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निर्मल भारत अभियान- दिशा निर्देश

निर्मल भारत अभियान- दिशा निर्देश

  1. परिचय
  2. पृष्ठभूमि
  3. उद्देश्य
  4. कार्यनीति
  5. कार्यान्यवन
  6. निर्मल भारत अभियान के घटक
    1. आरंभिक क्रियाकलाप
    2. आई. ई. सी क्रियाकलाप
    3. क्षमता निर्माणघटक
    4. वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय का निर्माण
    5. ग्रामीण स्वच्छता बाजार और उत्पादन केंद्र
    6. जिले में परिक्रामी निधि का प्रावधान
    7. सामुदायिक स्वच्छता परिसर
    8. संस्थागत शौचालय
    9. ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन
    10. निर्मल भारत अभियान (एनबीए) के अंतर्गत सृजित सुविधाओं का अनुरक्षण
    11. प्रशासनिक प्रभार
  7. राष्ट्रीय योजना स्वीकृति समिति
  8. कार्यान्वयन एजेंसियां
    1. राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (एसडब्ल्यूएसएम्)
    2. जल एवं स्वच्छता सहायता संगठन (डब्ल्यूएसएसओ)
    3. ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी)
    4. ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति
  9. पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका
  10. गैर सरकारी संगठनों की भूमिका
  11. निगमित निकायों की भूमिका
  12. परियोजना का वित्तपोषण
  13. वार्षिक कार्यान्वयन योजना (आईएपी)
  14. निधियों की रिलीज
    1. केंद्र से राज्य स्तरीय कार्यान्वयन निकास को रिलीज
    2. राज्य स्तर से जिला स्तर को रिलीज
  15. निर्मल भारत अभियान (एनबीए) के अंतर्गत जारी निधियों पर अर्जित ब्याज
  16. निरीक्षण
  17. राज्य समीक्षा मिशन
  18. सामाजिक लेखा परिक्षण
    1. भूमिका
    2. ग्राम स्वच्छता सभा
  19. परियोजना में संशोधन
  20. रिपोर्ट
  21. मूल्यांकन
  22. अनुसंधान
  23. वार्षिक लेखा परीक्षा
  24. परियोजना का समापन

परिचय

व्यक्तिगत साफ- सफाई, घरेलू स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल, कूड़ा करकट निपटना, मलमूत्र निपटान और अपशिष्ट जल के निपटान को शामिल के लिए स्वच्छता की अवधारणा का विस्तार किया गया। स्वच्छता की इस व्यापक आवधारणा के साथ केंद्रीय स्वच्छता कार्यक्रम में “सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान” के नाम से “मांग आधारित” दृष्टिकोण अपनाया गया, जिसे 1999 से लागू किया गया। संशोधित दृष्टिकोण में सूचना, शिक्षा और संचार, मानव संसाधन विकास, क्षमता विकास क्रियाकलापों पर पहले से जोर दिया गया, ताकि लोगों में जागरूकता पैदा की जा सके और स्वच्छता सुविधाओं की मांग पैदा की जा सके।

पृष्ठभूमि

व्यक्तिगत स्वास्थ्य और साफ – सफाई काफी हद तक पेयजल और समुचित स्वच्छता सुविधा की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इस लिए स्वच्छता और स्वास्थय के बीच संबंध है। अस्वच्छ पेयजल का उपयोग करना, मानव मल का सही ढंग से निपटन न किया जाना, पर्यावरण की समुचित साफ- सफाई की व्यवस्था का न होना तथा स्वयं की और भोजन की सफाई की व्यवस्था न होना, विकासशील देशों में कई बीमारियों के प्रमुख कारण रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। सरकार ने 1986 में केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम शुरू किया। इसके प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण लोगों के जीवन स्तर को सुधारना और महिलाओं को निजता तथा प्रतिष्ठा प्रदान करना था।

इससे वैकल्पिक वितरण तंत्र के उन्मुख विकल्पों का चयन करने की लोगों की क्षमता बढ़ी। इस कार्यक्रम को समुदाय उन्मुख और जनकेंद्रित पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित करें हुए कार्यान्वित किया गया। गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों द्वारा निजी पारिवारिक शौचालय बनवाए जाने और इसका इस्तेमाल किए जाने की उनकी उपलब्धियों को मान्यता देने ले लिए उन्हें वित्तीय प्रोत्साहन दिए गये। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत क्रियाकलाप शुरू करने के अलावा विद्यालय शौचालय इकाईयों, आंगनबाड़ी शौचालय और समुदायिक स्वच्छता परिसरों के निर्माण के लिए भी सहायता का विस्तार किया गया।

सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने निर्मल ग्राम पुरस्कार भी शुरू किया जिसमें पूर्ण स्वच्छता कवरेज हासिल करने की दिशा में हासिल की गई उपलब्धियों और किए गए प्रयासों को मान्यता दी जाती है। इस पुरस्कार को अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त हुए और इसने निर्मल स्थिति हासिल करने के लिए समुदाय में एक आंदोलन शुरू करने में प्रभावी योगदान दिया और इसके माध्यम से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता दायरा को बढ़ाने के लिए हासिल की गई उपलब्धियों में काफी वृद्धि हुई।

निर्मल ग्राम पुरस्कार की सफलता से प्रोत्साहित होकर सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान का नाम बदलकर “निर्मल भारत अभियान” किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता दायरा में तेजी लाना है, ताकि नई कार्यनीतियों और संतृप्ति – कारण दृष्टिकोण के माध्यम से ग्रामीण समुदाय को व्यापक रूप से शामिल किया जा सके।

एन बी ए के अंतर्गत निम्नलिखित प्राथमिकताओं के साथ निर्मल ग्राम पंचायतें बनाने की दृष्टि से संतृप्ति परिणाम हासिल किए जाने की योजना है।

  • ग्राम पंचायत में गरीबी रेखा से नीचे और गरीबी रेखा से ऊपर दोनों के निर्धारित परिवारों के लिए निधी  परिवारों के लिए निधी पारिवारिक शौचालय की व्यवस्था
  • ऐसी ग्राम पंचायतों का चयन जिनमें सभी बस्तियों में पानी उपलब्ध हो। उन ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें कार्यशील पाइप द्वारा जल आपूर्ति की सुविधा हो
  • इन ग्राम पंचायतों में सरकारी स्कूल और सरकारी भवनों में चलाई जाने वाली आंगनबाड़ी में स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था
  • प्रस्तावित और मौजूद निर्मल ग्रामों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था
  • स्थायी स्वच्छता के लिए पंचायती राज संस्थाओं, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों तथा क्षेत्रीय कर्मियों जैसे हिस्सेदारों की गहन क्षमता का विकास
  • एम्एनआरईजीएस के साथ अकुशल श्रम दिवसों और कुशल श्रमदिवसों के अनुसार के अनुसार समुचित तालमेल

उद्देश्य

निर्मल भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य निम्नानूसार है।

(क) ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जीवन स्तर में सुधार करना ।

(ख) देश में सभी ग्राम पंचायतों द्वारा निर्मल स्थिति प्राप्त करने के साथ 2022 तक निर्मल भारत के लक्ष्य को हासिल करने लिए स्वच्छता कवरेज में तेजी लाना।

(ग) जागरूकता सृजन और स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से स्थायी स्वच्छता सुविधाओं को बढ़ावा देने वाले समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं को प्रोत्साहित करना।

(घ) ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वशिक्षा अभियान के तहत शामिल न किए गए विद्यालयों और आंगनबाड़ी केन्द्रों को समुचित स्वच्छता सुविधाओं के साथ कवर करना और छात्रों के बीच स्वास्थ्य शिक्षा और साफ – सफाई की आदतों को बढ़ावा देना।

(ङ) पारिस्थितिकीय रूप से सुरक्षित और स्थायी स्वच्छता के लिए किफायती तथा उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।

(च) ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पूर्ण स्वच्छता के लिए ठोस और सरल अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देते हुए, समुदाय प्रबंधित पर्यावरणीय स्वच्छता पद्धति विकसित करना।

कार्यनीति

“समुदाय नेतृत्व निर्मिंत” और जनकेन्द्रित” कार्यनीतियाँ तथा समुदायिक संतृप्तिकरण दृष्टिकोण अपनाते हुए ग्रामीण भारत को “निर्मल भारत” में परिवर्तित करने की रणनीति है। जागरूकता सृजन और घरों, विद्यालयों में स्वच्छता सुविधाओं के सृजन की मांग पैदा करने तथा स्वच्छ वातावरण पर जोर देते हुए “मांग उन्मुख दृष्टिकोण” को गरीब परिवारों की निजी पारिवारिक शौचालय इकाइयों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन की व्यवस्था को विस्तृत किया गया है ताकि अन्य जरूरतमंद परिवारों को भी शामिल किया जा सके और इस तरह सामुदायिक परिणाम हासिल किये जा सकें। सृजित स्वच्छता सूविधाओं के स्थायित्व के लिए ग्राम पंचायत में पानी की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण कारक रहेगी। ग्रामीण विद्यालय स्वच्छता एक प्रमुख घटक होती है। और ग्रामीण लोगों द्वारा स्वच्छता को व्यापक रूप से स्वीकारक करने का प्रवेश बिन्दु होती है। ग्राहक की प्राथमिकताओं और स्थान विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, व्यापक प्रौद्योगिकी विकल्प उपलब्ध कराये जा रहे हैं। गहन आईईसी अभियान इस कार्यक्रम का आधार है, जिसमें पंचायती राज संस्थाओं, सहकारी समितियों, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता, महिला समूह, स्वयं सहायता समूह, निर्मल भारत अभियान की कार्यान्वयन प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शी प्रणाली शुरू की जा रही है, जिसमें सामाजिक लेखा परीक्षा और सक्रिय जनभागीदारी शामिल हैं। निधि उपलब्धता के साथ ग्रामीण परिवारों की मदद करने के लिए एम् एन आई जी एम् एस के साथ तालमेल करना भी महत्वपूर्ण होगा ताकि वे खुद की स्वच्छता सुविधाएँ सृजित करने के लिए धन हासिल कर सके।

कार्यान्यवन

निर्मल भारत अभियान के दिशा निर्देश और इसमें दिए गए प्रावधान 1/4/2012 से लागू हैं। निर्मल भारत अभियान का कार्यान्वयन ग्राम पंचायत को आधार इकाई मानकर करने का प्रवधान है। किसी जिले से आने वाले परियोजना प्रस्ताव की राज्य सरकार द्वारा जाँच की जाती है। और उसे सामेकित किया जाता है तथा राज्य योजना के रूप में भारत सरकार, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को भेज दिया जाता है। निर्मल भारत अभियान को आरम्भिक क्रियाकलापों को साथ अलग – अलग चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा। प्रारंभिक आईईसी कार्य के लिए निधियां उपलब्ध कराई जाती हैं। वास्तविक कार्यान्वयन महसूस की गई आवश्यकताओं को पूरा करने वाला होगा जिसमें हर पारिवारिक शौचालयों के लिए विकल्पों की सूची से विकल्प का चयन करेगा। विकल्पों की सूची में निर्मित लोचनीयता गरीब तथा उपेक्षित परिवारों को बाद में अपनी जरूरतों और आर्थिक स्थिति के आधार पर उन्नयन का अवसर प्रदान करता है। “अभियान दृष्टिकोण” में सरकारी एजेंसियों और अन्य हिस्सेदारों के बीच सहयोगात्मक बातचीत जरूरी है। प्रारंभिक स्वच्छताओं प्रथाओं में वंछित व्यवहारिक बदलाव लाने के  लिए गैर- सरकारी संगठनों /पंचायती राज संस्थाओं संगठनों की भागीदारी के साथ गहन आईईसी तथा प्रचार-प्रसार की व्यवस्था की गई है।

