অসমীয়া   বাংলা   बोड़ो   डोगरी   ગુજરાતી   ಕನ್ನಡ   كأشُر   कोंकणी   संथाली   মনিপুরি   नेपाली   ଓରିୟା   ਪੰਜਾਬੀ   संस्कृत   தமிழ்  తెలుగు   ردو

झारखण्ड राज्य विकलांगजन नीति

झारखण्ड राज्य विकलांगजन नीति

प्रस्तावना

वर्तमान युग में राज्य, नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना चाह रहा है। हमें यह याद रखने की आवश्यकता है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-41 में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक  तत्व में यह स्पष्ट प्रावधान अंकित किया गया है कि यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह विकलांगों के कल्याण के लिए प्रभावकारी नियम बनाए, जिससे उनका कल्याण हो सके। झारखण्ड राज्य की संस्कृति न्याय, समानता को महत्त्व प्रदान करती है तथा सहयोग भेदभाव मिटाने को बढ़ावा देती है। यह एक स्थापित रूप है कि यदि विकलांगों को भी समुचित अवसर प्रदान किया जाये तो वह एक बेहतर और स्वतंत्र जीवन की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

झारखण्ड राज्य की कुल जनसंखया में 5-6% विकलांगजनों की है। हाल के वर्षो में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकलांगजनों को विकास के मुख्यधारा में जोड़ने हेतु अनेक कदम उठाये गए हैं, जैसे -

क.   विकलांग व्यक्तियों के लिए (समान अवसर, अधिकार की सुरक्षा और संपूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995, के अनुसार शिक्षा, रोजगार, मुक्त वातावरण का निर्माण एवं सामाजिक सुरक्षा आदि,

ख.   आत्म-विमोह, पक्षाघात, मानसिक मंदता एवं बहुविकलांगता अधिनियम, 1999 की सहायता हेतु गठित राष्ट्रीय न्यास में चारों वर्गो के लिए विधिवत्‌ देखभाल की जिम्मेवारी एवं खुशहाल वातावरण कायम करने का प्रावधान उद्‌घृत किया गया है ताकि विकलांग व्यक्ति यथासंभव स्वतंत्र जीवन यापन कर सके।

ग.  मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, वर्ष 1987

घ.  भारतीय पुनर्वास परिषद्‌ अधिनियम, 1992 के अनुसार पुनर्वास सुविधाओं के

द्वारा लोगों के विकास का कार्य करती है।

ड.  विकलांगजनों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2006

च.  भारत सरकार द्वारा वर्ष 2007 में  विकलांगजनों के अधिकार पर संयुक्तराष्ट्र सम्मेलन     के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया गया है, जिसे 3 मई 2008 में अंतरराष्ट्रीय कानून की मान्यता मिली है।

झारखण्ड राज्य की विकलांगजन नीति उक्त अधिनियमों एवं नीतियों में दिए गए उद्देश्यों  और उपर्युक्त नीतियों पर आधारित है जो सभी संबंधित साझेदारों, विभागों और एजेन्सियों को उक्त नियमों को क्रियान्वित करने का बढ़ावा देने के साथ- साथ जागरूक भी बनाती है, जिसका मुख्य  उद्देश्य  विकलांगता पर राष्ट्रीय नीतियों को लागू करना है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा बनाये गये विकलांग नीति के आधार पर विशेष  प्रयास कर इसे कार्यान्वित करना है।

राज्य नोडल एजेन्सी

विकलांग व्यक्तियों को सरकार के प्रत्येक नियमित कार्यक्रमों एवं योजनाओं में अतिरिक्त सहायता और सुविधाओं की जरूरत है। इसके लिए सभी विभागों के बीच सामंजस्य होना जरूरी है। समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग इस हेतु नोडल विभाग होगा। राज्य निःशक्तता  आयुक्त विकलांगजनों के कार्यक्रमों और योजनाओं के लिये समन्वय एवं अनुश्रवण करेंगे। यह कदम विकलांगजनों के अधिकार को सुरक्षा  प्रदान करते हुए राज्य सरकार द्वारा विकलांगजनों के लिए कार्यक्रमों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन को सुगमता प्रदान करेगी। राज्य स्तरीय कार्यालय में बाधारहित वातावरण के लिए एक मॉडल बनाया जाएगा।

राज्य की नीति वक्तव्य

राज्य नीति के आधार पर विकलांग व्यक्ति राज्य के लिए एक अहम मानव संसाधन है और उनके लिए ऐसे वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है ताकि उन्हें समान अवसर, अधिकार के प्रति सुरक्षा और समाज में पूर्ण भागीदारी प्राप्त हो सके। नीति के अनुसार उनकी भागीदारी, बाधामुक्त वातावरण, सशक्तीकरण और स्वयं पैरवी को महत्व मिलता है। राज्य नीति के आधार पर राज्य सरकार निम्न अधिकारों को बढ़ावा देगी और इसे संरक्षित करेगी, जैसे -

क. सर्वप्रथम यह एक विकास की अवधारणा है, जो विभिन्न सम्मति प्रदत्त राष्ट्रीय एवं अंतर-राष्ट्रीय कन्वेन्शनों एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के माध्यम से उस सीमा को मान्यता देती है जहाँ तक विकलांगजनों का विकास, क्षमता एवं उदीयमान व्यक्तिगत स्वातंत्र्य में वृद्धि की जा सकती है।

ख. दूसरा, यह एक निर्मुक्त सोच है जो विकलांगजनों के अधिकार को सम्मान के साथ उनके क्षमता का आदर करना और समाज में विभिन्न वर्गो द्वारा अधिकार का लाभ लेते हुए विकलांगजनों के क्षमता अनुसार अधिकार उन तक पहुँचना ।

ग. तीसरा, यह एक सुरक्षात्मक सोच है, जो यह विश्वास करती है कि विकलांगजनों में एक छुपी हुई क्षमता होती है जो विकलांगता के कारण उभर नहीं पाता है और इसी कारण भेदभाव और उन सभी कार्यो जिसमें उनकी भागीदारी उन्हें नुकसान पहुँचा  सकती है। अतः उन सबों से बचाव हेतु अभिभावक समुदाय एवं राज्य द्वारा सुरक्षा का अधिकार देना चाहिए।

