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हथकरघा क्षेत्र के लिए पुनरुद्धार, सुधार और पुनर्गठन पैकेज के दिशा-निर्देश

पृष्‍ठभूमि

 

हथकरघा बुनकरों और सहकारी सोसाइटियों की ऋण की वापसी अदायगी करने में असमर्थता और बाजार की मंदी के कारण इनके सामने आ रही वित्‍तीय कठिनाइयों को ध्‍यान में रखते हुए वित्‍त मंत्री ने दिनांक 28.2.2011 को हथकरघा क्षेत्र के लिए 3000 करोड़ रुपये के वित्‍तीय पैकेज की घोषणा की थी । इस घोषणा को प्रभावी बनाने के लिए दिनांक 24.11.2011 को सीसीईए द्वारा हथकरघा क्षेत्र के लिए पुनरुद्धार, सुधार और पुनर्गठन (आरआरआर) पैकेज नामक एक योजना का अनुमोदन किया गया तथा तदनुसार दिनांक 28.11.2011 को आरआरआर पैकेज के दिशा-निर्देश जारी किए गए। आरआरआर पैकेज की निर्दिष्‍ट कार्यान्‍वयन एजेंसी नाबार्ड है ।

योजना के कार्यान्‍वयन में आ रही व्‍यावहारिक समस्‍याओं को दूर करने तथा पैकेज के अंतर्गत और भी शीर्ष सोसाइटियों, प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइटियों तथा व्‍यक्तिगत बुनकरों को शामिल करने के लिए  आरआरआर पैकेज के दिशा-निर्देशों में संशोधन किया गया है । संशोधित योजना  से बजट घोषणा (2013-14) के अनुसार हथकरघा क्षेत्र को 6% की ब्‍याज दर पर सस्‍ते ऋण भी सुलभ रहें ।

आरआरआर पैकेज की मुख्‍य विशेषताएं

 

  • हथकरघा क्षेत्र के लिए पुनरुद्धार, सुधार और पुनर्गठन (आरआरआर) पैकेज  अब एक नई केन्‍द्र प्रवर्तित योजनागत स्‍कीम, राष्‍ट्रीय हथकरघा विकास योजना के एक घटक के रुप में कार्यान्वित किया जाएगा ।
  • शीर्ष और प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइटियों की सांविधिक  लेखा परीक्षा 2011-12 तक पूरी की जाएगी और  शीर्ष और प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइटियों की पात्रता 2011-12  तक की लेखा परीक्षा रिपोर्ट के आधार पर निर्धारित की जाएगी।  तथापि,  आरआरआर पैकेज के तहत अब तक शामिल न की गई शीर्ष, प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइटियों तथा व्‍यक्तिगत बुनकरों के लिए अतिदेय ऋण की माफ की जानी वाली राशि तथा पुनर्पूंजीकरण सहायता का आकलन दिनांक 31.3.2010  की स्थिति के अनुसार किया जाएगा ।  ऐसे राज्‍य जिन्‍होंने अब तक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर नहीं किए हैं वे यदि आरआरआर पैकेज का कार्यान्‍व्‍यन आवश्‍यक समझे, तो समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर कर सकते हैं ।
  • हथकरघा बुनकरों, सहकारी सोसाइटियों तथा व्‍यक्तिगत बुनकरों के  ऋण की माफी तथा पुनर्पूंजीकरण सहायता के लिए अपेक्षित धनराशि के लिए भारत सरकार और संबंधित राज्‍यों के बीच निम्‍नलिखित अनुपात में हिस्‍सेदारी की जाएगी-

 

क्र. सं.

लाभार्थी

सामान्‍य श्रेणी के राज्‍य

(केन्‍द्र  राज्‍य)

विशेष श्रेणी के राज्‍य

(केन्‍द्र राज्‍य)

(i)

राज्‍य स्‍तरीय शीर्ष सोसाइटियां

7525

9010

(ii)

प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइ‍टियां

8020

9010

(iii)

व्‍यक्तिगत बुनकर/एसएचजी इत्‍यादि

8020

9010

योजना के तहत अर्थक्षम और संभावित रुप से अर्थक्षम प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइटियों और शीर्ष सोसाइटियों के साथ-साथ उन व्‍यक्तिगत हथकरघा बुनकरों, मास्‍टर बुनकरों, स्‍वं-सहायता समूहों  और संयुक्‍त जबावदेह समूहों, जिन्‍होंने  हथकरघा बुनाई के प्रयोजनार्थ ऐसे ऋण लिए हों, दिनांक 31.3.2010 की स्थिति के अनुसार जो मूलधन और ब्‍याज अतिदेय हो गया हो उसका क्रमश 100% और 25% की  वापसी अदायगी करने के लिए इस योजना के अंतर्गत निधियां प्रदान की जाएंगी वशर्ते कि बैंक नए ऋण मंजूर करने पर सहमत हो जाएं। जहां तक इस योजना के अंतर्गत वित्‍त पोषण करने का संबंध है, व्‍यक्तिगत हथकरघा बुनकरों की अतिदेय राशियों को माफ करने के संबंध में प्रति व्‍यक्तिगत लाभार्थी की समग्र सीमा 50,000 रुपये होगी ।

  • सरकार ने आरआरआर पैकेज मे शामिल पात्र हथकरघा सहकारी सोसाइटियों और व्‍यक्तिगत हथकरघा बुनकरों को बैंको द्वारा दिए गए नए ऋण की संवितरण की तारीख से 3 वर्ष के लिए 6% के  ब्‍याज पर रियायती ऋण का भी अनुमोदन किया है।  ब्‍याज सब्सिडी भारत सरकार द्वारा वहन की जाएगी जो  बैंकों द्वारा लागू /प्रभारित वास्‍तविक ब्‍याज दर तथा ऋणी द्वारा वहन किए जाने वाले 6% ब्‍याज के बीच के अंतर तक सीमित होगी। अधिकतम ब्‍याज परिदान की सीमा 7% तक होगी । यह ब्‍याज परिदान ऋण के अप्रयोज्‍य होने  की तारीख के बाद उपलब्‍ध नहीं कराया जाएगा।

 

  • सरकार नए ऋणों के प्रथम संवितरण की तारीख से 3 वर्ष की अवधि के लिए ऋण गारंटी हेतु  सीजीटीएमएसई को भुगतान करने के  लिए 1%  की दर से गारंटी शुल्‍क तथा 0.5% की दर से वार्षिक सेवा शुल्‍क के भुगतान के लिए आवश्‍यक प्रावधान करेगी।

 

  • सरकार ने योजना के कार्यान्‍वयन और निगरानी के लिए राष्‍ट्रीय, राज्‍य और जिला स्‍तरों पर तीन स्‍तरीय समितियों के गठन का भी अनुमोदन किया है । इन समितियों की भूमिका, जिम्‍मेदारी तथा शक्तियां अनुलग्‍नक-। में दी गई है ।

 

  • समझौता ज्ञापन के अनुसार राज्‍य सरकारों द्वारा समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किए जाने और उस राज्‍य में नाबार्ड की टीम द्वारा  विशेष लेखा परीक्षा पूरी किए जाने के बाद भारत सरकार के अंश की 80 प्रतिशत धनराशि जारी की जाएगी और शेष 20 प्रतिशत राशि संबंधित राज्‍य सरकारों द्वारा विधिक और संस्‍थायी सुधारों की प्रतिबद्धता पूरी किए जाने के बाद जारी की जाएगी।
  • ऋण माफी के लिए इस पैकेज से वापसी राशि अप्रयोज्‍य आस्तियां (एनपीए) बनने की तारीख के अनुसार अतिदेय मूलधन के 100 % और अतिदेय ब्‍याज के केवल 25 % तक ही सीमित होगी। शेष 75 % अतिदेय ब्‍याज और समग्र दंड ब्‍याज, यदि कोई हो, बैंक द्वारा पूर्व -शर्त के रूप में बट्टे खाते में डाला जाएगा।

 

  • केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों तथा राज्‍य सरकारों के नियंत्रणाधीन संस्‍थानों/एजेंसियों से सब्‍सिडी आदि  जैसी धनराशि  पूर्व- शर्त के रुप में संबंधित सरकार द्वारा अलग से पैकेज के बाहर प्रदान की जाएगी ।

 

  • धोखाधड़ी, गबन तथा दुर्विनियोजन इत्‍यादि के कारण हुई हानि के लिए धनराशि नहीं दी जाएगी  जिसे संबंधित संस्‍थानों यथा प्राथमिक बुनकर सोसाइटियों/शीर्ष बुनकर सोसाइटियों (स्‍टेकहोल्‍डरों) द्वारा वहन किया जाएगा ।
  • भारत सरकार की कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजना  (एडीडब्‍ल्‍यूडीआर) की तर्ज पर, जिसमें बैंक अतिदेय कृषि ऋणों को बट्टे खाते में डालने के बाद ही नए ऋण जारी करने को सहमत हुए, पैकेज के अंतर्गत  पुनर्पूंजीकरण और बैंकों को हथकरघा सहकारी सोसाइटियों के बकाया ऋणों की अदायगी नए ऋण देने की प्रतिबद्धता दिए जाने के अध्‍यधीन होगी।
  • अर्थक्षम और संभावित रूप से अर्थक्षम सोसाइटियों की परिभाषा इस प्रकार होगी -

(क)  निम्नलिखित मानकों/मानदंडों के आधार पर पहचानी गई अर्थक्षम प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइटियां (पीडब्ल्यूसीएस)