निर्मल भारत अभियान का कार्यान्वयन जिले को परियोजना इकाई मानकर किया जाएगा। राज्यों/संघ क्षेत्रों में यह अपेक्षा है कि वे सभी जिलों के लिए निर्मल भारत अभियान परियोजनाएँ तैयार करें/उसे संशोधित करें, राज्य योजना के रूप में राज्य स्तर पर समेकित करें तथा भारत सरकार के सम्मुख प्रस्तुत करें।

निर्मल भारत अभियान के घटक

निर्मल भारत अभियान के कार्यान्वयन के लिए कार्यक्रम घटक तथा क्रियाकलापों निम्नानुसार है:

आरंभिक क्रियाकलाप

आरंभिक क्रियाकलाप में निम्न शामिल हैं:

क. स्वच्छता तथा साफ-सफाई कार्यों की स्थिति का आंकलन करने के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण करना।

ख. आधार लेखा सर्वेक्षण

ग. जिला/ग्राम पंचायत स्तर पर प्रमुख कार्मिकों का प्रबोधन

घ. राज्य योजना तैयार करना

आरंभिक क्रियाकलापों के लिए 10 लाख रूपए तक की लात की पूर्ति सूचना, शिक्षा और संचार (आईसी) निधियों से की जाएगी। यदि अतिरिक्त निधि की आवश्यकता पड़ती है, तो उसकी पूर्ति राज्य द्वारा की जाएगी ।

आई. ई. सी क्रियाकलाप

सूचना, शिक्षा एवं संचार इस कार्यक्रम के महत्वपूर्ण घटक है। इनका लक्ष्य व्यावहारिक बदलाव के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घरों, स्कूलों, आंगनबाड़ी में स्वच्छता सुविधाओं और सामूदायिक स्वच्छता सुविधाओं और सामुदायिक स्वच्छता परिसरों की मांग पैदा करना है। इन घटकों के तहत शुरू किए जाने वाले क्रियाकलाप क्षेत्र विशिष्ट होंगे और उनमें ग्राम आबादी के सभी वर्गों को शामिल भी किया जाएगा। आईईसी केवल एक बार किया जाने वाला क्रियाकलाप नहीं है। निर्माण को बढ़ावा देने वाली मांग सृजन को शामिल करने के लिए आईईसी कार्यनीति और योजना तैयार करनी होती है तथा उन्हें स्थायी रूप से इस्तेमाल करना होता है। आईईसी क्रियाकलाप सभी स्तरों अर्थात जिला, ब्लॉक तथा ग्राम पंचायतों में चलाए जाने चाहिए।

भारत सरकार के द्वारा बुनियादी स्तर पर परस्पर चर्चा पर जोर देते हुए एक राष्ट्र संचार नीति की रूप रेखा तैयार की गई है। राज्यों को सामूहिक मीडिया, मास मीडिया और आउटडोर मीडिया जैसे दिवार पेंटिग, होर्डिंग इत्यादि का भी इस्तेमाल करते हुए खुद की कार्यनीति तैयार करनी होगी। आईईसी में स्वास्थय तथा साफ- सफाई कार्यो और पर्यावरण स्वच्छता के पहलूओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

परस्पर चर्चा और घर - घर जाकर संपर्क करने के कार्य को कार्यक्रम लक्ष्यों को हासिल करने का सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधन माना गया है। भागीदारी पूर्ण सामाजिक एकजूटता के साथ ग्राम स्तर पर संचार तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ग्रामीण स्तरीय प्रेरकों (स्वच्छतादूत/स्वच्छता प्रबंधकों) को शामिल करने के दिशा- निर्देश अलग से जारी किए गए। हैं। इस कार्यनीति के हिस्से के रूप में स्वच्छता दूतों के अलावा, क्षेत्रीय कर्मियों जैसे- भारत निर्माण स्वयं सेवकों, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं, विद्यालय शिक्षकों इत्यादि को भी ग्राम स्तर पर मांग सृजन और व्यवहारिक बदलाव लाने संबंधी चर्चा में शामिल किया जा सकता है। प्रेरकों और आईईसी के लिए निर्धारित की गई  निधि से उपयुक्त प्रोत्साहन राशि दी जा सकती है। प्रोत्साहन राशि कार्यनिष्पादन अर्थात शौचालय बनाने और उनका इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहन किए गए परिवारों और विद्यालयों/ आंगनबाड़ियों की संख्या पर आधारित होगी।

प्रत्येक परियोजना में जिला समुदाय के सभी वर्गों तक पंहुचने के लिए विस्तृत आईईसी योजना के साथ-साथ स्पष्ट कार्यनीति के साथ वार्षिक कार्य योजना तैयार की जाएगी। इस तरह की संचार योजना का लक्ष्य ग्रामीण लोगों को जीवन जीने के तरीके के रूप में साफ – सफाई की आदत को अपनाने के लिए प्रेरित करना और इसके माध्यम से कार्यक्रम के तहत सभी सुविधाएँ विकसित करना तथा उनका रख रखाव करना है। वार्षिक आईईसी कार्ययोजना के डीडब्ल्यूएससी/ डीडब्ल्यूएसएम् द्वारा विधिवित रूप से अनुमोदित किया जाना चाहिए। राज्य स्तर पर बनाई गई संचार एवं क्षमता विकास इकाइयाँ/जल एवं स्वच्छता सहयोग संगठन एक अच्छी आईसीसी योजना तैयार करने और उसे करने और उसे कार्यान्वित करने और उसे कार्यान्वित करने में जिलों की मदद करेंगे। स्वच्छता दिवस/स्वच्छता सप्ताह/ स्वच्छता पखवाड़ा मानना वार्षिक कार्य योजना का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।

आईईसी सामग्रियों का प्रभावी तरीके से प्रचार-प्रसार करने के लिए ब्लॉकों तथा ग्राम पंचायतों के कार्यों के निष्पादन के लिए इस घटक के तहत निधियां भी दी जा सकती हैं। परस्पर चर्चा करने, प्रेरकों का चयन करने, दिवार पेंटिंग, नुक्कड़ नाटक जैसे कार्य निष्पादित करने इत्यादि स्थानीय गैर सरकारी संगठनों को शामिल करने के लिए इस तरह के क्रियाकलाप शुरू कर सकते हैं। पंचायतों द्वारा तैयार की गई इस तरह की सामग्री को जिला अथवा सीसीडीयू द्वारा मानकीकृत किया जाना चाहिए।

आईईसी निधियों को मोटे तौर पर प्री- निर्मल तथा पोस्ट- निर्मल चरण में विभाजित किया जाना चाहिए ताकि अभियान को जारी रखने के लिए निधियां उपलब्ध रहें। फिर भी, परियोजना जिलों के बेसलाईन सर्वेक्षण रिपोर्टों और स्वच्छता कवरेज की तीव्रता की दर के आधार पर इस विभाजन के सम्बन्ध में निर्णय लेने की छूट होगी।

आईईसी के तहत उपलब्ध निधियों का इस्तेमाल ग्रामीण समुदायों, आम जनता और विद्यालयों में बच्चों को साफ- सफाई की शिक्षा देने के लिए किया जा सकता है। आईईसी योजना में स्कूल जाने वाले बच्चों, शिक्षकों तथा अभिभावक – शिक्षक संगठनों में जागरूकता स्तर बढ़ाने का एक घटक शामिल होना चाहिए।

आईईसी का वित्तपोषण भारत सरकार तथा राज्य सरकारों के बीच 80-20 के अनुपात में किया जाएगा और आरंभिक अनुदान सहित कुल आईईसी लागत कूल परियोजना लागत के 15 प्रतिशत तक सीमित होगी।

क्षमता निर्माणघटक

यह घटक वीडब्ल्यूएससी तथा पंचायती राज संस्था के सदस्यों, ब्लॉक तथा जिला कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं इत्यादि के प्रशिक्षण के लिए है स्व-सहायता समूहों को जागरूकता बढ़ाने वाले क्रियाकलापों के रूप राजमिस्त्री संबंधी काम, ईंट बनाने, टॉयलेट पैन बनाने और नल मिस्त्री से सम्बन्धित काम इत्यादि जैसे पेशों में भी प्रशिक्षित किया जा सकता है। सक्षम सीबीओ और गैर- सरकारी संस्था को ऐसे कार्यों के लिए भी सम्मिलित किया जा सकता है। राज्य संसाधन केन्द्रों का निर्धारण इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए किया जाना चाहिए।

क्षमता निर्माण का वित्तपोषण भारत सरकार और राज्य सरकारों के बीच 80:20 के अनुपात में किया जाएगा तथा यह आईईसी बजट का 2 प्रतिशत तक होगा।

वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय का निर्माण

विधिवत रूप से पूरा किए गए पारिवारिक स्वच्छता शौचालय में एक ऊपरी ढाँचा सहित एक शौचालय इकाई होगी। इस कार्यक्रम का लक्ष्य सभी ग्रामीण परिवारों को शामिल करना है। योजना के तहत दिया जाने वाला वित्तीय प्रोत्साहन जो गरीबी रेखा से नीचे अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों, छोटे तथा सीमांत किसानों, वासभूमि के साथ भूमिहीन मजदूरों, शारीरिक रूप से विकलांगों तथा महिला प्रमुख परिवारों को दिया जाता है, और विस्तार करके गरीबी रेखा के नीचे तथा गरीबी रेखा के ऊपर जीवन यापन करने वाले सभी परिवारों को दिया जा सकता है। पारिवारिक शौचालयों का निर्माण कार्य परिवार द्वारा खुद ही किया जाएगा और शौचालय बन जाने तथा इस्तेमाल शुरू हो जाने पर नकद वित्तीय प्रोत्साहन परिवार की उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए दिया जा सकता है।

वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय की एक इकाई के निर्माण के लिए गरीबी रेखा से नीचे के परिवार/निर्धारित एपीएल परिवार को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि 4600 रू. होगी (दुर्गम तथा पर्वतीय क्षेत्रों के लिए 5100 रू.)। इसमें केन्द्रीय अंश 3200 रू. होगी (पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों के लिए 3700 रू.) तथा राज्य सरकार का अंश 1400 रू. होगा। न्यूनतम लाभार्थी अंशदान नकद अथवा श्रम के रूप में 900 रू. होगा। राज्य सरकारों को यह छूट दी गई है कि चाहें तो स्वयं की निधियों से इसी इकाई लागत अथवा इससे अधिक इकाई लागत के आधार पर एक पारिवारिक शौचालय के लिए इससे अधिक प्रोत्साहन राशि दे सकती है। केन्द्रीय अथवा राज्य सहायता से बनाए गए सभी मकानों में निपरवाद रूप से अभिन्न हिस्सों के रूप में उपयुक्त स्वच्छता सुविधा होनी चाहिए। फिर भी, इंदिरा आवास योजना अथवा किसी अन्य राज्य आवास योजना के तहत लाभार्थियों द्वारा बनाए गए सभी मकान, शौचालय नहीं हैं, निर्मल भारत अभियान के तहत लक्ष्य में रखे गए समूहों के अंर्तगत स्वच्छता सुविधाओं के निर्माण के लिए उपर्युक्त अनुसार वित्तीय प्रोत्साहन के पात्र होंगे।

उपर्युक्त वित्तीय प्रोत्साहन के अंतर्गत कवन न किए गए एपीएल परिवार प्रेरित होकर स्वयं ही पारिवारिक शौचालय बनवाना शुरू कर देंगे। आईईसी क्रियाकलापों में बिना किसी अपवाद के ग्राम पंचायत में सभी परिवारों को व्यापक रूप से शामिल किया जाएगा। ऐसे एपीएल परिवार जिनके पास नकद का अभाव हो, वे दिशानिर्देशों में किए गए निर्धारण में किए गए निर्धारण के अनुसार परिक्रामी निधि से राशि प्राप्त कर सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बकेट शौचालय बनाने की अनुमति नहीं है। यदि काई बकेट शौचालय हो, तो उसे स्वच्छ शौचालयों में तब्दील दिया जाएगा तथा लक्ष्य में रखे गए लाभार्थियों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि की वित्तपोषण पद्धति वैयक्तिक पारिवरिक शौचालयों के निर्माण की तरह ही होगी।

