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भारत निर्माण स्वयंसेवक

भारत निर्माण स्वयंसेवक-उद्देश्य

भारत गाँवों का देश माना जाता है। ग्रामीण विकास हमेशा से देश की प्राथमिकता रही है। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय लगातार प्रयत्नशील है।

मुख्य तौर पर मंत्रालय के उददेश्य इस प्रकार हैं:

  • महिलाओं तथा अन्य अति दुर्बल वर्गों के साथ-साथ जरूरतमंदों को आजीविका के लिए रोजगार अवसर तथा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे परिवारों (बीपीएल) को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करना।
  • प्रत्येक परिवार को, प्रत्येक वित्त वर्ष में, कम से कम 100 दिनों का गारंटीयुक्त मजदूरी रोजगार प्रदान कर ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों को संवर्धित आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • सड़क मार्गों से नहीं जुड़ी ग्रामीण बसावटों के लिए बारहमासी ग्रामीण सड़क-संपर्क का प्रावधान और मौजूदा सड़कों के उन्नयन करके बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीएल परिवारों को मूल आवास और वासभूमि की उपलब्धता कराना।
  • वृद्धजनों, विधवाओं तथा विकलांग व्यक्तियों को सामाजिक सहायता उपलब्ध करना।
  • जीवन स्तर के सुधार हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध करना।
  • ग्रामीण विकास कार्यकर्ताओं का क्षमता निर्माण करना तथा उन्हें प्रशिक्षण देना।
  • ग्रामीण विकास के लिए स्वैच्छिक एजेंसियों तथा वैयक्तिकों की भागीदारी का प्रोन्नयन करना।
  • भूमि की खोई अथवा जर्जर उत्पादकता की पुनर्प्राप्ति करना। इसे वाटरशैड विकास कार्यक्रमों तथा भूमिहीन ग्रामीण निर्धनों को भूमि उपलब्ध करने के लिए प्रभावी भूमि संबंधी उपायों की पहल के माध्यम से किया जाता है।

भारत निर्माण वॉलन्टीयर (स्वयंसेवक) कौन होते हैं?

भारत निर्माण स्वयंसेवक (BNV) ऐसा व्यक्ति होता है, जो ग्रामीण परिवार से आता है तथा अपनी मर्जी से काम करता है, जिसके तहत वह परिवारों के एक समूह के बीच कड़ी के रूप में काम करता है तथा कई लाइन डिपार्टमेंटों के बीच एक मेज़बान के रूप में काम करता है। उसका उद्देश्य ऐसे घरों तक विभिन्न सरकारी योजनाओं को पहुंचाने में मदद करना है, जहां तक ये न पहुंच पाई हों। दूसरे शब्दों में ये “कार्यक्रमों तथा अछूते परिवारों के बीच की आखिरी मानव कड़ी होते हैं।”

भारत निर्माण स्वयंसेवक क्यों?

भारत सरकार तथा राज्य सरकारें कई दशकों से विभिन्न कल्याण तथा विकास योजनाओं का क्रियान्वयन करती रही हैं, हालांकि कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में अंतर हो जाता है जिससे गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को वे लाभ नहीं मिल पाते जिनके वे हकदार होते हैं। विभिन्न स्तरों पर बनाई गई आपूर्ति प्रणाली के आकार सीमित होते हैं तथा उनके पास पर्याप्त समय नहीं होता कि वे लक्षित ग्रामीण परिवारों तक पहुंच सकें, जिससे ये योजनाएं काफी अधिक समय में उन परिवारों तक पहुंचती हैं, साथ ही कई बार ये गलत परिवारों तक जा पहुंचती हैं। अतः ग्रामीण परिवारों से जुड़ाव के क्रम में आखिर मानव कड़ी के रूप में भारत निर्माण स्वयंसेवक (BNV) के तहत ऐसे युवकों को तैयार करने की योजना बनाई गई है, जो बेहतर प्लानिंग तथा गुणवत्ता व क्रियान्वयन की जिम्मेदारी हेतु ग्रामीण परिवारों के बीच जाकर कल्याण व विकास कार्यक्रमों के प्रति जागरुकता फैलाते हैं।

उन्हें स्वेच्छा पूर्वक क्यों काम करना चाहिए?