विकलांगता पर झारखण्ड राज्य की नीति का उद्‌देश्य

विकलांगता पर झारखण्ड राज्य की नीति का उद्‌देश्य विकलांगजनों से संबंधित कानूनों को क्रियान्वयन एवं लागू करना यू0एन0सी0आर0पी0डी और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों से संबंधित कानूनों द्वारा इन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाये। उक्त नीति के व्यापक उद्देश्य निम्नांकित हैं:-

क.  विकलांगता अधिकार, मूल्य और व्यवहार को सरकार की विकास नीतियों, योजनाओं एवं कार्यक्रमों में विकलांगता अधिकार मूल्यों और व्यवहारों को सम्मिलित एवं प्रोत्साहित किया जाय।

ख.  सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों में विकलांगता योजना, क्रियान्वयन और अनुश्रवण के लिए संमेकित प्रबंधन प्रणाली को तैयार करना।

ग.   राज्य एवं जिला स्तर पर ढॉचा तैयार करना जो लगातार नीतियों एवं नीति विकास के साथ योजना बनाएगी जिनमे मुख्य  भूमिका विकलांग लोगों के संघ, सरकार, निजी एवं सामान्य सेक्टर का होगा।

घ.   सरकार हर स्तर पर क्षमता बढाने की रणनीति बनाएगी जो झारखण्ड राज्य विकलांगजन नीति में दिए गए सुझाव के अनुरूप होगा।

ड.   सरकार द्वारा एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाएगी जिसके अन्तर्गत कार्यक्रम योजना, सद्गाक्त जन शिक्षा और जागरूकतापूर्ण कार्यक्रम होंगे जो समाज में व्याप्त भेदभाव को मिटाने में कारगर सिद्ध होगा।

मार्गदर्शक सिद्धांत

निम्नांकित सिद्धांतों पर आधारित कार्ययोजना।

(क) स्वयं प्रतिनिधित्व -

विकलांगता अधिकार आंदोलन का मौलिक सिद्धांत स्वयं प्रतिनिधित्व करने का अधिकार है। इसका मतलब यह है कि विकलांग लोगों के ज्ञान एवं उनके सम्मोहक प्रतिबद्धता का इस्तेमाल करते हुए उन्हें सरकार की नीतियों से अवगत कराया जाए। इस सिद्धांत के अंर्तगत सरकार, विकलांगजनों के संस्था और उनके प्रतिनिधियों को निर्णय की प्रक्रिया में शामिल करने लिए मान्यता देती है।

 

(ख) जुड़ाव

विकलांगों को सरकार के हर कार्यक्रम में पूरी तरह से उनके सिद्धांत, नीतियों और गतिविधियों के साथ जुड़ाव की आवद्गयकता है। विकलांगता के मुद्‌दे को टुकड़ों में नही उठाया जा सकता है। विशेष कोशिश कर विकलांगजनों को आवश्यकतानुसार हर कार्यक्रम एवं योजना के साथ जोड़ना होगा।

 

(ग) स्थायित्व

योजना और विकास के लिए विकलांगों को वित्तीय पोषण हेतु लम्बी अवधि की योजनाओं से सरकार, सामान्य या निजी क्षेत्र को जोड़ने हेतु प्रयत्न करने होंगे।

(घ) सहस्राब्दि विकास लक्ष्य

विकलांगता और गरीबी एम0डी0जी0 का एक मुख्य  मुद्‌दा है। राज्य, नीति द्वारा एम0डी0जी0 के प्रावधानों  को पूरा करने हेतु उचित कार्यवाही करना।

झारखण्ड राज्य की विकलांगजन नीति का मुख्य उद्देश्य

राज्य में विकलांगजनों को प्रभावकारी तरीके से समान अवसर मिले ताकि जीवन के हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी हो सके। झारखण्ड मे विकलांग लोगों तक पहुँचने के लिए कम समय में बाधा मुक्त मार्ग बनाना होगा, निर्णय के तुरन्त बाद ही क्रियान्वयन की शुरूआत किया जाए।

प्रत्येक नीति, प्रणाली, प्रावधान में यदि खामियाँ हैं या विकलांगजनों को सुरक्षा और हक  दिलाने के प्रति असमर्थ है तो उसे दरकिनार कर देना चाहिए।

उचित कदम उठाते हुए दिए गए समय के तहत विकलांगजनों का सरकारी अस्तित्व, सार्वजनिक जगह, स्कूल और अन्य जगहों के सभी बाधाओं को समाप्त करते हुए एवं नए बाधाओं को रोकते हुए जुड़ाव करना है।

विकलांगता कानून 1995 के आधार पर निर्देश प्रक्रिया को स्पष्ट करना और शिकायतों की सुनवाई की प्रक्रिया का गठन करना, साथ ही नागरिक ऑर्डर (आदेश) की घोषणा करना। यह नियम उद्योग दर उद्योग या क्षेत्र दर क्षेत्र के आधार पर खुला होना चाहिए।

यह भी सुनिश्चित करना होगा की झारखण्ड सरकार संस्था, व्यक्ति या समूह को सिंगल विंडो सिस्टम के तहत शिक्षा और अन्य जानकारी देगी जो विकलांगता अधिनियम 1995 के तहत हर जरूरतों को पूरा करेगी।

झारखण्ड सरकार को सकारात्मक कदम उठाते हुए नए कला और विकलांगजनों के लिए सेवा का विकास सुनिश्चित करना होगा।

क्षेत्रीय स्वशासी निकाय जहॉ संभव हो उन्हें किसी भी कार्यक्रम हेतु वित्तीय या किसी सेवा, समान या सुविधाओं को खरीदने या विकलांगता कानून और अन्य संबंधित कानून को सुनिश्चित करे।

अतंरराष्ट्रीय बाल अधिकार सम्मेलन के आधार पर रोकथाम, जल्द पहचान और बाल विकलांगता को अधिक महत्व देना है।

नीति निर्देश

 

क -जन शिक्षा एवं जागरूकता उत्थान

विकलांगजनों को मुख्यधारा के कार्यक्रम से जुड़ने एवं नयी विचारधारा के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा उनकी अनुभवहीनता एवं नकारात्मक सोच से घिरे रहने के कारण उत्पन्न होता है। यह डर, भ्रम और पुराने सोच विकलांगजनों को समाज से अलग एवं सीमांत बनाती है। व्यवहार में परिर्वतन स्वयं या आसानी से नहीं होता है अपितु यह एक लम्बी प्रक्रिया है।