टीएससी का एमजीआरईजीएस के साथ तालमेल बैठाने के संबंध में ग्रामीण विकास मंत्रालय की दिनांक 7.6.2012 की अधिसूचना संख्या जे. 11013/01/2011 एमजीएनआरईजीए (भाग- VI) इस दिशा निर्देश के अनुबंध VI पर उपलब्ध हैं।

ग्रामीण स्वच्छता बाजार और उत्पादन केंद्र

ग्रामीण स्वच्छता बाजार एक ऐसी दूकान है जिसमें स्वच्छ शौचालयों, सोख्ता तथा कम्पोस्ट पिट्स, वर्मी- कम्पोस्टिंग, धुलाई चबूतरों, प्रमाणित घरेलू जल शोधकों के निर्माण के लिए आवश्यक सामग्रियां हार्डवेयर और डिजाइन तथा आवश्यक अन्य स्वच्छता एवं साफ – सफाई सम्बंधी उपकरण उपलब्ध होते हैं। ग्रामीण स्वच्छता बाजारों में हर तरह के पैन (सिरामिक, मोजैक, एचडीपी, फाइबर ग्लास) उपलब्ध होने चाहिए जो स्वच्छता बाजार बनाने का प्रमुख उद्देश्य अलग- अलग तरह के शौचालय बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। उत्पादन केंद्र स्थानीय स्तर पर किफायती स्वच्छता सामग्रियां बनाने के साधन हैं। वे स्वतंत्र हो सकते हैं अथवा ग्रामीण स्वच्छता बाजारों का एक हिस्सा हो सकता हैं।

उत्पादन केंद्र/ ग्रामीण स्वच्छता बाजार स्व- सहायता समूहों/ महिला संगठनों/ पंचायतों/गैर- सरकारी संगठनों इत्यादि द्वारा खोला और संचालित किया जा सकता है। कारगार आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए निजी उद्यमियों की मदद भी ली जा सकती है।

डीडब्ल्यूएसएम्/डीद्ब्ल्यूएससी को ग्रामीण स्वच्छता बाजारों/ उत्पादन केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन करना चाहिए और संयुक्त रूप से निगरानी करने की प्रणाली भी विकसित करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ग्रामीण स्वच्छता बाजार और उत्पादन केंद्र, उत्पादन योजनाओं की आवश्यकता के अनुसार कार्य करते हैं। ग्रामीण स्वच्छता बाजार में उत्पादों की गूणवत्ता के प्रमाणन की एक पद्धति और प्रशिक्षित राजमिस्त्री तथा प्रेरकों का एक दल होना चाहिए।

खरीद की प्रत्येक सामग्री के लिए गूणवत्ता मानकों (जहाँ बीआईएस द्वारा अथवा पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया हो) का सख्ती से अनुपालन किया जाना चाहिए।

ग्रामीण स्वच्छता बाजार/ उत्पादन केंद्र खोजने के लिए जिले के पास उपलब्ध परिक्रामी निधि से 3.5 लाख रूपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा सकता है। यदि और अधिक स्वच्छता बाजारों की जरूरत हो, तो इस प्रयोजन के लिए परिक्रामी निधि से अधिकतम 35 लाभ  रूपये का इस्तेमाल किया जा सकता है। ग्रामीण स्वच्छता बाजार/ उत्पादन केंद्र के लिए दिए गए भुगतान ऋण प्राप्त करने की तारीख से एक वर्ष के बाद 12 से 18 किस्तों में किया जायेगा।

जिले में परिक्रामी निधि का प्रावधान

परिक्रामी निधि उन सहकारी समितियों अथवा स्व – सहायता समूहों को दी जा सकती है जिनकी विश्वसनीयता बनी हुई हो ताकि वे अपने सदस्यों को सस्ता वित्तपोषण उपलब्ध करा सकें । इस निधि से दिए गए ऋण का भुगतान 12 से 18 किस्तों में किया जाएगा। निर्मल भातर अभियान परियोजनाओं को परिक्रामी निधि स्वीकृत करने के लिए अन्य निबंधन और शर्ते निर्धारित करने की छूट होगी। यह परिक्रामी निधि उन एपीएल परिवारों द्वारा प्राप्त की जा सकती है। जिन्हें दिशा- निर्देशों के तथा प्रोत्साहन राशि के लिए शामिल नहीं किया गया है। जिन मकान मालिकों के घरों में आंगनबाड़ी केंद्र हैं, उन्हें भी बच्चों के अनुकूल शौचालय बनाने के लिए ऋण दिया जा सकता है बशर्ते आईसीडीएस प्राधिकारी मकान मालिक को दिए जाने वाले मकान किराए से ऋण का भुगतान करने के लिए सहमत हों। जिला परियोजना के 5 प्रतिशत जो अधिकतम 50 लाख रूपए तक होगा, का इस्तेमाल परिक्रामी निधि के रूप में किया जा सकता है। परिक्रामी निधि को केंद्र और राज्य के बीच 80:20 के अनुपात में वहन किया जाता है।

सामुदायिक स्वच्छता परिसर

समुदायिक स्वच्छता परिसर निर्मल भारत अभियान का एक अभिन्न घटक है। इन परिसरों, जिनमें उपयुक्त संख्या में शौचालय सीट, स्नान घर, कपड़े आदि धोने के लिए चबूतरा, वाशबेसिन इत्यादि शामिल हैं, को गांव में ऐसी जगह पर बनाया जा सकता है जो सभी लोगों को स्वीकार्य हो तथा जहाँ सभी पहुंच सकें। सामान्य तौर पर, परिसरें केवल तभी बनाए जायेंग जब गाँव में पारिवारिक शौचालयों क निर्माण के लिए जगह का अभाव हो और समुदाय इन परिसरों के परिचालन तथा रख – रखाव की जिम्मेदारी ले। इसका मुख्य लक्ष्य अधिकतम वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों का निर्माण करना है और समुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण केवल तभी करना है जब किसी कारण से वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय नहीं बनाए जा सकते हैं और समुदाय को “साफ- सफाई की आदतों” के बारे में बताना भी आवश्यक है। ऐसे परिसरों का रख- रखाव बहुत आवश्यक है जिसके लिए ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। प्रयोक्ता परिवारों को इसकी साफ- सफाई और रख - रखाव के लिए उपयुक्त मासिक प्रयोक्ता प्रभार देने के लिए कहा जा सकता है सामुदायिक स्वच्छता परिसर बनाने के प्रस्ताव को राष्ट्रिय योजना मंजूरी समिति (एनएसएससी) द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। ऐसे परिसर उन सर्वजनिक स्थानों, बाजारों इत्यादि में भी बनाए जा सकता हैं जहाँ भारी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं। समुदाय परिसर का समुचित रख-रखाव सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त रख-रखाव दिशा - निर्देश दिए जाने चाहिए।

सामुदायिक स्वच्छता परिसर के लिए निर्धारित अधिकतम इकाई लागत 2 लाख रूपए तक है। केंद्र सरकार राष्ट्र सरकार तथा समुदाय के बीच हिस्सेदारी 60:30:10: के अनुपात में रहेगी। फिर भी, सामुदायिक अंशदान की पूर्ति पंचायत द्वारा अपने संसाधनों जो तेरहवें वित्त आयोग के अनुदानों अथवा इसके द्वारा विधिवत रूप से अनुमत राज्य की किसी अन्य निधि से की जा सकती है।

संस्थागत शौचालय

बच्चे, अभिभावकों को समुचित स्वच्छता की आदतें अपनाने के लिए प्रभावित करने का एक अच्छा माध्यम हो सकते हैं। बच्चे नए विचारों को जल्दी ग्रहण करते हैं। विद्यालय/ आंगनबाड़ी प्रेरणा और शिक्षा के माध्यम से खुले में शौच करने की जगह शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए बच्चों के व्यवहार, सोच तथा आदतों में बदलाव लाने के लिए उपयुक्त संस्थाएँ हैं।

(ए) विद्यालय शौचालय

सभी सरकारी स्कूलों में शौचालय बनाए जाने चाहिए। स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय पर जोर दिया जाना चाहिए। शौचालय ऐसा होना चाहिए कि विकलांग बच्चे इसका इस्तेमाल कर सकें। शौचालय इकाई में एक शौचालय और न्यूनतम दो मूत्रालय होते हैं। सभी सह- शिक्षा विद्यालयों में लड़कों तथा लड़कियों के इकाई अलग अलग शौचालय उपलब्ध होने चाहिए और प्रत्येक इकाई केन्द्रीय सहायता के लिए पात्र होगी। बनाई जाने वाली शौचालय इकाइयों की संख्या स्कूल आने वाले छात्रों की संख्या के अनुसार स्कूल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार, अभिभावक, शिक्षा संघ तथा पंचायतें निर्धारति राशि के अतिरक्ति अपने संसधानों से अंशदान करने के लिए स्वतंत्र है।

स्कूलों में हार्डवेयर के सृजन के अलावा, यह अनिवार्य है की बच्चों को साफ- सफाई के समस्त पहलुओं के संबंध में स्वास्थ्य शिक्षा दी जाती है। इस प्रयोजन के लिए प्रत्येक स्कूल में कम से कम एक शिक्षक को स्वास्थ्य शिक्षा में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए जो बाद में साफ- सफाई की आदतों पर जोर देने वाले मनोरंजन क्रियाकलापों तथा सामुदायिक परियोजनाओं के माध्यम से बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे। इस प्रयोजन में हुए व्यय की पूर्ति परियोजना के लिए निर्धारित की गई आईईसी निधि से की जा सकती है। जिला तथा पंचायत कार्यान्वयन एन्जेंसियाँ एसएसएचई के उद्देश्य अर्थात सभी बच्चों को सुरक्षित, स्वास्थय शैक्षिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा एवं स्वास्थय विभाग तथा अन्य भागिदारी के साथ अच्छा तालमेल स्थापित।

केन्द्रीय सहायता 35,000 रू. प्रति इकाई की इकाई लागत (पर्वतीय तथा दुर्गत क्षेत्रों के मामले में 38,500 रू.) के लिए 70 प्रतिशत तक सीमित होगी। निर्मल भारत अभियान परियोजना में विद्यालय स्वच्छता के लिए वित्तपोषण केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा 70:30 के अनुपात में उपलब्ध कराया जाता है।

 

(बी) आंगनबाड़ी शौचालय

जीवन के आरंभकाल से ही बच्चों में शौचालय का इस्तेमाल करने की आदल डालने के उद्देश्य से यह आवश्यक है कि आंगनबाड़ी का इस्तेमाल बच्चों और माताओं में व्यवहारिक बादल लाने के एक मंच के रूप में किया जाए। इस प्रयोजन के लिए प्रत्येक आंगनबाड़ी में बच्चों के अनुकूल शौचालय होने चाहिए। चूंकि निजी परिसरों में काफी संख्या में आंगनबाड़ी चलाए जाते हैं, इसलिए निम्न कार्यनीति अपनाई जानी चाहिए :

क) सभी आंगनबाड़ी में जो सरकारी भवनों में हैं, उनके निर्मल भारत अभियान निधि से बच्चों के अनुकूल शौचालय बनाए जाने चाहिए।

ख) ऐसे आंगनबाड़ी, जो निजी भवनों में हैं, उसमें भवन मालिक को डिजाइन के अनुसार शौचालय बनाने के लिए कहना चाहिए और उसे निर्माण की लागत को वसूलने के लिए भवन का किराया बढ़ाने की अनुमति की जानी चाहिए।

