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स्वच्छकर शौचालय की आवश्यकता

स्वच्छकर शौचालय की आवश्यकता

भूमिका

ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच करना एक पुरानी अस्वस्थ्य आदत है। कई लोगों को स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के संबंध के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं है परन्तु बहुत सारे अध्ययनों से पता चला है कि 80 प्रतिशत बीमारिया का कारण अस्वच्छता ही है। एक ग्राम मल में एक करोड़ वायरस तथा 10 लाख बैक्टीरिया होते है। ये वायरस एवं बैक्टीरिया मक्खी के साथ भोजन के माध्यम से मनुष्यों में प्रवेश कर बीमारी फैलाते हैं। इसके अलावा शौचालय के अभाव मे महिलाओं को विशेषकर सबसे अधिक कठिनाई होती है, जिन्हें अंधकार होने का इंतजार करना पड़ता है तथा साँर, बिच्छू आदि से काटने का तथा उनके सम्मान का खतरा भी बना रहता हैं ।

बच्चों के शौच के बारे में भी कुछ भ्रान्तियाँ है कि यह हानिकारक नहीं होता है। परन्तु ऐसी बात नहीं है यह भी वयस्क के मल की तरह हानिकारक होता है। बच्चों में पोलियों का वायरस भी खुले में किये गये शौच के माध्यम से फैलता है।

भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के लिए माँग आधारित एवं जन केन्द्रित अभियान है, जिसमें लोगों की स्वच्छता सम्बन्धी आदतों को बेहतर बनाना, स्वसुविधाओं की माँग उत्पन्न करना और स्वच्छता सुविधाओं को उपलब्ध करना, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍वच्‍छता की प्रगति में तेजी लाने के लिए भारत सरकार ने टीएससी में आमूल-चूल बदलाव किए गए हैं, जिसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में अब निर्मल भारत अभियान (एनबीए) कहा गया है। निर्मल भारत अभियान का उद्देश्‍य चरणबद्ध, सेचूरेशन मोड में समस्‍त समुदायों में स्‍वच्‍छता सुविधाओं की व्‍यवस्‍था करके मनोवृ‍त्ति में स्‍थायी बदलाव लाना है जिसका परिणाम ‘निर्मल ग्राम’ के रूप में सामने आएगा।

सेप्टिक टैंक वाले अस्वच्छकर एवं स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में अंतर

सेप्टिक टैंक वाले अस्वच्छकर शौचालय

1.  यह अधिक खर्चीला एवं इसमें दीवाल और सतह पर प्लास्टिक करना पड़ता है जिससे लागत अधिक आती है।

2.  इसमें तीन चैम्बर बनते हैं और इसमें ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है।

3.  सेप्टिक टैंक वाले शौचालय में प्रति व्यक्ति के उपयोग के हिसाब से ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है।

4.  सेप्टिक टैंक वाले शौचालय में मल में कोई परिवर्तन नहीं होता है साथ ही पानी सोखने का कोई सिस्टम नही होने से एवं मूत्र और पानी के मल में लगातार मिलते रहने से यह और अधिक हानिकारक हो जाता है।

5.  सेप्टिक टैंक वाले शौचालय में टैंक के भरने पर ओवर फ्लो की समस्या हो जाती है।

6.  सेप्टिक टैंक वाले शौचालय में टैंक के भरने पर इसे खाली करना महंगा पड़ता है और बीमारी फैलाने की संभावना बनी रहती है। साथ ही जब तक ना खाली हो वह बहते मल की सफाई/निस्तारण की समस्या बनी रहती है जिससे ना केवल, स्वयं बल्कि दूसरों को भी परेशानियाँ उठानी पड़ती हैं।

7.  सेप्टिक टैंक वाले शौचालय में टैंक के भरने पर इकट्ठा हुए मल का उपयोग घरेलू स्तर पर संभव नहीं है।

8.  सेप्टिक टैंक वाले शौचालय में मल एवं मल के किसी भी अवयव का निष्पादन/विसर्जन नहीं होता है।

9.  सेप्टिक टैंक वाले शौचालय में गैस पाईप लगाना अनिवार्य है।

10. इसमें गैस पाईप अनिवार्य होने के कारण बदबू निकलती है।

11. सेप्टिक टैंक वाले शौचालय को भरने के पश्चात् टैंक को साफ करने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है, इसमें बहुत अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है। खाली करने के लिए मशीन की जरूरत पड़ती है।