 

ख- लोगों की जागरूकता हेतु नैतिक वक्तव्य

सरकार समय-समय पर लोगों के लिए जागरूकतापूर्ण कार्यक्रम चलायेगी जिससे विकलांगों के लिए सकारात्मक एवं सहयोगपूर्ण वातावरण कायम होगी जिसके द्वारा विभिन्नताओं को सम्मान एवं मूल्य मिलेगा।

विकलांग लोगों के लिए शिक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम हेतु रणनीति :

• क्षेत्र विशेष के आधार पर बहुस्तरीय, समेकित बहुस्तरीय विकलांगता जागरूकता रणनीति बनाना होगा जो विभिन्न मीडिया द्वारा विभिन्न समुदायों के लिए जानकारी प्रदान करेगी।

•  प्राथमिक एवं उच्च विद्यालयों के पाठ्‌यक्रम में विशेष विषय को सम्मिलित करना होगा।

• पत्रकारों के लिए विकलांगता जागरूकता परियोजना का क्रियान्वयन और साथ ही विकलांगता अधिकार सूचना जो ''दया'' और ''वीरता'' की छवि के विपरीत है और सभी समूह के द्वारा सकारात्मक जिम्मेवारी का उपयोग करना होगा।

•  सरकार के प्रत्येक कार्यक्रम को विकलांग जागरूकता कार्यक्रम से जोड़ना होगा।

• जागरूकता के लिए रेडियो, टीवी, लिखित समान जैसे टेलीफोन बिल, किताब का अंतिम पृष्ट, कॉपी आदि जैसे संसाधन का इस्तेमाल करना होगा।

रोकथाम

विकलांगता नीति के आधारभूत स्तम्भों में से एक स्तम्भ है रोकथाम जिसमें यह मानवाधिकार-गत दृष्टि समाहित है कि सभी जीवन मूल्यवान है, सभी व्यक्तियों को प्रजननीय आधिकारों से  संबंधित विकल्प हैं तथा  समुचित जाँच योजना से कोई शारीरिक दोषों की रोकथाम हो सकती है अथवा उन्हें कम किया जा सकता है।

  • क- रोकथाम के लिए नीति वक्तव्यः

पी0डब्ल्यू0डी0 अधिनियम 1995 के तहत जल्द चिन्हित और गतिविधि/कदम उठाने हेतु उचित       उपाय।

घर, स्कूल, कार्यालय और खेल के क्षेत्र में स्वास्थ्य वातावरण को बढ़ावा देना।

सुरक्षात्मक उपाय जैसे टीकाकरण, दुर्घटना से सुरक्षा और व्यवसायिक क्षेत्र में हादसा से बचाव।

जल एवं स्वच्छता सुविधाओं के क्षेत्र में सुधार। पेयजल हेतु विशेष कदम।

टीकाकरण प्रणाली से विकास कार्यक्रम के अनुश्रवण एवं मापदण्ड को जोड़ना।

राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों से गरीबी को कम करना।

स्वास्थ्य सेवा में सुधार, साथ ही मातृत्व देखभाल, जल्द पहचान एवं उपाय और अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार के नियमानुसार जेनेटिक काउन्सिलिंग, अच्छे अभ्यास और प्रभावकारी आपातकालीन स्वास्थ्य गतिविधि चलाना।

स्थिति पर पुनर्विचार कर व्यावसायिक दुर्घटना को कम करना।

द्वितीय विकलांगता के रोकथाम हेतु सभी विकलांग व्यक्तियों को मुफ्त में तकनीकी सुविधा/सामग्री प्रदान करना।

अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्र में विशेष रोकथाम के उपाय करना।

 

स्वास्थ्य देखभाल एवं पोषण

विकलांगजनों को समान अवसर मिले इसके लिए उचित, क्रियात्मक और प्राप्त करने योग्य स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता, द्वितीय और तृतीय स्तर में होना आवश्यक है। इस सेवा के अन्तर्गत परिवार को दवा, सामुदायिक आवास सेवा, मरिजों की देखभाल, भौतिक एवं पुनर्वास सुविधा और गैर सरकारी संस्था एवं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी के साथ मिलकर देना है।

क- स्वास्थ्य और पोषण पर नैतिक वक्तव्य

सरकार द्वारा एक विस्तृत एवं सम्पूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रणाली तैयार की जाये, जिसके तहत सेवा के हर क्षेत्र में देखभाल, साथ ही विकलांगजनों के सामान्य और विशेष स्वास्थ्य देखभाल एवं पोषण जरूरतों के प्रति संवेदनशील रहेगी एवं राज्य में चल रहे राष्ट्रीय नीति के साथ जुड़ कर कार्य करेगी।

कार्ययोजना के अन्तर्गतः-

• विकलांगता के आधार पर स्वास्थ्य क्षेत्र में उपायों को चिन्हित करना एवं भेदभाव को कम करना

• आर्थिक स्थिति से कमजोर विकलांगजनों के लिए मुफ्त में व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना, जिसके तहत मुफ्त में सहयोग यंत्र और पुनर्वास सेवा की सुविधा देना है।

• आदिवासी एवं औद्यौगिक क्षेत्र में रहने वाले विकलांगजनों के लिए विशेष पैकेज तैयार करना एवं अमल हेतु कदम उठाना।

• संवादहीन विकलांगता, दृष्टिहीन या बधिर और बहुविकलांगता के लिए सेवा केन्द्र स्थान में उचितसंवाद हेतु रणनिति तैयार करना ताकि उन्हें समान सेवा प्राप्त हो सके।

• स्वास्थ्य संबंधित कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार कर सुगमता प्रदान करना ताकिसामाजिक एवं स्वास्थ्य अधिकार मॉडल के तहत झंझटों की जानकारी हो सके।

• हर उम्र के लिए पोषण व्यवस्था हो, इसके लिए विशेष नियम बने। 0-6 वर्ष के विकलांग बच्चे जो आंगनबाड़ी केन्द्र जाने में असमर्थ हैं, उनके लिए अतिरिक्त भोजन की व्यवस्था हो।

• सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार (2 मई, 2003) सभी परिवार जिनके साथ विकलांग सदस्य है उन्हें अन्तोदय कार्ड मिले।