ग) वैकल्पिक तौर पर, निर्मल भारत अभियान के तहत परिक्रामी निधि घटक से शौचालय बनाया जा सकता है और निश्चित समयावधि के भीतर लागत को वसूलने के लिए भवन मालिक को दिए जाने वाले मासिक किराए से उपयुक्त कटौती की जा सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक आंगनबाड़ी के लिए एक शौचालय की इकाई लागत 8,000 रू. तक होगी (पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के मामले में 10,000 रू.) भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता 5,600 रू. तक सीमित होगी (पर्वतीय तथा दुर्गम क्षेत्रों के मामले में 7,000 रू.)। अतिरिक्त व्यय की पूर्ति राज्य सरकार, पंचायतों द्वारा अथवा तेरहवें वित्त आयोग, एमपीएलएस, एमएलएएलएडीएस, एमजीएनआराईजीएस इत्यादि निधियों से की जा सकती है।

कुपोषण के मुददे को हल करने में मदद करने के लिए 200 उच्च सकेंद्रित कुपोषित जिलों में आंगनबाड़ी शौचालयों को निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।

केंद्र की आर्थिक मदद से बनाए गए सभी सरकारी भवनों में योजना के अभिन्न घटक के रूप में संबंधित योजनाओं के तहत उपयुक्त स्वच्छता सुविधाएँ अनिवार्य रूप से होने चाहिए। इसे “निर्मल भारत” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनिवार्य माना जाता है।

ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन

निर्मल भारत अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जीवन स्तर में सुधार लाना है। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंध इसे हल करने का एक प्रमुख घटक है। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंध कार्य को परिवार की संख्या के आधार पर किसी ग्राम पंचायत के लिए निर्धारित वित्तीय सहायक से प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए परियोजना आधार पर शुरू किया एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं को कार्यान्वित करने में समर्थ हो सकें। इस घटक के तहत कपोस्ट पिट, वर्मी कम्पोस्टिंग, सार्वजनिक एवं निजी बायोगैस संयंत्र, कम लागत वाली निकासी, सीवेज चैनल/गड्ढा, अपशिष्ट जल का पुन: इस्तेमाल और संग्रहण प्राणाली, घरेलू कचरे को अलग-अलग करना तथा उसका निपटान करना इत्यादि जैसे क्रियाकलाप शुरू किए जा सकते हैं। परियोजनाओं को राज्य  योजना मंजूरी समिति द्वारा अनूमेदित किया जाना चाहिए। इस तरह की परियोजनाएं तैयार करने/ उनकी जाँच करने/ उन्हें कार्यान्वित करने के लिए पेशेवर एजेंसियों/ गैर- सरकारी संगठनों की मदद मांगी जा सकती है। निर्मल स्थिति के लिए लक्ष्य में रखी गई निर्धारित ग्राम पंचायतों तथा जिन ग्राम पंचायतों ने निर्मल ग्राम पुरस्कार पहले ही हासिल कर लिया है, में परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन कार्य को एमजीएनआईजीएस इत्यादि जैसे अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों से निधियां लेकर भी कार्यान्वित किया जा सकता है।

निर्मल भारत अभियान के तहत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं के लिए कुल सहायता का निर्धारण प्रत्येक ग्राम पंचायत में परिवारों की कूल संख्या के आधार पर किया जाएगा जो 150 परिवार वाली ग्राम पंचायत के लिए अधिकतम 7 लाख रूपए, 390 परिवारों के लिए 12 लाख रूपये, 500 परिवारों के लिए 15 लाख रूपये और 500 से अधिक परिवारों के लिए 20 लाख रूपये होगी (भारत सरकार का पत्रांक W-11013/16/2012-CRSP दिनांक- 5/12- Octobar  2012 ) निर्मल भारत अभियान के तहत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए वित्त – पोषण केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा 70:30 के अनुपात में उपलब्ध कराया जाएगा। किसी अतिरिक्त लागत की आवश्यकता की पूर्ति राज्य/ ग्राम पंचायत की निधियां से की जाएगी।

निर्मल भारत अभियान (एनबीए) के अंतर्गत सृजित सुविधाओं का अनुरक्षण

सृजित स्वच्छता सुविधाओं के समुचित देखभाल तथा रखरखाव के लिए समुदाय, विशेषकर परिवार के सभी सदस्यों को प्रशिक्षित करना अनिवार्य है। आईईसी क्रियाकलापों में स्वच्छता सुविधाओं के रख-रखाव के सम्बंध में समुदाय को जागरूक करने का काम शामिल होना चाहिए। वैयक्तिक पारिवारिक स्वच्छ शौचालयों के रख- रखाव पर होने वाले खर्चे की पूर्ति परिवारों द्वारा की जानी चाहिए। सम्बन्धित विभाग, विद्यालय/आंगनबाड़ी शौचालयों के रख-रखाव के लिए पर्याप्त निधियां उपलब्ध कराएँ। राज्य सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं/जिलों को उपलब्ध कराई गई किन्हीं अन्य उपयुक्त निधियों का इस्तेमाल किया जाए।

प्रशासनिक प्रभार

प्रशासनिक प्रभारों में निर्मल भारत अभियान के निष्पदान के लिए अस्थायी आधार पर तैनात किए गए स्टाफ के वेतन, सहायक सेवाओं, इंधन प्रभारों, किराए पर लिए गए वाहनों के प्रभारों, लेखा- सामग्री, निर्मल भारती अभियान के कार्यान्वयन केलिए किसी भी स्थिति में कोई अतिरिक्त पद सृजित नहीं किए जाएंगे और न ही अलग से वाहन खरीदे जायेंगे। लेकिन परियोजना को पेशेवर तरीके से कार्यान्वित करने के लिए संचार, मानव संसाधन विकास, स्कूल स्वच्छता एवं स्वास्थ्य शिक्षा तथा निगरानी क्षेत्र से विशेषज्ञ/ परामर्शदाता परियोजना अवधि के लिए बुलाए जायेगें। परामर्शदाताओं की फीस का भुगतान प्रशासनिक प्रभारों से किया जाएगा। प्रति जिला उपकरणों के साथ एक कम्प्युटर खरीदने की अनुमति होगी।

परियोजना के तहत निर्धारित किए जाने वाले प्रशासनिक घटक कूल जिला परियोजना परिव्यय के 4 प्रतिशत तक जो सकते हैं।

“प्रशासनिक व्यय” के तहत निम्न पदों पर व्यय विशेष रूप से प्रतिबंधित है:

क. वाहनों की खरीद

ख. भूमि और भवनों की खरीद

ग. औपचारिक भवनों और विश्राम गृहों का निर्माण (इसमें निर्मल भारत अभियान परियोजनाओं की लिए आवशयक शौचालय इकाइयाँ शामिल नहीं है।)

घ. कार्यालय उपकरण की खरीद ।

ङ. किसी राजनीतिक दल और धार्मिक संगठनों पर व्यय

च. उपहार और दान पर व्यय।

छ. सेल फोन की खरीद।

ज. प्रशासनिक व्यय की पूर्ति करने के लिए राज्य स्तरीय संस्थाओं को निधियों का अंतरण।

 

राष्ट्रीय योजना स्वीकृति समिति

राज्य योजना मंजूरी समिति विधिवत रूप से अनुमोदित परियोजना प्रस्ताव राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र सरकार से मिलने पर जिलों के लिए परियोजना प्रस्ताव अनूमेदित करने अथवा संशोधित करने के लिए निर्धारित समयावधि के लिए निर्मल भारत अभियान के तहत राष्ट्रिय योजना मंजूरी समिति गठित की जाएगी। राष्ट्रिय योजना मंजूरी समिति में सात सदस्य होंगे। राष्ट्रीय योजना मंजूरी समिति गठन निम्नानुसार किया जायेगा।

1. सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय- अध्यक्ष

2. अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय।

3. मंत्रालय द्वारा मनोनीत किए गए ग्रामीण स्वच्छता क्षेत्र के चार गैर सरकारी विशेषज्ञ।

4. उस राज्य के ग्रामीण स्वच्छता के प्रभारी सचिव, जिसके प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।

5. प्राथमिक शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रभारी संयूक्त सचिव।

6. राष्ट्रिय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के प्रभारी संयूक्त सचिव।

7. महिला एवं बाल विकास के प्रभारी संयूक्त सचिव।

8. स्वच्छता, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के प्रभारी सचिव- सदस्य सचिव।

कार्यान्वयन एजेंसियां

निर्मल भारत अभियान के कार्यान्वयन के लिए व्यापक पैमाने पर सामाजिक एकजूटता तथा निगरानी की आवश्यकता होगी।

निम्नानुसार राज्य/जिला/ब्लॉक/ ग्राम स्तर पर एक चार- स्तरीय कार्यान्वयन तंत्र बनाया जाना चाहिए।

राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (एसडब्ल्यूएसएम्)

ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, ग्रामीण स्वच्छता, विद्यालय शिक्षा, स्वास्थय महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, कृषि का काम देखने वाले राज्य के विभागों के बीच सहयोग एवं समन्यव स्थापित करने की दिशा में एक कदम के रूप में राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र में एक राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन बनाया जाना चाहिए। यह राज्य में ग्रामीण जल आपूर्ति एवं स्वच्छता कार्यक्रम कार्यान्वित करने वाले विभाग/बोर्ड/निगम/प्राधिकरण/एजेंसी के तत्वावधान में एक पंजीकृत सोसाइटी होगा।

एसडब्ल्यूएसएम की अध्यक्षता प्रमुख सचिव/अपर प्रमुख सचिव/विकास आयुक्त द्वारा की जाएगी और पीएचईडी, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, कृषि, सूचना और जन संपर्क के प्रभारी सचिव सदस्य के रूप में शामिल होंगे। प्रमुख सचिव/राज्य में स्वच्छता, पेयजल का काम देखने वाले विभाग के सचिव सभी एसडब्ल्यू एसएम क्रियाकलापों के लिए तथा मिशन की बैठकें आयोजित करने के लिए जिम्मेदार नोडल सचिव होंगे। स्वच्छता, जल-विज्ञान, आईईसी, एचआरडी, एसआईएस, मीडिया, गैर- सरकारी संगठन इत्यादि क्षेत्र के विशेषज्ञों को सदस्यों के रूप में शामिल किया जा सकता है।

एसडब्ल्यूएसएम राज्य में परियोजना जिलों में निर्मल भारत अभियान के कार्यान्वयन का पर्यवेक्षण करेगा, लाइन विभागों के बीच तालमेल तंत्र सुनिश्चित करेगा, जिलों द्वारा की गई प्रगति के अनुसार प्रत्येक जिले द्वारा की गई प्रगति के अनुसार प्रत्येक जिले के लिए वार्षिक कार्यान्वयन योजना तैयार करेगा, विशिष्ट परियोजना जिलों के लिए निर्धारित केंद्र से सहायता अनुदान प्राप्त करेगा और डीडब्ल्यूएसएम को वितरित करेगा। सभी परियोजनाओं को राज्य योजना मंजूरी समिति द्वारा अनूमादित किया हुआ होना चाहिए। मिशन की बैठक छह महीने में कम से कम एक बार होनी चाहिए।

जल एवं स्वच्छता सहायता संगठन (डब्ल्यूएसएसओ)

सभी राज्यों, राज्य स्तर पर आईईसी, एचआरडी, तथा निगरानी एवं मूल्यांकन का काम करने के लिए राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के तहत जल एवं स्वच्छता संगठन (डब्ल्यूएसएसओ) बनाएगा। राज्य के लिए नीति की योजना डब्ल्यूएसएसओ द्वारा बनाई जाएगी और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उसकी नियमित निगरानी की जानी चाहिए। उन राज्यों में, जहाँ आपूर्ति एवं स्वच्छता का काम दो अलग- अलग विभागों द्वारा देखा जाता है, वहाँ सीसीडीयू (स्वच्छता) डब्ल्यूएसएसओ के साथ संबंध किया जाएगा। संचार, मानव संसाधन विकास तथा निगरानी और स्कूल स्वच्छता एवं स्वास्थय शिक्षा क्षेत्र के परामर्शदाताओं की सेवाएँ ली जा सकती हैं।

जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम)

जिला स्तर पर एक जिला जल एवं स्वच्छता मिशन बनाया जाएगा। लाइन विभाग कार्यान्वयन में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएंगे।

डीडब्ल्यूएसएम का संघटन निम्नानुसार होना चाहिए।

  • डीडब्ल्यूएसएम की अध्यक्षता जिला परिषद के अध्यक्ष/ जिला कलक्टर/उपायुक्त द्वारा की जाएगी।
  • इसमें सदस्य होंगे जिले के सभी संसद सदस्य/विधान सभा सदस्य और विधान परिषद सदस्य तथा जिला परिषद की स्थायी समिति के अध्यक्ष अथवा उनके प्रतिनिधि, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज, सामाजिक कल्याण, आईसीडीएस, पीएचईडी, जल संसाधन, कृषि सूचना जन सम्पर्क के जिला अधिकारी।
  • गैर – सरकारी संगठनों का निर्धारण डीडब्ल्यूएसएम द्वारा किया जाना चाहिए तथा मिशन में सदस्य के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।
  • पीएचईडी के कार्यकारी अभियंता/ जिला परिषद के जिला अभियंता/ एसडब्ल्यूएसएम द्वारा अनुमोदित कोई अन्य अधिकारी सदस्य सचिव होंगे।
  • मिशन की बैठक कम से कम हर तीसरे महीने होनी चाहिए।

डीडब्ल्यूएसएम को उपयुक्त आईईसी कार्यनीतियों और अन्य लाइन विभागों के साथ तालमेल बैठाकर जिला निर्मल भारत अभियान परियोजना का आयोजन तथा कार्यान्वयन करना चाहिए। डीडब्ल्यूएसएम यह भी सुनिश्चत करेगा कि निर्मल भारत अभियान के उदेश्यों को हासिल करने के लिए ग्राम पंचायतों को निधियां मिल रही हैं। इसे कार्यक्रम कार्यान्वयन की समीक्षा तथा निगरानी करनी चाहिए ताकि जिला वार्षिक कार्ययोजनाओं का उद्देश्य हासिल किया जा सके और इसके परिणामस्वरूप स्थायी निर्मल ग्राम पंचायतें बन सकें।

ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी)

ग्राम पंचायतों में जल आपूर्ति एवं स्वच्छता की स्थिति के संबंध में मार्गदर्शन, सहायता देने और उसकी निगरानी करने के लिए ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता क्षेत् में ब्लॉक पंचायतों की भूमिका को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। ब्लॉक पंचायत, ग्राम पंचायतों के समूह को सहायता देने के लिए आदर्श इकाई है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा दिनांक 24 अगस्त, 2010 को पत्र संख्या डब्ल्यू – 11042/72/2009 के माध्यम से जारी किए गए दिशा- निर्देशों के अनुसार ब्लॉक संशाधन केंद्र बनाए जायेंगे। बीआरसी जागरूकता सृजन, प्रेरणा, एकजुटता, प्रशिक्षण और ग्रामीण समुदायों, ग्राम पंचायतों तथा बीडब्ल्यूएससी के सहयोग के मामले में मंत्रालय के कार्यक्रमों में सतत सहायता प्रदान करेगा। बीआरसी साफ्टवेयर सहायता मामले में डीडब्ल्यूएसएम की विस्तारित सूपूर्दगी तंत्र के रूप में सेवा करेगा और डीडब्ल्यूएसएम तथा ग्राम पंचायत/वीडब्ल्यूएससी/ ग्रामणी समुदायों के बीच कड़ी के रूप में कार्य करेगा।

क्षमता निर्माण तथा स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं के संबंध में ग्रामीण समुदाय को जागरूक बनाने का काम बीआरसी द्वारा किया जाएगा। यह ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम की स्थिति हासिल करने, उसे बनाए रखने और वहाँ प्रभावी तथा किफायती ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था बनाने में भी मदद करेगा।

ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति

प्रेरणा, जागरूकता, कार्यक्रम के कार्यान्वयन और पर्यवेक्षण के मामले में सहायता करने के लिए ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत की उपसमिति के रूप में एक ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति गठित की जाएगी। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को निर्मल ग्रामों की व्यापक और संतृप्तीकरण नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका

73वें संविधान संशोधन 1992 के अनुसार, स्वच्छता को 11 वीं अनुसूची में शामिल किया गया है। तदानुसार, निर्मल भारत अभियान के कार्यान्वयन में ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका है। कार्यक्रम का कार्यान्वयन सभी स्तरों पर पंचायती राज संस्थाओं द्वारा किया जाएगा। वे शौचालयों के निर्माण के लिए सामाजिक जागरूकता पैदा करेंगे और अपशिष्टों के सूरक्षित निपटान के माध्यम से पर्यावरण को स्वच्छ भी बनाए रखेंगी। पंचायती राज संस्थाएं पारस्परिक आईईसी तथा प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त गैर सरकारी संगठनों की मदद ले सकती हैं। निर्मल भारत अभियान के तहत बनाए गए स्वच्छता परिसरों का रख-रखाव पंचायतों/स्वैच्छिक संगठनों/परोपकारी न्यासों द्वारा किया जाएगा। पंचायतें निर्धारित राशि के अतिरिक्त विद्यालय स्वच्छता के लिए अपने संसाधनों से भी अंशदान दे सकती हैं। निर्मल भारत अभियान के तहत सृजित परिसंपत्तियों जैसे- सामुदायिक परिसरों, पर्यावरण घटकों, निकासी इत्यादि के संरक्षक के रूप में कार्य करेंगी। ग्राम पंचायतें उत्पादन केंद्र/ ग्रामीण स्वच्छता बाजार भी खोल और संचालित कर सकती है।

ग्राम पंचायतें शौचालयों के नियमित इस्तेमाल, उनके रख-रखाव तथा उन्नयन और स्वास्थ्य शिक्षा के लिए परस्पर चर्चा को बढ़ावा देने में अहम् भूमिका निभा सकती है। वे पंचायतें और गैर सरकारी संगठन जो कार्यान्वयन में सबसे आगे हैं, उनकी यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका है कि निर्मल भारत अभियान के सभी घटकों अर्थात जल स्रोत और शौचालय के बीच दूरी निजी पारिवारिक शौचालय के लिए निर्धारित न्यूनतम दूरी का अनुपालन, विद्यालय और आंगनबाड़ी शौचालय तथा स्वच्छता परिसर, प्रदूषण को रोकने के लिए गड्ढे की गहराई, गड्ढे के संरेखण का नियमन, गड्ढे का भर जाना इत्यादि के संबंध में सुरक्षा मानकों को पूरा किया जाता है। यह बातें साफ- सफाई संबंधी प्रमुख आदतों जैसे हैण्डपम्पों/ जल स्रोतों के चारों और पर्यावरण को साफ और मानव तथा पशु मल से मुक्त रखना, पर भी लागू होती हैं। ग्राम पंचायतों को निर्मल भारत अभियान कार्यक्रमों की निगरानी में भी भूमिका निभानी चाहिए। ब्लॉक स्तरीय तथा जिला स्तरीय-दोनों पंचायती राज संस्थाओं को संबंधित कर्मियों के साथ कार्यान्वयन की नियमित निगरानी करनी चाहिए।

गैर सरकारी संगठनों की भूमिका

ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मल भारत अभियान के कार्यान्वयन में गैर सरकारी की उत्प्रेरक की भूमिका है। उन्हें आईईसी क्रियाकलापों तथा क्षमता निर्माण में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए जिससे स्वच्छता सुविधाओं के निर्माण और उनके इस्तेमाल की मांग पैदा हो। गैर सरकारी संगठनों को बेसलाइन सर्वेक्षण तथा पीआरए में भी शामिल किया जा सकता है, ताकि स्वच्छ्ता, साफ – सफाई, जल के इस्तेमाल, परिचालन एवं रख- रखाव इत्यादि के संबंध में प्रमुख व्यवहार तथा ज्ञान का विशेष रूप से निर्धारण किया जा सके। गैर- सरकारी सन्गठन उत्पादन केंद्र तथा स्वच्छता बाजार भी खोल और संचालित कर सकते हैं। गैर सरकारी संगठनों का निर्धारण एक पारदर्शी मानदंड अपना कर किया जाएगा।

निगमित निकायों की भूमिका

कार्पोरेट घरानों को कार्पोरेट सोशल रिस्पोंसिबिलिटी के अनिवार्य हिस्से के रूप में निर्मल भारत अभियान में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। मान्यता है कि स्वस्थ कार्यबल अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बेहतर कार्य कर सकता है बशर्ते इसकी जानकारी उन्हें पहले से हो। अपने उत्पादों अथवा सेवाओं के विपणन से ख्याति प्राप्त करने अथवा केवल प्रतिष्ठा के मुददे भी कोर्पोरेट घरानों को सामाजिक कार्य करने और लोगों के साथ मेल मेलाप बढ़ाने के लिए आकर्षित करते हैं। इस तरह निर्मल भारत अभियान कोर्पोरेट घरानों को अपने सीएसआर को हल करने में मदद करने वाले मंच के रूप में काम कर सकता है।

कार्पोरेट घराने आईईसी, एचआरडीके माध्यम से अथवा निम्न लक्षित पहलों के माध्यम से स्वच्छता के मुददों को उठा सकते हैं।

क. ग्रामीण क्षेत्रों के अपने कर्मचारियों को इस्तेमाल करने और उसका प्रदर्शन करने के लिए कार्यस्थल पर ग्रामीणों के अनुकूल उपयुक्त स्वच्छता सुविधा मुहैया कराकर।

ख. ग्रामीण आबादी के एनबीए के तहत उपलब्ध विभिन्न प्रौद्योगिकी डी-विकल्पों के प्रदर्शन के लिए प्रदर्शन की जगह/ ग्रामीण स्वच्छता पार्क की स्थापना करके।

ग. प्रदर्शनी/स्वच्छता बाजार लगाकर।

घ. समुचित स्वच्छता एवं साफ सफाई के बारे में बच्चों को आवश्यक जानकारी देकर।

ङ. उपयुक्त स्वच्छता सामग्रियों के रूप में ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देकर अथवा उपयुक्त स्थानीय संगठन के माध्यम से ग्रामीण आबादी के लिए उपयुक्त संगत स्वच्छता सुविधाएँ सृजित करके।

च. बाजार अथवा अन्य सर्वजनिक स्थानों/ कार्यस्थलों के चारों और समुदायिक शौचालय परिसर उपलब्ध कराकर।

छ. प्रभावी ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रौद्योगिकी तथा संसाधनों में सहायता देकर।

ज. स्वच्छता सुविधाओं के रख-रखाव और/अथवा एसएलडब्ल्यूएम के स्थापना के लिए प्रशिक्षित श्रमिक उपलब्ध कराकर।

झ. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ्ता सुविधाओं के लिए उपयुक्त स्थानीय प्रौद्योगिकी विकल्पों के लिए अनुकूल अनूसंधान कार्य करके।

ञ. मास मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम का प्रचार – प्रसार करके।

ट. बसावटों/ ग्रामों/ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम बनाने के लिए गोद लेकर।

परियोजना का वित्तपोषण

एनबीए का घटाकवार निर्धारण तथा वित्तपोषण पद्धति

क्र. सं.

घटक

एनबीए परियोजना परिव्यय के प्रतिशत के रूप में निर्धारित राशि

अंशदान में हिस्सा

भारत सरकार

राज्य

लाभार्थी परिवार/समुदाय

क.