  • गत तीन वर्षों के दौरान क्षमता उपयोग, परिचालन के आर्थिक स्‍तर के बराबर या अधिक होना चाहिए (ब्रेक  ईवन लेबल)
  • निवल निपटान योग्य संसाधन (एनडीआर) और निवल पूँजी सकारात्मक होनी चाहिए)
  • विगत तीन वर्षों के लिए बिक्री, औसत उत्पादन का कम से कम 75 प्रतिशत होनी चाहिए
  • लेखा परीक्षा वर्ष 2011-12 तक पूरी हो।
  • वर्ष में कम से कम दो बार कार्यशील पूँजी/ नकद ऋण सीमा रोटेट होनी चाहिए।

(ख)    निम्नलिखित मानकों/मानदंडों के आधार पर पहचानी गई संभावित रूप से अर्थक्षम प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइटियां (पीडब्ल्यूसीएस)

  • नकारात्‍मक पूंजी वाली सहकारी सोसाइटियां भी  संभावित रुप से अर्थक्षम  मानी जाएगी बशर्ते उनकी पूंजी ऋण माफी और पुनर्पूंजीकरण के बाद सकारात्‍मक बन जाए।
  • सोसाइटी को 5 वर्षों में से कम से कम एक वर्ष में  परिचालनात्‍मक लाभ होना चाहिए और  परिचानात्‍मक लाभ को  अर्थक्षमता  मानकों के निर्धारण के प्रयोजन से मूल्‍यहा्स, ब्‍याज तथा कर से पूर्व सकल लाभ  के रुप में परिभाषित किया जाएगा ।
  • गत तीन वर्षों के लिए बिक्री, औसत उत्पादन का कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए ।
  • वर्ष 2011-12 तक  सांविधिक लेखा परीक्षा पूरी हो ।
  • वर्ष में कम से कम एक बार कार्यशील पूँजी/नकद ऋण सीमा रोटेट होनी चाहिए  ।

(ग)      गैर-अर्थक्षम सोसाइटियाँ वे हैं जो उपर्युक्त श्रेणियों में नहीं आती हैं   ।

नोट राष्‍ट्रीय कार्यान्‍वयन, निगरानी एवं समीक्षा समिति (एनआईएमआरसी) को इन परिभाषाओं में कोई भी संशोधन करने की शक्तियां प्राप्‍त हैं लेकिन यह व्‍यय विभाग, वित्‍त मंत्रालय के पूर्व अनुमोदन से ही होगा ।

  • आरआरआर पैकेज के तहत हथकरघा बुनकर सहकारी सोसाइटियों (प्राथमिक और राज्‍य स्‍तरीय शीर्ष) के पुनरुद्धार और अतिदेय ऋण की माफी तथा व्यक्तिगत बुनकरों, स्व-सहायता ग्रुपों (एसएचजी),संयुक्त जबावदेही समूहों (जेएलजी) और मास्टर बुनकरों की कार्यशील पूँजी और सावधि ऋणों की माफी के लिए दिशा-निर्देश अनुबंध - 2 और 3 में दिए गए  हैं । इन  समितियों की भूमिका जिम्‍मेदारियों और शक्तियां अनुबंध – 1 में दी गई हैं ।
  • आरआरआर पैकेज के अंतर्गत प्रस्‍तावित विधिक और संस्‍थागत सुधारों व भारत सरकार, राज्‍य सरकारों तथा नाबार्ड के बीच हस्‍ताक्षरित किया जाने वाला समझौता ज्ञापन अनुबंध – 4 और 5 में है । तथापि, एनआईएमआरसी को प्रचालनात्‍मक  कारणों से इन योजनाओं में समुचित संशोधन करने की शक्तियां होंगी, बशर्ते  वह संशोधन सीसीईए द्वारा प्रदत्‍त अनुमोदन के अनुसार हो ।

रियायती ऋण घटक के संबंध में दिशा-निर्देश

इस घटक में सावधि ऋण के साथ-साथ कार्यशील पूंजी ऋण का भी प्रावधान होगा ।   करघों, जैकार्ड, कम्‍प्‍यूटर की सहायता से टैक्‍स्‍टाइल डिजाइन प्रणाली, कार्ड पंचिंग मशीन, न्‍यूमैटिक जैकार्ड प्रणाली, वाइंडिंग मशीन, रैपिंग मशीन, साइजिंग मशीन, छोटे कैबिनेट की डाइंग मशीन, परीक्षण उपकरण, कार्यशाला आदि जैसी सहायक  स्‍थाई आस्‍तियों का सृजन करने के लिए ‍ सावधि ऋण की सीमा 15 लाख रुपये तक  होगी ।  रंगाई गृह और एफ्ल्‍यूएंट ट्रीटमेंट प्‍लॉंट या संसाधन गृह और कॉमन एफ्ल्‍यूएंट ट्रीटमेंट प्‍लांट स्‍थापित करने के लिए सावधि ऋण की सीमा 50 लाख रुपये तक होगी। कार्यशील पूंजी ऋण की सीमा 25 लाख रुपये तक होगी ।

रियायती ऋण घटक के उप-घटक  निम्‍नवत होंगे -

i. ब्‍याज सब्सिडी

हथकरघा क्षेत्र को 3 वर्ष की अवधि के  लिए 6% की ब्‍याज दर पर रियायती ऋण प्रदान करना, भारत सरकार द्वारा वहन की जाने वाली ब्‍याज सब्‍सिडी की मात्रा, 3 वर्ष के लिए होगी और यह यथा लागू और बैंकों द्वारा वसूली गई ब्‍याज की वास्‍तविक दर के अंतर तक सीमित होगी तथा 6% ऋणकर्ता द्वारा वहन की जानी है । तथापि, भारत सरकार का ब्‍याज परिदान 7%  पर निश्‍चित  होगा ।

ii. मार्जिन सहायता

प्रत्‍येक बुनकर को अधिकतम 10,000/-रुपये की मार्जिन सहायता की राशि प्रदान की जाएगी, हथकरघा बुनकर, उनके स्‍वयं सहायता समूह और संयुक्‍त जबावदेह समूह इस राशि का उपयोग बैंकों से ऋण लेने के लिए कर सकेंगे । तथापि, बुनकरों की सहकारी सोसाइटियां, बुनकरों की उत्‍पादक कंपनियां आदि  मार्जिन सहायता की राशि प्राप्‍त करने की पात्र नहीं होगी । यदि बुनकर द्वारा अपेक्षित ऋण के लिए अधिक मार्जिन राशि की आवश्‍यकता  हो तो लाभार्थी  या राज्‍य सरकार या कार्यान्‍वयन एजेंसी या इसके किसी भी समूह के लिए यह अपेक्षित होगा कि वह अतिरिक्‍त मार्जिन राशि का अंशदान करें ।

iii. ऋण गारंटी

बैंकों/वित्‍तीय संस्‍थानों द्वारा हथकरघा बुनकरों को दिए गए ऋण की गारंटी मझौले और छोटे उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्‍ट (सीजीटीएमएसई) द्वारा बकाया राशि  के 85% तक दी जाएगी (या समय-समय पर सीजीटीएमएसई द्वारा यथा संशोधित ) । इस प्रयोजनार्थ आवश्‍यक गारंटी फीस और वार्षिक सेवा फीस का भुगतान भारत सरकार द्वारा किया जाएगा ।

iv. बुनकर सुविधाता सहित सूचना, शिक्षा और संचार(आईईसी) संबंधी कार्य

इसे बैंकों, राज्‍य सरकार के पदाधिकारियों, विपणन एजेंसियों आदि जैसे सभी  स्‍थानीय स्‍टेकहोल्‍डरों को  शामिल कर लाभार्थियों को योजना के बारे में जागरुक करने के लिए किया जाएगा । इसके अलावा,  बैंकों को हर तरह से पूर्ण ऋण आवेदन प्राप्‍त करने और प्राथमिक जांच करने , आवेदन पत्र  को बैंक की सही शाखा में प्रस्‍तुत करने तथा ऋण संवितरण तक मंजूरी के बाद निगरानी रखने के लिए बुनकर सुविधाता नियुक्‍त करने के लिए प्राधिकृत किया जाएगा जिसके लिए भारत सरकार,  संवितरित ऋण राशि के 0.5%  प्रोत्‍साहन का भुगतान करेगी जो बैंक को प्रति बुनकर क्रेडिट कार्ड  न्‍यूनतम 200/- रुपये और अधिकतम-2000 /-रुपये के अध्‍यधीन होगा जिसे फिर बुनकर सुविधाता को भुगतान किया जाएगा ।

v. कार्यान्‍वयन एजेंसियों को सेवा प्रभार

योजना के तहत नाबार्ड, सिडबी और सभी राष्‍ट्रीयकृत बैंक (अग्रणी बैंक) मार्जिन सहायता राशि और ब्‍याज परिदान के लिए पात्र कार्यान्‍वयन एजेंसियां होगी । मार्जिन राशि और ब्‍याज सब्सिडी का संवितरण किए जाने के संबंध में हथकरघा बुनकरों और बैंकों के बीच समन्‍वय स्‍थापित करने के लिए उनके द्वारा संवितरित मार्जिन राशि और ब्‍याज सब्सिडी की राशि का 1.5% की दर से कार्यान्‍वयन एजेंसी को सेवा प्रभार का भुगतान किया जाएगा ।