समय के साथ स्थानीय शक्ति समूहों के विकास, विभिन्न समुदायों के बीच एकता की कमी, उनसे जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरुकता की कमी, सेवा प्रदाता क्षेत्रों की उदासीनता, भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार, कार्यक्रम क्रियान्वयन के बारे में जागरुकता की कमी इत्यादि जैसे कारकों से ग्रामीण बुनावट काफी कमजोर हुई है। अतः विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के लाभ गांव के सही परिवारों तक नहीं पहुंच पाते हैं। अतः विभिन्न कल्याण तथा विकास के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में ग्रामीणों की भागीदारी काफी कम देखी गई है। अतः ग्रामीणों, खासकर युवाओं द्वारा अपनी इच्छा से अपनी भागीदारी दिखाना निम्न कारणों से काफी अहम पाया गया है:

  • युवा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में भाग लेने के अवसर की तलाश में हैं।
  • ग्रामीण विकास का अर्थ है उनके अपने परिवारों का विकास करना, अतः वहां उन्हें उनकी अपनी भूमिका दिखाई पड़ती है।
  • चूंकि वे एक ही गांव से आते हैं, उनके कार्यों को सराहना मिलती है।
  • उनमें से कुछ बेरोजगार युवकों को गांव में एक समूह में काम करना आनंदकारी लगता है।
  • स्वयंसेवा से आत्मसम्मान तथा पहचान मिलती है।
  • भारत निर्माण स्वयंसेवक योजना ने उनके व्यक्तित्व/रुझानों में महत्वपूर्ण बदलाव देखा है।
  • नई उपलब्धियां पाने के दौरान इस बात का एहसास कि “हमने इसे किया”, उन्हें आत्मगौरव से भर देता है।
  • एपीएआरडी(APARD) ने प्रत्येक स्वयंसेवक को अपने गांव के जीवन की गुणवत्ता को उन्नत बढ़ाने में इच्छुक पाया है।

पिछले काफी समय से देखा जा रहा था कि ग्रामीण परिवेश में स्‍थानीय शक्‍ति के समूह बढ़ने, विभिन्‍न समुदायों के बीच एकता का अभाव, उनसे संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूकता का अभाव, कार्यक्रम की कार्यान्‍वयन प्रक्रिया के पहलुओं के बारे में जागरूकता का अभाव जैसे मुद्दे सामने आ रहे थे इससे विभिन्‍न सरकारी कार्यक्रमों का लाभ गरीब परिवारों को नहीं पहुंच पा रहा था। इसके साथ ही, विभिन्‍न कल्‍याणकारी तथा विकास कार्यक्रमों की योजना की प्रक्रिया में ग्रामीण परिवारों की सहभागिता पर्याप्‍त नहीं थी। इसलिए, ग्रामीणों की विशेष तौर पर युवाओं की स्‍वयंसेवी भागीदारी तथा ग्राम विकास के लिए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में भाग लेने का अवसर प्रदान करना आवश्‍यक समझा गया। भारत निर्माण स्‍वयंसेवकों ने अपने कार्यों से अपने व्‍यक्‍तित्‍व, व्‍यवहार में काफी परिवर्तन महसूस किया। उन्‍होंने सम्‍मान और पहचान प्राप्‍त की तथा जहां उन्‍होंने कोई विशिष्‍ट कार्य किया तो उनमें यह भाव पैदा हुआ कि ‘यह हमने किया’।

प्रशिक्षण में मूल्‍यों तथा नैतिकता के साथ-साथ सरकार की सभी विकास योजनाओं के उद्देश्‍यों पर बल दिया गया है। इससे उनका ध्‍यान उनके समुदाय में व्‍याप्‍त विभिन्‍न बुराइयों जैसे कि शराबखोरी, जल्‍दी स्‍कूल छोड् देने के साथ ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था, सुशासन और योजना की ओर गया। ग्राम सभा, ग्राम पंचायत तथा समितियों के अंतर्गत मुद्दों का निपटान, अनुशासन, सहजता तथा निर्धारित ढंग के होने से वे स्‍वयं अचंभित थे और ऐसा उन्‍होंने पहले सोचा भी नहीं था। वे शक्‍तिशाली स्‍तंभों से भी सामना करने लगे और उन्‍हें अपने विकास कार्यक्रम के अनुरूप ढालने में समर्थ रहे।

