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निर्मल ग्राम पुरस्कार

निर्मल ग्राम पुरस्कार

भूमिका

भारत सरकार, ग्रामीण भारत के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन स्तर सुनिश्चितता सुनिशिचत करने हेतु एक अभियान के रूप में स्वच्छता कवरेज को बढ़ावा दे रही है। इसके कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए भारत सरकार ने ग्रामों, पंचायतों, ब्लॉकों, जिलों और राज्यों को पूरी तरह से स्वच्छ तथा खुले में शौच मुक्त रखने के लिए अक्तूबर, 2003 में “निर्मल ग्राम पुरस्कार” (एनजीपी) नामक एक प्रोत्साहन आधारित पुरस्कार योजना शुरु की तथा अपनी महत्वपूर्ण योजना- सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान(टीएससी) के एक घटक के रूप में 2005 में प्रथम पुरस्कार प्रदान किया। निर्मल ग्राम पुरस्कार((एनजीपी)  वर्ष 2011निर्मल भारत पुरस्कारतक प्रदान किये जाते रहे हैं। एनजीपी में उन पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और संगठनों द्वारा किये गए प्रयासों को मान्यता प्रदान की जाती है, जिहोंने पने संचालन क्षेत्रों में पूर्ण स्वच्छता कवरेज  सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण रूप से योगदान दिया है। निर्मल भारत अभियान में सुचना, शिक्षा और संप्रेषण(आई.ई.सी) दक्षता निर्माण एवं स्वच्छता के बारे में शिक्षा जो पुरे समुदाय को लेकर प्रभावी रूप से व्यवहार में बदलाव लाता है, उस पर जोर दिया गया है। साथ ही साथ निर्मल ग्राम पंचायत बनाने ले लिए पंचायती राज संस्थाएँ, समुदाय आधारित संगठन और सरकारी संस्थान इत्यादि की भागादारी पर भी जोर दिया गया है।

वर्ष 2011 तक पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों अथार्त ग्राम पंचायत, ब्लॉक  पंचायत और जिला पंचायत स्तरों पर निर्मल ग्राम पुरस्कार प्रदान किया गया है। अब यह निर्णय लिया गया है किनिर्मल भारत अभियान (एनबीए) के तहत वर्ष 20 12 से निर्मल ग्राम पुरस्कार प्रदान करने के लिए ग्राम पंचायतों का चयन राज्यों द्वारा किया जायगा, जबकि ब्लॉक और जिला पंचायतों का चयन केन्द्र के पास बना रहेगा। तदनुसार, इन दिशानिर्देशों को तैयार किया गया है।

निर्मल ग्राम पुरस्कार के उद्देश्य

1. ग्रामीण भारत में साफ-सफाई की अच्छी आदतों को दैनिक जीवन स्तर के रूप में बढ़ावा देना।

2.  ग्रामों को खुले में शौच मुक्त बनाने और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एस.एल.डब्ल्यू.एम.) अपनाने हेतु पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई)  को प्रोत्साहित करना।

3. स्वच्छ वातावरण की पहल को जारी रखना।

4. एनबीए के कार्यान्वयन में सामाजिक संगठनों को सामुदायिक एकजुटता के लिए प्रोत्साहित करना।

ग्राम पंचायतों के लिए पात्रता

एक ग्राम पंचायत निम्मलिखित आधारों पर निर्मल ग्राम पुरस्कार (एनजीपी) के लिए पात्र होगी:-

  • ग्राम पंचायत ने सभी बसावटों और अपने क्षेत्र  के भीतर खुले में शौच पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक संकल्प लिया है।
  • ग्राम पंचायत के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आनेवाली सभी बसावटों में पीने तथा साफ-सफाई के प्रयोजनों के लिए जल की सुविधा है।
  • ग्राम पंचायतों ने जिला परियोजना में एन.बी.ए. के सभी घटकों के उद्देश्यों को ओरोत कर लिया है तथा इनकी प्रविष्टि पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की आई.एम.आई.एस. प्रणाली में कर दी है।

स्कोरिंग पैटर्न (समंकन पद्धति)

ग्राम पंचायतों के चयन के लिए निम्मलिखित समंकन  पद्धति अपनाई जायगी :-

 

मापदंड

अधिकतम अंक

न्यूनतम अंक

 

अनिवार्य मापदंड

 

 

1

वैयक्तिक  पारिवारिक शौचालय (आई, एच, एच, एल.)

