परिचय स्वैच्छिक विकास संगठन के आधारभूत मूल्य कल्याण की, खासकर हाशिये पर खड़े तबकों की भलाई के लिए कार्य की, इच्छा पर आधारित होने चाहिए: क) उस जनता के अधिकारों, संस्कृति और गरिमा के लिए सम्मान जिसके बीच संगठन काम रहा है| ख) यह सुनिश्चित करना है कि संगठन की सत्यनिष्ठा, लक्ष्य, जनादेश और गतिविधियों को कोई बाहरी या भीतरी निहित स्वार्थी तत्व विकृत या नष्ट न करें या भ्रष्ट न बना दें| ग) निजी और सांगठनिक, दोनों स्तरों पर ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के उच्च मानदंडों को बनाएं रखना| संगठन की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार होनी चाहिए क) वह जाति, धर्म या सम्प्रदाय से निरपेक्ष होकर मानव जाति की समानता और एकता में विश्वास करता हो, ख) वह किसी राजनितिक दल से सम्बद्ध न हो| ग) वह गरिमा के साथ स्त्री-पुरुष समानता और न्याय के लिए काम करे| घ) वह महिलाओं और पुरुषों के स्वतंत्र और नवोन्मेषी चिंतन को प्रोत्साहित करे, अपने कर्मचारियों और अपने कार्य के अंतर्गत आने वाले व उससे प्रभावित होने वालों लोगों के अधिकारों, संस्कृति और गरिमा के प्रति सम्मान की भावना रखता हो| ड.) सभी मानव प्राणियों के अधिकारों, संस्कृति और गरिमा के प्रति सम्मान की भावना रखता हो| च) वैज्ञानिक सोच, मानवतावाद तथा जाँच-पड़ताल व सुधार की भावना को प्रोन्नत करे| छ) व्यक्तिगत और सामूहिक क्रियाकलाप के समस्त क्षेत्रों में श्रेष्ठता हासिल करने का प्रयास करे| संगठन के तीन समान मूल्यों को आगे बढ़ाना चाहिए क) प्रमाणिकता: जिन सिद्धांतों और व्यवहार को आप उत्तम समझते हैं, उन्हें अपनाना और स्वीकार करना| ख) खुलापन:आम लोगों और सदस्यों को लेकर काम करते समय| ग) लाभार्थियों की सहभागिता:कार्यक्रम के सभी चरणों में, जैसे समस्या की पहचान करने, कार्यक्रम तैयार करने, उसका क्रियान्वयन तथा मूल्याकंन करने में लाभार्थियों की सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित करना| संगठन को दो बुनियादी मूल्यों को समर्थन देना चाहिए क) न्याय और समानता:संसाधनों, सम्पदा और अधिकारों के वितरण में तथा विकास सम्बन्धी निवेश प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध कराने में निष्पक्षता बरतना| ख) टिकाऊपन और सशक्तिकरण: ऐसे सकारात्मक सामाजिक विकास का कार्य करना, उसे सुगम बनाना और आगे बढ़ाना जिसमें समुदायों/साझेदारों/लाभार्थियों का इस तरह से सशक्तिकरण हो कि वे जीवन-स्थितियों पर नियंत्रण हासिल कर सकें और सम्मानपूर्ण, अधिक न्यायपूर्ण, समानतापूर्ण और मानवीय विकास की प्रक्रिया को टिकाऊ बना सकें| स्रोत: जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची|