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ग्रामीण सड़क-आयोजना,वित्तपोषण और निष्पादन

ग्रामीण सड़कों हेतु आयोजना

१. निर्धारित समय-सीमा और लागत के अन्दर कार्यक्रम के उद्‌देश्यों को हासिल करने के लिए उपयुक्म आयोजना अत्यावश्यक है। जिला ग्रामीण सड़क योजना और कोर नेटवर्क की तैयारी हेतु नियमावली को दिशा-निर्देशोंका एक हिस्सा माना जाएगा और वर्तमान दिशा-निर्देशोंद्वारा संशोधित सीमा तक संशोधित होंगे। नियमावली में मध्य स्तरीय पंचायत, जिला पंचायत के साथ-साथ राज्य स्तरीय स्थायी समिति सहित विभिन्न एजेन्सियों की भूमिका एवं आयोजना प्रक्रिया के लिए कई चरण बताए गए हैं। कोर नेटवर्क के निर्धारण में, संसद सदस्यों एवं विधायकों सहित निर्वाचित प्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं पर पूर्ण विचार किया जाएगा और इन्हें पूरा महत्व दिया जाएगा। कोर नेटवर्क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तगर्त परियोजना प्रस्तावों की तैयारी के लिए आधार होगा।

२. इसलिए, जहां तक विशेष जिले का संबंध है, जिला ग्रामीण सड़क प्लान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत परियोजना प्रस्तावों को तैयार करने का आधार है। राज्य सरकारों को 2001-02 के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत परियोजना प्रस्तावों के साथ अनुमोदित ब्लॉक ग्रामीण सड़क योजना तथा जिला प्राथमिकता सूची संलग्न करनी होगी। तत्पश्चात्‌ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इन प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।

३. जिला ग्रामीण सड़क योजना तैयार करते समय, प्रथमतः विभिन्न सेवाओं के लिए वेटेज दश्र्ााना आवश्यक होगा। जिला पंचायत जिला हेतु उपयुक्त सामाजिक-आर्थिक / अवसंरचनात्मक विभिन्नताओं का सेट चुनने, उन्हें श्रेणीबद्ध करने तथा उनमें समानुपातिक वेटेज कायम करने के लिए सक्षम प्राधिकारी होगा। इसे जिला ग्रामीण सड़क योजना की तैयारी शुरु करने से पहले समस्त संबंधित पक्षों के पास भेजा जाएगा।

4.यह योजना सर्वप्रथम ब्लॉक स्तर पर तैयार की जाएगी, जो नियमावली में निहित निर्देशों  एवं जिला पंचायत द्वारा बतायी गयी प्राथमिकताओं के अनुरूप होगी। संक्षेप में, विद्यमान सड़क नेटवर्क तैयार किया जाएगा, सम्पर्क विहीन बसावटों का निर्धारण किया जाएगा और इन सम्पर्क विहीन बसावटों को जोड़ने के लिए अपेक्षित सड़कें बनाई जाएंगी। इससे ब्लॉक स्तरीय मास्टर प्लॉन बन पाएगा।

5.एक बार यह कार्य पूरा हो जाता है, तो विद्यमान और प्रस्तावित सड़क सुविधाओं का बेहतर उपयोग कर ब्लॉक के लिए कोर नेटवर्क इस तरह से बन जाएगा कि समस्त पात्र बसावटों को आधारभूत पहुँच सुनिश्चित हो जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बसावट सड़क सम्पर्क वाली एक बसावट या एक बारहमासी सड़क से 500 मीटर (पहाड़ों में 1.5 कि.मी. की पथ दूरी) के अन्दर हो। प्रस्तावित रोड सम्पर्कों का नक्शा बनाते समय, लोगों की अपेक्षाओं को सामाजिक-आर्थिक / अवसंरचनात्मक मूल्यों (सड़क तालिका) को उपयुक्त वेटेज (कृपया पैरा 4.3 देखें) देकर और अधिकतम सड़क तालिका को चयन के लिए समेकित करते हुए ध्यान में रखा जाना चाहिए।