12. सेप्टिक टैंक वाले शौचालय को भरने के पश्चात् गृह मलिक को स्वयं परेशानियों का सामना करना पड़ता है एवं आस-पास के लोगों को भी परेशानी औरे बदबू का सामना करना पड़ता है।

13. सेप्टिक टैंक वाले शौचालय में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती है।

स्वच्छकर जल-बंध शौचालय

1.इसमें केवल सुपरस्ट्रक्चर में यदि लाभार्थी चाहे तो यह प्लास्टर की जरुरत होती है। लिचपिट की चुनाई में सीमेंट कम लगता है इसलिए यह कम खर्चीला एवं एस्मेंक्म लागत आती है।

2.इसमें लिचपिट लाभार्थी की सुविधा एवं जमीन की उपलब्धता के अनुसार बनाये जा सकते हैं अतएव अपेक्षाकृत कम जगह के आवश्यकता होती है ।

3.स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में रूरल पैन में लगता जिससे इसमें कम पानी की आवश्यकता होती है।

4.स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में मूत्र, पानी का सुरिक्षत निपटान  है तथा मल को खाद में परिवर्तित करने की प्रक्रिया सम्पादित होती है।

5.स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में लिचपिट तकनीक का प्रयोग होता है तथा इसमें जंक्शन बॉक्स के द्वारा दूसरे  पीट का प्रावधान निर्माण के दौरान ही रखा जाता है। जिसे लाभार्थी चाहे तो शुरुआत में या सुविधा अनुसार कभी भी बना सकता है।

6.स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में लिचपिट तकनीक का प्रयोग होता है तथा इसमें जंक्शन बॉक्स के द्वारा दूसरे  पीट का प्रावधान निर्माण के दौरान ही रखा जाता है तथा पीट के भरने पर खाली करना आसान।

7.स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में लिचपिट के भरें के बाद एक वर्ष तक बंद रखने से यह सोना खाद के रूप में परिवर्तित हो जाता है। सोना खाद उत्तम किस्म की कार्बनिक खाद होती है।

8.स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में मल के सभी अवयवों का निष्पादन/विसर्जन  होता है।

9.स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में गैस पाईप लगाना नहीं अनिवार्य है। गैस मिट्टी द्वारा सोख ली जाती है।

10.स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में लिचपिट तकनीक का उपयोग होने से किसी तरह की बदबू नहीं निकलती है।

11. स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में लिचपिट भरने के पश्चात् yजंक्शन से जोड़कर दुसरे पीट को उपयोग में लिया जा सकता है तथा भरने जाने पर  एक वर्ष तक सूखने के पश्चात उसे खाली करने में कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ती है।

12. स्वच्छकर जल-बंध शौचालय y जंक्शन होने से लिचपिट के भरने के बाद किसी प्रकार का समस्या ना तो खुद को और न दूसरों को समस्या का सामना करना पड़ता है।

13. स्वच्छकर जल-बंध शौचालय y जंक्शन होने से वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता ही नहीं होती है।

बकेट शौचालय (अस्वच्छकर) एवं स्वच्छकर जल-बंध शौचालय

बकेट/शुष्क शौचालय (अस्वच्छकर)

1.  बकेट/शुष्क  शौचालय मल के निपटान का एल अस्थाई समाधान है।

2.  बकेट शौचालय, स्वच्छकर शौचालय की श्रेणी में नहीं आता क्योंकि यह खुले में शौच को रोकता है लेकिन  एक बिन्दु केन्द्रित शौच स्थान है।

3.  बकेट/शुष्क शौचालय में संक्रमण का खतरा बरकरार रहता है इससे विशेषकर महिलाओं व बालिकाओं को माहवारी (मासिक धर्म) के दौरान संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

4.  बकेट/शुष्क शौचालय बच्चों के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है मल त्याग के लिए इसमें मुंह बड़ा रहा है। जिसमें बच्चों के गिरने की संभावना है।

5.  बकेट/शुष्क शौचालय की वनावट कच्ची रहती है जिससे बारिश से दौरान धसने के संभावना बनी रहती है।