बैंकों/वित्‍तीय संस्‍थानों से ऋण प्राप्‍त करने के लिए पात्र एजेंसियां

बैंकों/वित्‍तीय संस्‍थानों से ऋण प्राप्‍त करने के लिए निम्‍नलिखित एजेंसियां पात्र हैं -

  1. बुनकरी कार्य में लगे हथकरघा बुनकर,
  2. स्‍वयं सहायता समूह,
  3. संयुक्‍त जबाबदेह समूह,
  4. बुनकर उद्यमी,
  5. प्राथमिक हथकरघा बुनकरों की सहकारी समितियां,
  6. शीर्ष हथकरघा बुनकर सहकारी समितियां,
  7. ग्रुप/क्‍लस्‍टर/मेगा क्‍लस्‍टर/एकीकृत (हथकरघा)/टैक्‍स्‍टाइल पार्क (एसआईटीपी) या वस्‍त्र मंत्रालय की अन्‍य योजनाओं के तहत संवर्धित कंपनियों सहित हथकरघा बुनकरों द्वारा संवर्धित उत्‍पादक कंपनियां/ कंसर्शिया  और
  8. विकास आयुक्‍त (हथकरघा)द्वारा यथा अनुमोदित  हथकरघा कार्यो में लगा अन्‍य कोई संगठन
  9. 20,000 बुनकरों तक कार्पेट बुनकर

वस्‍त्र मंत्रालय की विभिन्‍न योजनाओं में शामिल  क्‍लस्‍टर भी ऋण के प्रयोजनार्थ इस योजना के तहत लाभान्वित होंगे ।

कार्यान्‍वयन एजेंसियां

मार्जिन सहायता की राशि और ब्‍याज परिदान के लिए नाबार्ड, सिडबी और राष्‍ट्रीयकृत बैंक (जहां वे अग्रणी बैंक हैं) पात्र कार्यान्‍वयन एजेंसियां होंगी और ऋण गारंटी के प्रयोजनार्थ,सीजीटीएमएसई कार्यान्‍वयन एजेंसी होगी ।

परिचालनात्‍मक ब्‍यौरा

  • बैंक ऋण प्राप्‍त करने के लिए बुनकर को संबंधित अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक/ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक/सहकारी बैंक से संपर्क करना अपेक्षित है  जिसके लिए आवेदक को  आवेदन फार्म भरना होगा और संगत  दस्‍तावेजों के साथ उसे बैंक में जमा करना होगा जिसमें निम्‍नलिखित  दस्‍तावेज शामिल होंगे -

(i)  मतदाता पहचान पत्र/ राशन कार्ड/यूआईडी की   फोटो कापी, उसका फोटो

(ii) बुनकर पहचान पत्र/  बुनकर क्रेडिट कार्ड /स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड की फोटो कापी

(iii)यार्न पासबुक की फोटो कापी

  • आवेदक द्वारा दी गई सूचना के आधार पर बैंक द्वारा ऋण आवेदन पत्र की जांच की जाएगी और यदि आवेदन पत्र को ऋण के लिए पात्र पाया जाता है तो आवेदन की तारीख से 3 माह के अंदर बैंक द्वारा आवेदक को ऋण मंजूरी पत्र  के साथ बुनकर क्रेडिट कार्ड जारी किया जाएगा ।

 

  • लाभार्थियों को लाभ प्रदान करने के लिए भारत सरकार द्वारा कार्यान्‍वयन एजेंसी को मार्जिन राशि और ब्‍याज परिदान के लिए वित्‍तीय सहायता जारी की जाएगी ताकि उसे फिर बैंकों/ वित्‍तीय संस्‍थानों को जारी किया जा सके।

 

  • यदि नाबार्ड कार्यान्‍वयन एजेंसी है तो संबंधित बैंक शाखा मार्जिन राशि और ब्‍याज सब्सिडी का दावा अपने क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्‍तुत करेगी जो फिर उन दावों को नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्‍तुत करेगा जो  बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय को दावे की राशि अंतरित करेगा । बैंक अग्रिम रूप से मार्जिन राशि और ब्‍याज परिदान का दावा कर सकते हैं जो उन लाभार्थियों की संख्‍या पर  निर्भर करेगा जिन्‍हें बैंक 6 माह की अवधि में कवर करना चाहते हैं ।

 

  • यदि राष्‍ट्रीयकृत बैंक (जहां यह अग्रणी बैंक है) कार्यान्‍वयन एजेंसी है तो संबंधित बैंक शाखा मार्जिन राशि और ब्‍याज सब्सिडी का दावा अग्रणी बैंक को प्रस्‍तुत करेगी जो दावे की राशि का अंतरण सीधे ही उन्‍हें करेगी ।

 

  • यथा अनुज्ञेय ब्‍याज सब्सिडी पहले संवितरण की तारीख से 3 वर्ष के लिए प्रदान की जाएगी । ऋणों को निष्क्रिय आस्ति (एनपीए) होने से बचाने के लिए उर्धारकर्ता उस अवधि के बाद, जिस अवधि में खाता एनपीए हुआ है, ब्‍याज परिदान के लिए पात्र नहीं होगा और बैंक, आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार बाद की अवधि के लिए सामान्‍य ब्‍याज दर वसूलने के पात्र होंगे ।

 

  • ऋण मंजूर करने के लिए जब एक बार आवेदन पत्र पात्र पाया जाता है तो बैंकों द्वारा सीजीटीएमएसई को निर्धारित समयावधि के अंदर ऑनलाईन ब्‍यौरा भेजा जाएगा जिसे ऐसे ऋण के लिए ऋण गारंटी कवर प्राप्‍त करने के लिए सीजीटीएमएसई द्वारा यथा विनिर्दिष्‍ट किया गया है । गारंटी कवर 3 वर्ष के लिए बैंक द्वारा ऋण संवितरण की तारीख से प्रभावी होगा । ऋण गारंटी फीस और वार्षिक फीस के लिए वित्‍तीय सहायता का  भुगतान भारत सरकार द्वारा सीधे ही सीजीटीएमएसई को किया जाएगा ।

 

  • बैंक, ऋण आवेदन प्राप्‍त करने और उनकी प्राथमिक जांच करने ,आंकड़ों का सत्‍यापन करने और बैंकों को आवेदन पत्र प्रस्‍तुत करने और ऋण संवितरण तक मंजूरी के बाद तक निगरानी रखने के लिए बुनकर सुविधाता नियुक्‍त करने के लिए प्राधिकृत होंगे जिसके लिए भारत सरकार द्वारा संवितरित ऋण राशि के 0.5% के प्रोत्‍साहन का भुगतान किया जाएगा जो प्रत्‍येक ऋण खाते के लिए न्‍यूनतम 100/- रुपये  और अधिकतम 2000/- के अध्‍यधीन होगा । बुनकर सुविधाता की भूमिका में निम्‍नलिखित शामिल होंगे -

(i)      बचतों और  अन्‍य उत्‍पादों तथा शिक्षा के बारे में जागरुकता का सृजन करना तथा मार्जिन राशि और ऋण के बारे में           सलाह देना ;

(ii)      उधारकर्ताओं की पहचान करना और क्रियाकलापों का निर्धारण करना  ;

(iii)     प्राथमिक सूचना/आंकड़ों का सत्‍यापन करने सहित ऋण आवेदन प्राप्‍त करना और उनकी प्राथमिक जांच करना ;

(iv)     बैंकों को आवेदन प्रस्‍तुत करना और उनकी जांच करना ;

(v)      मंजूरी के बाद निगरानी रखना और

(vi)     वापसी अदायगी और पुन भुगतान के लिए कार्रवाई करना;

  • ब्‍याज परिदान, मार्जिन राशि और ऋण गारंटी का प्रावधान सबके लिए नहीं होगा और यह वर्ष के बजट प्रावधान के अनुसार किया जाएगा ।

निधियां जारी करना

छ माह की अवधि में शामिल किए जाने वाले लाभार्थियों की संख्‍या के आधार पर अग्रिम के रूप में कार्यान्‍वयन एजेंसी  (एजेंसियों) को सीधे ही निधियों की पहली किस्‍त जारी की जाएगी । पूर्व किस्‍त का 70% उपयोग किए जाने के  बाद ही अगली किस्‍त जारी की जाएगी ।

अनुबंध –1

राष्ट्रीय कार्यान्वयन मॉनीटरिंग और समीक्षा समिति (एनआईएमआरसी), राज य कार्यान्वयन मॉनीटरिंग और समीक्षा समिति (एसआईएमआरसी) और जिला कार्यान्वयन, मॉनीटरिंग और समीक्षा समिति (डीआईएमआरसी) का गठन, भूमिका, जिम्मेदारी और शक्तियाँ

I. राष्ट्रीय कार्यान्वयन मॉनीटरिंग और समीक्षा समिति (एनआईएमआरसी)

एनआईएमआरसी को समयबद्ध ढंग से पुनरूद्धार पैकेज को कार्यान्वित किए जाने की जिम्मेदारी सौपी गई है।

गठन

क.    सचिव, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार  - अध्यक्ष

ख.   विकास आयुक्त (हथकरघा), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार

ग.   ब्यय विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधि

घ.   वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधि

ड़    योजना आयोग के प्रतिनिधि

च.  प्रधान सचिव (पीएस)/निदेशक, राज्‍य सरकार हथकरघा (पैकेज कार्यान्वित करने वाले राज्‍य)

छ.  महा प्रबंधक (प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र), सार्वजनिक क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंक

ज.  राज्‍य स्तरीय बैंकर समिति संयोजक (पैकेज कार्यान्वित करने वाले राज्‍य)

झ.  प्रबंध निदेशक, राज्‍य सहकारी बैंक (पैकेज कार्यान्वित करने वाले राज्‍य)

ञ.  भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि

ट.   भारतीय बैंक संघ के प्रतिनिधि

ठ.   अध्यक्ष, नाबार्ड या उनके प्रतिनिधि  - संयोजक

ड   विशेष आमंत्रित सदस्य (अध्यक्ष आरआरबी, एमडी, एससीएआरडीबी जो एनआईएमआरसी द्वारा लिए गए निर्णय    के अनुसार किसी अन्य प्रतिनिधि के अलावा आमंत्रित किए जा सकते हैं)।

भूमिका, जिम्मेदारी और शक्तियाँ

  • आरआरआर पैकेज के कार्यान्वयन की समीक्षा और मॉनीटरिंग करना
  • राज्‍यों द्वारा समझौता ज्ञापन का समय पर अनुपालन सुनिश्चित किया जाना
  • एडब्ल्यूसीएस और पीडब्ल्यूसीएस में विशेष लेखा परीक्षा उचित रूप से और समय पर सुनिश्चित करने के लिए विशेष  लेखा परीक्षा के लिए नियमावली का अनुमोदन करना
  • एडब्ल्यूसीएस, पीडब्ल्यूसीएस और व्यक्तिगत बुनकरों के संबंध में वित्तीय सहायता की समग्र राशि को अंतिम रूप देना  और अनुमोदन करना तथा इसे जारी करने की नाबार्ड से सिफारिश करना
  • सामान्य लेखा प्रणाली के कार्यान्वयन और उचित एमआईएस के लिए नीति निर्धारित करना
  • एडब्ल्यूसीएस और पीडब्ल्यूसीएस में एचआरडी पहलों के संबंध में नीति तैयार करना
  • व्‍यय विभाग, वित्‍त मंत्रालय की सहमति प्राप्‍त करने के बाद अर्थक्षम और संभावित रूप से अर्थक्षम सहकारी   सोसाइटियों को उचित रूप से परिभाषित कर प्राथमिक बुनकर    सहकारी सोसाइटियों और राज्‍य स्तरीय शीर्ष बुनकर सहकारी सोसाइटियों की पात्रता का निर्णय करना (अनुलग्‍नक-V)
  • सहकारी सोसाइटियों और व्यक्तिगत बुनकरों के लिए वित्तीय पैकेज के कार्यान्वयन की योजनाओं को तैयार करना,    संशोधित  और अनुमोदित करना (अनुलग्‍नक-VI) और (अनुलग्‍नक-VII) ।
  • भारत सरकार, राज्‍य सरकारों और नाबार्ड द्वारा हस्‍ताक्षर किए जाने वाले समझौता ज्ञापन (अनुलग्‍नक-III) का अनुमोदन करना और  निधियां जारी किए  जाने के बारे में निर्णय लेना ।
  • अध्यक्ष महोदय के  निर्णय के अनुसार पैकेज के कार्यान्वयन के संबंध में अन्य कोई मुद्दा ।

 

अवधि  समिति की बैठक तिमाही आधार पर या  आवश्‍यकतानुसार पहले होगी।

II राज्‍य कार्यान्वयन मॉनीटरिंग और समीक्षा समिति (एसआईएमआरसी)

एसआईएमआरसी की भूमिका राज्‍य में कार्यक्रम के समग्र कार्यान्वयन की योजना  बनाने, सुकर बनाने, समस्या हल करने और उस पर निगरानी रखने की है।

गठन

  1. राज्‍य के प्रधान सचिव (हथकरघा और वस्त्र)-अध्यक्ष
  2. नाबार्ड के प्रतिनिधि
  3. प्रबंध निदेशक, राज्‍य सहकारी बैंक
  4. प्रबंध निदेशक, शीर्ष बुनकर सोसाइटी
  5. ख्‍यातिप्राप्‍त सनदी लेखाकार
  6. राज्‍य स्तरीय बैंकर समिति के प्रतिनिधि-संयोजक
  7. विशेष आमंत्रित सदस्य (आवश्यकता के अनुसार एसआईएमआरसी द्वारा निर्णय लिया जानाहै)
  8. आयुक्‍त निदेशक, संबंधित राज्‍य के हथकरघा (नोडल विभाग)-संयोजक

भूमिका और जिम्मेदारी

  • राज्‍य में पुरूद्धार पैकेज के तहत समामेलित पैकेज के कार्यन्वयन पर नजर रखना
  • एडब्ल्यूसीएस और पीडब्ल्यूसीएस में उचित और समय पर विशेष लेखा परीक्षा सुनिश्चित करना
  • एडब्ल्यूसीएस और पीडब्ल्यूसीएस के संबंध में वित्तीय सहायता की मात्रा का पुनरीक्षण करना और उसे अंतिम रूप देना तथा एनआईएमआरसी  को जारी करने के लिए नाबार्ड से सिफारिश करना
  • सामान्य लेखा प्रणाली और उचित एमआईएस स्थापित करना
  • एडब्ल्यूसीएस और पीडब्ल्यूसीएस में एचआरडी पहलों का मार्ग निर्देश करना और उन पर निगरानी रखना
  • समय-समय पर एनआईएमआरसी, नाबार्ड आदि को आवश्यक सूचना और प्रतिसूचना प्रस्तुत करना
  • एडब्ल्यूसीएस और पीडब्ल्यूसीएस द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन का समय पर अनुपालन सुनिश्चित करना
  • फील्ड स्तरीय परिचालनात्मक समस्याओं को हल करना और राज य में पैकेज के समग्र कार्यान्वयन करने का मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण करना
  • राज्‍य में पैकेज के कार्यान्वयन से संबंधित अन्य कोई मुद्दा

अवधि - समिति की बैठक तिमाही आधार पर या  आवश्‍यकतानुसार पहले होगी।

III जिला कार्यान्वयन मॉनीटरिंग और समीक्षा समिति (डीआईएमआरसी)

 

हो सकता है कि सभी जिले डीआईएमआरसी गठित न कर सकें। अर्थक्षम और संभावित रूप से अर्थक्षम प्रथामिक बुनकर सोसाइटियों की संख्या के आधार पर क्लस्टर दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है जिन्हें पैकेज के तहत पुन पंजीकृत किया जा सकता है (वर्ष 2011-12 की लेखा परीक्षा विवरणी के अनुसार राज्‍य सरकार द्वारा इनकी पहचान की जानी है जिनका पुन पूंजीकरण आरआरआरपैकेज के तहत किया जाना है)।

गठन

  1. i. निदेशक, संबंधित राज्‍य का हथकरघा (नोडल विभाग)  का प्रतिनिधि - संयोजक
    1. नाबार्ड के प्रतिनिधि (जहां पुनर्पूंजीकरण के तहत सोसाइटियों की संख्या अधिकतम है वहाँ संबंधित जिला/प्रमुख जिले के जिला विकास प्रबंधक)
    2. सनदी लेखाकार
      1. उस जिले/प्रमुख जिले में अग्रणी बैंक के अग्रणी जिला प्रबंधक जहाँ पुनर्पूंजीकरण के तहत सोसाइटियों की संख्या अधिकतम है
      2. विशेष आमंत्रित सदस्य जब (कभी आवश्यक हो तो डीआईएमआरसी द्वारा निर्णय लिया जाना है)

भूमिका और जिम्मेदारी

  • पीडब्ल्यूसीएस में विशेष लेखा परीक्षा समय पर पूरी करना
  • जिले/क्लस्टर जिले में पीडब्ल्यूसीएस को वित्तीय सहायता की राशि को अंतिम रूप देना और एसआईएमआरसी और नाबार्ड को सिफारिश करना
  • जिले में कम्प्यूटरीकरण, एचआरडी और सीएएस का पर्यवेक्षण करना और
  • समय-समय पर एसआईएमआरसी, नाबार्ड आदि को आवश्यक सूचना और प्रतिसूचना प्रस्तुत करना।

आवधि समिति की बैठक तिमाही आधार पर या आवश्‍यकतानुसार पहले होगी।

अनुलग्‍नक- 2

आरआरआर पैकेज के तहत हथकरघा बुनकर सहकारी सोसाइटियों ( प्राथमिक और राज्‍य स्‍तरीय शीर्ष ) के अतिदेय ऋणों को माफ करने और उनका पुनरुद्धार करने के लिए दिशा-निर्देश

क्षेत्र

हथकरघा क्षेत्र के लिए पुनरुद्धार, सुधार तथा पुनर्गठन पैकेज में निम्‍नलिखित शामिल है -

(i)       प्राथमिक और शीर्ष स्‍तर पर हथकरघा सहकारी सोसाइटियों के 31 मार्च, 2010 की स्थिति अनुसार अतिदेय ऋणों और ब्‍याज  विस्‍तृत आकलन और तदोपरांत एकबारगी माफी  (केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों से  प्राप्‍य  को छोड़कर )

(ii)       हथकरघा बुनकर सहकारी सोसाइटियों के विधिक और संस्‍थायी ढांचे में  सुधार लाना