६. ब्लॉक स्तरीय मास्टर प्लॉन और कोर नेटवर्क को इसके पश्चात्‌ कोर नेटवर्क के विचारार्थ एवं अनुमोदन के लिए मध्य स्तरीय पंचायत कि समक्ष पेद्गा किया जाता है। इसके बाद ही, इसे समस्त सम्पर्कविहीन बसावटों की सूची के साथ संसद सदस्यों एवं विधायकों के पास उनकी टिप्पणियों के लिए, यदि कोई हो, भेज दिया जाता है। मध्य स्तरीय पंचायत द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद, योजनाओं के जिला पंचायत के समक्ष उनकी स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। यह जिला पंचायत का दायित्व होगा कि वह यह सुनिश्चित करे कि संसद सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर पूर्ण विचार किया जा रहा है, जो इन दिच्चा-निर्देद्गाों के फ्रेमवर्क के अन्दर हो। जिला पंचायत द्वारा एक बार स्वीकृति मिलने के बाद कोर नेटवर्क की एक प्रति राज्य-स्तरीय एजेन्सी के साथ-साथ राश्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास एजेन्सी को भेजी जाएगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तगर्त कोई सड़क नए सम्पर्क या सुधार (जहाँ अनुमति दी गई हो) के लिए तब तक प्रस्तावित नहीं की जा सकती जब तक कि यह कोर नेटवर्क का हिस्सा नहीं बन जाती है।

वित्तपोषण एवं आबंटन

1 एक बार जब कोर नेटवर्क तैयार हो जाता है, तो प्रत्येक जिला के लिए सुधार के साथ-साथ नए सम्पर्क के लिए सड़कों की लम्बाई का अनुमान लगाना संभव है। राज्य, प्रत्येक वर्द्गा, जिलों के बीच राज्य का आबंटन वितरित कर सकता है, जो संपर्कविहिन बसावटों को सम्पर्क प्रदान करने हेतु सड़क की लम्बाई के आधार पर 80 प्रतिच्चत और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तगर्त सुधार की जाने वाली सड़क की लम्बाई के आधार पर 20 प्रतिद्गात हो सकता है। निधियों के जिलावर आबंटन की जानकारी भी राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक वर्द्गा मंत्रालय / राश्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास एजेन्सी को ही जाएगी।

2 जिलावर आबंटन करते समय प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना या किसी अन्य योजना के अन्तर्गत शामिल की गई बसावटों की संखया को सम्पर्कविहीन बसावटों की संखया में से घटा दिया जाएगा (भले ही वह सड़क कार्य अभी निश्पादन के अधीन हो)। सम्पर्क सहित के साथ-साथ सम्पर्क विहीन बसावटों को आँकड़ा किसी जिला में प्रत्येक वर्ष तब तक बदलता रहेगा, जब तक जिला में समस्त सम्पर्कविहीन बसावटों (अनुमानित आबादी के अनुसार) को शामिल नहीं कर लिया जाता है।

प्रस्ताव

1 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत शुरु किए जाने वाले सड़क कार्यों की सूची प्रत्येक वर्द्गा जिला पंचायत द्वारा तैयार की जाएगी, जो राज्य सरकार द्वारा जिला को दी गयी निधियों के आबंटन के अनुरूप होगा (कृपया पैरा 5.1 देखें)। जिला पंचायत निचले स्तर की पंचायती संस्थाओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों (कृपया पैरा 6.5 देखें) को शामिल कर एक परामर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सूची को अंतिम रूप देगा। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रस्तावित सड़क कार्य कोर नेटवर्क का हिस्सा हो और नए सम्पर्क सड़क को प्राथमिकता दी गयी हो, जैसा कि उपरोक्त पैरा 3.1 में दिया गया है।

2 राज्य सरकार / जिला पंचायत की यह जिम्मेदारी होगी कि वह देखे कि प्रस्तावित सड़क कार्य शुरु करने के लिए भूमि उपलब्ध है। प्रत्येक सड़क कार्य हेतु प्रस्ताव के साथ एक प्रमाणपत्र संलग्न होना चाहिए कि भूमि उपलब्ध है। यह नोट किया जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना भूमि अधिग्रहण के लिए निधि प्रदान नहीं करती है। हालांकि, राज्य सरकारें नीतियाँ निर्धारित करेंगी जिससे कि सड़क कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सामान्य हित को पूरा करें तथा न्यायोचित और तर्कसंगत हो।

3 सड़क कार्यों की सूची तैयार करते समय, जिला पंचायत को यह सुनिश्चित करना होगा कि समस्त सम्पर्कविहीन बसावटों को नया सड़क सम्पर्क प्रदान करने को प्राथमिकता दी गयी हो। निम्नलिखित प्राथमिकता क्रम का सखती से पालन किया जाएगा :-

1.