6.  बकेट/शुष्क शौचालय में मल को ढकने के लिए मिट्टी/लकड़ी क बुरादा/राख (छाई) का प्रयोग किया जाता है।

7.  बकेट/शुष्क शौचालय में मल को समुचित रूप से ढकने के लिए प्रति प्रयोग कम से कम 3 कि. ग्रा. मिट्टी/लकड़ी क बुरादा/राख (छाई) का प्रयोग किया जाता है, जो घरेलू स्तर पर नियमिन संभव नहीं है।

8.  बकेट/शुष्क शौचालय में मल एवं मुनष्य के बीच अवरोध प्रभावी व शील बंद नहीं होता इसलिए बदबू आती हैं।

स्वच्छकर जल-बंध शौचालय

1.  स्वच्छकर जल-बंध शौचालय मल के निपटान का एल अस्थाई समाधान है।

2.  स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में वाटर शील (जलबंध) होने से किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा नहों है। यह महिलाओं की लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित है।

3.  स्वच्छकर जल-बंध शौचालय बच्चों में स्वच्छता के आदतें विकसित करने का सबसे सरल साधन है इसमें बच्चों के गिरने की संभावना नहीं है।

4.  स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में प्लींथ लेवल (जमीनी स्तर) तक पक्का एवं सुरक्षित निर्माण आवश्यक होता है।

5. स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में रुरल पेन लगने एवं चौड़े मुँह वाले पात्र से मात्र एक लीटर पानी प्रति प्रयोग से मल को लिचपिट में सुरक्षित निपटान हेतु भेजा जाता है।

6.  स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में मात्र एक लीटर पानी प्रति प्रयोग से मल को लिचपिट में सुरक्षित निपटान हेतु भेजा जाता है, जो घरेलू स्तर पर आसानी संभव है।

7.  स्वच्छकर जल-बंध शौचालय में मल एवं मुनष्य के बीच वाटर शील (जलबंध) होने से किसी प्रकार की बदबू नहीं आती है।

शौचालय निर्माण में अपनाई जाने वाली आवश्यक बातें

1.  मल किये भोजन का अपचित भाग होता है जिसमें पानी गैस और ठोस तीनों होते हैं।

2.  एक स्वस्थ्य व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 300 ग्राम मल त्याग करता है।

3.  इस प्रकार एक स्वास्थ्य व्यक्ति के मल में 60 ग्राम ठोस भाग होता है।

4.  अथार्त एक वर्ष में एक व्यक्ति द्वारा लगभग 18 किलो ठोस मल का त्याग किया जाता है।

5.  एक व्यक्ति के लिए एक साल के ठोस मल के निपटान हेतु एक घनफुट स्थान की आवश्यकता रहती है।

6.  पांच व्यक्तियों वाले परिवारों के लिए पांच घनफुट स्थान एक साल के मल के लिए ठोस भाग के लिए निपटान चाहिए।

7.  इस प्रकार चार वर्ष के लिए मल के ठोस भाग के लिए हेतु आवश्यक प्रभावी आयतन 20 घनफुट स्थान होता है।

स्वच्छकर जल-बंध शौचालय निर्माण की विधि

1.  स्थान चयन

सबसे पहले शौचालय के लिए स्थल चयन करें। चयन करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें:-

  • शौचालय के लिए नीचे के जमीन ना चुने स्थान ऊँचा हो।
  • पेयजल के स्रोत यथा कुँआ, चापानल आदि से सुरक्षित दूरी
  • कुँआ  अथवा चापानल की गहराई यदि 12 मीटर से कम है तो शौचालय के लिचपिट की दूरी पेयजल स्रोत से 15 मीटर तर रखें। पर यदि पेयजल स्रोत की गहराई 12 मीटर से ज्यादा है तो पेयजल स्रोत से लिचपिट की दूरी 10 मीटर तक रखी जा सकती है। लेकिन किसी भी सूरत में लिचपिट पेयजल स्रोत से 10 मीटर कमी दुरी पर ना हो।
  • यदि आस-पास कोई बड़ा वृक्ष है तो शौचालय और लिचपिट को उससे  दुरी पर रखें।
  • घर की दीवार से लिचपिट कम से कम 3 मीटर दूरी पर हो।
  • शौचालय के लिए पथरीली/चट्टान वाली जमीन ना चुने।
  • शौचालय की घर से दूरी परिवार के सभी सदस्यों की सुविधा के अनुकूल हो।
  • घर से शौचालय के मध्य का रास्ता साफ सुथरा अथवा कंकड़, झाड़ी, कांटे इत्यादि से रहित हो।