50

 

2

विद्यालय साफ-सफाई

8

 

3

आंगनबाड़ी साफ-सफाई

8

 

4

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एन.आर.एच.डी.डब्ल्यू.पी.) दिशानिर्देशों के अनुसार पर्याप्त  जल की सुविधा

10

85

5

आई.ई.सी. गतिविधि

9

 

 

अन्य मापदंड

 

 

6

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

5

 

7

तरल अपशिष्ट प्रबंधन

10

5

 

कुल अंक

100

90


 

 




मापदंड का ब्यौरा:

 

उप-मापदंड

अंक

1.

आई.एच.एच. एल.

1.1

भी परिवारों, प्रवासी श्रमिकों द्वारा शौचालय का उपयोग और सार्वजानिक स्थानों एवं ग्राम पंचायतों में खुले में शौच की प्रथा नहीं पाई गई। 

30

1.2

शौचालय का निर्माण इस प्रकार से किया गया, जो मलमूत्र को सुरक्षित रूप से परिसीमित रखते हैं(उन्नत/सुरक्षित साफ-सफाई)।

5

1.3

परिवारिक और सार्वजानिक/सामुदायिक शौचालयों का उचित रूप से अनुरक्षण किया जाता है।

5

1.४

बच्चे के मल का सुरक्षित रूप से निपटान किया जाता है

5

1.5

सिर पर मैला नहीं ढोया जाता है।

5`

 

उप-जोड़

50

2.

विद्यालय साफ-सफाई

 

2.1

विद्यालयों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग तथा पर्याप्त शौचालय उपलब्ध  हैं।

2

2.२

विद्यार्थियों और अध्यापकों द्वारा शौचालयों का प्रयोग किया जा रहा है।

2

2.3

विद्यालय शौचालयों का उपयुक्त रूप से अनुरक्षण किया जाता है।

2

2.4

हाथ धोने के लिए साबुन उपलब्ध है।

1

2.5

विद्यालय में पीने तथा अन्य प्रयोजनों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध है।

1

 

उप-जोड़

8

3.

आंगनबाड़ी साफ-सफाई

 

3.1

आंगनबाड़ी में शौचालयों की उपलब्धता

2

3.2

बच्चों द्वारा शौचालयों का प्रयोग किया जा रहा है।

2

3.3

आंगनबाड़ी शौचालयों का उपयुक्त रूप से अनुरक्षण किया जाता है।

1

3.4

हाथ धोने के लिए साबुन उपलब्ध है।

1

3.5

आंगनबाड़ी में पीने तथा अन्य प्रयोजनों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध है।

1

 

उप-जोड़

8

4.

एन.आर.एच.डी.डब्ल्यू.पी दिशानिर्देशों के अनुसार जल की उपलब्धता 

 

4.1

ग्राम पंचायत की प्रत्येक बसावट के लिए 55 एल.पी. सी. डी.  (लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन) जल की उपलब्धता

4

4.2

प्रत्येक घर के 100 मीटर की दुरी के भीतर जल स्रोतों की जल उपलब्धता

 

४.3

सभी जल स्रोतों की नियमित जाँच

 

 

उप-जोड़

10

1.