1000+ (पहाड़ी राज्यों आदि के मामले में 500+) की आबादी वाले सम्पर्कविहीन बसावटों को नया सड़क सम्पर्क प्रदान करना।

2.

500-999 (पहाड़ी राज्यों आदि के मामले में 250-499) की आबादी वाले सम्पर्कविहीन बसावटों को नया सड़क सम्पर्क प्रदान करना।

3.

कोर नेटवर्क में थ्रू रूटों को सुधारना।

4.

लिंक रूटों को सुधारना।

4 प्राथमिकता के उपर्युक्त आदेद्गा में केवल एक अपवाद उन मार्गों के संबंध में है जिसमें ग्राम पंचायत मुख्यालय या विपणन केन्द्र या अन्य शैक्षणिक और अनिवार्य चिकित्सा सेवाओं या वे जिन्हें पर्यटन के हित में अधिसूचित किया गया है, शामिल हैं। वैसे मामलों में, जनसंखया के आकार पर ध्यान दिए बगैर नए संपर्क का प्रावधान किया जा सकता है।

5 पी एम जी एस वाई के अंतर्गत, संसद सदस्यों के प्रस्तावों पर र्प्याप्त ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। प्रत्येक जिले में सड़कों से न जूड़ी बसावटों की सूची (जनसंखया के साथ) के साथ उन सड़कों की सूची, जिनकी पहचान कोर नेटवर्क के हिस्से के रूप में जोड़ने के लिए की गई है, संसद सदस्यों को भेजी जानी चाहिए, ताकि संसद सदस्यों को अपने सुझाव देने में आसानी हो सके। यह सुनिश्चित करना जिला पंचायत के लिए आवश्यक होगा कि, प्रस्ताव तैयार करते समय संसद सदस्यों से प्राप्त प्रस्तावों पर दिशा-निर्देंशों के फ्रेमवर्क के अंतर्गत पर्याप्त विचार किया जाता है। इस उद्देश्य हेतु, पी एम जी एस वाई वेबसाइट ( pmgsy.nic.in) पर संसद सदस्यों द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।

परियोजना प्रस्तावों की तैयारी और उनकी स्वीकृति

1 जिला पंचायतों के अनुमोदन के बाद (उपर्युक्त पैरा 6.1 का संदर्भ लें), प्रस्तावों को जिला पी आई यू के जरिए राज्य स्तरीय एजेंसी को भेजा जाएगा (उपर्युक्त पैरा 7.3 का संदर्भ लें)। पी आई यू इसके प्रोफोर्मा-एमपी - । और एमपी - ॥ पर की गई कार्रवाई के ब्यौरे तैयार करेगी और इसे प्रस्तावों के साथ भेजेगी।

2 राज्य स्तरीय एजेंसी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावों की जांच करेगी कि वे दिशा-निर्देशोंके अनुरूप हों और फिर उन्हें राज्य स्तरीय स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगी। राज्य परियोजना प्रस्तावों का साईज और समय जब इन्हें एन आर आर डी ए को प्रस्तुत किया जाएगा, इसका निर्धारण प्रत्येक वर्द्गा मंत्रालय / एन आर आर डी ए द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाएगा।

3 यह देखने कि लिए कि प्रस्ताव दिशा-निर्देशोंके अनुरूप है और संसद सदस्यों के प्रस्तावों पर पूरा विचार किया गया है, राज्य स्तरीय स्थायी समिति प्रस्तावों की संवीक्षा करेगी। राज्य स्तरीय स्थायी समिति द्वारा संवीक्षा के बाद, पी आई यू प्रत्येक प्रस्तावित सड़क कार्य के लिए विस्तृत परियोजना रिर्पोट (डी पी आर) तैयार करेगी। डी पी आर तैयार करने केे लिए पेवमेंट की डिजाईन और क्रॉस-ड्रेनेज कार्यों के लिए अपेक्षित आंकड़े, अर्थात्‌ एनवेंट्री और इंजीनियरिंग सर्वे, मृदा जांच, हाइड्रौलिक आंकड़े आदि एकत्र करने और जांच करने की जरूरत होती है। डी पी आर तैयार करने की लागत, जो प्रति कि.मी. 10,000 रू. की दर से अधिक नहीं होनी चाहिए, को परियोजना लागत में शामिल किया जा सकता है। इसी प्रकार, एक निर्धारित राच्चि, जो प्रति कि.मी. 10,000 रू. से अधिक नहीं होनी चाहिए (वास्तविक आधार पर) को आई आर सी के विनिर्देद्गा के अनुसार साईन बोर्डों को लगाने, रोड स्ओन और अन्य सड़क संबंधी सामग्रियों को लगाने की लागत के रूप में परियोजना लागत में शामिल किया जा सकता है। द्गिालान्यास / उद्‌घाटन समारोहों के लिए प्रति समारोह 5,000 रू. भी शामिल किये जा सकते हैं। डी पी आर के साथ अलग से बेंचमार्क सूचकांक रिर्पोट लगाई जाएगी जिसमें सड़कों से जोड़े जाने के लिए प्रस्तावित प्रत्येक बसावटों के द्गिाक्षा, स्वास्थ्य, आय आदि जैसे मुखय सूचकांकों की स्थिति दी जाएगी (जिला ग्रामीण सड़क योजना / जनगणना के लिए बनाए गए फार्मेट - प् में मौजूद बसावट आंकड़ों से लिए गए आंकड़े इस्तेमाल किए जा सकते हैं)।

4 पी आई यू विस्तृत परियोजना रिर्पोट तैयार करने में निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करेगी :-

i) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतगर्त निर्मित ग्रामीण सड़कों में आई आर सी की गा्रमीण सड़क नियमावली (प्रकाशन आई आर सीः एसपी 20:2002) में दी गई तकनीकी विशिष्टताओं  और ज्यामितिक डिजाईन मानकों को अवश्य पूरा किया जाएगा। अधिकांश नई सम्पर्क सड़कों पर कम यातायात की संभावना है। यह नोट किया जाए कि जहाँ यातायात संखया प्रतिदिन 100 मोटर वाहनों से कम है और जहाँ अंतिम छोर, कम बसावट और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की वजह से यातायात में वृद्धि की संभावना नहीं है, ग्रामीण सड़क नियमावली में 3.0 मी. की चौड़ाई वाली सड़क की अनुमति दी गई है। सम्पर्क सड़कों के संबंध में बचत सुनिश्चित करने के लिए, ग्रामीण सड़क नियमावली के अनुसार सड़कों की चौड़ाई में सदृश्यता कमी करते हुए सभी मामलों में सड़कों की चौड़ाई को 3.0 मी. तक सीमित किया जा सकता है।

ii) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण सड़कें सतही सड़कें और मोटे तौर पर पक्की सड़कें होंगी अर्थात्‌ कोलतार या सीमेण्ट कंक्रीट वाली सड़कें। सतह का चयन ग्रामीण नियमावली (आई आर पीः एसपी 20:2002) में निर्धारित तकनीकी विनिर्देशोंका पालन करते हुए अन्य बातों के साथ-साथ यातायात की सघनता, मृदा का प्रकार और वृक्षों जैसे घटकों के आधार पर किया जाएगा।

iii) जहाँ सड़क कार्य किसी बसावट से होकर किए जा रहे हैं, निर्मित क्षेत्र में और सड़क को दोनों ओर 50 मी. की सड़क का डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि उसे पानी से नुकसान न हो। इसके लिए सड़कों के किनारे नालियाँ बनाने के लिए सीमेंट या पत्थर की सड़कें बनाई जाएंगी। उचित पाश्र्व नालियाँ भी बनाई जाएंगी ताकि पानी की अनुचित निकासी से सड़क को नुकसान न हो।

iv) ग्रामीण सड़क नियमावली में साधारण बिटूमन की जगह संशोधित बिटूमन के इस्तेमाल के लाभों के बारे में बताया गया है। यदि राज्य सरकारों ने अपने किसी भी कार्यक्रम में संशोधित बिटूमन ख रबर संशोधित बिटूमन (आर एम बी) सहित , का इस्तेमाल करने के निर्णय लिए हैं, तो इसका इस्तेमाल पी एम जी एस वाई सड़कों में भी किया जाना चाहिए। संशोधित बिटूमन (आर एम बी सहित) का इस्तेमाल केवल ी सतह पर ही किया जाना चाहिए। आई आर सी कोड - आई आर सी 53:2002 के प्रावधानों के अनुरूप, कड़ाई से गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने का ध्यान रखा जाना चाहिए। रिफाईनरी से बिटूमन की प्राप्ति, बिटूमन का उपयोग करते समय गुणवत्ता के लिए ठोस जाँच और भारी मात्रा में उसका इंतजाम वैसे उपायों के जरिए गुणवत्ता नियंत्रण के लिए विद्गोद्गा ध्यान दिया जाना होता है। ग्रामीण सड़क नियमावली में या आई आर सीः एसपी 20:2002 या आई आर सी 53:2002 द्वारा निर्धारित सभी जाँचों का पालन किया जाएगा।

