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बिहार राज्य के पंचायत की सफल कहानी

बिहार राज्य के पंचायत की सफल कहानी

बगहा 2 पंचायत समिति, जिला चंपारण, बिहार

तालाब का जीर्णोद्धार-अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की सहायता करना|

बगहा 2 पंचायत समिति में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की आबादी 25 प्रतिशत है| अनुसूचित जनजाति के लोग नेपाल से हैं तथा वास्तव में बहुत गरीब है | पंचायत समिति उन्हें इंदिरा आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, अजा/अजजा छात्रों को छात्रवृत्ति आदि का आबंटन कर रही है | पंचायत समिति सूखे तालाब का जीर्णोद्धार कर रही है तथा इमारती लकड़ी, चारा, ईंधन एवं फल देने वाले 25,000 पेड़ लगा रही है और मछली पालन से संबंधित एक परियोजना शुरू की है | पंचायत समिति की इन पहलों से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की पोषण संबंधी आवश्यकताएँ पूरी होंगी तथा वे आय प्रदान करने वाली गतिविधियों में शामिल होंगे क्योंकि जलाशय में मछलियाँ होंगी और यह पशुओं जैसे कि बकरी, सुअर को पेयजल के अलावा पेड़ उपलब्ध कराएगा | यह पंचायत के लिए भी आय प्रदान करने वाली परिसंपत्ति है |

गोपालगंज जिला परिषद, बिहार: ई-किसान भवन की स्थापना

कृषि विभाग के साथ मिलकर गोपालगंज जिला परिषद ने एक ई-किसान भवन का निर्माण किया है जिसका उद्देश्य इस प्रकार है:

(क)  आवासीय प्रशिक्षण के माध्यम से भूमि से खेत में प्रौद्योगिकी का परिवर्तन

(ख) मौसम की भविष्यवाणी

(ग)  कीमत की भविष्यवाणी

गन्ने के इस बेल्ट में इलेक्ट्रनिक किसान (ई-किसान) भवन निर्मित करने की इस पहल से हजारों लोगों को लाभ होगा | अब किसानों को नई प्रौद्योगिकी, निविष्टि, उत्पादों की कीमत, चीनी मिलों द्वारा खरीद की संभावित तिथि आदि के बारे में सूचना प्राप्त हो सकेगी |

धरमडीह ग्राम पंचायत, जिला मधुबनी, बिहार: महिलाओं की सहायता करना

इस ग्राम पंचायत की मुखिया एक महिला है तथा वह बहुत मेहनती है | पंचायत की 50 प्रतिशत सीटों पर चुनेहुए महिला प्रतिनिधि (ई डब्ल्यूआर) है | ई डब्ल्यू आर स्वास्थ्य एवं शिक्षा स्थायी समिति के प्रमुख हैं तथा वे बच्चों की शिक्षा, लड़कियों के नामांकन, स्कूल में स्वच्छता की सुविधा, विशेष रूप से लड़कियों के लिए, आयरन एवं विटामिन के टैबलेट उपलब्ध करवाने समेत किशोरियों के समुचित पोषण पर विशेष बल देती हैं | पंचायत ने सूक्ष्म वित्त प्राप्त करने तथा आय उत्पन्न करने वाली गतिविधियाँ शुरू करने में महिला समूहों की सहायता की है |

पैगम्बरपुर ग्राम पंचायत, जिला मुजफ्फरपुर, बिहार

केन्द्रीय स्कीमों के माध्यम से आय प्रदान करने वाली परिसंपत्तियों का सृजन करना|

ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत वृक्षारोपण तथा भारत निर्माण के तहत राजीव गांधी सेवा केंद्र, जिसे मनरेगा भवन के नाम से भी जाना जाता है, का निर्माण विशेष पहले हैं | सड़कों और तालाबों के किनारे फल एवं इमारती लकड़ी प्रदान करने वाले पेड़ों को लगाना ग्राम पंचायत के लिए आय का एक अच्छा स्रोत है | 2011-12 में फल और लकड़ी बेचने से ग्राम पंचायत को 40,000 रुपए की आय हुई है | एक अतिथि कक्ष तथा सूचना केंद्र का निर्माण भी सराहनीय कार्य हैं जहाँ कंप्यूटर एवं इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है |

फुलबार दक्षिणी ग्राम पंचायत, जिला पूर्वी चंपारन, बिहार

बाढ़ रोकने के लिए समुदाय का लामबंद होना|

स्थानीय नदियों से पानी के ओवर फ्लो के कारण ग्राम पंचायत में नियमित रूप से बाढ़ आती है जिससे न केवल फसलें नष्ट हो जाती हैं अपितु घर, पशुओं के शेड आदि भी नष्ट हो जाते हैं | ग्राम पंचायत ने समुदाय के साथ सहभागितापूर्ण ढंग से बचाव के लिए लगभग 11 किमी के बांध का निर्माण करने की पहल की है |

पंचायत ने स्वेच्छा से काम करने के लिए समुदाय को प्रेरित किया तथा 12 फीट ऊँचे एवं 16 फीट चौड़े बांध का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया | वर्ष 2011-12 में मनरेगा के तहत धन प्राप्त करने के बाद ग्राम पंचायत ने इमारती लकड़ी, ईधन एवं फल प्रदान करने वाले 16,000 पेड़ लगवाए जो पंचायत के लिए बहुमूल्य परिसंपत्ति है |

हरपुरबोचा ग्राम पंचायत, जिला समस्तीपुर, बिहार

सिंचाई के लिए मनरेगा की निधि का प्रयोग करना|

वर्ष 2009 -10 में मनरेगा की निधियों से एक जल संचयन एवं संरक्षण संरचना का निर्माण किया गया किन्तु मानसून के बाद यह संरचना 3 माह से अधिक समय तक पानी का भंडारण नहीं कर सकी | इसलिए 2011-12 में ग्राम सभा की सहायता से, इस टैंक के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी गई | श्रम के रूप में समुदाय द्वारा स्वैच्छिक योगदान दिया गया | एक ड्रेनेज चैनल तथा बांध का भी निर्माण किया गया | इस समय यह संरचना हजारों किसानों के खेतों की सिंचाई करने में समर्थ है जिससे गेहूँ एवं दालों की फसले उगाई जा रही हैं | इससे 200 से अधिक एससी परिवार लाभांवित हुए हैं | चारदीवारी क्षेत्र में फल देने वाले पेड़ों को लगाने से ग्राम स्तर पर संपोषणीय आय की दृष्टि से ग्राम पंचायत को अतिरिक्त लाभ हुआ है |

 

स्रोत: भारत सरकार, पंचायती राज मंत्रालय



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