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जनजातीय उत्पादों अथवा ऊपज के विकास तथा विपणन के लिए संस्थागत समर्थन योजना के लिए दिशा-निर्देश

जनजातीय उत्पादों अथवा ऊपज के विकास तथा विपणन के लिए संस्थागत समर्थन योजना के लिए दिशा-निर्देश

प्रस्तावना

जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने “जनजातीय उत्पादों / ऊपज का बाजार विकास' तथा 'लघु वन उत्पाद संचालन के लिए राज्य जनजातीय विकास सहकारी निगम को सहायता अनुदान” को वर्तमान दो अलग योजनाओं के संशोधन तथा विलय द्वारा ‘जनजातीय उत्पादों / ऊपज के विकास तथा विपणन के लिए संस्थागत' समर्थन की योजना कार्यान्वित करने का निर्णय लिया है। यह योजना 12वीं पंचवर्षीय योजना की शेष अवधि के लिए केन्द्रीय क्षेत्र की योजना होगी ।

कार्य क्षेत्र

  • उत्पादन, उत्पाद विकास, पारम्परिक विरासत का आरक्षण, जनजातीय लोगों के वन तथा कृषि उत्पाद दोनों को समर्थन, उपरोक्त कार्यकलापों को जारी रखने के लिए संस्थानों को समर्थन, बेहतर अवसंरचना का प्रावधान, डिजाइनों का विकास, मूल्य तथा उत्पाद क्रय करने वाली एजेंसियों के विषय में सूचना का प्रसार, सतत विपणन के लिए सरकारी एजेंसियों को समर्थन तथा जिनके द्वारा उचित मूल्य व्यवस्था को सुनिश्चित करते हुए उत्पाद की पूरी श्रृंखला में विभिन्न जनजातियों से संबंधित लोगों के लिए व्यापक समर्थन प्रदान करना है ।
  • ग्राम पंचायत तथा ग्राम सभा के साथ सूचना साझा करना ।
  • कौशल उन्नयन, बाजार में मूल्य की वृद्धि के लिए उपयोगी उत्पादों का विकास

संस्थागत तंत्र

जनजातीय कार्य मंत्रालय (एमओटीए), भारत सरकार, योजना प्रचालित करने के लिए नोडल मंत्रालय होगा । योजना के तहत समर्थन निम्नलिखित के लिए उपलब्ध होगा-

  • जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राइफेड),
  • राज्य जनजातीय विकास सहकारी निगम,
  • राज्य वन विकास निगम (एसडीसी)
  • लघु वन उत्पाद (व्यापार तथा विकास) संघ (एमएफपीटीडीएफ)
  • उत्पाद डिजाइन, विकास, निर्यात प्रसंस्करण, जनजातीय उत्पादकों को प्रशिक्षण, पेटेंट करना तथा ट्रेड मार्क, अनुसंधान, जीआई प्रमाणीकरण तथा उपरोक्त के सहायक कार्यकलापों के लिए अन्य संस्थान चिह्नित किये गये हैं।

योजना के कार्यकलाप

योजना के तहत निम्नलिखित कार्यकलाप किये जाने चाहिए –

    बाजार उपाय

      विपणन उपाय के विभिन्न पहलुओं जिसको योजना के तहत समर्थन दिया जाएगा वह निम्नानुसार हैं

      • मानव निर्मित तथा प्राकृतिक वर्तमान उत्पादों दोनों के लिए उचित मूल्यों का निर्धारण ।
      • एक सुरक्षा जालकार्यक्रम के रुप में राज्य एजेंसियों द्वारा वास्तविक खरीद एवं न कि एकाधिकार / राष्ट्रीयकरण द्वारा ।
      • जब मूल्य, कम हो जाने की संभावना हो तब फसल की कटाई के मौसम के दौरान समर्थन ।
      • मूल्यों संबंधी सूचना को साझा करना ताकि लोग सूचित तथा सचेत निर्णय ले सकें तथा जिसके द्वारा बाजार कार्य सक्षम बन सकें ।
      • शहरी क्षेत्रों में तथा ऐसे क्षेत्रों में, जो उत्पादों की मांग को बढ़ाये जाने के लिए उत्पाद क्षेत्र से दूर हैं, राज्य एजेंसियों द्वारा उत्पादों की बिक्री ।
      • उत्पादों की ग्रेडिंग
      • मानकीकरण
      • स्रोत प्रमाणीकरण /पेटेंट आदि ।
      • अन्य प्रचार-प्रसार संबंधी कार्यकलाप