2.जमीन का नाप लेना

स्थान का चयन हो जाने के बाद जमीन पर शौचालय का नक्शा निम्न प्रकार से नाप लेकर बनाते हैं- उक्त नक्शा बनाते हुए हमें ध्यान रखना है कि लिचपिट आवश्यक रूप से गोल ही बने चोकोर लिचपिट जमीन का कम दबाव झेलता है। जबकि गोल अधिक दबाव झेलता है। लिचपिट पूर्णरूप से गोल ही बनना चाहिए। यह उसके स्थायित्व  और मजबूती के लिए आवश्यक है। नक्शा इसी अनुरूप बनाना चाहिए।

यदि मकान के पास जमीन की कमी है तो भी उसे वाई जंक्शन बॉक्स युक्त शौचालय बनाना चाहिए। ऑन द पिट शौचालय नहीं बनना चाहिए। जगह की कमी होने पर लिचपिट की अन्य वैकल्पिक रचना की जा सकती है। जिसमें दो लिचपिट को समकोण में लिया जा सकता है। सीधी रेखा में लिया जा सकता है।

लेकिन ध्यान रखना चाहिए कि दोनों लिचपिट की बीच की दूर उन दोनों की गहराई जितनी अथार्त 1 मीटर आवश्यक रूप से होनी चाहिए।

3.बैठने के चबूतरे की खुदाई

जमीन का नक्शा बन जाने पर जमीन पर 12’’ चौड़ाई एवं 6’’ गहराई में मिट्टी की खुदाई करें।

4.बैठने के चबूतरे का निर्माण

बैठने के चबूतरे के निर्माण के लिए सबसे पहले निचले सतह पर 3’’ बालू बिछायें ताकि मिट्टी की नमी को सोख लें, इसके बाद चारों तरफ 10’’ ईंट से 1:6 मसाला बनाकर चुनाई करें जिससे ईंट के अंदर के अंदर की भाग की दूरी चौड़ाई 31’’ तथा लम्बाई में 35’’ हो।

5. 5’’ ईंट का दूसरा रद्दा लगायें

जिससे अंदर के भाग की दूरीू लम्बाई में 4’’ एवं चौ० में 36’’ ईच हो इस प्रकार 5’’ ईंट तीन रद्दा लगाएँ यह अंतिम रद्दा होगा। एक फीट पूरा जड़ाई के बाद डी.पी.सी. 1:3:4 के अनुपात में सीमेंट.बालू स्टोन चिप्स से 1’’ मोटाई में ढलाई कर दें। ताकि नीचे का पानी डी.पी.सी. के ऊपर दीवारों पर पानी का अंश न जाय और पिलिन्थ मजबूत हो। इसके बाद 10’’ के बाहर चारों तरफ दीवारों को मिट्टी से ढँक दें।

6. अल पिलिन्थ पर से 5’’ ईंट का 1’’ मसाला से जड़ाई तीन तरफ करें

आगे से 6 फीट और पीछे से 5’’.6’’  जड़ाई पूरा करें आगे जड़ाई करते समय दाहिने तरफ  दीवार से 5’’ ईट का जड़ाई करके कोपला निकालें साथ-साथ एल टाईप का कलम्पु जाम कर दें, नीचे से ऊपर से नीचे की ओर आठ-आठ पर जाम कर दें।

7. लिच-पिट का निर्माण

लिच-पिट क्र गड्ढे को आसानी से खुदाई करने के लिए 2 फीट का एक धागा उसके बाद जमीन पर रखकर उसे विच सेंदर करके चारों तरफ घुमा दें। गड्ढा का माप गोल हो जायेगा। अब गहराई 39’’ कर दें।

8. लिच-पिट का गड्ढा गोल 48’’ हो जाने के बाद गहराई भी 39’’ फीता से नाप लें, इसके बाद 5’’ ईंट का जड़ाई ½ इंच जली छोड़तें हुए चालू करें निचले रद्दा में 1;4 मसाला से खाली स्थान को भर दें इस तरह 12 रद्दा ऊपर तक जड़ाई करें। अंतिम रद्दा जड़ाई के बाद 5’’ के ऊपरी भाग पर मसाले से जाम कर दें।