स्‍पष्‍टीकरण

  • एनपीए ऋणों के मामले में एनपीए के रुप में ऋण लेखा  को वर्गीकृत किए जाने  की तारीख से कोई ब्‍याज लागू नहीं होगा । अत  इस प्रकार के वर्गीकरण के बाद किसी अवधि के लिए एनपीए के रुप में वर्गीकृत ऋणों पर  ब्‍याज की माफी के लिए  सरकार से न तो दावा किया जाएगा और न हीं बुनकर ऋण लेने वाले से दावा किया जाएगा ।
  • ऋण संस्‍थानों द्वारा बीमा प्रीमियम/निरीक्षण प्रभार इत्‍यादि  की यदि  वसूली की जाती है, तो वह भारत सरकार/राज्‍य सरकार से ऋण माफी सहायता के लिए पात्र नहीं होगी ।
  • किसी सरकारी प्रायोजित योजना के अंतर्गत देय किसी भी प्रकार की  बैक एंडेड सब्सिडी का माफी धनराशि तय होने से पूर्व ऋणद संस्‍थानों द्वारा लाभ उठाया जाएगा ।

 

(iii)     अर्थक्षम  और संभावित रुप से अर्थक्षम  सोसा‍इटियां ही शामिल हैं ।

(iv)     प्रत्‍येक नए ऋण के लिए सीजीटीएमएसई के माध्‍यम से  3 वर्षो के लिए ऋण गारंटी के साथ 3 वर्ष के लिए अधिकतम 7 % की ब्‍याज सब्सिडी मुहैया कराकर 6% ब्‍याज पर हथकरघा बुनकरों की सहकारी सोसाइटियों को सस्‍ते ऋण मुहैया कराना ।

(v)       बाढ़, अग्नि इत्‍यादि जैसी आपदा के मामले में बुनकरों को राहत मुहैया कराने के लिए धनराशि सहित ऋण गारंटी के लिए पर्याप्‍त धनराशि के साथ तंत्र बनाना ।

(vi)       सभी अर्थक्षम और संभावित रुप से अर्थक्षम बुनकर सोसाइटियों के खातों का कंप्‍यूट्रीकरण करने और उसके लिए देशभर की सभी बुनकर सोसाइटियों के लिए एक साझा लेखांकन प्रणाली तैयार करना ।

(vii)      ऋण माफी के लिए इस पैकेज से अदायगी ऋण के एनपीए  बनने की तारीख को अतिदेय मूलधन के 100% और अतिदेय ब्‍याज के केवल 25% तक सीमित होगी शेष 75% अतिदेय ब्‍याज और समग्र अतिदेय दंड ब्‍याज, यदि कोई हो बैंक द्वारा एक पूर्व शर्त के रुप में बट्टे खाते में डाला जाएगा ।

(viii)     राज्‍य सरकारों के नियंत्रणाधीन संस्‍थानों/एजेंसियों सहित केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों से प्राप्‍य राशि जो  तकरीबन 300 करोड़ रुपये होगी,  एक पूर्व शर्त के रुप में अलग से पैकेज से बाहर भुगतान की जाएगी ।

(ix)       पुनर्पूंजीकरण सहायता  जारी करना समझौता ज्ञापन के अनुसार राज्‍य सरकारों द्वारा संस्‍थायी और विधिक सुधार करने के लिए प्रतिबद्धता से सम्‍बद्ध  होगा।  राज्‍य सरकारों द्वारा समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किए जाने और विशेष लेखा परीक्षा पूरी किए जाने के बाद  80 प्रतिशत धनराशि जारी की जाएगी और शेष 20 प्रतिशत राशि विधिक और संस्‍थायी सुधारों की प्रतिबद्धता पूरी किए जाने के बाद जारी की जाएगी।

(x)       भारत सरकार की कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजना  (एडीडब्‍ल्‍यूडीआर) की तर्ज पर, जिसमें बैंक अतिदेय कृषि ऋणों को बट्टे खाते में डालने के बाद ही नए ऋण जारी करने को सहमत हुए, पैकेज के अंतर्गत हानियों का  पुनर्पूंजीकरण और बैंकों को बकाया ऋणों की अदायगी नए ऋण देने की प्रतिबद्धता दिए जाने के अध्‍यधीन होगी।  पुराने बकाया ऋणों की प्राप्ति के स्‍थानपर नए ऋण प्रदान करने के लिए बैंकों की सहमति की प्रतिबद्धता हानि आकलन दिशा-निर्देशों का अभिन्‍न भाग होगा।

(xi)        नाबार्ड  योजना के लिए कार्यान्‍वयन एजेंसी है।  तथापि, राष्‍ट्रीय, राज्‍य और जिला स्‍तरों पर योजना के कार्यान्‍वयन के मार्ग-निर्देशन और निगरानी के लिए कार्यान्‍वयन और निगरानी समितियां गठित की जाएगी। प्रमुख स्‍टेकहोल्‍डरों अर्थात् नाबार्ड, भारत सरकार तथा  राज्‍य सरकारों द्वारा समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किए जाने के बाद योजना कार्यान्‍वित की जाएगी।

(xii)      इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि धोखाधड़ी, गबन तथा दुर्विनियोजन इत्‍यादि के कारण हुई हानि के लिए धनराशि नहीं दी गई है जिसे संबंधित संस्‍थानों यथा प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइटियों/शीर्ष बुनकर सोसाइटियों (स्‍टेकहोल्‍डरों) द्वारा वहन किया जाना है ।

व्‍याख्‍या और कठिनाइयों के समाधान के लिए शक्तियां

 

  • इस योजना के किसी पैरा  या उसके तहत जारी किसी अनुदेश  की व्‍याख्‍या के संबंध में  उत्‍पन्‍न किसी संदेह के मामले में एनआईआरएमसी  मामले का समाधान करेगी और एनआईआरएमसी का निर्णय अंतिम होगा।
  • योजना अथवा उसके अंतर्गत किन्‍हीं अनुदेशों के प्रावधान को प्रभावी बनाने में उत्‍पन्‍न किसी कठिनाई के मामले में भारत सरकार कठिनाई के  समाधान के प्रयोजन से जो  आवश्‍यक अथवा अनिवार्य समझे, आदेश द्वारा कर सकती है ।
  • एनआईआरएमसी को प्रचालनात्‍मक आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए इस योजना में समुचित संशोधन करने की शक्तियां होगी ।
  • हथकरघा बुनकर सहकारी सोसाइटियों की हानि आकलन प्रक्रिया के प्रयोजन से विशेष लेखा परीक्षा नियम पुस्तिका तैयार की जाएगी । इससे देशभर की शीर्ष बुनकर सहकारी सोसाइटियों और प्राथमिक बुनकर सहकारी सोसाइटियों में हानि आकलन की कार्रवाई करने में लेखा परीक्षकों के लिए विस्‍तृत दिशा-निर्देश प्राप्‍त होंगे । इस नियम पुस्तिका में न केवल बुनकर सोसाइटियों द्वारा व्‍यय की गई पुनर्पूंजीकरण की वास्‍तविक हानि का आकलन करने में सुविधा होगी बल्कि उनकी कार्य प्रणाली की वास्‍तविक जानकारी मिलेगी और समस्‍याओं व उनके संभावित हल की भी जानकारी मिलेगी । लेखा परीक्षक वित्‍त वर्ष 2011-12 (31 मार्च, 2012 के अंत तक) के संदर्भ में सोसाइटियों के लेखों की विशेष लेखा परीक्षा करेंगे। तथापि, वर्ष 2009-10 के लेखा परीक्षित लेखों के आधार पर वित्‍तीय सहायता प्रदान की जाएगी ।
  • उपर्युक्‍त उद्देश्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए आशा है कि  विशेष लेखा परीक्षा नियम पुस्तिका तैयार की जाएगी जिसमें व्‍यापक रुप से निम्‍नलिखित पहलुओं को शामिल किया जाएगा -

क्र. सं.

विवरण

कवरेज

1.

उद्देश्‍य

शीर्ष एवं प्राथमिक हथकरघा बुनकर सहकारी सोसाइटियों की हानि का आकलन

2.

कार्य पद्धति

  • परिभाषा के अनुसार शुद्ध राशि, शुद्ध प्रयोज्‍य संसाधनों, बिक्री, ऋण सीमा परिवर्तन, इत्‍यादि के संदर्भ में अर्थक्षम तथा संभावित रुप से अर्थक्षम
  • हानि के आकलन के लिए एक समान मानदंड और मानक तैयार करना व उपयोग करना
  • भारत सरकार और राज्‍य सरकारों व बैंकों के लिए पुनर्पूंजीकरण का अंश निर्धारित करना
  • पूंजी पर्याप्‍तता और इसके आकलन के लिए मानक

3.

विशेष लेखा परीक्षा की पूर्वापेक्षा/विशेष लेखा परीक्षा के लिए अपेक्षित दस्‍तावेज अथवा रिकार्ड

  • विवरण/रिटर्न
  • शेष पुष्टि प्रमाण पत्र एवं ऋण स्थिति प्रमाण पत्र
  • बही
  • अन्‍य रिकार्ड, स्‍टॉक इत्‍यादि का मूल्‍यांकन

4.

लेखा परीक्षा कार्रवाई के दौरान तुलनपत्र में  विभिन्‍न मदों में सुधार

 

क.

नकदी

  • अल्‍प नकदी

ख.

बैंक में जमा राशि

  • अल्‍प नकदी

ग.

भारत सरकार/राज्‍य सरकार से प्राप्‍त होने वाली अन्‍य राशि –सभी पूर्व प्रतिबद्धताएं

  • आकलन/गणना
  • सीएआरईउपलब्‍ध कराई जाने वाली अपफ्रंट राशि

घ.