सुचना, शिक्षा और संप्रेषण

 

5.१

विद्यालय और आंगनबाड़ी शौचालयों के आस-पास बच्चों की रूचि अनुसार आलेखन और चित्रकारी।

1

5.2

ग्राम पंचायत में सार्वजानिक स्थानों में प्रदर्शित स्वच्छता एवं साफ-सफाई संबंधी संदेश।

2

5.3

अन्तः वैयक्तिक संप्रेषण के लिए स्वस्छता  दूतों की नियुक्ति और तैनाती।

2

5.4

जागरूकता सृजन हेतु ग्राम पंचायतों में सार्वजानिक स्थानों पर स्ट्रीट थियेटर, लोक कला , नृत्य, नाटक आदि जैसी बाह्य एवं परम्परागत  मिडिया गतिविधियों का आयोजन।

1

5.5

ग्राम पंचायतों में स्वच्छ्ता और साफ- सफाई के बारे में सुचना का प्रचार-प्रसार करने के लिए सामुदायिक लीडरों, युवा समूहों, महिला समूहों के नेटवर्क के सृजन जैसी गतिविधियों का आयोजन।

1

5.6

खुले में शौच के प्रतिबंध का उलंघन करने के लिए जुर्माना वसूल करना।

2

 

उप-जोड़

9

6

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

 

6.1

परिवार और ग्राम स्तर पर ठोस अपशिष्ट सामग्री को अलग-अलग करने की उपयुक्त प्रणाली

2

6.२

परिवार अथवा ग्राम स्तर पर ठोस अपशिष्ट सामग्री को सुरक्षित रूप से लाने-ले जाने तथा/अथवा उसके निपटान की उपयुक्त प्रणाली

2

6.3

गलियों, खुले स्थानों तथा आस-पास के क्षेत्र में सामान्य साफ-सफाई ।

1

 

उप-जोड़

5

7

तरल अपशिष्ट प्रबंधन

 

7.1

परिवार स्तर पर जल अपशिष्ट सामग्री का उचित एवं प्रबंधन

4

7.2

जल स्रोतों और निकास मार्ग के आस=पास उचित प्लेटफार्म।

3

७.3

सार्वजनिक क्षेत्रों और सार्वजनिक जल स्रोतों के नजदीक अपशिष्ट जल का उचित एवं प्रबंधन

3

 

उप-जोड़

10

 

कुल जोड़

10

उपरोक्त के आलावा, पुरस्कार प्राप्त करने वाली ग्राम पंचायत 5 बोनस अंक भी प्राप्त करेगी जहाँ उसकी सभी बसावटों के प्रत्येक घर में पाइप द्वारा जल आपूर्ति के कनेक्शन हैं। इससे ग्राम पंचायत एन.आर.एच.डी.डब्ल्यू.पी के अंतर्गत पुरस्कार के रूप में अतिरिक राशि प्राप्त करने का पात्र होगी जिसका ब्यौरा  नीचे सारणी 5.1 में दिया गया है। प्राप्त बोनस अंकों को सर्वेक्षण दल द्वारा अलग से निदृष्ट किया जायगा।

ग्राम पंचायतों के लिए पुरस्कार राशि

पंचायती राज संस्थानों को केवल पुरस्कार राशि ही प्रदान की जाट है जबकि अधिकारियों और संगठनों को उनके प्रयासों को मान्यता प्रदान करते हुए उद्धरण एवं स्मृतिचिन्ह प्रदान किये जाते हैं । ग्राम पंचायतों के लिए पुरस्कार राशि, जनसंख्या मापदंड के आधार पर दी जाती है, जिसका ब्यौरा नीचे सारणी में दिया गया है:-



मापदंड/राशि

ग्राम पंचायत

जनगणना-2011  के अनुसार जनसंख्या

1000 से कम

100 से 1999

2000 से 4999

5000 से 9999

10,000 तथा उससे अधिक

पुरस्कार राशि  (लाख रु० में)

1.0

2.0

4.0

8.0

10.0

 

5.1 एन.आर.एच.डी.डब्ल्यू.पी के तहत परिवार में पाइप द्वारा जल आपूर्ति के कनेक्शनों के लिये बोनस अंकों के लिए अतिरिक्त पुरस्कार राशि