      प्रशिक्षण तथा कौशल उन्नयन

      • उन्नत उत्पादन तथा उच्चतर श्रेणी उत्पादों के लिए प्रशिक्षण
      • गुणवत्ता को सुधारने के लिए मानव निर्मित उत्पादों से संबंधित प्रशिक्षण
      • उच्च मूल्य उत्पादों की ओर व्यपवर्तन ।
      • उन्नत गुणवत्ता तथा डिजाइन का विकास
      • प्रशिक्षण में वृद्धि, कौशल उन्नयन तथा प्रौद्योगिकीय समर्थन के लिए कृषि, बागवानी, खादी तथा ग्राम उद्योग, हथकरघा तथा हस्तशिल्प आदि जैसे अन्य विभागों के साथ संबंध ।

      आर एण्ड डी /आईपीआर कार्यकलाप

      • नए उपयोग के माध्यम से नए उत्पाद का विकास
      • वास्तव में नये उत्पादों का विकास
      • उत्पाद विकास के लिए नई लागत प्रभावी प्रक्रियाओं का विकास
      • आर एंड डी उपायों के माध्यम से जनजातीय उत्पादों का बाजार विस्तार ।
      • रायल्टी के लाभ तथा नकल के खिलाफ सुरक्षा के लिए पारम्परिक ज्ञान तथा शिल्प को दस्तावेजीकरण करने के लिए आईपीआर व्यवस्था होनी चाहिए ।
      • फसलों की कटाई के लिए नई प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक कटाई पद्वति आदि आरएण्डडी के अन्य उपाय हैं ।
      • पर्यटन आदि को बढ़ावा देने के लिए मूर्त तथा अमूर्त विरासत का प्रलेखन और परिरक्षण ।

      आपूर्ति श्रृंखला अवसंरचना विकास

      • दक्ष भंडारण सुविधाएं, गोदामों, शीत भंडारण आदि की स्थापना जब भी आवश्यक हो ।
      • मूल्य संवर्धन के लिए प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना
      • उत्पादकों / संग्रहणकर्ताओं के साथ निविष्टयों पर सूचना को साझा करना ।
      • 1ए स्तर तथा ग्राम स्तर दोनों पर उत्पाद विशिष्ट दक्ष भंडारण का विकास
      • उत्पाद विशिष्ट भंडारण के संबंध में प्रशिक्षण

      व्यापार सूचना प्रणाली-जनजातीय उत्पाद तंत्र

      ट्राइफेड एमएफपी, जनजातीय हस्तशिल्पों, हथकरघाओं आदि सहित जनजातीय उत्पादों के विषय में पूरी सूचना के लिए अंततः एक गंतव्य के रुप में “जनजातीय उत्पाद तंत्र” नामक एक पोर्टल स्थापित करेगा । इस पोर्टल में निम्नलिखित प्रावधान होगा –

      • स्रोतों, प्रकार, क्षमता, उत्पादन, संग्रहण आदि से संबंधित विभिन्न जनजातीय उत्पादों के विषय में सूचना प्राप्त करना ।
      • जनजातीय उत्पादों के विषय में व्यापार सूचना को एकत्रित करना तथा प्रसार करना विभिन्न एमएफपी वस्तुओं की बाजार दरों के विषय में सूचना विभिन्न बाजारों से एकत्रित की जाएगी एवं लोगों /एजेंसियों के लिए पोर्टल के माध्यम से प्रचारित किया जाएगा ।
      • एनएसटीएफडीसी के सहयोग से संग्रहणकर्ताओं को सूचना का प्रसार। एनएसटीएफडीसी के सहयोग से ट्राइफेड आकाशवाणी के माध्यम से उक्त बाजार सूचना का भी प्रसार करेगा ।
      • आर एण्ड डी पहल तथा नए उत्पादों / आर एण्ड डी के माध्यम से ट्राइफेड तथा एसटीडीसी द्वारा विकसित उसके उपयोगों के विषय में सूचना का प्रसार ।
      • उपरोक्त के अतिरिक्त, निम्नलिखित कार्यक्रलाप भी समर्थन के लिए पात्र हैं –
        • जनजातीय ऊपज / उत्पादों के लिए ब्रांड या ब्रांड्स का निर्माण
        • प्रशिक्षुओं का क्षमता निर्माण
        • क्षमता निर्माण के लिए संस्थानों का चिन्हन
        • लक्ष्य समूहों का चिन्हन एवं जनजातीय लाभार्थियों के वैज्ञानिक डेटाबेस का रखरखाव
        • विशेषज्ञों तथा व्यापार प्रबंधकों को शामिल करते हुए व्यावसायिक संरचना तैयार करते हुए एमएसपी संचालनों में दक्षता तथा प्रभावशीलता को सुनिश्चित करना ।
        • राज्य एजेंसियों के प्रतिनिधियों द्वारा एमएफपी से संबंधित मुद्दों पर ग्राम सभा की भागीदारी तथा ग्राम सभा की उपस्थिति सुनिश्चित करना ।
        • विभिन्न बाजारों से विभिन्न एमएफपी के दैनिक मूल्यों के विषय में व्यापार सूचना का संग्रहण और वेब तथा एसएमएस सक्ष्म वेब के माध्यम से इच्छुक लोगों/ एजेंसियों के लिए उसका प्रसार ऐसी सूचना को बाजार संवाददाताओं द्वारा एकत्रित तथा एसटीडीसी को अग्रेषित किया जाएगा।
        • समस्या वाले क्षेत्रों में प्रभावी रूप से समस्याओं को खत्म करने के लिए प्रत्येक कार्यकलापों में निगरानी तथा मूल्यांकन खंड का विकास ।
        • निर्यात बाजार एवं निर्यात के लिए समर्थन को ध्यान में रखते हुए उत्पाद डिजाइनों का विकास ।