अनेक गांवों में गलियों की सफाई की, कूड़े का निपटान किया, टैंकों को साफ किया, श्रमदान करके सड़क तैयार की, सूचना प्रदान की। कई बार उन्‍होंने अपनी कमाई भी लगाई। उनमें से कुछ ने बेसहारा परिवारों, जिनमें केवल महिलाएं घर चलाती थीं जिनके लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली से प्राप्‍त चावल पूरा नहीं पड़ता था, ऐसे परिवारों की पहचान की और कार्यकर्ताओं ने ऐसे परिवारों की मदद की और यह सुनिश्‍चित किया कि वे हर रोज अपने तीन समय का भोजन प्राप्‍त कर सकें। कई स्‍वयंसेवी अपने गांव में रोशनी लाने के लिए ऊर्जा के वैकल्‍पिक स्रोतों की योजना सरकार से धनराशि प्राप्‍त करने के लिए बना रहे हैं। कुछ अपनी गलियों में सौर ऊजा से रोशनी तथा कुछ सौर कुकर और बिजली के लिए योजना बना रहे हैं। गांव में विभिन्‍न समुदायों के बीच काफी समय से चल रहे झगड़ों का निपटारा कर लिया गया है और भाईचारा पनपा है। भारत निर्माण स्‍वयंसेवी ने मंडल स्‍तर पर सभी विभागों से संपर्क कर समुदायों के पूरे नहीं किए गए अनुरोधों के संबंध में उत्‍तर प्राप्‍त किए हैं। इनमें से अनेक ने दफनाने के लिए स्‍थान, खेल के मैदान तथा कुछ ने अपने गांव में बस चलाने के लिए प्रशासन से पहचान तथा अधिसूचना प्राप्‍त कर ली है। प्राय: सभी गांव वालों ने यह सूचित किया है कि उन्‍होंने ऐसी दुकानें (शराब की दुकान) बंद कराने के प्रयास किए और उनमें से कई ऐसी दुकाने बंद कराने में सफल रहे। कुछ ने गांव की दुकानों में पान और गुटकों की बिक्री बंद करा दी। कइयों ने सौ प्रतिशत आईएसएल कवरेज के बारे में अनेक लोगों को सूचित किया है।

कइयों ने प्रशासन से नालियों की लाइन के निर्माण के लिए संपर्क किया है। एक गांव में प्रत्‍येक घर परिवार के लिए गड्ढ़ा भरना निश्‍चित किया गया है, यह उनका लक्ष्‍य है और उन्‍हें यह विश्‍वास कि वे इस कार्य को शीघ्र ही पूरा कर लेंगे। कुछ गांवों में खुली हवादार लाइब्रेरी शुरू की गयी हैं। अख़बार और पत्रिकाएं शाम तक छोटे कमरे में रख दी जाती हैं और शाम को इन्‍हें पेड़ के पास चौपाल में पढ़ने के लिए पहुंचा दिया जाता है। बाद में इन्‍हें फिर से स्‍वयंसेवी  प्रभारीद्वारा कमरे में वापस पहुंचा दिया जाता है।

आंध्र प्रदेश ग्रामीण विकास अकादमी (अपार्ड) के प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी भारत निर्माण स्‍वयंसेवियों को स्‍वयं सेवा की भावना का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रबुद्ध व्‍यक्‍तियों, उस्‍मालिया विश्‍वविद्यालय के साइक्‍लोजिस्‍ट, ब्रह्म कुमारियां, भारत के पूर्व राष्‍ट्रपति अब्‍दुल कलाम द्वारा शुरू किया गया लीड इंडिया फाउंडेशन, अनुभवी पत्रकार तथा प्रोग्रेसिव सरपंच तथा अपार्ड से लोगों को शामिल किया गया।

इस प्रयोग की सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह रही कि यह सभी स्‍वयंसेवी किसी भी स्रोत से कोई वित्‍तीय सहायता या मानदेय प्राप्‍त नहीं करते। इसके विपरीत कई मामलों में वे जहां आवश्‍यकता पड़ती है अपनी खुद की धनराशि खर्च करते हैं। उन्‍होंने यह सिद्ध कर दिया है कि ग्रामीण समुदाय निष्‍क्रिय नहीं हैं और वे अपनी समस्‍याओं का समाधान करने में सक्षम हैं। उन्‍होंने यह भी सिद्ध कर दिया है कि वे अपने समुदाय के अधूरे सपनों को पूरा कर सकते हैं तथा वे ग्रामीण आंध्र प्रदेश के स्‍तर में गुणवत्‍ता परक सुधार लाएंगे। एक खास बात जो अपार्ड ने देखी कि भारत निर्माण स्‍वयंसेवियों तथा चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच कार्य का बेहतर माहौल बना जबकि यह लगता था कि इनके बीच टकराव तथा तकरार न हो जाए। यात्रा जारी है और भारत निर्माण स्‍वयंसेवियों से लम्‍बी सूची प्राप्‍त करने की अपेक्षा है।

भारत निर्माण सेवा के रुप में स्वयंसेवक बनने के लिए जाने और रजिस्ट्रर करें।



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