मापदंड/राशि

ग्राम पंचायत

जनगणना-2011  के अनुसार जनसंख्या

1000 से कम

100 से 1999

2000 से 4999

5000 से 9999

10,000 तथा उससे अधिक

पुरस्कार राशि  (लाख रु० में)

1.0

2.0

4.0

8.0

10.0

ग्राम पंचायत चयन प्रक्रिया

जिला जल और स्वच्छता मिशन (डी.डब्ल्यू.एस.एम.) ग्राम पंचायतों से आवेदन पत्र मंगाएगा तथा आवेदन पत्रों की जाँच पड़ताल करेगा उर पात्र आवेदनों को राज्य को भेजेगा। मंत्रालय एक व्यापक दिशानिर्देश का मसौदा तैयार करेगा जिसमें राज्यों के लिए सामान्य सर्वेक्षण प्रणाली का ब्यौरा शामिल होगा और इसे अंतर-जिला सर्वेक्षण दल के माध्यम से शुरू किया जा सकता है। इससे जाँच-पड़ताल में एकरूपता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।  सर्वेक्षण रिपोर्ट जिला जल और स्वच्छता मिशन को प्रस्तुत की जायगी जो उनकी जाँच करेगा और राज्य को अंतिम सिफारिशें करेगा। जिलों से प्राप्त अंतिम सिफारशों को निर्मल ग्राम पुरस्कार के लिए ग्राम पंचायतों के चयन हेतु, “राज्य निर्मल ग्राम पुरस्कार चयन समिति” के समकक्ष  प्रस्तुत किया जायगा। राज्य स्तरीय समिति का गठन निम्न प्रकार से होगा:-

  • राज्यों/संघ क्षेत्रों के ग्रामीण स्वच्छता के प्रभारी प्रधान सचिव/सचिव ।
  • ग्रामीण विकास, पीएचई/पंचायती राज के प्रतिनिधि( यदि इनमें से कोई एक अथवा अधिक राज्य में स्वच्छता के लिए नोडल विभाग नहीं है)।
  • स्वास्थ्य, विद्यालय शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभागों से राज्य सरकारों के सचिव।
  • स्वच्छता के लिए राज्य एनबीए समन्यवक ।

जाँच-पड़ताल करने के लिए पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा निर्धारित एक स्वत्रंत एजेंसी/एजेन्सियों के माध्यम से पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा चयनित सूची में से कम से कम 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों के नमूने सत्यापित किये जायंगे। इसके आलावा, पेयजलऔर  स्वच्छता मंत्रालय अधिकारियों तथा एनआरसी कन्सल्टेन्ट को नियुक्त करके चयनित सूची में से 5 प्रतिशत ग्राम पंचायतों का समग्र सत्यापन के परिणाम प्राप्त होने के बाद राज्य पात्र ग्राम पंचायतों का अंतिम रूप से चयन करेगा।

पुरस्कार के लिए अंतिम रूप से चयनित ग्राम पंचायतों की सूची राज्य की वेबसाइट पर अपलोड किया जायगा। ग्राम पंचायतों के नाम समाचारपत्रों में भी प्रकाशित किये जायेंगे।

ग्राम पंचायत को पुरस्कार राशि क भुगतान करने की प्रक्रिया

ग्राम स्वच्छता राज्य का विषय है। केन्द्र सरकार राज्य सरकार के प्रयासों की प्रतिपूर्ति करती है। इस प्रकार, केन्द्र और राज्य के बीच 80:20 के अनुपात में निधि अंशदान पद्धति को एनजीपी पुरस्कार राशि के लिए अपनाया जायगा।