निवेश

  • विभिन्‍न निवेशों के मूल्‍यांकन की कार्य प्रणाली
  • हानि,  यदि कोई हो, की बुकिंग
  • लाभांश
  • अन्‍य सोसाइटियों में जमा राशि, जिसका परिशोधन किया जा रहा है

ड.

सदस्‍यों से बकाया ऋण (परिसम्‍पत्ति पक्ष )

  • विवेचनात्‍मक आकलन

 

च.

सदस्‍यों से बकाया ऋण (देनदारी पक्ष )

  • हानि यदि कोई हो*,  का विवेचनात्‍मक आकलन

 

छ.

वित्‍तीय एजेंसी से उधारी (ऋण)

  • बकाया उधारी का आकलन
  • बकाया ऋणों का आकलन
  • ब्‍याज का आकलन- कुल और एनपीए बनने तक
  • द्विभाजन – मूलधन और ब्‍याज तथा ब्‍याज को आगे द्विभाजित किया जाएगा जिसमें 25% * पुनर्पूंजीकरण के लिए होगा तथा शेष 75% बैंकों द्वारा वहन किया जाएगा।

ज.

अंतिम स्‍टॉक (सूचिका)

  • कच्‍चे माल और तैयार माल, दोनों के स्‍टॉक के मूल्‍यांकन के लिए मानदंड
  • स्‍टॉक में कमी
  • एक वर्ष से अधिक का स्‍टॉक हानि* के रुप में लिया जाएगा
  • प्रमाणपत्र

झ.

विविध ऋण दाता

  • विवेचनात्‍मक आकलन के लिए भुगतान
  • एनसीडीसी सहित लेकिन वित्‍तीय संस्‍थानों* को छोड़कर विभिन्‍न एजेंसियों से उधारियों पर बकाया देयताएं

ञ.

 

विविध कर्जदार

  • विवेचनात्‍मक आकलन के लिए भुगतान
  • सरकारों के अलावा प्राप्‍य तथा एक वर्ष से अधिक लंबित राशि
  • परिष्‍कृत माल के बिना बुनकरों की मजदूरी
  • परिष्‍कृत माल * के लिए बुनकरों की बकाया मजदूरी
  • संगत क्रियाकलापों और धागे* की खरीद  के संबंध में अन्‍य बकाया देयताएं

भूमि एवं भवन

  • आकलन
  • मूल्‍य हृास*
  • किराया, कर इत्‍यादि

ठ.

मशीनरी

  • मूल्‍यांकन एवं मूल्‍यहृास

 

निर्धारित परिसम्‍पत्ति

  • मूल्‍यांकन एवं मूल्‍यहृास

5.

पूंजी पर्याप्‍तता

  • पूनर्पूंजीकरण उपरांत के एनडीआर को कार्यशील पूंजी आवश्‍यकता के 10% के स्‍तर पर लाना

6.

अन्‍य

  • हानि आकलन को प्रभावी करने वाली कोई अन्‍य मद जो ऊपर सम्मिलित नहीं की गई है

 

* विशेष श्रेणी के राज्‍यों जहां भारत सरकार और राज्‍य सरकार का अनुपात क्रमश 9010 होगा, को छोड़कर सभी राज्‍यों में  भारत सरकार  और राज्‍य सरकार द्वारा क्रमश 8020  के अनुपात में  हिस्‍सेदारी की जाएगी ।

नियम पुस्तिका एनआईआरएमसी द्वारा अनुमोदित की जाएगी ।

अनुलग्नक-3

व्यक्तिगत बुनकरों, स्व-सहायता समूहों (एसएचजी),संयुक्त जबावदेह समूहों (जेएलजी) और मास्टर बुनकरों की अतिदेय कार्यशील पूँजी और सावधि ऋणों को माफ करने के लिए दिशा-निर्देश

1. व्यक्तिगत बुनकरों, स्व-सहायता समूहों, संयुक्त जबावदेही समूहों और मास्टर बुनकरों की कार्यशील पूँजी और सावधि ऋणों को शामिल करके आरआरआर पैकेज के कार्यान्वयन के दिशा-निर्देश नीचे दिए गए हैं।

2. क्षेत्र

  • इस योजना में प्रत्यक्ष ऋण शामिल होंगे जिन्हें सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्‍य/जिला केन्द्र सहकारी बैंकों और राज्‍य/प्राथमिक सहकारी कृषि विकास बैंको, इसमें इसके बाद ऋण दाता संस्थान के रूप में उल्लिखित किया जाएगा, मास्टर बुनकरों सहित व्यक्तिगत बुनकरों, स्व-सहायता समूहों, संयुक्त जबावदेही समूहों को शामिल किया जाएगा जो प्रति व्यक्ति 50,000 रूपये की अधिकतम अतिदेय राशि के अध्यधीन है (ब्याज के पात्र हिस्से सहित अर्थात् अतिदेय ब्याज का 25 प्रतिशत)।
  • यह योजना वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अधिसूचना की तारीख से प्रभावी होगी।

3 परिभाषा

  • प्रत्यक्ष ऋण का तात्पर्य उन सावधि ऋणों से है जिन्हें करघे प्राप्त करने और आधुनिकीकरण के लिए प्राप्त किया गया है तथा जिन्हें उपर्युक्त पैरा 2.1 में दर्शाए गए ऋणकर्त्ताओं की श्रेणियों और मास्टर बुनकरों को दिया गया है ताकि ऋणकर्ता संस्थानों को पूर्व प्रलेखीकरण करके बैंक के रिकार्ड के अनुसार उनके अधीन कार्य कर रहे बुनकरों की सहायता की जा सके।

स्पष्टीकरण

कारीगर ऋण कार्ड, स्व-रोजगार ऋण कार्ड और प्रधानमंत्री रोजगार योजना आदि जैसे कार्यक्रमों के तहत हथकरघा के परियोजनार्थ लिए गए प्रत्यक्ष ऋण इस योजना में शामिल होंगे।

3.2 मास्टर बुनकरों  को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया जाएगा

  • वह स्वयं अपने/किराय पर लिए गए करघों पर मजदूरी के आधार पर बुनकरों को रोजगार प्रदान करता हो और निविष्टि (सूत, रंगाई, रसायन) की आपूर्ति, बुनकरों की आपात जरूरतों को पूरा करने के लिए नकद अग्रिम  देने जैसी अन्य सेवाओं और डिजाइनिंग के संदर्भ में उनको विभिन्न प्रकार की सेवाओं में मार्गदर्शन प्रदान करता हो;
  • उसे कपड़े का उत्पादन और विपणन कार्य करना चाहिए तथा वह केवल एक व्यापारी के रूप में कार्य न करता हो जो केवल तैयार माल प्राप्त करता है और उन्हें बेच देता है;
  • मास्टर बुनकर द्वारा काम पर लगाए गए बुनकर वरीयता उसी गाँव/आस पास के क्षेत्र में रहते हों और कार्य करते हों;
  • नाबार्ड के दिनांक 01.08.2007 के परिपत्र संख्या 143/पीसीडी-19/2007 (सभी बैंको को संबोधित) के संदर्भ में मास्टर बुनकरों को बैंकों द्वारा दिए गए ऋण इसमें शामिल होंगे।

4. पात्र राशि

  • माफ करने के लिए पात्र राशि (इसमें इसके पश्चात पात्र राशि के रूप में उल्लेख किया गया है) में वह राशि शामिल होगी जो 31 मार्च, 2010 की स्थिति की अनुसार अतिदेय है (मूलधन और ब्याज 25 प्रतिशत सहित) लेकिन आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार भारत सरकार/ राज्‍य सरकार की किसी योजना या बैंक के ओटीएस के तहत विगत में ऋण दाता संस्थानों द्वारा सामान्य अवधि में पुर्निधारित किए गए ऋण शामिल नहीं हैं जिन्हें योजना की तारीख तक ऋण दाता संस्थानों द्वारा  एसएआरएफएईएसआई अधिनियम/ अन्य विधायी कानूनों में शामिल किए जा रहे हैं।

स्पष्टीकरण

क.    प्लेज या हाइपोथिकेशन के बदले दिए अग्रिम इस योजना में शामिल हो सकते हैं।

ख.    कारपोरेट, साझीदार फर्मों, बुनकर सहकारी सोसाइटियों और इसी प्रकार के संस्थानों को दिया गया  धन इस योजना में शामिल नहीं होगा।

  • इस योजना में निहित किसी बात को होते हुए 31 मार्च, 2010 के बाद ऋण दाता संस्थानों द्वारा संवितरित ऋण इस योजना पर लागू नहीं होगा।