आईईसी, आरंभिक क्रियाकलाप तथा क्षमता निर्माण

15% तक

80%

20%

0%

 

ख.

परिक्रामी निधि

5% तक

80%

20%

0%

ग.

(1) वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय

पूर्ण कवरेज के लिए अपेक्षित वास्तविक राशि

3200 रू (पर्वतीय तथा दुर्गम क्षेत्रों के मामले में 3700 रू.)

 

 

 

(2) सामुदायिक शौचालय परिसर

पूर्ण कवरेज के लिए अपेक्षित वास्तविक राशि

60%

30%

10%

 

घ.

विद्यालय तथा आंगनबाड़ी स्वच्छता सहित संस्थागत शौचालय

पूर्ण कवरेज के लिए अपेक्षित वास्तविक राशि

70%

30%

 

0%

 

ङ.

प्रशासनिक प्रभार

4% तक

80%

20%

0%

 

ठोस/तरल अपशिष्ट प्रबंधन (पूंजीगत लागत)

अनुमेय सीमा के भीतर एससलडब्ल्यूएम परियोजना लागत के अनुसार वास्तविक राशि

70%

30%

0%

वार्षिक कार्यान्वयन योजना (आईएपी)

वार्षिक कार्यान्वयन योजना (आईएपी) का मुख्य उद्देश्य निर्मल ग्रामों के सृजन हेतु कार्यक्रमों को एक निश्चित दिशा प्रदान करना है। सुनिश्चित गतिवधियों की तुलना में वित्तीय वर्ष के दौरान वास्तविक एवं वित्तीय प्रगति की मासिक और तिमाही निगरानी के लिए आधार उपलब्ध कराना भी अपेक्षित है। आईएपी में निम्नलिखित शामिल होने चाहिए।

क. वार्षिक कार्यान्वयन योजना के उद्देश्यों की तुलना में पिछले वर्ष की तुलना में पिछले वर्ष के दौरान भारत अभियान (एनबीए) के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए राज्यों द्वारा की गई प्रगित पर रिपोर्ट।

ख. भिन्नता के कारण और टिप्पणियाँ, यदि कोई हों।

ग. प्रस्तावित वित्तीय वर्ष के लिए निर्मल भारत अभियान (एनबीए) के प्रत्येक घटक के अंर्तगत वास्तविक और वित्तीय अनुमानों के साथ गतिविधियों की योजना।

घ. मासिक/तिमाही सम्बंधी अनुमानित लक्ष्य।

ङ. सफलता की कहानियों, सर्वोत्तकृष्ट कार्यों, शुरू की गई अभिनव पहलों, प्रयोग की गई नई प्रौद्योगिकियों पर विस्तार से लिखना।

वार्षिक कार्यान्वयन योजना (एआईपी) को परियोजना गतिविधियाँ प्राप्त करने के लिए समर्पित होने वाली ग्राम पंचायतों का निर्धारण करके तैयार किया जाना चाहिए। इन ग्राम पंचायत योजनाओं को ब्लॉक कार्यान्वयन योजनाओं को राज्य कार्यान्वयन योजना के रोप समेकित करेगा।

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र एआईपी तैयार करेंगे और उसे शेष कार्यों का पूरा किये जाने के आधार पर वित्तीय वर्ष की शूरूआत में अंतिम रूप देने के लिए पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की योजना अनुमोदन समिति (पीएस) को प्रस्तुत करेंगे।

प्रस्तावित वार्षिक कार्यान्वयन योजनाओं पर पीएसी में विचार – विमर्श किया जाएगा और संशाधनो के साथ अथवा बगैर संशोधनों के उन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा। अंतिम रूप दिए गए एआईपी को निधियों के वित्तीय आवंटन के आधार पर राज्यों द्वारा तैयार किया जाएगा और उन्हें पीएसी में विचार विमर्श के एक पखवाड़े के भीतर केंद्र सरकार को अग्रेषित किया जाएगा तथा उसे ऑनलाइन निगरानी प्रणाली के माध्यम से वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। पीएसी की सिफारिश केवल उसी वित्तीय वर्ष अर्थात एक वित्तीय वर्ष के लिए वैद्य होगी।

एआईपी निर्धारित ग्राम पंचायतों के आधार पर व्यापक स्वच्छता और जल कवरेज को दर्शाते हुए संतृप्तीकरण दृष्टिकोण का अनुकरण करके तैयार की जानी चाहिए जो वर्ष के दौरान अथवा आगामी वर्षों में “निर्मल” स्थिति का निर्माण कर सके। ग्राम पंचायतों को इस ढंग से सूचीबद्ध किया जाना चाहिए जिससे एक ब्लॉक/जिला में सभी ग्राम पंचायतें तेजी से कवर की जा सकें ताकि राज्य को “निर्मल” बनाया जा सके। एआईपी बजट बनाते समय एनबीएके लागत मानदंडों का अनुकरण किया जाना चाहिए तथा वर्ष के दौरान केंद्रीय अंशदान की वित्तीय मांग पर विचार करने हेतु उसका संकलन किया जाना चाहिए।

निधियों की रिलीज

केंद्र से राज्य स्तरीय कार्यान्वयन निकास को रिलीज

निर्मल भारत अभियान (एनबीए) के अंतर्गत निधियां राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन को जारी की जाएगी। राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (एसडब्ल्यूएसएम) किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिकृत बैंक में एक बचत बैंक खाते का संचालन करेगा जिसके माध्यम से राज्य सरकार की निधियां केन्द्रीय अंशदान, राज्य अंशदान लाभार्थी अंशदान अथवा किसी भी अन्य प्राप्ति सहित निर्मल भारत अभियान से संबंधित सभी लेनदेनों के लिए संचालित की जाएगी। एनबीए बैंक खाते का ब्यौरा बैंक के नाम, आईएफएससी कोड तथा खाता संख्या सहित पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को भेजना पड़ेगा तथा इसमें पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की पूर्व अनुमति के बगैर परियोजना का कार्यान्वयन के दौरान परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के अंतर्गत निधियां भारत सरकार द्वारा अनुरक्षित केंद्रीय योजना स्कीम निगरानी प्रणाली (सीनीएसएमएस) के जरिए जारी की जाएगी।

एआईपी बैठक के लिए गए निर्णय के राज्यों की अनुमोदित मांग और निधियों की उपलब्ध के आधार पर, संबंधित राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन को दो किस्तों में निधियों की रिलीज करने हेतु सभी राज्यों के आवंटन की गणना की जाएगी। ऐसे सभी मामलों, जिनमें पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान दूसरी किस्त बिना शर्त जारी कर दी गई है, वे राज्य वित्तीय वर्ष के दौरान प्रथम किस्त रिलीज करने के लिए पात्र होंगे। अन्य राज्य आवंटन की केवल 25 प्रतिशत राशि की रिलीज के पात्र होंगे। अधिशेष निधियों/दूसरी किस्त रिलीज करने के लिए पिछली रिलीज की सभी शर्तों को पूरा करना होगा।

एआईपी में यथा अनुमोदित निधियों को दूसरी किस्त निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने पर ही जारी की जाएगी:

  • जिलावार वास्तविक और वित्तीय प्रगति रिपोर्टों के साथ राज्य साकार की सिफारिश पर राज्य/संघ शासित प्रदेश से विशेष प्रस्ताव की प्राप्ति:
  • अनुबंध- I  के अनुसार वार्षिक कार्य निष्पादन रिपोर्ट;
  • एआईपी में निर्दिष्ट लक्ष्यों की तुलना में मासिक/तिमाही प्रगति की उपलब्धियों का विवरण;
  • केन्द्रीय अनुसंधान की रिलीज के 15 दिनों के भीतर एसडब्ल्यूएसएम खाते में अनुपातिक राज्य अंशदान की रिलीज हेतु राज्य की वचनबद्ध;
  • एसडब्ल्यूएसएम में उपलब्ध निधियों की 60 प्रतिशत राशि का उपयोग अर्थात अवशेष, वर्ष के दौरान एनबीए के अंर्तगत अनुदान मांगों की प्रथम किस्त की रूप में रिलीज की गई निधियां तथा उन पर अर्जित ब्याज, केन्द्रीय और राज्य अंशदान अलग से;
  • अनूबधं – II  के अनुसार पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के लेखों के लेखापरीक्षित विवरणों का प्रस्तूतिकरण;
  • पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के लिए एसडब्ल्यूएसएम के सदस्य सचिव द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित अनुबंध – III  के  अनुसार निर्धारित प्रपत्र में केंद्र और राज्य अंशदान के प्रयोग प्रमाण – पत्रों का अलग से प्रस्तूतिकरण;
  • कोई अन्य शर्त (शर्तें) जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जाए;

प्रथम किस्त में जारी की गई निधि पीएसमें अनुमोदित राशि की 50 प्रतिशत होगी तथा उसर राज्य को पिछले वर्ष जारी रिलीज के 10 प्रतिशत के अलावा अथशेष राशि द्वारा कम कर दिया जाएगा।

वित्तीय वर्ष के दौरान निधियों की आगे कोई भी रिलीज व्यय, उपलब्ध निधियों और आवश्यक दस्तावेजों के प्रस्तूतिकरण जैसा कि पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा अपेक्षित हो, में हुई प्रगति पर आधारित होगी।

राज्य स्तर से जिला स्तर को रिलीज

राज्य/संघशासित प्रदेश केन्द्रीय अनुदान प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर जिला कार्यान्वयन एजेंसी/एजेंसियों को समान राज्य अंशदान के साथ - साथ प्राप्त केन्द्रीय अनूदानों को रिलीज करेंगे।

जिला कार्यान्वयन एजेंसी को निधियों प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर ग्राम पंचायत (राज्य में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति जहाँ ग्राम पंचायतें अस्तित्व में नहीं है) को कार्यों के लिए निधियों का अंतरण करना अपेक्षित है।

निर्मल भारत अभियान (एनबीए) के अंतर्गत जारी निधियों पर अर्जित ब्याज

निर्मल भारत अभियान निधियां (केंद्र और राज्य) बैंक खाते में ही रखी जानी चाहिए। इस खाते में पारिवारिक लाभार्थी अंशदान को जमा करने की आवश्यकता नहीं है। एनबीएनिधियों पर अर्जित ब्याज संसाधन के भाग के रूप में समझा जाएगा। जिला कार्यान्वयन एजेंसी को अनुवर्ती किस्तों के लिए दावे/दावों के साथ साथ एनबीए निधियों पर अर्जित ब्याज के उपयोग का ब्यौरा प्रस्तुत करना होगा तथा इसे उपयोग प्रमाण- पत्र में दर्शाया जाना चाहिए।

निरीक्षण

कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य और जिला स्तरों से अधिकारीयों द्वारा नियमित फिल्ड निरीक्षकों के जरिए निगरानी करना अनिवार्य है। ये निरीक्षण यह जाँच करने और सुनिश्चित करने के लिए किये जाने चाहिए कि निर्माण कार्य मानदंडों के अनुसार किया गया है, निर्माण में समुदाय को शामिल किया गया है तथा शौचालयों से जल स्रोत प्रदूषित नहीं हो रहे हैं तथा यह भी जाँच करने कि क्या लाभार्थियों का सही चयन किया गया है और निर्माण के बाद शौचालयों का उचित प्रयोग किया जा रहा है। इस प्रकार के निरीक्षण में यह सुनिश्चित किया जाए स्वच्छता शौचालयों का किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग नहीं किया जा रहा है। निरीक्षण यह जाँच करने के लिए भी किया जाना चाहिए कि क्या एक ग्राम पंचायत की निर्मल भारत अभियान की सूचना ग्राम पंचायत में (दिवार पर पेंटिंग करके अथवा विशेष होर्डिग्स के द्वारा) पारदर्शी रूप से प्रदर्शित कर दी गई है। परियोजना प्राधिकारियों को जिले में विशेषों के एक दल का गठन करना चाहिए जो विभिन्न ब्लॉकों में कार्यान्वयन की बार-बार समीक्षा करेंगे। ऐसी समीक्षा तिमाही में कम से कम के बार की जानी चाहिए। इसी प्रकार राज्य सरकार को प्रत्येक जिले में परियोजनाओं की आवधिक रूप से समीक्षा करनी चाहिए और इस प्रयोजन के लिए उन्हें राज्य में उपलब्ध विशेषज्ञों के एक पैनल का गठन करना चाहिए। इसके अलावा, भारत सरकार कार्यान्वयन की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए राज्यों से आवधिक रूप से अपने समीक्षा मिशन भेजेगी।