राज्य एनजीपी चयन समिति द्वारा निर्मल ग्राम पुरस्कार के लिए ग्राम पंचायतों का चयन किये  लिए जाने पर, जिलों में ग्राम पंचायतों के लिए पुरस्कार राशि (केन्द्र अनुदान तथा राज्य अनुदान) को, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय एव्राज्य सरकार द्वारा एस.डब्ल्यू.एस.एम. कहते में रिलीज किया जायगा। तत्पश्चात, अपने कहते में निधियाँ प्राप्त होने की तारीख से 7 दिनों के भीतर एस.डब्ल्यू.एस.एम. द्वारा उन्हें सम्बन्धित जिले के डी.डब्ल्यू.एस.एम खातों में अंतरित किया जायगा। निधियाँ प्राप्त होने की तिथि से 7 दिनों के भीतर, डी.डब्ल्यू.एस.एम द्वारा पुरस्कार राशि को पुरस्कृत ग्राम पंचायतों को जरी किया जायगा। जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डी.डब्ल्यू.एस.एम) ग्राम पंचायतों को उक्त राशि के संवितरण के एक महीने के भीतर राज्य को पुरस्कार राशि की रिलीज का विवरण उपलब्ध करायेगा।

  • ग्राम पंचायतों को निम्मलिखित तरीके (मोड) से कुल पुरस्कार राशि जारी की जायगी:-
  • पुरस्कार की घोषणा होने पर, पुरस्कार राशि की 25 प्रतिशत राशि नकद में जारी की जायगी।
  • पुरस्कार राशि की 75 प्रतिशत राशि, ग्राम पंचायतों के नाम से दो वर्षो के लिए सविधि जमा (फिक्स्ड डिपोजिट) के रूप में रखी जायगी।

निर्मल स्थिति बनाये रखने के लिए ग्राम पंचायतें सविधि जमा पर मिलने वाली ब्याज राशि का उपयोग कर सकती हैं। जिले को निर्मल ग्राम स्थिति के स्थायित्व का सत्यापन करना होगा। राज्य को इस आशय का एक प्रमाणपत्र देना होगा कि ग्राम पंचायत ने दो वर्षों के अंत तक निर्मल ग्राम स्थिति को बनाये रखा हुआ है, जिसके लिए सविधि जमा राशि जारी की जाती है।

ब्लॉक पंचायत (मध्यवर्ती पंचायत) और जिला पंचायत चयन प्रक्रिया

यदि राज्य एनजीपी चयन समिति द्वारा ग्राम पंचायतों की चयनित सूची के बाद, एनजीपी के लिए ब्लॉक/जिलों में सभी ग्राम पंचायतों का चयन कर लिया गया हो, तो ब्लॉक तथा जिला स्तर पर पुरस्कार के  लिए आवेदन पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को भेजा जा सकता है।

ब्लॉक पंचायतों की सिफारिशों के मामले में, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय एनजीपी के स्थायित्व का आकलन करने हेतु, ब्लॉक की 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों का औचक (रैन्डम) रूप से चयन करेगा। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ख्याति प्राप्त स्वतंत्र एंजेंसियों के माध्यम से, औचक (रैन्डम) रूप से, चयन की गई ग्राम पंचायतों में सर्वेक्षण करवाएगा।

स्वतंत्र एंजेंसियों द्वारा एकत्रित किये गए आंकड़ों को, निर्धारित अवधि में भीतर समीक्षा एवं सिफारिश के लिए सम्बन्धित राज्य स्तरीय जाँच समितियों (एस.एल.एस.सी.) को उपलब्ध कराया जायगा। प्रतिवादी परिवारों, विद्यालयों और आंगनबाड़ियों जिनके पास शौचालय सुविधाएँ नहीं हैं, के नाम. विवरण, अपात्रता के अन्य विस्तृत कारणों का ब्यौरा एसएलएससी  को उपलब्ध कराया जायगा। यदि एसएलएससी निष्कर्षों की जाँच करने के इच्छुक हो, तो उस मामले में पंचायती राज संस्था को  पुरस्कार देने के लिए सिफारिश हेतु मद-वार इसके कारण दे सकती है। प्राप्त किसी भी अभ्यावेदन पा पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा विचार किया जायगा तथा उसका निर्णय अंतिम होगा।