5 माफी

  • इस योजना का प्रयोजन ऋण प्रदान करके अवरूध हुई वर्तमान ऋण लाइनों को खोलकर हथकरघा बुनकरों के क्रियाकलापों को शुरू करना है। ऋण दाता संस्थानों से यह अपेक्षा की जाती है कि वह उन मामलों को गुण-दोषों के आधार पर छाँटे जिन्हें योजना के तहत शामिल किया जाना है । ऐसे मामले में ऋण दाता संस्थान अतिदेय ब्याज का 75 प्रतिशत और सम्पूर्ण दंडात्मक ब्याज माफ करेंगे। बाकी राशि भारत सरकार  और संबंधित राज्‍य सरकार द्वारा 8020 के अनुपात में माफ की जाएगी और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्‍यों, झारखण्ड छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर जैसे विशेष श्रेणी के राज्‍यों के लिए यह 9010 के अनुपात में माफ की जाएगी। ऋण दाता संस्थानों पर यह निर्भर करेगा कि वे अलग-अलग मामलों के आधार पर निर्णय लें और वे इस मामले में अपने निर्णयों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।
  • उपर्युक्त के अनुसार किसी विशेष लाभार्थी के ऋण और ब्याज को तभी माफ किया जाएगा जब शाखा साथ-साथ इस बात पर सहमत होती है कि वह उस लाभार्थी को 20,000 रूपये या अधिक का नया ऋण देगी। यदि वह बैंक उस बुनकर को साथ-साथ नया ऋण देने का इच्छुक नहीं है तो उस बुनकर का ऋण इस योजना में शामिल नहीं होगा। इसलिए नए ऋण के लिए नया मंजूरी आदेश 50,000/- रुपए से अधिक का ब्‍याज शामिल किए जाने से पूर्व का होगा तो इस पैकेज के तहत माफी सहायताकी राशि 50,000/- रुपए सीमित की जाएगी और इस सीमा से अधिक की राशि बुनकर उधारकर्ता से ली जाएगी या ऋणदाता संस्‍थानों द्वारा बट्टे खाते में डाली जाएगी ।

6. कार्यान्वयन

  • इस योजना को प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया दोनों में व्यापक प्रचार किया जाएगा जिसमें पात्र बुनकरों को सूचित किया जाएगा कि वे माफी के लिए अपनी बैंक शाखा में आवेदन करें।
  • एक बारगी उपाय के रूप में इस योजना में शामिल किए गए ऋण दाता संस्थानों की प्रत्येक शाखा उन ऋणकर्ताओं की सूची तैयार करेगी जो इस योजना के तहत माफी के पात्र हैं और इसे हथकरघा बुनकर के रूप में उधारकर्ता की स्थिति के बारे में राज्‍य सरकार के नोडल विभाग के सक्षम प्राधिकारी के साथ परामर्श करके किया जाएगा और भविष्य में उसकी ऋण की जरूरतों का संभावित आकलन भी किया जाएगा। यह सूची ऋण दाता संस्थाओं की शाखाओं के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाएगी और इसे उनके विवेक के अनुसार निर्धारित तारीख तक प्रदर्शित किया जाएगा लेकिन यह इस योजना के जारी होने की तारीख से 60 दिन के बाद नहीं होगा। यदि संभव हो तो यह सूची ऋणकर्ता संस्थानों की वेबसाइट में भी डाली जा सकती है। इसके  बाद छाँटे गए ऋणकर्ताओं को योजना के अंतर्गत शामिल किए जाने के लिए उचित औपचारिक पत्र द्वारा सूचित किया जा सकता है जिसमें उनसे भविष्य में हथकरघा बुनाई के कार्य करने में उनकी इच्छा प्राप्त की जा सकती है जो वे ऋण दाता संस्थानों से ऋण प्राप्त करके कर सकते हैं।
  • जहाँ वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा  योजना से संबंधित सभी संभावित और अनुसंगी मामलों के संबंध में ऋण दाता संस्थानों को अनुपूरक अनुदेश जारी किया जाएगा लेकिन योजना के कार्यान्वयन में निर्णय से उत्पन्न सभी कानूनी विवादों को ऋण दाता संस्थानों द्वारा निपटाया जाएगा।
  • नाबार्ड, ऋण दाता संस्थानों को माफी सहायता जारी किए जाने के लिए नोडल एजेंसी होगी। इसे नाबार्ड द्वारा यथा निर्धारित ढंग से उनके द्वारा पेश किया जा सकता है।
  • ऋण दाता संस्थान 3 वर्ष के लिए 6% ब्‍याज दर पर हथकरघा बुनकरों को नए ऋण देंगे (उपर्युक्‍त पैरा 5.2 के अनुसार) और भारत सरकार का ब्‍याज परिदान बैंकों द्वारा लगाए गए ब्‍याज का अंतर होगा तथा उधारकर्ता द्वारा 6%  वहन किया जाएगा जो योजना के रियायती ऋण घटक के तहत यथानिर्धारित 7% के अध्‍यधीन होगा। ऐसे ऋण सीजीटीएमएसई द्वारा ऋण गारंटी के तहत भी शामिल किए जाएंगे जिसके लिए भारत सरकार द्वारा वार्षिक फीस और सेवा प्रभार वहन किया जाएगा ।

 

7. ऋणदाता संस्थानों की बाधताएँ

  • प्रत्येक ऋणदाता संस्थान इस योजना के तहत पात्र बुनकरों की सूचियों की शुद्धता और विश्वसनीयता तथा प्रत्येक हथकरघा बुनकर को पात्र माफी सहायता के विवरण के लिए जिम्मेदार होगा । इस योजना के प्रयोजनार्थ किसी ऋणदाता संस्थान द्वारा वह कोई भी दस्तावेज, जिसको रखा गया है, जो सूची तैयार की गई है और जो प्रमाण-पत्र जारी किया गया है उस पर  ऋण दाता संस्थान के प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर और पदनाम होने चाहिए।
  • प्रत्येक ऋणदाता संस्थान प्रत्येक राज्‍य के लिए एक या अधिक शिकायत निवारण अधिकारियों की नियुक्ति करेगा (उस राज्‍य में शाखाओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए)। संबंधित शिकायत निवारण अधिकारी का नाम और पता उधारदाता संस्‍थान की प्रत्येक शाखा मे प्रदर्शित किया जाएगा। शिकायत निवारण अधिकारी को यह अधिकार प्राप्त होगा कि वह संतप्त बुनकरों से अभ्यावदेन प्राप्त करें और उस पर उचित आदेश जारी करें। शिकायत निवारण अधिकारी का आदेश अंतिम होगा।
  • यदि किसी हथकरघा बुनकर को इस आधार पर शिकायत है कि उसका नाम पैराग्राफ 6.2 में उल्लिखित सूची में शामिल नहीं किया गया है तो वह उस शाखा के माध्यम से अभ्यावेदन कर सकता है जहाँ से उसने ऋण प्राप्त किया है या वह अपनी शिकायत संबंधित ऋण दाता संस्थान के शिकायत निवारण अधिकारी को सीधे ही अभ्यावदेन भेज सकता है और ऐसे प्रत्येक अभ्यावेदन का निपटान उसकी प्राप्ति के 30 दिन के अंदर किया जाएगा।

 

8. लेखा परीक्षा

प्रत्‍येक ऋण संस्‍थान के खाते जिसने इस योजना के अंतर्गत माफी सहायता प्रदान की है (शाखाओं पर अनुरक्षित खातों की बहियों सहित ), भारत सरकार द्वारा निर्धारित की जाने वाली प्रक्रिया के अनुसार एक लेखा परीक्षा के अध्‍यधीन होगी। लेखा परीक्षा समवर्ती लेखा परीक्ष्‍ाकों, सांविधिक लेखा परीक्षकों अथवा भारत सरकार द्वारा यथा अनुदेशित विशेष लेखा परीक्षकों द्वारा की जाएगी । भारत सरकार इस बात से संतुष्‍ट होने पर कि ऐसा करना आवश्‍यक है, किसी ऋणद संस्‍थान अथवा ऐसे ऋणद संस्‍थानों की एक अथवा अधिक शाखाओं के मामले में विशेष लेखा परीक्षा का निर्देश दे सकती है ।

9. प्रचार-प्रसार

  • इस दिशा-निर्देश  की अंग्रेजी तथा शासकीय भाषा अथवा राज्‍य/केन्‍द्र शासित प्रदेश की भाषाओं में तैयार एक प्रति योजना के अंतर्गत शामिल ऋणद संस्‍थानों की प्रत्‍येक शाखा पर प्रदर्शित की जाएगी।
  • इस दिशा-निर्देश  की एक प्रति वस्‍त्र मंत्रालय, भारत सरकार, नाबार्ड तथा सभी ऋणद संस्‍थानों की वेबसाइट पर उपलब्‍ध रहेगी ।

 

10. व्‍याख्‍या और कठिनाइयों के समाधान के लिए शक्तियां

  • इस दिशा-निर्देश  के किसी पैरा या उसके तहत जारी किसी अनुदेश  की व्‍याख्‍या के संबंध में  उत्‍पन्‍न किसी संदेह के मामले में एनआईआरएमसी  समाधान करेगी और एनआईआरएमसी का निर्णय अंतिम होगा।
  • दिशा-निर्देश  अथवा उसके अंतर्गत जारी किन्‍हीं अनुदेशों के प्रावधान को प्रभावी बनाने में उत्‍पन्‍न किसी कठिनाई के मामले में भारत सरकार कठिनाई के  समाधान के प्रयोजन से जो  आवश्‍यक अथवा अनिवार्य समझे, आदेश द्वारा कर सकती है ।

 

11. एनआईआरएमसी को प्रचालनात्‍मक आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए इस योजना में समुचित संशोधन करने की शक्तियां होगी ।

अनुलग्नक – 4

आरआरआर पैकेज के तहत कानूनी और संस्थागत सुधार

हथकरघा बुनकर सहकारी समितियों का पुनरूद्धार, सुधार और पुनर्गठन पैकेज, कानूनी और संस्थागत सुधार पर निर्भर होगा। यह भी आवश्यक है कि बुनकर समितियों के कार्यकलाप में कानूनी तथा प्रशासनिक ढांचे में विशिष्ट परिवर्तन करने हेतु, औपचारिक वचनबद्धता करें। यद्यपि पैकेज में भाग लेना पूर्णत स्वेच्छा पर निर्भर करेगा, परन्तु एक बार अपनी सहमति देने के बाद संबंधित राज्‍य सरकार तथा बुनकर समितियों को पैकेज पूर्ण रूप से स्‍वीकार करना पड़ेगा ।