राज्य समीक्षा मिशन

चूंकि निर्मल भारत अभियान का विस्तार पर्याप्त रूप से किया गया है अत: यह आवश्यक है कि राज्य सरकार स्तर पर समीक्षा मिशन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से ही की जाए। राज्य समीक्षा मिशन का अध्यक्ष राज्य के संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी होगा जिसमें अन्य लिंक विभागों जैसे कि ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज और मानव संसाधन विकास के कम से कम तीन सदस्य तथा स्वच्छता के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त संगठनों से स्वतंत्र प्रतिनिधि शामिल होंगे। राज्यों के सलाह दी गई है कि वे विभिन्न एनबीए जिलों की आवधिक रूप से समीक्षा करने के लिए राज्य स्तर पर विशेषज्ञों का एक पैनल गठित करें। राज्य समीक्षा मिशनों की रिपोर्टों के आधार पर, यदि राज्य सरकार अनुवर्ती किस्त रिलीज करने के लिए सहमत है निधियाँ  जारी करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाना चाहिए। निधियाँ जारी करने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करते समय, राज्य सरकार द्वारा समीक्षा मिशन रिपोर्ट की एक प्रति भी संलग्न की जानी चाहिए।

सामाजिक लेखा परिक्षण

भूमिका

मंत्रालय की वेबसाइट में कार्यक्रम का निर्माण, लागू करने और परिणाम के बारे में व्यापक सूचना और आंकड़े दिए गए हैं। सामाजिक संकेतकों पर किसी अन्य संगत आंकड़ों (डाटा) के साथ – साथ आंकड़े का सामाजिक लेखा परीक्षा के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

निर्मल भारत अभियान सतत और व्यापक जन सतर्कता के साधनों के रूप में “सामाजिकलेखा परीक्षा” की केन्द्रीय भूमिका अदा करेगा। ग्राम पंचायतें प्रत्येक महीने एक “ स्वच्छता दिवस” (सेनिटेशन डे) के रूप में निर्धारित करेगी।

  • स्वच्छता दिवस के पिछले महीने में बड़ी संख्या में निर्मित शौचालयों और आईईसी, एच आरडी तथा एसएलडब्ल्यूएम आदि के अंतर्गत शुरू किए गए कार्यों की उपलब्धियों को रिकॉर्ड करना
  • मांग आधारित वैयक्तिक स्वच्छता सुविधा का निर्धारण करना तथा कार्यों की पहचान करना जिन्हें एनबीए के अंतर्गत शुरू किया जा सके
  • ग्राम पंचायत में आईएचएचएल, विद्यालय और आंगनबाड़ी शौचालयों तथा स्वच्छता परिसरों के निर्माण, शुरू की गई आईसीसी गतिविधियों, प्रशिक्षण आदि के लिए मासिक योजना तैयार करना
  • वैयक्तिक पारिवारिक शौचालयों (आईएचएचएल) के अंर्तगत निचली श्रेणी में लौट आई बसावटों के मामलों और कुल मिलकर खुले में शौच मुक्त समुदाय का निर्माण करने संबंधी मुददे का समाधान करने केलिए कार्यनीति तैयार करना
  • प्रोत्साहन राशि का संवितरण, निर्माण और अन्य कार्यों एवं गतिविधियों सहित पिछले महीने में विभिन्न गतिविधियों पर किए गए व्यय का निर्धारण करना
  • कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित किए जाने वाले अन्य कार्यों को कार्यान्वित करना

सूचना और विचारों का पूर्णत: खुलासा करने संबंधी व्यापक प्रवधान का साथ “स्वच्छता दिवस” संबंधी करवाई सार्वजनिक खुले मैदान में आयोजित की जाएगी।

यह प्रक्रिया परियोजना की सर्वजनिक सतर्कता का भाग होगी और जिसके द्वारा शुरू की गई वास्तविक एवं वित्तीय गतिवधियां, मासिक योजना दस्तावेजों और उसके अंतर्गत की गई प्रगति से समबन्धित दस्तावेजों की जाँच पड़ताल की जाएगी।

मासिक योजना के अंतर्गत उद्देश्यों की उपलब्धियों से व्यतिक्रम के विभीन्न कारण हो सकते हैं। इन कारणों के निवारण अथवा समाधान के संभावित साधनोपयों के साथ - साथ  सकारात्मक ओर नकारात्मक कारणों को वर्गीकृत करने वाले कारणों की एक संकेतात्मक सूची की स्वच्छता दिवस में विचार- विमर्शों के दौरान जाँच की जाएगी।

ग्राम स्वच्छता सभा

विभिन्न मासिक योजनाओं के अंतर्गत की गई प्रगित तथा ग्राम पंचायत (जीपी) में आयोजित किए गए स्वच्छता दिवस की कारवाइयों की अनिवार्य रूप से समीक्षा करने के लिए सचिव, ग्राम पंचायतों द्वरा प्रत्येक 6 महीनों में “ ग्राम पंचायत द्वारा प्रत्येक 6 महीनों में “ग्राम स्वच्छता सभा” के रूप में ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा। इन मंचों पर ग्राम पंचायतों के सचिव द्वारा तैयार की गई जानकारी को समुदाय के किसी जिम्मेवार व्यक्ति अधिमानता विद्यालय के एक अध्यापक/भूतपूर्व सैनिक द्वारा पढ़वाया जाएगा और उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा तथा लोगों को अधिकारीयों से प्रश्न पूछने, सूचना मांगने और प्राप्त करने, वित्तीय व्यय का सत्यापन करने, लाभार्थियों की सूची की जाँच करने, पंसद के कार्यों से प्रतिबिम्बित प्राथमिकताओं पर चर्चा करने तथा कार्यक्रम कर्मियों के कार्यों की गुणवत्ता और कार्यक्रम कर्मियों का विवेचनात्मक रूप से मूल्यांकन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

ग्राम पंचायत यह सुनिश्चित करेगी कि जीएसएस की तारीख से पहले निम्नलिखित तयारी संबंधी कार्य किए जाएंगे।

1. जीएसएस की तारीख, समय, स्थान, कार्यसूची के विवरण व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए ताकि अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके। अधिमानत: निर्दिष्ट वार्षिक अनुसूची के साथ जीएसएस की तारीख संबंधी अग्रिम नोटिस गाँव और ग्राम सभा भवन में सर्वजनिक स्थानों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

2. प्रचार- प्रसार के दोनों पारस्परिक तरीकों (जैसे की ढोल बजाकर (मुनादी करके) लोगों को सूचित करना), संचार के आधुनिक साधनों (जैसे कि चलते फिरते लाउडस्पीकरों अथवा जनता को संबोधित करने संबोधित पद्धति के माध्यम से घोषणाएं) का प्रयोग शुरू किया जा सकता है।

3. एक अभियान के तरीके से इनकी लेखा परीक्षा करना ताकि अपेक्षित दस्तावज तैयार करने सहित संस्थागत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सम्पूर्ण प्रशासन को अनुकूल बनाया जा सके।

4. उपलब्ध सूचना के सारांश को अग्रिम में तैयार किया जाना चाहिए ताकि इसे अधिक बोधगम्य बनाया जा सके। इन सारांशों को अग्रिम में जनता को उपलब्ध कराया जाना चाहिए और जीएसएस के दौरान जोर- जोर से पढ़ना चाहिए।

5. किए गए कार्यों की पूर्ण फाइलों सहित, सभी संगत दस्तावेज अथवा उनकी प्रतिलिपियां जीएसएस के कम से कम 15 दिन पहले अग्रिम में ग्राम पंचायत कार्यालय में निरीक्षण हेतु उपलब्ध होने चाहिए तथा निरिक्षण के लिए कोई शुल्क वसूला नहीं जाना चाहिए। इस आवधि के दौरान, दस्तावेजों की प्रतियाँ अनुरोध किए जाने की तारीख से एक सप्ताह के भीतर मांग करने पर, लागत मूल्य पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

6. मूल दस्तावेजों को जीएसएस दिवस पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि किसी भी सूचना की हर तरह से जाँच की जा सके।

जीएसएस की कारवाई निम्निखित तरीके से की जानी चाहिए:

1. कारवाई का आयोजन पारदर्शी ढंग से किया जाना चाहिए जिसमें सबसे निर्धन और सीमांत व्यक्ति आत्मविश्वास और निडर होकर भाग ले सकें तथा बोल सके। इस बात की भी सावधानी रखी जानी चाहिए कि सभा में निहित स्वार्थियों द्वारा छलकपट न किया जाए। जीएसएस का समय ऐसा होना चाहिए जिससे सभी वर्गों के लोगों विशेषकर महिलाओं और सीमांत समुदायों के लिए सभा में भाग लेना सुविधाजनक हो। जीएसएस को एक ऐसे व्यक्ति का चयन करना चाहिए जो इसकी बैठकों की अध्यक्षता कर सके और सचिव के रूप में वह रूप में वह व्यक्ति पंचायत अथवा अन्य कार्यान्वयन एजेंसी का भाग नहीं होना चाहिए अर्थात वह व्यक्ति सेवारत अथवा सेवानिवृत विद्यालय अध्यापक/ भूतपूर्व सैनिक/गैर सरकारी संगठन/सीबीओ का प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्त्ता आदि होना चाहिए। बैठक की अध्यक्ष पंचायत अथवा वार्ड पंचायत के अध्यक्ष द्वारा नहीं की जानी चाहिए।

2. सूचना देने वाला ब्यक्ति वह व्यक्ति नहीं होना चाहिए जो कार्य के कार्यान्वयन में संबंध हो। उदाहरण के लिए सतर्कता समिति के सदस्यों अथवा एक विद्यालय अध्यापक अथवा भूतपूर्व सैनिक पर अपेक्षित फार्मेट के अनुसार जानकारी को जोर- जोर से पढ़ने के प्रयोजन के ली विचार किया जा सकता है।

3. ग्राम स्वच्छता सभा के सदस्यों द्वारा की गई पूछताछ का उत्तर देने के लिए कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी सभी कर्मियों के जीएसएस में उपस्थित रहना अपेक्षित होना चाहिए।

4. निर्णयों तथा संकल्पों को वोट द्वारा बनाया जाना चाहिए लेकिन असहमत विचारों को दर्ज किया जाना चाहिए।

5. बैठक का कार्यवृत ग्राम पंचायत (जीपी) के सचिव द्वारा बाह्य कार्यान्वयन एजेंसी से निर्धारित व्यक्ति विशेष द्वारा रिकार्ड किया जाना चाहिए तथा कार्यवृत्त के रजिस्टर में बैठक की शूरूआत और समापन पर ( कार्यवृत्त के लिए जाने के बाद हस्ताक्षर किए जाने चाहिए।

6. अनिवार्य कार्यसूची (नीचे दी गई) की जाँच सूची की पारदर्शिता सहित जाँच की जानी चाहिए।

7. आपत्तियाँ, यदि कोई हों, निर्धारित फार्मेट के अनुसार रिकॉर्ड की जानी चाहिए।

8. पिछली जीएसएस से संबंधित “ की गई कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट” प्रत्येक जीएसएस के आरंभ में पढ़ी जानी चाहिए।