समुदाय आधारित पुनर्वास

सामाजिक और मानव अधिकार मॉडल, विकलांगजनों को पुनर्वास सेवा के लिए योजना, क्रियान्वयन, विकास, और अनुश्रवण में उनके जिम्मेवारी को अधिक महत्व दिए जाने का प्रस्ताव है। अन्य शब्दों में जिम्मेवारी को प्रोफेशनल से विकलांगो को दिया जाना। यह सेवा विकलांगजनों के जरूरतों को चिन्हित कर संपूर्ण तरीके से सेवा प्रदान किया जाए। समुदाय आधारित पुनर्वास के लिए नीति पुनर्वास नीति पर  आधारित होगी।

क- समुदाय आधारित पुनर्वास नीति का वक्तव्य

  • सरकार सी.बी. आर. के सिद्धांतों के आधार पर -स्वास्थ्य, शिक्षा, जीविकोपार्जन, वातावरण और सामाजिकता के साथ ही समुदाय आधारित पुनर्वास एवं जागरूकता पैदा करेगी ताकि विकेन्द्रीकरण, विशेषकर पंचायती सिस्टम के तहत पुनर्वास सेवा प्राप्त हो सके।
  • पुनर्वास सेवा से जुडे़ व्यक्ति (फिजिओथेरापी, ऑकुपेशनलथेरापी एवं स्वास्थ्य तकनीकी विशेषज्ञ) के लिए उचित प्रशिक्षण। इसके पश्चात्‌ नर्स, ए0एन0एम, आंगनबाड़ी सेविका और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पद पर सेवा का प्रावधान।
  • वितरण प्रणाली का विकेन्द्रीकरण, जानकारी एवं दक्षता को ग्राम पंचायत/ग्राम सभा, एन0जीओ0, समुदाय आधारित संस्थाओं के माध्यम से सहयोग को फैलाना।
  • जिला एवं प्रखंड स्तर पर सेवा विकास हेतु आपसी सम्बन्ध मजूबत करना।
  • उचित एवं प्राप्त करने योग्य सहायक यंत्र का प्रावधान।
  • विकलांग एवं प्रोफेशनल के बीच साझेदारी स्थापित हो जो विकलांगो के सही जरूरतों को आगे लाएगी।
  • पुनर्वास सेवा देने के प्रति कार्य करने वाले पुनर्वास प्रोफेशनल की सक्रिय भागीदारी हेतु प्रोत्साहित करना।
  • प्रखांड स्तरीय टास्क फोर्स/संसाधन समूह, विकलांगों, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, गैर सरकारी संगठन, प्रोफेशनल, सरकारी पदाधिकारी को शामिल कर गठन करना।
  • क्रमबद्ध तरीके से राज्य के हर गांव में सफल सी0बी0आर0 मॉडल को  फैलाना।
  • सी0बी0आर0 रणनीति के तहत पुनर्वास सेवा हेतु विशेष बजट।

 

बाधा मुक्त पहुँच

जिस प्रकार वातावरण एवं विकास का प्रारूप तैयार किया गया है, उसके अनुसार विकलांगजन स्वतंत्र एवं समान जीवन का लाभ नहीं ले सकते हैं। समाज में अनेक प्रकार के बाधाएं हैं जो विकलांगजनों को आम लोगों के मिलने वाले अवसर के समान, उन्हें अवसर प्रदान करने से रोकता है। उदाहरण- ढॉचागत बाधाऍ, सेवा केन्द्र तक पहुँच  असंभव, प्रवेद्गा मार्ग पहुँच  में कठिनाई, खराब शहरी योजना और आंतरिक डिजाइन आदि। बाधाओं के अंतर्गत संवाद बाधा को भी उजागर करने की आवश्यकता है जैसे बोले जाने वाली भाषा, चिन्ह या स्पर्द्गा कर बोलने वाले लोगों के लिए बाधक बनती है।

झारखण्ड में मुख्य  चिंतन का विषय

• अधिकतर सार्वजनिक एवं निजी इमारतें विकलांगजनों के पहुँच से बाहर है।

• दक्ष योजनाकर्ता विशेष मुद्‌दो को चिन्हित कर उसे अमल में लाए ताकि बाधा मुक्त पहुँच  बनाने में मददगार सिद्ध हो सके।

• इमारत और इस्तेमाल नियम की आवश्यकता।

• बाधा मुक्त पहुँच  के क्षेत्र में कार्य करने वाले दक्ष/अनुभवी लोगो की कमी ।

व्यय को हमेशा बाधा मुक्त वातावरण कायम करने में असफलता का कारण माना गया है। लेकिन यदि मूल डिजाइन में लागू किया जाए, तब अतिरिक्त खर्च पूरे खर्च के 0.2 प्रतिशत से अधिक नही होगी।

क- बाधा मुक्त पहुँच  नीति के वक्तव्य

सरकार बाधा मुक्त समाज का निर्माण करे, ताकि विकलांगजनों को विभिन्न जरूरतों और पूरी जनंसखया को आरामपूर्वक घूमने का मौका मिले, रूकावट रहित, जानकारी को इस्तेमाल करने लायक जैसे -आवश्यकतानुसार ब्रेल, साइन भाषा, और अन्य संवाद के तरीके।

  • उक्त रणनीति के तहत निम्नांकित बातों को होना अनिवार्य है-

विभागीय पहुँच  को बनाने के लिए विभागो के बीच सबंध को सुनिश्चित करना।

  • सभी मुख्य  सरकारी कार्यकर्ता बाधा मुक्त पहुँच  पर पूर्ण कोर्स/पढाई करे ताकि विकलांगों के जरूरतों को बता सके। औद्योगिक निर्माण में लगें दक्ष व्यक्ति को भी यह कोर्स पूरा करना अनिवार्य हो।
  • दृष्टिहीन, बधिर और संवादहीन विकलांगता के लिए अन्तर्शाखा सहयोग की आवश्यकता है ताकि संवाद प्रणाली पहुँच  का विकास हो सके।
  • विकलांगजनों या उनके प्रतिनिधियों को जल्द से जल्द योजना प्रक्रिया में शामिल करना।
  • नगर निगम एवं पंचायत स्तर पर उचित एवं प्रभावकारी क्रियान्वयन, प्रबंधन और अनुश्रवण लायक बनाने हेतु यंत्र तैयार करना ।

