अल्पसंख्यकों को विशेष अधिकार भारतीय संविधान में धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों को अनुच्छेद 29 और 30 में विशेष अधिकार दिए हैं । अनुच्छेद 29(1) के अनुसार किसी भी समुदाय के लोग जो भारत के किसी राज्य मे रहते हैं या कोई क्षेत्र जिसकी अपनी आंचलकि भाषा, लिपि या संस्कृति हो, उस क्षेत्र को संरक्षित करने का उन्हें पूरा अधिकार होगा। ये प्रावधान जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 के तहत है । अनुच्छेद 30(1) के तहत सभी अल्पसंख्यकों को धर्म या भाषा के आधार पर अपनी पसंद के आधार पर अपनी शैक्षिक संस्था को स्थापित करने का अधिकार है। संविधान में अल्पसंख्यक शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है अल्पसंख्यकों को शिक्षा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986-में समानता औऱ सामाजिक न्याय के हित में शैक्षणिक रुप से पिछड़े अल्पसंख्यकों की शिक्षा पर विशेष बात कही गयी है । 1992 में इसमें दो नई योजनाएं जोड़ दी गयी । शैक्षिक रुप से पिछड़े अल्पसंख्यकों के लिए गहन क्षेत्रीय कार्यक्रम मदरसा शिक्षा आधुनिकीकरण वित्तीय सहायता योजना 1993-94 के दौरान शुरु की गयी । राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्था आयोगका गठन 2004 में किया गया । जिसके तहत अस्पसंख्यक संस्थाएं अनुसूचित विद्यालय से स्वयं को संबद्ध कर सकती हैं। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय , पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय , असम विश्वविद्यालय, नागालैंड विश्वविद्यालय और मिजोरम विश्विविद्यालय इस सूची में आते हैं । अल्पसंख्यकों की शिक्षा संबंधी योजनाएं मानव संसाधन विकास केंद्र की शैक्षिक योजनाएँ १.शैक्षिक रुप से पिछड़े अल्पसंख्यकों के लिए एरिया इंटेनसिव प्रोग्राम। क-इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य उन भागों में जहां शिक्षा में पिछड़े हुए अल्पसंख्यक भारी संख्या में रहते हैं, वहां शिक्षा के लिए सुविधा मुहैया कराना। मदरसा शिक्षा को माडर्न बनाने के लिए वित्तीय सहायता फारसी और अरबी भाषा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को वित्तीय सहायता। अल्पसंख्यकों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के लिए कोचिंग क्लासों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वित्तीय सहायता केंद्रीय वक्फ परिषद तकनीकि संस्थानों तथा वोकेशनल कोर्स करने वालों को वजीफा तथा वित्तीय सहायता देती है । मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन आवासीय स्कूलों, तकनीकि/प्रोफेशनल संस्थानों, हास्पिटल, पिछड़े अल्पसंख्यकों को कोचिंग देने के लिए वित्तीय सहातयता प्रदान करता है । मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय सहायता योजना यह योजना पूरी तरह स्वैच्छिक है। इसको वित्तीय सहायता केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त है । इसमें शिक्षा विभाग द्वारा प्राचीन संस्थानों में गणित , अंग्रेजी , हिंदी आदि जैसे विषय लागू हैं। इस योजना को ग्रहण करना मदरसों की इच्छा पर निर्भर करता है । इसका उद्देश्य प्राचीन संस्थानों जैसे मकतबा, मदरसों में आधुनिक शिक्षा को बढावा देने के लिए वित्तीय सहायता देना है। इस योजना से संबंधित जानकारी के लिए – मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय (शिक्षा विभाग), नई दिल्ली से संपर्क करें। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के कार्य अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए रक्षा उपायों को लागू करने की वकालत करना । अल्पसंख्यकों को रक्षा के उपायों तथा अधिकारों से वंचित किए जाने की सुनिश्चित शिकायतों को देखना तथा उन्हें उपयुक्त प्राधिकारी के पास ले जाना अल्पसंख्यकों के विरुद्ध भेदभाव की समस्या का अध्ययन करना तथा उसको दूर करने के लिए सुझाव देना । अल्पसंख्यकों के सामाजिक-आर्थिक तथा शैक्षिक विकास के मुद्दे का अध्ययन करना तथा विश्लेषण करना । केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा चुनी गई किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय के संबंध में उपयुक्त मापदण्ड सुझाना। केंद्र सरकार को अल्पसंख्यक के सामने आयी मुश्किलों से संबंधित समय-समय पर या विशेष रिपोर्ट देना । तथा कोई भी अन्य मुद्दा जिसे केंद्र सरकार आयोग को सोंपे। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की शक्तियां आयोग के पास उपरोक्त कार्यों को करने के लिए दीवानी अदालत की शक्तियां हैं । भारत के किसी भी भाग से किसी भी व्यक्ति को समन भेज कर उसकी हाजिरी लगाना तथा उसे शपथ दिलाकर परखना । किसी भी दस्तावेज को खोजना तथा प्रस्तुत करने के लिए कहना। हलफनामों पर गवाही लेना। किसी भी न्यायालय या सरकारी दफ्तर से पब्लिक रिकार्ड की मांग करना । गवाहों तथा दस्तावेजों की जांच के लिए आदेश जारी करना । कोई भी अन्य निर्धारित मुद्दा । राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग,1997 राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के कार्य अल्पसंख्यकों के सुरक्षा उपायों का मूल्यांकन तथा अनुश्रवण करना । सरकार के अन्य महकमों को सुझाव देना। अल्पसंख्यकों को अधिकारों या सुरक्षा उपायों से वंचित करने की शिकायतों पर गौर करना। आयोग को दिए गये मुद्दो पर विचार करना । विशिष्ट शिकायतों का निपटारा अल्पसंख्यकों को उनके अधिकारों या सुरक्षा उपायों से वंचित कनरे की शिकायतों को कोई भी व्यक्ति या संस्था आयोग तक पहुंचा सकती है । शिकायत चेयरमैन या सचिव को संबोधित की जा सकती है । किसी भी शिकायत को सुलझाने के लिए कोई फीस नहीं ली जाती है , जब तक कि इससे संबंधित कोई निर्देश ना मौजूद हों। निम्नलिखित शिकायतों को आयोग नहीं स्वीकार करेगा ऐसी शिकायतें जो अल्पसंख्यक अधिकार, स्थिति एवं सुरक्षा उपायों से संबंध नहीं रखती हो। उन मुद्दों को जो न्यायालय के समक्ष मौजूद हों। उन मुद्दों पर जिनके लिए उचित प्रशासनिक एवं न्यायिक समाधान मौजूद हों, लेकिन उन्हें इस्तेमाल नहीं किया गया हो। वह घटनाएं जो एक वर्ष या उससे अधिक पुरानी हों। वह शिकायतें जो अस्पष्ट, अज्ञात, कृत्रिम नाम या छिछोरा हों। वह शिकायतें जो आयोग को सीधी ना भेजी गयी हों , लेकिन किसी और को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि के लिए हो। आयोग की शिकायतों के प्रकार वह शिकायतें जो नियमित याचिका के रुप में आयोग के हस्तक्षेप के लिए हों। वह शिकायतें जो विशिष्ट शिकायतों को सुधारने के लिए आयोग के हस्तक्षेप के लिए हों। वह जो किसी सुविधा , राहत या सुधार के लिए आयोग की मदद के हस्तक्षेप के लिए हो। 1 औऱ 2 में रखी गयी शिकायत को किसी भी समय क में हस्तांतरित किया जा सकता है । 1,2,3 वर्ग की शिकायतों के लिए आयोग विशेष रजिस्टर रखेगा। हर शिकायत को विशिष्ट नंबर के साथ वर्ग भी दिया जायेगा। हर शिकायतकर्ता को फार्म बी दिया जायेगा , जिसे उसे निर्धारित सीमा में भरना होगा। निर्देश के अतिरिक्त शिकायत तभी दर्ज की जायेगी, जब शिकायतकर्ता इस फॉर्म को भरकर जमा कराएगा। यदि शिकायत को किसी भी उल्लेखित कारण से स्वीकार नहीं किया जायेगा तो वह सुस्पष्ट कर दिया जायेगा। 1 वर्ग की शिकायतों का निर्णय या तो पूरा कमीशन करेगा या (निर्देश मिलने पर) कमीशन की बेंच करेगी। कमीशन या बेंच इन मामलों का निपटारा करते समय जहां तक संभव हो सकेंगा अधिनियम की धारा 9(4) , दीवानी प्रक्रिया संहिता , 1908 के प्रावधानों तथा सूची में दिए गए उपयुक्त फॉर्म का प्रयोग करके निर्णय लेगा। बेंच के द्वारा लिए गये निर्णय की रिपोर्ट पूरे आयोग को दी जायेगी ,यदि आयोग उसमें कोई फेरबदल नहीं करता है तो उसे आयोग की रिपोर्ट मानी जायेगी । 2 औऱ 3 वर्ग की शिकायतों को चेयरमैन किसी भी सदस्य या अफसर को देकर उसे उपयुक्त अधिकारी से संपर्क करने के निर्देश दे सकता है । इस तरह की शिकायतों को जब सदस्य/अफसर सीधे लेगा और अधिकारी से संपर्क करेगा तो उसे इसकी सूचना आयोग के चेयरमैन को देनी होगी । इन सभी केसों में सदस्य/अफसर या तो चेयरमैन की बताई हुई प्रणाली को अपनाएंगे या सूची में दिए गये फॉर्म को इस्तेमाल करेंगे। आयोग स्वयं से /अल्पसंख्यक व्यक्ति/समूह/संस्था की कोई आम या विशेष तकलीफ पर जो मीडिया में आई हो, उस पर भी कार्यवाही कर सकता है , जरुरी नहीं कि उसे कोई विशिष्ट शिकायत प्राप्त हो । आयोग का सूचना पत्र आयोग का सूचना पत्र ‘भारत के अल्पसंख्यक’ नाम से साल में तीन बार प्रकाशित किया जाता है । यह सूचना पत्र चेयरमैन के दफ्तर में तैयार और संपादित किया जाता है । सूचना पत्र अल्पसंख्यकों के अधिकारों, सुरक्षा उपायों, सुविधाओं, योजनाओं, राज्य सरकार तथा केंद्र सरकारों और अन्य संस्थाओं, संगठनों , एजेंसी की योजनाओं से संबंधित खबरें, सूचना , दृष्टिकोंण को प्रकाशित करता है । सूचना पत्र आयोग के क्रिया कलापों तथा उसके सुझाव, निर्णय, रिपोर्ट औऱ अध्ययन आदि को भी प्रकाशित करता है । स्त्रोत: अल्पसंख्यक कार्यों के मंत्रालय, भारत सरकार