      निधि पोषण

      1. यह एक केन्द्र क्षेत्र की योजना होगी एवं कार्यान्वयन एजेंसियों को जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 100% सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा ।
      2. कार्यान्वयन एजेंसियां (आईए), बजटीय आवश्यकता के साथ-साथ प्रस्ताव एवं विस्तृत कार्रवाई योजना को तैयार करने के लिए तथा इसे अग्रिम रुप से राज्य जनजातीय /कल्याण विभाग को प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार होंगी।
        • ट्राइफेड से प्रस्ताव, सीधे मंत्रालय को प्रस्तुत किये जाएंगे वहीं अन्य कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए उन्हें नोडल मंत्रालय / विभाग के माध्यम से मंत्रालय को पहुंचाया जाना चाहिए ।
        • कार्यान्वयन एजेंसियों से प्राप्त प्रस्ताव में एक वित्तीय वर्ष से अधिक में पूरे किये जाने वाले कार्यकलापों के साथ एक परिप्रेक्ष्य योजना के साथ-साथ चालू वित्तीय वर्ष के लिए योजना शामिल होनी चाहिए । जहां तक संभव हो, स्थापना प्रणाली, प्रक्रिया तथा तंत्र जो पारदर्शी एवं सतत हों, पर बल दिया जाना चाहिए ।
      3. उपरोक्त घटकों को शामिल करते हुए कार्यान्वयन एजेंसियां अपने प्रस्ताव भेज सकती हैं
      4. जीएफआर के प्रावधानों के अनुसार प्रस्तावों को उपयोगिता प्रमाण-पत्रों के साथ भेजा जाना चाहिए ।
      5. जिस उद्देश्य के लिए किसी अन्य योजना के तहत निधि प्रदान की गई है उसके लिए निधि प्रदान नहीं की जाएगी । इस उद्देश्य के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों यह प्रमाणित करेगी कि उक्त योजना के तहत प्रस्तावित कार्यकलापों के लिए किसी अन्य स्रोतों से निधियां प्राप्त नहीं की हैं ।

      योजना की निगरानी

      1. जनजातीय कार्य मंत्रालय (एमओटीए), भारत सरकार योजना की समीक्षा के लिए वास्तविक तथा वित्तीय प्रगति रिपोर्टो एवं मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा दौरों के माध्यम से समवर्ती निगरानी के लिए जिम्मेदार होगा ।
      2. राज्य सरकार उन कार्यान्वयन एजेंसियों के भी जिम्मेदार हैं जिनके प्रस्ताव उनके द्वारा प्रायोजित हैं ।
      3. 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के अंत के पूर्व किसी स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से । योजना का मूल्यांकन किया जाएगा ।
      4. ट्राइफेड तथा एसटीडीसी के खातों की लेखा-परीक्षा चार्टर्ड एकाउंटेट द्वारा या संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए जाने के अनुसार लेखा परीक्षित किया जाएगा ।
      5. योजना की आयोजना, निगरानी, मूल्यांकन तथा संवर्धन के लिए परिव्यय का 2% अलग रखा जाएगा।
      6. पारदर्शिता एवं सेवाओं के कुशल वितरण के लिए मूल्य सहित जनजातीय उत्पादों को बढ़ावा देने तथा विपणन हेतु उठाए गए कदमों के संबंध में सूचना को ऐसी ग्राम पंचायत / ग्राम सभा के साथ साझा किया जाएगा जहां ऐसे उत्पादों का उत्पादन किया जाता है, या जहां ऐसे उत्पाद का उत्पादन संभवतः किया जा सकता है ।

      स्रोत: जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार



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