v) जहाँ कहीं भी लाई ऐद्गा जैसे उत्पादों सहित स्थानीय सामग्रियां उपलब्ध हैं, तकनीकी मानदण्डों का पालन करते हुए उनका निर्धारण किया जाना चाहिए।

vi) पी एम जी एस वाई के अंतर्गत निर्मित ग्रामीण सड़कों में उचित निकासी सुविधाएं होनी चाहिए होनी चाहिए। कार्यक्रम के अंतर्गत क्रॉस ड्रेनेज कार्यों के संबंध में साधारणतया केवल छोटे अर्थात्‌ 15 मी. की लंबाई वाले पुलों को ही लिया जाना चाहिए। 15-25 मी. लंबे पुलों के मामले में सुपरिटेंडिंग इंजिनियर या उससे  के स्तर के अधिकारी तथा राज्य तकनीकी एजेंसी और वरिश्ठ इंजीनियरों, जो प्रस्तावित संरचना की आवश्यकता और डिजाईन को मंजूर करेगें, के द्वारा जाँच करने के बाद ही इस कार्यक्रम के अंतर्गत लंबे पुलों की भी अनुमति दी जाएगी। पुलों से होने वाले लाभ और उसे पर होने वाले खर्च पर पर्याप्त ध्यान दिए जाने की जरूरत है। इसी प्रकार, पहाड़ी राज्यों के मामले में, क्रॉस-ड्रेनेज कार्य की लागत सामान्यतः 25 लाख रू. से अधिक नहीं होनी चाहिए। पुलों को इस तरह बनाया जाए कि जहाँ व्यवहार्य हो, वे पुल व बंधार की तरह कार्य कर सकें। तथापि, ऐसे मामलों में, इसके संचालन और रखरखाव में संबंध में लाभार्थी समूह / ग्राम पंचायत की पूर्व वचनबद्धता ली जानी चाहिए।

परियोजना प्रस्तावों की तैयारी और उनकी स्वीकृति

1 जिला पंचायतों के अनुमोदन के बाद (उपर्युक्त पैरा 6.1 का संदर्भ लें), प्रस्तावों को जिला पी आई यू के जरिए राज्य स्तरीय एजेंसी को भेजा जाएगा (उपर्युक्त पैरा 7.3 का संदर्भ लें)। पी आई यू इसके प्रोफोर्मा-एमपी - । और एमपी - ॥ पर की गई कार्रवाई के ब्यौरे तैयार करेगी और इसे प्रस्तावों के साथ भेजेगी।

2 राज्य स्तरीय एजेंसी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावों की जांच करेगी कि वे दिशा-निर्देशों के अनुरूप हों और फिर उन्हें राज्य स्तरीय स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगी। राज्य परियोजना प्रस्तावों का साईज और समय जब इन्हें एन आर आर डी ए को प्रस्तुत किया जाएगा, इसका निर्धारण प्रत्येक वर्द्गा मंत्रालय / एन आर आर डी ए द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाएगा।

3 यह देखने कि लिए कि प्रस्ताव दिशा-निर्देशों के अनुरूप है और संसद सदस्यों के प्रस्तावों पर पूरा विचार किया गया है, राज्य स्तरीय स्थायी समिति प्रस्तावों की संवीक्षा करेगी। राज्य स्तरीय स्थायी समिति द्वारा संवीक्षा के बाद, पी आई यू प्रत्येक प्रस्तावित सड़क कार्य के लिए विस्तृत परियोजना रिर्पोट (डी पी आर) तैयार करेगी। डी पी आर तैयार करने केे लिए पेवमेंट की डिजाईन और क्रॉस-ड्रेनेज कार्यों के लिए अपेक्षित आंकड़े, अर्थात्‌ एनवेंट्री और इंजीनियरिंग सर्वे, मृदा जांच, हाइड्रौलिक आंकड़े आदि एकत्र करने और जांच करने की जरूरत होती है। डी पी आर तैयार करने की लागत, जो प्रति कि.मी. 10,000 रू. की दर से अधिक नहीं होनी चाहिए, को परियोजना लागत में शामिल किया जा सकता है। इसी प्रकार, एक निर्धारित राशि, जो प्रति कि.मी. 10,000 रू. से अधिक नहीं होनी चाहिए (वास्तविक आधार पर) को आई आर सी के विनिर्देशों के अनुसार साईन बोर्डों को लगाने, रोड स्ओन और अन्य सड़क संबंधी सामग्रियों को लगाने की लागत के रूप में परियोजना लागत में शामिल किया जा सकता है। शिलान्यास / उद्‌घाटन समारोहों के लिए प्रति समारोह 5,000 रू. भी शामिल किये जा सकते हैं। डी पी आर के साथ अलग से बेंचमार्क सूचकांक रिर्पोट लगाई जाएगी जिसमें सड़कों से जोड़े जाने के लिए प्रस्तावित प्रत्येक बसावटों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आय आदि जैसे मुखय सूचकांकों की स्थिति दी जाएगी (जिला ग्रामीण सड़क योजना / जनगणना के लिए बनाए गए फार्मेट -में मौजूद बसावट आंकड़ों से लिए गए आंकड़े इस्तेमाल किए जा सकते हैं)।