9. लिच-पिट का ढक्कन

लिच-पिट के ढक्कन के लिए 6 एम. एम क्वाईल से गड्ढे के हिसाब से एक गोलाकार रिंग तैयार कर लें। रिंग की गोलाई के हिसाब से छोटे छड़  को काट कर छह: छह:  इंच के देरी पर तार से बांध दें। 1:3;4 स्टोन चिप्स मसाला से 39’’ व्यास गोलाई में करके 3’’ इंच मोटाई में ढलाई कर दें।

10. जंक्शन बॉक्स के लिए 11’’ का 6 एम.एम. छड़ चार काट लें। फिर तार से चित्रानुसार बांधे, अब 1:3:4 स्टोन चिप्स मसाला बनाकर 2’’ मोटाई में ढलाई कर दें।

जंक्शन बॉक्स

जंक्शन बॉक्स अंदर-अंदर 10’xx 10’’ का होगा इसके लिए शौचालय में चबूतरे से सटा कर 20’’ का चौकर मिट्टी काट लेंगें उसमें ईंट के टुकड़े को डालकर धुर्मिस करें, किनारे में 5’’ का दो रद्दा लगाएंगे तो बीच में 10’xx 10’’ का जगह  उपलब्ध हो जायेगा\ इस जंक्शन बॉक्स को बेहतर ढंग से सिमेंट का पन्नी कर दें ताकि मलका जमाव जंक्शन बॉक्स बनाते समय इसका ढाल इतना हो कि मल पाईप के रास्ते से लिच-पिट में आसानी से चला जाए जंक्शन बॉक्स में मुँह होगा इसके एक मुँह में 3 इंच मोटाई का प्लास्टिक पाईप लगाकर उसे लिच-पिट में जोड़ देंगे दूसरे मुख को ईंट के टुकड़े से कम मसाला का उपयोग कर बंद कर देंगे जो पहले लिच-पिट को भर जाने के बाद दूसरा लिच-पिट के लिए उपयोग होगा, पाईप का ढाल पानी डालकर देख लें ताकि मल आसानी से लिच-पिच में जा सके, लिच-पिट में पाईप इस तरह से लगाएँ कि लिच-पिट के बीच में जमा हो सकें और उसके बाद जंक्शन बॉक्स को ढक्कन से बंद कर दें।

11. कमरे की दीवार 5’’ का पूरा होने के बाद छत पर 3’6’ का दो बम्बू (बाँस) का टुकड़ा ईंट के बीचो बीच मसाला से जाम कर दें, इसके बाद चौड़ाई 3’6’’ और लम्बाई 4 फीट सीमेंटेड करकट/जी.आई.सीट (टीना करकट) ऊपर से रखकर उसे पांच इंच ईंट से जड़ाई दो रद्दा कर दें।

12. कमरे की छत पूरा होने के बाद कमरे के अंदर साइमन बिठाने के लिए जमीन के अंदर 1’3’ खुदाई करें, और उसके बाद नीचे एक ईट बिछाएं और उसी  पर साइफन रखने के बाद सीमेंट का घेल बनायें और उसमें सूती कपडा/ पटुआ को भिगो दें फिर उस कपड़े पटुआ को साइफन पाईप में घुमा कर लपेट दे उसके बाद पाईप को साइफन से जोड़ दें, इस प्रकार 4’’ पी.वी.सी. पाईप को ऐसा साइफन से जोड़े कि जंक्शन बॉक्स की तरफ ढलान हो अब पैन को साइफन पर पीछे की दीवार से 9’’ दुरी पर बिठायें ध्यान देना है कि अगल-बगल के दोनों दे बीचो बीच हो पानी डालकर देख लें ढलान सही है या नहीं, पैन हिले नहीं इसके लिए चारो तरह से ईंट या पत्थर के टुकड़े व मिट्टी से जाम कर दें।

13. अब जमीन बनाने के लिए ईंट के चारों तरफ खंरजा/सोलिंग कर दें, इसके बाद पानी का छिड़कव करके छोड़ दें। तब तक जंक्शन बॉक्स का काम करें और 4’’ पी.वी.सी. पाईप ऐसा जाम करे की जंक्शन बॉक्स से गड्ढे कि ओर ढाल हो ताकि मल आसानी से गड्ढे में जा गिरे। जंक्शन बॉक्स के अंदर चारों तरफ प्लास्टर करके सीमेंट का घोल से नहला/पन्ना कर दें।