आवेदकों की स्थिति के बारे में सभी सर्वेक्षण रिपोर्टों के निष्कर्षों के साथ-साथ राज्यों द्वारा अंतिम रूप  से अनुशंसित आवेदन पत्रों को राष्ट्रीय एनजीपी चयन समिति के समकक्ष प्रस्तुत किया जायगा जिसमें निम्मलिखित शामिल होंगें:-

  • पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा संयुक्त सचिव अथवा उसी रैंक का नामित समतुल्य अधिकारी।
  • निदेशक, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय।
  • स्वच्छता क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय दो संगठनों के प्रतिनिधि।

राष्ट्रीय एनजीपी चयन समिति (समितियों) द्वारा अनुसंशित ब्लॉक और जिला पंचायती राज संस्थाओं की सूची  को एनजीपी वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जायगा। पुरस्कार प्राप्तकर्ता ब्लॉकों/जिलों के नामों को समाचारपत्रों में भी प्रकाशित किया जायगा। ब्लॉक और जिला पंचायती राज संस्थाओं को पुरस्कार, राष्ट्रीय समारोह में प्रदान किया जायगा।

9.  ब्लॉक/ जिला पंचाययों के लिए पुरस्कार राशि
ब्लॉक/ जिला पंचाययों के लिए पुरस्कार राशि  नीचे दी गई सारणी में जनसंख्या मापदंड के आधार पर प्रदान की जाती है:-

मापदंड/राशि

ग्राम पंचायत

जिला पंचायत

जनगणना-2011  के अनुसार जनसंख्या

50,000  तक

50,000 से अधिक

10,00,000  तक

10,00,000  से अधिक

पुरस्कार राशि  (लाख रु० में)

15.0

20.0

30.0

50.0

ब्लॉक/ जिला पंचाययों के लिए पुरस्कार राशि के भुगतान  की प्रक्रिया

जैसे ही राष्ट्रीय एनजीपी चयन समिति द्वारा पुरस्कार के लिए ब्लॉक/जिला पंचायत का चयन कर लिया जाता है, वैसे ही एक विशिष्ट राज्य के कार्यक्षेत्र में आने वाली ब्लॉक/ जिला पंचाययों के लिए पुरस्कार राशि पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय और राज्य सरकार द्वारा (80:20 के अनुपात में) एस.डब्ल्यू.एस.एम. को अंतरित कर दी जायगी। इसके बाद यह पुरस्कार राशि विजताओं को जारी की जायगी।

पंचायती राज संस्थाओं द्वारा पुरस्कार राशि प्रयोग

पुरस्कार राशि प्राप्त करने वाली ग्राम पंचायतों को, अपने सम्बन्धित क्षेत्रों में स्वच्छता में सुधार करने और उनका रख-रखाव करने  के लिए इस राशि का प्रयोग करना चाहिए। इस प्रोत्साहन राशि का उपयोग करते हुए, निम्मलिखित गतिविधियाँ शुरु की जा सकती है:-

  • सामुदायिक स्वच्छता सुविधाओं का अनुरक्षण एवं एनजीपी स्तिथि का स्थायित्व सुनिश्चित करना।
  • एनबीए, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एम.पी.लौड्स) तथा अन्य कार्यक्रमों के अंतर्गत उपलब्ध कुल निधियों के अतिरिक पुरस्कार राशि का उपयोग ठोस एवं तरल प्रबंधन सम्बन्धी आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है।
  • किसी अन्य कार्यक्रम के अंतर्गत कवर न होने वाले पंचायती क्षेत्र जैसे मेला ग्राउंड, बाजार स्थलों, विद्यालयों, आंगनबाड़ियों आदि में अतिरिक्त स्वच्छता सुविधाओं का सृजन।
  • वर्मी-कम्पोस्टिंग और अन्य पर्यावरणीय अनुकूल स्वच्छता प्रणालियों का संवर्धन।
  • विभिन अशक्त व्यक्तियों के लिए शौचालयों का संवर्धन।
  • स्वच्छता संवर्धन के लिए कोई अन्य अभिनव साधन।