4 पी आई यू विस्तृत परियोजना रिर्पोट तैयार करने में निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करेगी :-

i) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतगर्त निर्मित ग्रामीण सड़कों में आई आर सी की गा्रमीण सड़क नियमावली (प्रकाशन आई आर सीः एसपी 20:2002) में दी गई तकनीकी विशिष्टताओं  और ज्यामितिक डिजाईन मानकों को अवश्य पूरा किया जाएगा। अधिकांद्गा नई सम्पर्क सड़कों पर कम यातायात की संभावना है। यह नोट किया जाए कि जहाँ यातायात संखया प्रतिदिन 100 मोटर वाहनों से कम है और जहाँ अंतिम छोर, कम बसावट और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की वजह से यातायात में वृद्धि की संभावना नहीं है, ग्रामीण सड़क नियमावली में 3.0 मी. की चौड़ाई वाली सड़क की अनुमति दी गई है। सम्पर्क सड़कों के संबंध में बचत सुनिश्चित करने के लिए, ग्रामीण सड़क नियमावली के अनुसार सड़कों की चौड़ाई में सदृद्गा कमी करते हुए सभी मामलों में सड़कों की चौड़ाई को 3.0 मी. तक सीमित किया जा सकता है।

ii) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण सड़कें सतही सड़कें और मोटे तौर पर पक्की सड़कें होंगी अर्थात्‌ कोलतार या सीमेण्ट कंक्रीट वाली सड़कें। सतह का चयन ग्रामीण नियमावली (आई आर पीः एसपी 20:2002) में निर्धारित तकनीकी विनिर्देशों का पालन करते हुए अन्य बातों के साथ-साथ यातायात की सघनता, मृदा का प्रकार और वृक्षों जैसे घटकों के आधार पर किया जाएगा।

iii) जहाँ सड़क कार्य किसी बसावट से होकर किए जा रहे हैं, निर्मित क्षेत्र में और सड़क को दोनों ओर 50 मी. की सड़क का डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि उसे पानी से नुकसान न हो। इसके लिए सड़कों के किनारे नालियाँ बनाने के लिए सीमेंट या पत्थर की सड़कें बनाई जाएंगी। उचित पाश्र्व नालियाँ भी बनाई जाएंगी ताकि पानी की अनुचित निकासी से सड़क को नुकसान न हो।

iv) ग्रामीण सड़क नियमावली में साधारण बिटूमन की जगह संशोधित बिटूमन के इस्तेमाल के लाभों के बारे में बताया गया है। यदि राज्य सरकारों ने अपने किसी भी कार्यक्रम में संशोधित बिटूमन ख रबर संशोधित बिटूमन (आर एम बी) सहित , का इस्तेमाल करने के निर्णय लिए हैं, तो इसका इस्तेमाल पी एम जी एस वाई सड़कों में भी किया जाना चाहिए। संशोधित बिटूमन (आर एम बी सहित) का इस्तेमाल केवल ी सतह पर ही किया जाना चाहिए। आई आर सी कोड - आई आर सी 53:2002 के प्रावधानों के अनुरूप, कड़ाई से गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने का ध्यान रखा जाना चाहिए। रिफाईनरी से बिटूमन की प्राप्ति, बिटूमन का उपयोग करते समय गुणवत्ता के लिए ठोस जाँच और भारी मात्रा में उसका इंतजाम वैसे उपायों के जरिए गुणवत्ता नियंत्रण के लिए विद्गोद्गा ध्यान दिया जाना होता है। ग्रामीण सड़क नियमावली में या आई आर सीः एसपी 20:2002 या आई आर सी 53:2002 द्वारा निर्धारित सभी जाँचों का पालन किया जाएगा।