14. अगले दिन कमरा के अंदर 1:3:4(सीमेंट, बालू व स्टोन चिप्स) का मसाला बनाकर पैन के लेवल ढलाई कर दें। इसके बाद हाप इंची प्लास्टर कर जमीन को पैन की ओर ढाल करें।

15. पायदान सीट के अगल बगल पैन की पीछे किए सतह से आगे कि ओर 5’’ पर पायदान को बिठाएं। इसके बाद सीमेंट का घोल बनाकर नहला/पन्नी अच्छी तरह जमीन पर करके सूती कपडा से जमीन को पोंछ दें।

16. इसके दरवाजा को क्ल्म्पू में डालकर उसे खोल-लगाकर देख लें, उसके बाद दरवाजा के पास एक रद्द जड़ाई करके सी सीढi  बना दें ताकि चढ़ने उतरने में आराम हो।

ध्यान रहे कि नव निर्मित शौचालय का 5 दिन सुबह-शाम पानी से तराई जरुर करें, ताकि शौचालय मजबूत टिकाऊ हो। कमरा का कार्य पूरा होने के बाद जंक्शन बॉक्स एवं गड्ढे पर ढक्कन चढ़ा दें और सीमेंट, बालू के मसाला से अच्छी तरह जाम कर दें ताकि अंदर का गैस व बदबू बाहर ना आ सके। इसके पश्चात चारों ओर मिट्टी से ढंक दें । अब शौचालय उपयोग के लिए तैयार है।

  • जंक्शन बॉक्स को बनाते वक्त चैम्बर का तल ढलान होना चाहिए तथा चैम्बर को अंदर से अच्छी तरह से घोटाई की हुई होनी चाहिए।
  • जंक्शन बॉक्स से लिचपिट तक लगाए जाने वाला पाईप 4 इंच व्यास का होना चाहिए तथा लिचपिट  का लेवल जंक्शन बॉक्स के नीचे होना चाहिए अथार्त जंक्शन बॉक्स एवं लिच-पिट के मध्य पाईप बैठाते समय उचित डालान (1 फीट में सवा इंच का ढलान होना चाहिए)।
  • मलवाहक पाईप लिच-पिट के अंदर अधिकतम 4 इंच अंदर तक होना चाहिए ताकि मल पिट में गिरे।
  • वाटर सील एवं पैन में लेवल बैठाना चाहिए एवं जोड़ते वक्त पानी डालकर जांचकर लेनी चाहिए। लिच-पिट का तल, जंक्शन बॉक्स, रूरल पैन, वाटर सील एवं पाईप पूर्ण रूप से साफ है उनमें कहीं पर भी मिट्टी, सीमेंट अथवा मसाला नहीं रहा है।
  • ढक्कन तथा लिच-पिट की दीवार के बीच का जोड़ ठीक तरह से बंद हो इसमें कोई भी दरार/रेख नहीं होनी चाहिए।
  • लिच-पिट पर ढक्कन बैठाने के बाद उस पर 9-10 इंच मिट्टी भर देनी चाहिए। जिससे भविष्य में कोई वजन आने पर उसके क्षति पहुँचने की संभावना कम रहे।
  • जंक्शन बॉक्स को बंद करने से पूर्व जिस तरह के लिच-पिट को हमें काम में नहीं लेना है। उस तरफ के मार्ग को ईंट लगाकर बंद कर देना चाहिए।
  • चबूतरे के बाहर 2 ईंट का समानांतर सीढ़ी बनावें, ताकि चबूतरा पर चढ़ने में सुविधा हो और धुल मिट्टी अंदर न जा सके।
  • दो लिच-पिट का अंदर दोनों की गहराई के बराबर होना चाहिए अथार्त 3 फीट गहरे दो लिच-पिट की दूरी 3 फीट होनी चाहिए।
  • जलबंध शौचालय बनाते वक्त इसमें 20 मी. ली. वाटर सील ट्रेप/मुर्गा काम में लिए जाना चाहिए।

स्रोत: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग,झारखण्ड सरकार



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