सही विषय एवं पाठ्‌य सामग्री जो पहुँच  के नियम को केन्द्रित करता हो उसे शिल्पकार, इंजिनियर और शहरी योजनाकर्ता को दिए जाने वाले प्रशिक्षण में शामिल किया जाए।

सार्वजनिक स्थान जैसे रेलवे स्टेशन, बैंक, कार्यालय आदि में मुफ्त बाधामुक्त पहुँच  हेतु विशेष व्यवस्था करना।

सर्व-व्यापी डिजाइन के आधार पर नए इमारतों को बनाना और बने हुए इमारतों को विशेष समय के अंदर नवनीकरण करना।

यातायात

सार्वजनिक यातायात प्रणाली को जल्द से जल्द लचीला एवं लोगों तक पहुँच  बन सके इसके लिए विकास की आवश्यकता है, ऐसा होने से, विकलांगजनों की जरूरतों तक रचनात्मक एवं क्रियात्मक तरीके से पहुँचा जा सकता है।

क- यातायात से संबंधित नीति वक्तव्य

झारखण्ड सरकार प्रवेश योग्य, व्यय योग्य बहुमॉडल सार्वजनिक यातायात प्रणाली का विकास करेगी जिसके द्वारा अधिक संखया में विकलांगों की जरूरतों को कम खर्च में पूरा किया जा सकता है। साथ ही अधिक खर्च वाले स्वरूप जो विकलांगजनों के मोबीलिटी और संवाद के जरूरतों को पूरा करे, उसके लिए योजना तैयार करेगी।

रणनीति के अंतर्गत:

यातायात कारखानों के लिए विकलांग जागरूकता पर डिजाइन एवं क्रियान्वयन और उन्मुखीकरण कार्यक्रम।

यातायात प्रणाली को तैयार करने की प्रक्रिया को आरंभ करना जिसके अंतर्गत सभी साझेदारों की भागीदारी हो।

  • लागत को प्रभावकारी तरीके से कम करते हुए शारीरिक विकलांगता से ग्रसित व्यक्ति हेतु बस, रेलवे इत्यादि यातायात के साधनों को पुनर्स्थापित करना एवं विभाग के साथ समेकित करते हुए जोड़ना, ताकि आसानी से इनकी पहुँच  हो सके।
  • सभी साझेदारों से बातचीत कर शहर में पार्किंग क्षेत्र बनाना।
  • राज्य सरकार के बस यातायात के हर रूट एवं वर्ग में कम से कम विकलांगो के लिए 50% छुट एवं उनके सहयोगी को 25% छूट का प्रस्ताव हो। निजी बस सेवा में यह छूट 25% और 12.5% होगी।

 

शिक्षा

शिक्षा प्रदान करने की विधि के मामले में विकलांगता के प्रति मानवाधिकार एवं विकास के दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण प्रभाव है। शिक्षकों को विकलांगता के आधार पर विकलांगों को चिन्हित करना होगा। सीखने वाले विकलांगजनों को या तो विशेष स्कूल अथवा कक्षाओं में नामांकन दिया जाता है या उनके अत्याधिक विकलांग होने के आधार पर किसी भी तरह की शिक्षा के अवसर से पूरी तरह से वंचित कर दिया जाता है। ऐसा करने पर वयस्क विकलांगजनों में अशिक्षा के साथ-साथ दक्षता की कमी आएगी तथा इसके कारण अधिक बेरोजगारी एवं गरीबी उत्पन्न होगी।

संयुक्त/विस्तृत शिक्षा सीखने एवं भागीदारी में होने वाले बाधा को चिन्हित कर समाप्त करने पर केन्द्रित है। व्यक्ति को अधिक सामान्य बनाने की अपेक्षा व्यक्ति के लिए वातावरण को अधिक सामान्य बनाने पर जोर दिया जाए। सीखने वाले विकलांगजनों के लिए इमारतों तक पहुँच की असुविधा, पाठ्‌यक्रम को उपयोग में लाने की असुविधा, भाषा, कम अपेक्षा, नाकारात्मक व्यवहार और पुराने सोच और अन्य प्रकार के विभिन्नताऍ बाधक हैं। संयुक्त/विस्तृत शिक्षा इन सब बाधाओं को दूर कर सभी के लिए शिक्षा को अनिवार्य बनाए। शिक्षा की विशेष जरूरत यह भी है कि इसे विकलांगजनों से जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही किसी भी शैक्षणिक प्रस्ताव को सामान्य प्रस्ताव के आवश्यकतानुसार ही बनाना चाहिए ताकि विशेष व्यक्ति की विशेष जरूरत को पूरा किया जा सके। इसलिए कुछ केस में यह संभव हो सकता है कि विकलांग बच्चे को विशेष प्रावधान की जरूरत नहीं है। उदाहरण, बच्चा जिसमें थोड़ी- सी शारीरिक विकलांगता है। बच्चे जो विकलांग न हो परन्तु सुविधाओं की अपेक्षा करता हो जैसे - (उदारहण, किसी बुरे घटनाक्रम  से बच्चे को आघात पहुँचा  हो)। मुख्यधारा एवं संयुक्त शिक्षा के बीच के अंतर को भी जानने की आवश्यकता है। मुख्यधारा से एकात्मकता तब संभव है जब विकलांग बच्चे को कक्षा में या पाठ्‌यक्रम में बिना किसी बदलाव के शामिल किया जाएगा। बच्चा इस वातावरण को तभी स्वीकार कर सकता है जब लड़के या लड़की में अपनी विकलांगता के होते हुए भी सकारात्मक सोच हो। तब बच्चा उस वातावरण में जरूर घुल मिल सकता है। बाल विकलांगता और उसके विशेष जरूरत बच्चों के मूल मानव अधिकार हैं, जो अपने साथी के साथ शिक्षा प्राप्त कर सके। इस अधिकार को सभी बच्चों को प्राप्त करने के लिए स्कूल एवं शिक्षा प्रणाली में बदलाव एवं सुधार की आवद्गयकता है तभी बच्चे शिक्षा प्रणाली के उपयुक्त हो सकते है।

क- शिक्षा पर नैतिक वक्तव्य

सभी विकलांगों को समान शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया जाए और एकाकी शिक्षा प्रणाली का विकास हो ताकि हर विकलांग और सामान्य एक साथ बैठकर शिक्षा ग्रहण कर सके, तब राज्य शिक्षा के सभी जरूरतों को हर प्रकार के विकलांगजनों के लिए संयुक्त एवं विशेष स्कूल के माध्यम से सुगमता प्रदान कर सकती है और सहयोग का सही ढ़ग से इस्तेमाल हो सकती है।