v) जहाँ कहीं भी लाई ऐद्गा जैसे उत्पादों सहित स्थानीय सामग्रियां उपलब्ध हैं, तकनीकी मानदण्डों का पालन करते हुए उनका निर्धारण किया जाना चाहिए।

vi) पी एम जी एस वाई के अंतर्गत निर्मित ग्रामीण सड़कों में उचित निकासी सुविधाएं होनी चाहिए होनी चाहिए। कार्यक्रम के अंतर्गत क्रॉस ड्रेनेज कार्यों के संबंध में साधारणतया केवल छोटे अर्थात्‌ 15 मी. की लंबाई वाले पुलों को ही लिया जाना चाहिए। 15-25 मी. लंबे पुलों के मामले में सुपरिटेंडिंग इंजिनियर या उससे  के स्तर के अधिकारी तथा राज्य तकनीकी एजेंसी और वरिष्ठ इंजीनियरों, जो प्रस्तावित संरचना की आवश्यकता और डिजाईन को मंजूर करेगें, के द्वारा जाँच करने के बाद ही इस कार्यक्रम के अंतर्गत लंबे पुलों की भी अनुमति दी जाएगी। पुलों से होने वाले लाभ और उसे पर होने वाले खर्च पर पर्याप्त ध्यान दिए जाने की जरूरत है। इसी प्रकार, पहाड़ी राज्यों के मामले में, क्रॉस-ड्रेनेज कार्य की लागत सामान्यतः 25 लाख रू. से अधिक नहीं होनी चाहिए। पुलों को इस तरह बनाया जाए कि जहाँ व्यवहार्य हो, वे पुल व बंधार की तरह कार्य कर सकें। तथापि, ऐसे मामलों में, इसके संचालन और रखरखाव में संबंध में लाभार्थी समूह / ग्राम पंचायत की पूर्व वचनबद्धता ली जानी चाहिए।

परियोजना प्रस्तावों की संवीक्षा

1 ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रत्येक राज्य सरकार के परामर्द्गा से प्रतिद्गिठत तकनीकी संस्थाओं की पहचान की है ताकि राज्य सरकारों द्वारा बनाएं गए परियोजना प्रस्तावों की संवीक्षा की जा सके, राज्य सरकारों को आवश्यक तकनीकी सहायता मुहैया कराई जा सके और विद्गिाष्ट आग्रह कर गुणता नियंत्रण जांच कराई जा सके। इनका राज्य तकनीकी एजेंसियों (एस टी ए) के रूप में उल्लेख किया जा रहा है। एस टी ए की गतिविधियों का समन्वयन एन आर आर डी ए द्वारा किया जाएगा, जो संस्थाओं की सूची में कुछ नाम जोड़ सकती है या हटा सकती है, ताकि समय पर विद्गिाष्ट कार्य सौंपे जा सकें। ग्रामीण विकास मंत्रालय / एन आर आर डी ए समय पर अतिरिक्त तकनीकी गुणवत्ता वाली एजेंसियों की पहचान कर सकती हैं ताकि राज्य सरकारों को ये सेवाएं दी जा सकें और योजना के लाभ के लिए आवश्यक अन्य कार्य पूरे किए जा सकें।

2 पी आई यू डिजाईन और आकलनों की संवीक्षा के लिए एस टी ए को प्रस्तावों के साथ विस्तृत परियोजना रिर्पोट प्रस्तुत करेगी। प्रोफॉर्मा एफ-1 से एफ-8 डी पी आर का भाग होगा। एस टी ए को भेजे जाने से पहले इन्हें सुपरिंटेंडिंग इंजिनियर या पी आई यू के पर्यवेक्षण अधिकारी के स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रालय / एन आर आर डी ए द्वारा परिचालित प्रोफॉर्मा-'बी' में सड़क कार्यों का सार प्रस्तुत किया जाएगा।