क. कानूनी सुधार

  1. प्राथमिक बुनकर सहकारी समितियों को अर्थक्षम संभावित रूप से अर्थक्षम तथा गैर -अर्थक्षम में वर्गीकृत किया गया है। गैर -अर्थक्षम इकाइयों को आरआरआर पैकेज के क्षेत्राधिकार से  बाहर रखा गया है। गैर-अर्थक्षम सहकारी समितियों के भाग्‍य का निर्णय पूर्णत राज्‍य सरकारों को लेना है, क्योंकि पैकेज में इनके लिए कोई पुनर्पूंजीकरण  का प्रस्ताव नहीं है
  2. राज्‍य, राज्‍य सहकारी समिति अधिनियम/समितियों के उप-नियमों के संगत प्रावधानों में संशोधन की पहल करे ताकि यह सुनिश्चित हो कि -
  • बुनकर समितियों के कार्यकलाप और प्राथमिक तथा शीर्ष बुनकर सहकारी समितियों के निदेशक बोर्डों  का चुनाव समय से तथा प्रजातांत्रिक  ढंग से हो
  • प्राथमिक तथा शीर्ष बुनकर समितियों की व्यवस्था में व्यावसायीकरण लाना
  • हथकरघा बुनकर समूहों/ग्रुप के सदस्यों, मास्टर बुनकरों और हथकरघा क्षेत्र की उत्पादक कम्पनियों के वित्त पोषण के लिए सहकारी बैंकों को सक्षम बनाना
  • निम्नलिखित के संबंध में प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में कार्यात्मक स्वायत्ता सुनिश्चित करना-

1.  कार्मिक नीति एवं स्टाफिंग पैटर्न

2.  भर्ती, तैनाती और स्टाफ को मुआवजा

3.  आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था, ऑडिटरों की नियुक्ति तथा लेखा-परीक्षा की क्षतिपूर्ति

4.  सेवा शर्तें, नियुक्ति, वेतन संरचना और स्टाफ के चयन की पद्धति

5.  समितियों को अपने कार्य संचालन के लिए भौगोलिक सीमाओं में प्रतिबंधित किए जाने की अनिवार्यता के बिना किसी भी स्तर पर इस संरचना में प्रवेश और निकास की स्वतंत्रता

  1. राज्‍य के अन्दर और  बाहर सरकारी अथवा गैर-सरकारी संस्थानों/एजेंसियों को उत्पादों का विपणन करने पर लगे प्रतिबंधों को हटाना
  2. बुनकर सहकारी समितियों द्वारा रोजमर्रा के वित्तीय निर्णय लिए जाने और बी.आर. अधिनियम, 1949 के अंतर्गत नियंत्रित किसी वित्तीय संस्थान के साथ वित्तीय लेन-देन करने पर लगे प्रतिबंध, यदि कोई हो, को हटाना। बुनकर सहकारी समितियों को बाजार में अपनी ऋण साख के आधार पर अपने संसाधनों को पूरा करने के लिए अन्य वित्तीय संस्थानों से उधार लेने की स्वतंत्रता
  3. वित्तीय व्यवस्था में राज्‍य की प्रत्यक्ष दखलंदाजी, जो व्‍यवस्‍था के लिए बाधक हो, पूर्णत समाप्त किया जाना
  4. हथकरघा उत्पादों की अद्वितीयता के परिरक्षण और विद्युतकरघों द्वारा अप्राधिकृत नकल किए जाने से रोकने के लिए वस्तुओं का भौगोलिक संकेतन (पंजीकरण एवं उत्पादन), अधिनियम, 1999 को उपयोग में लाना। सभी हथकरघा उत्‍पादों पर हथकरघा मार्क का अनिवार्य उपयोग किया जाए
  5. यह सुनिश्चित करना कि मुख्य कार्यकारी अधिकारियों तथा बुनकर सहकारी समितियों के सभी कर्मचारियों की नियुक्ति सहकारी समितियों द्वारा कतिपय मानकों के अन्दर स्वयं की जाए और यह भी कि वे अपनी सेवा शर्तों के अनुसार निर्णय लें। सभी कर्मचारी केवल बुनकर सोसायटी बोर्ड के प्रति ही जवाबदेह हो

ख. संस्थागत सुधार

  1. पूँजी की पर्याप्तता और भण्डारण के लिए सही मानक तय किए जाएं जिससे वे सुचारु रुप  से कार्य कर  सकें
  2. प्राथमिक तथा शीर्ष समितियों के सभी बकाया तथा लंबित छूट/दावों के निपटान की व्यवस्था करना
  3. बेकार पड़े करघों को पुन सक्रिय करना और अर्थक्षम/संभावित रूप से अर्थक्षम सोसायटियों में व्यर्थ/निष्क्रिय करघों को पुनरुज्‍जीवित करना
  4. बुनकरों से ली गयी भविष्य निधि राशि के उपयुक्त निवेश तथा प्रशासन के लिए नियम बनाने की आवश्यकता है जिसे वर्तमान में पी.डब्ल्यू.सी.एस. में रखा गया है, डी.सी.सी.बी. के बचत खाते में रखा जाए
  5. बुनकरों के ऋण पर ऋण गारंटी के लिए तंत्र बनाना ।
  6. आग, बाढ़ आदि जैसे प्राकृतिक प्रकोप से भण्‍डार, निर्माणाधीन कपड़े के नुकसान/क्षति  के कारण बुनकरों की उत्पादन हानि के लिए बीमा योजना शुरू करना
  7. सक्षमता के आधार पर समितियों का पुनर्गठन करने की आवश्यकता
  8. बुनकर सहकारिताओं के लेखों का अद्यतन करने के लिए तात्‍कालिक  उपाय करना।
  9. शीर्ष तथा प्राथमिक बुनकर समितियों की अद्यतन लेखा परीक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है
  10. पैकेज में प्रस्ताव के अनुसार शीर्ष तथा प्राथमिक बुनकरों की बैलेंस शीट ठीक करने के लिए उपाय करना
  11. शीर्ष एवं प्राथमिक बुनकर सहकारी समितियों को वित्तीय संस्थानों से ऋण उपलब्ध कराना
  12. सी.ए. द्वारा सभी प्राथमिक बुनकर क्रेडिट समितियों की नियमित ऑडिट करना तथा यह सुनिश्चित करना कि समिति के विवेकानुसार राज्‍य सरकार की वर्तमान ऑडिट मशीनरी अथवा सी.ए. द्वारा सभी प्राथमिक बुनकर सहकारी समितियों का नियमित ऑडिट हो
  13. नाबार्ड द्वारा साझा लेखांकन प्रणाली (सी.ए.एस.) तथा प्रबंध सूचना प्रणाली (एम.आई.एस.) अपनाने के लिए

(i)  उत्तरदायित्व एवं हाउसकीपिंग कम्पोनेंट शुरू करना

(ii) घाटा उठाने वाले शोरूम को बंद करना/ छटनी करना/क्षेत्रीय कार्यालयों का विलय/उनके प्रचालन को दुरूस्त करके व्यवसाय का पुनर्गठन करना

(iii)अधिक पारदर्शी तथा उत्तरदायी प्रबंधन प्रक्रिया से अनिवार्य प्रशिक्षण के लिए एच.आर.डी. घटक (सी.ए.एस., एम.आई.एस. व्यवसाय विकास योजना तैयार करना आदि ) । इस संबंध में नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षण की व्यवस्था करना

प्राथमिक स्तर पर बुनकर समिति के कम्प्यूटरीकरण के लिए योजना शुरू करना।

इस पैकेज के अंतर्गत जारी निधियों को बुनकर समितियों के संबंध में निम्नलिखित कदम उठाकर, आरआरआर पैकेज के वास्तविक कार्यान्वयन की प्रगति से जोड़ा जाएगा-

  • शीर्ष और  प्राथमिक बुनकर सहकारी समितियों को आवश्यक पूर्व शर्त के रुप में राज्‍य सरकार की देय राशि जारी करना
  • कानूनी और संस्थागत सुधार प्रक्रिया आरंभ करने हेतु कदम उठाना

इसके अलावा राज्‍य सरकार इस बात पर भी सहमति देगी -

(i)वह सिद्धांत कि  अर्थक्षम अथवा संभावित रूप से अर्थक्षम सोसायटियों को ही सहायता उपलब्‍ध होगी (पैकेज में यथापरिभाषित) और गैर- अर्थक्षम सोसायटियों का परिसमापन किया जाना चाहिए ।

(ii)संस्थागत समितियाँ, जो पात्र है, को सहायता की मात्रा का निर्धारण इस आधार पर होगा कि कार्यान्वयन एजेंसी अर्थात नाबार्ड की देखरेख में वर्ष 2009-10 तक विशेष ऑडिट होगा।

(iii)बुनकर समितियों को व्यवसाय की वृद्धि एवं ऋण प्रबन्धन में सक्षम बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्मिकों को प्रशिक्षित करने, आंतरिक लेखांकन, रिपोर्टिंग और नियंत्रण प्रणालियों को अद्यतन करने के लिए कार्यक्रम में भाग लेना।

 

स्रोत: भारत सरकार का विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय

 



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