  • रणनीति के तहत-

एक स्पष्ट नीति का विकास हो जिसमें सभी साझेदारों को शामिल किया जा सके साथ ही नीति को स्कूल या अन्य स्तर पर बड़े समुदाय में समझ एवं स्वीकृति मिले।

  • समावेशी शिक्षा कार्यक्रम की सही क्रियान्वयन हेतु राज्य दिशा निर्देश बने जो केन्द्रीय सरकार द्वारा सहयोग  प्राप्त करता हो।

व्यक्तिगत रूप से सीखनेवाले, बिना वर्गीकरण किए उनके जरूरतों के अनुसार नियमित स्कूल में पाठ्‌यक्रम तैयार करना एवं उसके लचीलेपन को बढ़ावा और संशोधन को सुनिश्चित करना।

अत्यधिक विकलांगों के लिए गृह आधारित शिक्षा की व्यवस्था।

  • पूर्व एवं वर्तमान में चल रही सेवा के अंतर्गत  शिक्षकों एवं अन्य स्कूल कर्मियों के लिए प्रशिक्षण।

अभिभावक जागरूकता कार्यक्रम चले ताकि बच्चों से सम्बन्धित निर्णय एवं आंकलन में अभिभावकों की भागीदारी हो।

शिक्षा एवं प्रशिक्षण में सही तकनीकी का विकास करना।

  • सभी सीखने वालों के लिए पर्याप्त एवं सही शिक्षा सेवा हो।

सभी सीखने वालों के लिए जल्द शिक्षा की सुविधा, परन्तु विशेष शिक्षा जरूरतों के आधार पर सीखने वालों के लिए प्रभावकारी एवं महत्वपूर्ण अनुसंधान। अनुभवी व्यक्ति एवं संस्था से इस उद्‌देश्य हेतु सहयोग।

100 प्रतिशत सभी विकलांग बच्चों का समयानुसार विशेष स्कूल में नामांकन के लिए पहल करना। इसके लिए और अधिक समावेशी/विशेष स्कूल खोलने की आवद्गयकता होगी जिसमें छूटे हुए बच्चों का नामांकन संभव है।

विकलांग बच्चों को चिन्हित करने एवं आंकने का सही तरीका का इजाद करना।

यातायात की सुविधा को सुनिश्चित करना ताकि विकलांग बच्चे शिक्षण संस्थान तक पहुँच  सके।

वर्तमान में चल रहे नियमित स्कूल में समावेशी शिक्षा का उपयुक्त तरीके से अपनाना।

सभी सरकारी और निजी मान्यता प्र्राप्त स्कूल में विकलांगो को तीन प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य किया जाए।

योग्य/विशिष्ट शिक्षक का वेतन/मानदेय नियमित शिक्षक के वेतन/मानदेय से कम न हो।

विकलांगजनों से सम्बन्धित शिक्षा का अधिकार एवं कानून को समयानुसार सही रूप में क्रियान्वित करना।

रोजगार एवं आर्थिक सशक्तीकरण

इस अनुभाग का उद्देश्य  यह है कि विकलांगजनों को झारखण्ड राज्य के आर्थिक विकास में जुड़ाव सुनिश्चित करना है और इसके लिए कोई अलग उपाय नही बनाया जाए। सर्वप्रथम, विकलांगजनों के लिए जो रोजगार एवं व्यवसाय (ग्रामीण और शहरी) का विकास हो रहा है, उसमें उनकी भागीदारी आवश्यक है- जिस तरह सरकार वर्तमान में गरीबों के अधिक भागदारी को सुनिश्चित करने की शुरूआत की है।

क- रोजगार एवं आर्थिक पुनर्वास हेतु नीति वक्तव्य

सरकार विकलांगजनों को रोजगार एवं आर्थिक विकास के दायरे को बढ़ाते हुए सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय रोजगार कार्यक्रम से जुड़ने का अधिकार दे ताकि आम लोग एवं विकलांग के बीच आय/आर्थिक दूरी कम हो। सरकार विशेष राज्य योजना व्यक्तिगत एवं समूह के लिए स्वयं सहायता समूह या अन्य तरीके के माध्यम को तैयार करे।

  • संबंधित  रणनीतियों में सम्मिलित है :-
  • विकलांगजनों को रोजगार, आयवृद्धि और आर्थिक सद्गाक्तीकरण का अवसर प्राप्त हो ताकि उन्हें विभिन्न जरूरतें और आर्थिक चयन के लिए सही संभावनाऍ मिल सके।

विकलांगजनों को उनके क्षमता एवं अवसर के प्रति जागरूक करना।

  • सरकारी विभाग, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी एवं गैर सरकारी संस्था और निजी क्षेत्र के बीच संबंध स्थापित हो जो विकालांगजनों के रोजगार एवं व्यवस्था को केन्द्रित करता हो।
  • वैसे कर्मी जो कार्मिक के रूप में कार्य कर रहे है, उनके लिए विशेष कार्यक्रम स्थापन/कार्मिक/ नियुक्ति और सभी कर्मी स्थापन में उपलब्ध विकल्प को समझ सके और विकलांगजन जो नौकरी पाने की इच्छा रखते हैं तथा कर्मियों का पदस्थापन हो सके।

विकलांग व्यवसायियों के लिए सहयोग का कार्यक्रम एवं मुख्य  सहयोग सेवा के अंदर मौजूद विशेष कार्यकर्ता का विकास कर चलाया जाए जो विकलांग व्यवसायियों के जरूरतों को समझ सके।

