमली पेड़ के बीच में एक वर्गाकर गढ्ढा खोदा जाता है। पानी के साथ उसमें सूखी पत्तियाँ व टहनियों को इकठ्ठा किया जाता है। इसके अलावा, उसमें मछली व मूर्गी के सत्व या खाद को नमक के साथ मिलाकर गढ्ढे को छह इंच की ऊँचाई तक मिट्टी से भर दिया जाता है। बरसात के मौसम में इसमें बरसात का पानी जमा होता है। मिट्टी व नमक के मिश्रण के कारण गड्ढे में काफी लम्बे समय तक पानी जमा रहता है। इस प्रकार जमा की गई पानी का उपयोग सिंचाई कार्य के लिए किया जाता है।
  • 1 हॉर्स पावर के मोटर द्वारा तालाब में जमा पानी से खेतों की सिंचाई की जाती है जिससे बिजली की भी काफी बचत होती है।

इमली तुराई मशीन

इसमें लोहे की सैकडों जंजीरें होती है जो छड़ से लटकती रहती है। इसे ट्रैक्टर की ट्राली पर लादकर लाया जाता है। जब इमली की फसल पक कर तैयार हो जाती है तब ट्रैक्टर ट्रॉली को पेड़ के नीच कतार में लाया जाता है। इसके बाद जंजीरों को ढीला कर फैला दिया जाता है ताकि ट्राली में इमली आसानी से गिर सकें। इस दौरान जंजीरो के प्रहार से पौधे नष्ट हो जाते है लेकिन बाद में वह फिर उग जाता है।

इमली बीज विभाजक मशीन

इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए इसे ट्रैक्टर या ऑयल इंजन से जोड़ा दिया जाता है। इस मशीन में इमली को पेग की स्लाइडिंग क्रिया के कारण पॉड के बाहर फेंक दिया जाता है। इससे समय तथा श्रम दोनों की बचत होती है।



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