3 पी एम जी एस वाई दिशा-निर्देशों,ग्रामीण सड़क नियमावली / आई आर सी एस पी 20:2002 में उल्लिखित आई आर सी विनिर्देशों प्राप्त दरों की लागू अनुसूची के आलोक में एस टी ए द्वारा डी पी आर की संवीक्षा की जाएगी। ऐसा करने से, यह सुनिश्चित हो पाएगा कि मृदा की को किस श्रेणी में रखा जाए।

4 राज्य स्तरीय एजेंसी, यह जांच करने के बाद कि संबंधित एस टी ए द्वारा प्रस्तावों की विधिवत संवीक्षा कर ली गई है, प्रत्येक पी आई यू से प्रस्तावों को एकत्र करेगी। तब वे राज्य सार तैयार करेंगे और सभी परियोजना प्रस्तावों के साथ प्रत्येक जिले के प्रोफॉर्मा-एमपी- और एमपी- और सभी प्रोफॉर्मा को एन आर आर डी ए को भेजेंगी।

5 तत्पश्चात एन आर आर डी, एस टी ए से प्राप्त प्रस्तावों की संवीक्षा करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावों को तैयार किया गया है और एस टी ए द्वारा उनकी विधिवत जांच की गई है। उसके बाद प्रत्येक राज्य के लिए प्रस्तावों को अधिकार संपन्न समिति के समक्ष विचार-विमर्श हेतु प्रस्तुत किया जाएगा।

अधिकार संपन्न समिति

1 केन्द्र स्तर पर, राज्य सरकारों से प्राप्त परियोजना प्रस्तावों पर सचिव, ग्रामीण विकास विभाग की अध्यक्षता वाली अधिकार संपन्न समिति द्वारा विचार किया जाएगा। राज्य सरकार के प्रतिनिधियों, जिनकी परियोजनाओं पर अधिकार संपन्न समिति द्वारा विचार किया जा रहा है, को जरूरत पड़ने पर बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। उसके बाद, अधिकार संपन्न समिति की सिफारिद्गाों को मंजूरी हेतु ग्रामीण विकास मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

2 मंत्रालय प्रस्तावों की मंजूरी के बारे में राज्य सरकार को सूचित करेगा। तथापि, यह नोट किया जाए कि मंत्रालय की मंजूरी का अर्थ प्रस्तावों को प्रद्गाासनिक या तकनीकी मंजूरी मिल जाना नहीं है। इस संबंध में निश्पादन एजेंसी / यों की सुस्थापित प्रक्रियाओं का पालन करना जारी रहेगा।

3 सड़क रूप-रेखा का एक बार अनुमोदन हो जाने के पश्चात्‌ जिला पंचायत, राज्य तकनीकी एजेंसी और राज्य स्तरीय स्थायी समिति की अनुमति प्राप्त किए बिना उसे नहीं बदला जाना चाहिए।

कार्यों की निविदा

1 मंत्रालय द्वारा परियोजना प्रस्तावों को स्वीकृत किए जाने के बाद निश्पादन एजेंसी निविदा आमंत्रित करेगी और परियोजानाओं पर कार्य आरंभ करेगी। सभी परियोजनाओं के लिए प्रतियोगी बोली के जरिए निविदा की सुव्यवस्थापित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। राज्य तकनीकी एजेंसी द्वारा जांची गई और मंत्रालय द्वारा स्वीकृत की गई सभी परियोजनाओं के लिए इसी तरह निविदा की जाएगी और कार्य में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। राज्य, सभी निविदाओं के लिए, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानक बोली दस्तावेज का अनुपालन करेंगे।

2 निविदा सूचना जारी करने, निविदा को अंतिम रूप देने और कार्यों के वितरण से संबंधित सभी राज्य स्तरीय औपचारिकताएं परियोजना प्रस्तावों की मंजूरी के 120 दिनों के अन्दर पूरी हो जानी चाहिए, यदि ऐसा नहीं होता है तो यह मान लिया जाएगा कि प्रसंगत कार्य रद्द कर दिए गए हैं। जिन परिस्थितियों के कारण कार्य नहीं दिया जा सका उनके संबंध में एक रिर्पोट राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी (एन आर आर डी ए) को भेजी जानी चाहिए। राज्य सरकार को भी वह राद्गिा नहीं मिलेगी।

3 यदि प्राप्त निविदाओं का मूल्य मंत्रालय द्वारा स्वीकृत अनुमान से अधिक है, तो वह अन्तर (निविदा राद्गिा) राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

स्त्रोत :ग्रामीण विकास मंत्रालय,भारत सरकार

अंतिम बार संशोधित : 2/22/2020



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