  • रोजगार से सम्बन्धित राज्य स्तरीय सरकारी तंत्रों एवं काउन्सिलों में विकलांगों का प्रतिनिधित्व हो।
  • राज्य सरकार के रोजगार के सभी क्षेत्रों में विकलांगो के लिए आरक्षण एवं ऊपरी आयु सीमा में छूट कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की अधिसूचना सं0-2096 दिनांक-25.04.2011 के आलोक में देय होगी।
  • झारखण्ड में चल रहे व्यावसायिक शिक्षा विकलांगो तक पहुँच सके, यह सुनिश्चित करना चाहिए जिसमें 5 प्रतिशत विकलागों की भागीदारी हो।
  • कृषि विकास में विकलांगों को प्राथमिक जिम्मेवारी दी जाए तथा कृषि कार्य को कैसे बढावा मिले साथ ही प्रसंस्करण जलछाजन प्रबंधन आदि में विकलांगो को शामिल करना और संपूर्ण कृषि विकास कार्यक्रम से जोड़ा जाए।
  • ऐसा डाटाबेस तैयार करना चाहिए जिसके अंतर्गत विकलांगजनों का कार्य एवं क्षमता की जानकारी उपलब्ध हो तथा लेबर और रोजगार मंत्रालय में अनुभवी व्यक्ति के द्वारा चल संपप्ति सूची का मुख्य  रजिस्टर तैयार कराना चाहिए।

किसी भी रोजगार प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता पूरा करने वाले विकलांगजनों को प्रोत्साहन के साथ प्राथमिकता प्राप्त हो।

सामाजिक जीवन में भागीदारी

सभी लोगों के लिए सामाजिक जीवन में भागीदारी उनका मौलिक अधिकार है। यह अधिकार 1994 के नागरिक एवं राजनैतिक अधिकार पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अनुच्छेद 25 में दिया गया है लेकिन, अभ्यास में, विकलांगजन हमेशा चुनाव प्रक्रिया या राजनैतिक स्तर पर अपनी आवाज उठाने के प्रति भागीदारी के अधिकार का प्रयोग करने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। यह मुद्‌दा सिर्फ शारीरिक बाधा हटाने की नहीं अपितु गलत धारणाओं को भी समाप्त करने का है।

क- सामाजिक जीवन में भागीदारी का नीति वक्तव्य

सरकार विकलांगजनों की राजनीतिक जीवन के सभी स्तरों में (राष्ट्रीय, राज्य, नगर निगम और पंचायत) की चुनावी प्रक्रिया में समान पहुँच एवं पूर्ण प्रतिभागिता के अवसर प्रदान करें।

  • रणनीति के अंतर्गत

विकलांगता अधिनियम 1995 को सखती से पालन एवं क्रियान्वयन करें ताकि सिंद्धात के अनुसार विकलांगों को चुनाव प्रक्रिया एवं राजनीतिक जीवन का इस्तेमाल करने का अवसर प्राप्त हो सके।

  • राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मतदान केन्द्र पर मतदाता पंजीयन एवं स्थान विकलांगों के सुविधानुसार अनिवार्य रूप से शामिल एवं क्रियान्वित किया जाए तथा हो सके तो इनके लिए घर पर या इनके अनुरूप स्थानों का चयन एवं व्यवस्था की जायें।
  • मतदाता प्रबंधक, मतदान से संबंधित सेवा जो राष्ट्रीय मानक के आधार पर अनिवार्य है उस पर निर्देश  जारी करें।
  • मतदान पंजीयन क्षेत्र और मतदान केन्द्र में बहुतायत संखया में प्रिंट पोस्टर जारी साधारण या साधारण मतपत्र या मतदान उपकरण, मतदान केन्द्र में उपलब्ध हो ताकि दृष्टिदोष एवं बहुविकलांगता से ग्रसित व्यक्ति को लाभ मिले, इसका प्रावधान हो।

विकलांगों के लिए ब्रेल के माध्यम से मत डालने की व्यवस्था हो।

दक्षता विकास

विकास का मूल मानक है कि समाज अपने ही संसाधनों का प्रयोग कर स्थायित्व लाने का प्रयास करे फिर भी अनेक विकलांग राज्य में पूर्व और वर्त्तमान में व्याप्त भेदभाव के कारण पिछडे़ हुए है। मानव संसाधन विकास का मुख्य  कारक है जो गरीबी और अर्द्धविकास  को रोक सकती है।

क- दक्षता विकास हेतु नीति वक्तव्य

सरकार विकलांगजनों के क्षमता का विकास करें ताकि वे प्रभावकारी ढंग से समुदाय के आर्थिक विकास और समाज से जुड़ सकें

  • रणनीति के अंतर्गत

व्यावसायिक प्रशिक्षण में बदलाव लाना, जिससे विकलांगजनों के लिए व्यापक प्रशिक्षण आसानी से प्राप्त हो सके।

विकलांगजनों का विशेष क्षमता को चिन्हित करते हुए दक्षता निर्माण करना ताकि आय हेतु वे मान्यता प्राप्त रोजगार व्यवसाय या सामुदायिक परियोजना से जुड़ सकें।

विकलांगों के लिए वयस्क शिक्षा कार्यक्रम का प्रावधान हो ताकि वर्तमान में चल रहे वयस्क शिक्षा कार्यक्रम में सही पाठ्‌क्रम एवं अन्य सुविधा से जुड़ सके।

विकलांगजनों को अपरेन्टिसशिप (कार्य स्थिति में रोजगार के अनुभव) का अवसर प्राप्त हो। इसके लिए बने हुए वातावरण में बदलाव और प्रशिक्षण एवं आकलन के लिए विशेष तकनीकी एवं उपकरण प्राप्त करना।

उचित प्रशिक्षण मापदंडों का विकास, बाजार की जरूरतों को देखते हुए विकलांग प्रशिक्षणार्थियो कें लिए विशेष प्रशिक्षण एवं जरूरतों को पूरा करना।

सकारात्मक कदम द्वारा, विकलांग कर्मचारी को अपग्रेड कोर्सो, नये तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं शिक्षा अवकाश प्राप्त कर प्रशिक्षणों में भाग लेने का अधिकार है।

  • व्यावसायिक प्रशिक्षक का विकलांग अधारित मुद्‌दों पर उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण

विकलांग कार्यकर्ता के नियोक्ता को प्रोत्साहित करना।

मानव संसाधन विकास

कोई भी सेवा मानव संसाधन के बिना असंभव है। वर्तमान में राज्य में पुनर्वास के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की बड़ी कमी है। कार्य कर रहे मौजूद दक्ष प्रशिक्षक, विकलांगों की संखया के अनुपात में अत्यल्प हैं। हर 8 विकलांग बच्चों पर 1 विशेष प्रशिक्षक का प्रावधान है। इसकी जरूरतों को मानव संसाधन विकास के प्रक्रिया के बिना पूरा नहीं किया जा सकता है।