पुरस्कार राशि का प्रयोग निम्मलिखित प्रयोजनों के लिए नहीं किया जाना चाहिए:-

  • कार्यशालाओं, सम्मेलनों आदि का आयोजन।
  • मेलों का आयोजन
  • खेलकूद आदि का आयोजन
  • वाहनों, मोबाइलों, कम्पूटरों, फर्नीचर आदि की खरीद।
  • ग्राम पंचायतों के शासी निकाय द्वारा यथानिनि कोई संबद्ध मामला।

निधियों की रिलीज

किसी वर्ष के लिए पुरस्कार विजताओं का चयन करने के बाद, पुरस्कार राशि को भारत सरकार द्वारा राज्यों को एनबीए द्वारा संचालित किये जा रहे उनके एस.डब्ल्यू.एस.एम. खातों में रिलीज किया जायगा। पुरस्कार के लिए निधियों की रिलीज सम्बन्धित, पंचायती राज संस्थाओं को पुरस्कार राशि के संवितरण प्रस्तुत करने तथा साथ ही राज्यों द्वारा उनको पूर्व में जरी की गई धनराशि के लिए आनुपातिक राज्य अंशदान जारो करने के अधीन होगी।

राज्य सरकार केन्द्र सरकार से मिलने वाली पुरस्कार राशि के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र देगी जो एन.बी.ए. के वार्षिक उपयोगिता प्रमाण पत्र का ही भाग होगा।

लेखों का अनुरक्षण

ग्राम पंचायतें/ब्लॉक पंचायतें / जिला पंचायतें प्राप्त  पुरस्कार राशि तथा समर्थित दस्तावेज़ के साथ उस प्रयोजन जिस पर यह राशि खर्च की गई है, के बारे में एक उपयुक्त कहते का अनुरक्षण करेंगी। पुरस्कार राशि अथवा उसको भाग के उपयोग की रिपोट, जिला/राज्य की एनबीए कार्यान्वयन एजेंसी को, वार्षिक रूप से दी जायगी, जिसके साथ ग्राम पंचायत/ब्लॉक पंचायत के कार्यकारी प्रधान द्वारा हस्ताक्षरित एक उपयुक्त व्यय विवरण भेजेंगी। इस निधि पर प्राप्त होने वाली ब्याज राशि का उपयोग उसी प्रयोजन हेतु उपयोग किया जा सकता है जिसके लिए पुरस्कार दिया गया है।

उचित निगरानी

स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को उचित निगरानी करनी होगी। डी.डब्ल्यू.एस.एम द्वारा औचक जाँच की जायगी, कि ग्राम पंचायतें अपनी एनजीपी स्थिति को बरकरार रखती हैं या नहीं। इस प्रयोजन के लिए, डी.डब्ल्यू.एस.एम द्वारा एक वर्ष में कम से कम दो बार, निर्मल ग्राम पंचायतों की स्थिति का आवधिक रूप से सत्यापन किया जायगा तथा उसकी जानकारी पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की एनजीपी वेबसाइट पर डाली जायगी। स्वच्छता कवरेज के स्थायित्व का आकलन करने के लिए सम्पूरक निगरानी संकेतकों जैसे, जल जनित बिमारियों के फैलाव, पेयजल स्रोतों के सुक्ष्म जैविकीय तत्वों  आदि को भी ध्यान में रखा जायगा।

अपील

राज्य एनजीपी चयन समिति, ग्राम समिति, ग्राम पंचायतों के चयन, सर्वेक्षण प्रक्रिया तथा सम्बन्धित किसी भी मामले में सभी अपीलों पर निर्णय करने हेतु अंतिम प्राधिकरण होगी।

स्रोत: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग,झारखण्ड सरकार, केंद्र सरकार एवं पत्र सूचना कार्यालय



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