9. इन जीएसएस की रिपोर्ट और कार्यवृत आवश्यक कारवाई हेतु एक माह के अंदर डीडब्ल्यूएसएम / जिला कलेक्टर को प्रस्तुत की जानी चाहिए।

10. जिला जज एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम)/ जिला कलेक्टर यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेवार हो कि अनुसूची के अनुसार सामाजिक लेखा परीक्षा होती है।

11. जिला कलेक्टर नियमित रूप से इस बात की समीक्षा करेंगे कि सामाजिक लेखा परीक्षा कार्य किया जा रहा है।

अनिवार्य कार्यसूची में निम्नलिखित प्रश्न/मुददे शामिल किए जाने चाहिए।

  • क्या परियोजना में परिभाषित उद्देश्यों में प्रत्येक परिवार सहित सम्पूर्ण ग्राम पंचायत (जीपी) को शामिल किया गया है
  • क्या स्वच्छता की मासिक योजनाओं को पारदर्शी तरीके से तैयार किया गया था
  • क्या निर्धारित लाभार्थी ने आईएचएचएल ने निर्माण और प्रयोग पर प्रोत्साहन प्राप्त किया था
  • क्या निर्धारति लाभार्थियों की सूची को ग्राम सभा के सत्यापन हेतु पढ़ा गया था
  • स्वच्छता सुविधाओं के प्रावधान के लिए एपीएल सहित शेष परिवारों के कवरेज हेतु प्रयास
  • खुले में शौच वातावरण/ निर्मल स्थिति प्राप्त करने के लिए कारवाई योजना

परियोजना में संशोधन

आशा है कि आधारभूत सर्वेक्षण करने के बाद विभिन्न प्रकार के हार्डवेयर की सही आवश्यकता में परिवर्तन हो सकता है जिससे परियोजना में संशोधन होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, वित्तपोषण संबंधी मानदंडों में परिवर्तन होए के कारण संशोधन करना अपेक्षित होगा। निर्मल भारत अभियान परियोजना में अपेक्षित संशोधन करने वाले प्रत्येक जिला को संशोधित परयोजना प्रस्ताव तैयार करना चाहिए। परियोजना प्रस्ताव में आधारभूत सर्वेक्षण रिपोर्ट, जिलों में संबंधित उपलब्ध अद्यतन जनगणना संबंधी आंकड़े तथा अन्य सर्वेक्षण जिसका परियोजना प्रस्ताव के संशोधन विषयक समर्थन में उल्लेख किया गया है।

किसी भी परियोजना में संशोधन करने का प्रयास ग्राम पंचायत में बसावटों/ग्रामों की संख्या सहित ग्राम पंचायत-चार आंकड़ों, निर्मल भारत अभियान (एनबीए) के अंतर्गत निर्धारित श्रेणियों के बारे में प्रत्येक बसावट में आबादी परिवारों की संख्या, शौचालय के साथ परिवारों/संस्थाओं के कवरेज, विद्यालयों ने आंगनबाड़ी के संख्या और प्रत्येक श्रेणी के शेष परिवारों की संख्या, ग्राम पंचायत की सामान्य आर्थिक स्थिति पर नोट, हाट, मेला और अन्य जन समूहों तथा समारोहों आदि के सामान्य सामुदायिक संघटन संघठनों के आहार पर किया जाना चाहिए।

प्रस्ताव की शूरूआत ग्राम पंचायत से होनी चाहिए, संकलन ब्लॉक स्तर पर तथा उसके बाद जिला स्तर पर डीडब्ल्यूएसएमस/डीडब्ल्यूएससी प्रस्ताव को एसडब्ल्यूएसएम् को भेजेगा। एसडब्ल्यूएसएम सम्बंधित मंत्रालय में राज्य सरकार के समक्ष मामले को प्रस्तुत करवाएगा।

प्रत्येक राज्य में ग्रामीण स्वच्छता विषयक मामले को देखने वाला सम्बन्धित मंत्रालय एक राज्य योजना स्वीकृति समिति (एसएसएससी) का गठन करेगा अध्यक्ष के रूप में सम्बन्धित विभाग के सचिव स्तर पर एक अधिकारी, उप – सचिव स्तर के अधिकारी/पेयजल आपूर्ति, विद्यालय शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, सामुदायिक स्वास्थ्य (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थय मिशन) गरीबी उन्मूलन/रोजगार कार्यक्रम (महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) तथा किसी अन्य राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों का कार्य रेख रहे राज्य समन्यवक सदस्य के रूप में शामिल होंगे।

संबंधित विभाग द्वारा निर्मल भारत अभियान (एनबीए) में संशोधन करने का प्रस्ताव एसएसएससी के समक्ष रखा जाएगा । एसएसएससी द्वारा इसको अनुमोदित करने के बाद, एसएसएससी बैठक के कार्यवृत सहित प्रस्ताव तथा जनगणना/ सर्वेक्षण रिपोर्टों जैसे अन्य संगत दस्तावेजों/ रिपोर्टों को राज्य के संबंधित विभाग द्वारा पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय, भारत सरकार को अग्रेषित किया जाएगा।

पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय परियोजना प्रस्ताव की उपयुक्त रूप से जांच करेगा और इसके परिशोधन के लिए उसे राष्ट्रीय योजना स्वीकृति समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगा। परियोजना में प्रस्ताव पर विचार करने वाली एनएसएससी की बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार संशोधित करना होगा।

रिपोर्ट

पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने निर्मल भारत अभियान (एनबीए) के लिए एक ऑनलाइन निगरानी प्राणाली विकसित की है। सभी एनबीए जिलों को इस ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के जरिए वास्तविक एवं वित्तीय प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करना होता है। जिसके लिए यूजर आईडी तथा पासवर्ड सृजित किया जाता है एवं पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय – एन आईसी प्रकोष्ठ द्वारा संचालित किया जाता है। हार्ड कॉपी में प्रगति रिपोर्टों को हतोत्साहित किया जाता है। तथापि, वार्षिक कार्य निष्पादन रिपोर्ट पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को प्रस्तुत करनी होती है जिसका ब्यौरा अनुबंध – I  में दिया गया है।

एनबीए रिपोर्टों का मूल्यांकन सभी स्तरों पर किया जाना चाहिए। ब्लॉक पंचायती राज संस्था और ब्लॉक स्तरीय अधियाकारियों को प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रगति की समीक्षा करनी चाहिए। जिला पंचायत के सीईओ / डीडब्ल्यूएससी के सचिव को मासिक आधार पर ब्लॉक अधिकारीयों के साथ परियोजना की प्रगति की समीक्षा करनी चाहिए। इसी प्रकार राज्य में ग्राम स्वच्छता के प्रभारी सचिव को तिमाही आधार पर जिला अधिकारीयों के साथ प्रगति की समीक्षा करनी चाहिए।

मूल्यांकन

राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों को  एनबीए के कार्यान्वयन पर आवधिक कार्यान्वयन अध्ययन करने चाहिए। मूल्यांकन अध्ययन ख्याति प्राप्त संस्थाओं और संगठनों द्वारा आयोजित कराए जाने चाहिए। राज्यों/संघ शासित प्रदेशों द्वारा आयोजित किए गए इन मूल्यांकन अध्ययनों की रिपोर्टों की प्रतियाँ भारत सरकार को भेजी जानी चाहिए। इन मूल्यांकन अध्ययनों में की गई टिप्पणियों तथा भारत सरकार द्वारा अथवा उनकी ओर से कराए गए समरूपवर्ती मूल्यांकन के आधार के भी राज्यों/संघशासित प्रदेशों द्वरा उपचारी करवाई की जानी चाहिए। ऐसे अध्ययनों की लागत एनबीए के प्रशासनिक प्रभार घटक से वसूली जा सकती है।राज्य (राज्यों) में एनबीए समूह के लिए भारत सरकार कार्यान्वन प्रगति समीक्षा/ अध्ययन भी शुरू/आयोजित किया जा सकता है। अधिकारीयों/कर्मियों का एक बहु-एजेंसी कल का गठन विशिष्ट विचारर्थ विषयों की समीक्षा करने के लिए किया गया।

अनुसंधान

स्वच्छता क्षेत्रों में प्रमाणित ट्रैक रिकॉर्ड वाले अनुसंधान संस्थानों,संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों तथा स्वास्थ्य, स्वास्थ्य विज्ञान, जल आपूर्ति और स्वस्छता के मुददों से संबंधित अनुसंधान/अध्ययनों में कार्यत्र राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय संस्थाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में मानव मल –मूत्र और अपशिष्ट निपटन प्रणालियों की मौजूदा पद्धतियों के अध्ययन में संबंध किया जाना चाहिए। अनूसंधान/अध्ययन के परिणामों से प्रौद्योगिकी का उन्नयन करने, विभिन्न जियो-हाईड्रोलोजिकल स्थितियों की आश्यकतानुसार इसे अधिक वहनीय और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। इससे अपशिष्ट के निपटान के लिए पारिस्थितिकीय रूप से स्थायी दीर्घकालिक समाधान को प्रोत्साहन और बढ़ावा मिलेगा। शौचालय डिजाइन  भिन्न-भिन्न मृदा परिस्थितियों के अनुरुप समुचित प्रौद्योगिकी, उच्च जल स्तर स्थितियों, बाढ़, जल, सुरक्षा स्थितियों, समुद्र तटीय क्षेत्रों के अनूसंधान/ अध्ययन को प्राथमिकता दी जाएगी। अशोधित अपशिष्ट के माध्यम से अपशिष्ट की ढुलाई और जल निकायों के प्रदूषण पर आने वाली अधिक लागत से बचने के लिए पारिस्थितिकीय स्वच्छता/स्थल पर अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा एक स्वत: स्पष्ट प्रस्ताव प्रस्तुत करने पर भी, एनएसएससी अनुसंधान अपरियोजनाओं को स्वीकृत कर सकता है और भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से इस प्रयोजन के लिए निर्धारित अनूसंधान एवं विकास निधि से निधियां उपलब्ध कराई जाएगी।

वार्षिक लेखा परीक्षा

राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन (एसडब्ल्यूएसएम) यह सुनिश्चित करेगा की लेखों की लेखा परीक्षा भारत सरकार की सामान्य वित्तीय नियमावली के अनुसार वित्तीय वर्ष के समाप्त होने की 6 महीनें की आवधि के भीतर सीएजी द्वारा अनुमोदित पैनल से चयनित सनदी लेखाकार द्वारा कराई गई है और यह लेखा परीक्षा लेखों का विवरण मंत्रालय को प्रस्तुत करेगा।

परियोजना का समापन

जब एक जिला में परियोजना पूरी तरह से पूर्ण हो जाती है तब जिला स्तर पर कार्यान्वयन एजेंसी पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, भारत सरकार को राज्य सरकार के माध्यम से लेखों के लेखा परीक्षा विवरणों और उपयोग प्रमाण –पत्र के साथ एक को समापन रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार और जिला कार्यान्वयन एजेंसी को समापन रिपोर्ट की स्वीकृत अथवा अन्यथा स्थिति के बारे में सूचित किया जाएगा। परियोजना जिलों में एनबीए परियोजना को पूरा करने में लिया गया समय अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन पर स्पष्ट रूप से निर्भर करेगा। तथापि, परियोजना को पूरा करने में सभी प्रयास एक समयबद्ध ढंग से किये जाने चाहिए। भारत सरकार द्वारा औचक परियोजना पश्चात् मूल्यांकन शुरू किए जाएंगे। इस प्रयोजन के लिए राज्य ऐसे मूल्यांकन करने और भारत सरकार की मदद प्राप्त करने के लिए भी पहल कर सकते हैं।

स्रोत : पयेजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखण्ड सरकार/ जेवियर समाज सेवा संस्थान/ राँची



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