क- मानव संसाधन विकास का नीति वक्तव्य

सरकार यह सुनिश्चित करे की प्रत्येक वर्ष प्रशिक्षित मानव संसाधन का विकास हो जो राज्य में विकलांगजनों के पुनर्वास से जुडे़ जरूरतों को पूरा करने में सक्षम सिद्ध हो।

  • रणनीति के अंतर्गत
  • मौजूदा शिक्षक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पुनर्वास सेवा हेतु उचित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था हो।
    • संस्थान और केन्द्र/संस्था जो पुनर्वास के क्षेत्र में मानव संसाधन का विकास कर रही है, उन्हें बढ़ावा एवं सहयोग प्रदान करना।

पुनर्वास पर पढ़ाई करने वाले छात्रों को प्रायोजक तथा मानदेय प्रदान की जाए।

मान्यता प्राप्त छोटे कोर्स के माध्यम से क्रमवद्ध योजना एवं क्रियान्वयन कर मानव संसाधन में व्याप्त दूरी को कम करना।

राज्य में पुनर्वास पर सेवा प्रदान करने वाले दक्ष एवं कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना।

सामाजिक सुरक्षा

मौजूद सामाजिक सुरक्षा योजना एवं प्रणाली के ढाँचे का आकलन करने की आवश्यकता है ताकि विकलांगजनों को आर्थिक स्वतंत्रता एवं सामाजिक सम्बन्ध को बढ़ावा मिले।

क- सामाजिक सुरक्षा पर नीति वक्तव्य

सरकार चल रहे सामाजिक सेवा कार्यक्रम आकलन के साथ -साथ सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक योग्य प्रणाली का विकास करें ताकि व्यक्ति आत्मसम्मान को ध्यान में रखते हुए सामाजिक जुड़ाव और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा मिले।

  • रणनीति के तहत -

संबंधित विभाग द्वारा चल रहे, सामाजिक कल्याण और पेंशन योजना को आवश्यकतानुसार बढ़ावा देते हुए वर्तमान प्रणाली का आकलन करना।

सभी विकलांगजनों को विकलांगता के प्रकार के आधार पर, कष्टपूर्ण विकलांगता और उम्र को देखते हुए अन्तोदय कार्ड उनके परिवारों को मिले, यह सुनिश्चित हो।

राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा सभी विकलांगजनों को प्रदान करे ताकि सभी विकलांगजन का खाद्‌य सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

  • सरकार, जिन विकलांग बच्चों के अभिभावक है या वे अनाथ हैं, वैसे बच्चों के लिए उचित कदम उठाए। साथ ही जो राज्य ऐसा मॉडल तैयार किया है उसे अपनाए।

सरकारी नियमों के आधार पर मानदेय और पेंद्गान का प्रावधान हो। अधिक सेवा देने हेतु पहल हो।

आवास

अनेक विकलांग, व्यक्तिगत आवास की छोटी उम्मीद लिए जीते हैं। वर्तमान में जो आवास है वह वातावरण, डिजाइन एव ढांचा के खयाल से विकलांगजनों के लिए उपयुक्त नहीं है। भीड़-भाड़ एवं गरीबी विकलांगजनों की समस्या को और अधिक बढ़ा देती है। किसी भी आवास योजना में बाधा मुक्त डिजाइन का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए अन्य लोग इस सुविधा का लाभ लेते हैं और विकलांग व्यक्ति आवास पाने या रिश्तेदार एवं दोस्तों के घर जाने से वंचित रह जाते है।

क- आवास पर नीति वक्तव्य

सरकार विकलांगजनों एवं उनके परिवार को सुरक्षित आवास की व्यवस्था करे तथा बिना भेदभाव के उसका इस्तेमाल कर सके।

  • रणनीति के तहत
  • विकलांगजनों को रहने की सुविधा का उपयोग में लाया जा सके, विशेष स्तर में सरकारी आवास का तीन प्रतिशत।
    • आवास का अधिकार सभी राष्ट्रीय और राज्य योजनाओ में इसके उपयोग को सुनिश्चित करते हुए, विशेष स्तर पर कुल कोटा का तीन प्रतिशत हो।
    • विशेष बलदायक कार्यक्रम ताकि निजी क्षेत्र में आवास सुविधा में भागीदारी को प्रोत्साहन मिले।
    • 30 वर्ष के उम्र से अधिक अविवाहित विकलांग महिला को इंदिरा आवास के माध्यम से आवास की सुविधा मिलने का प्रावधान हो।

4.14 सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधि, खेल और युवा

विकलांगता अधिनियम 1995 के आधार पर विकलांगजनों को भी आम लोगों के समान सांस्कृतिक, रचनात्मक गतिविधि, खेल और मनोरंजन का अवसर सामान्य साथी की भाँति प्राप्त होना चाहिए। समाज के साथ तादात्म्य हेतु खेल और रचनात्मक गतिविधि को महत्वपूर्ण भाग माना गया है। खेल हमेशां से सफल पुनर्वास और समाज के साथ जुड़ाव का मुख्य  भाग रहा है। सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधि स्वयं को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है, साथ ही अनुभवों को बढ़ाती है और अनेक समय दर्द से उबरने का मौका प्रदान करती है। खेल एवं रचनात्मक गतिविधियों को स्कूल स्तर में शारीरिक क्षमता का विकास के लिए आवश्यक है साथ स्वयं में आत्मविश्वास व्यक्त करने, हिम्मत और सहनशक्ति का विकास करती है। इसलिए यह जरूरी है कि स्कूल एवं अन्य क्षेत्र में खेल पर विशेष ध्यान दिया जाये ताकि विकलांग बच्चों को भी भागीदारी का अवसर मिल सके।

क- खेल एवं संस्कृति के नीति वक्तव्य

सरकार खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का विकास को बढ़ावा दे ताकि विकलांगजन मनोरंजन, प्रतियोगिता और उपचार के उद्देश्य से खेल में शामिल हो सके।

  • रणनीति के तहत-

विकलांगजनों के लिए खेल, चित्रकारी एवं संस्कृति की जानकारी रखनेवाले प्रशिक्षक एवं कोच को ब्रेल लिपि/साइन लेंग्वेज का प्रशिक्षण  मिले।

सभी विकलांगजनों के लिए खेल एवं सांस्कृतिक सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो तथा सभी खेल/ संस्कृति विधाओं की हर स्तर की प्रतियोगिताओं में सामान्य के साथ-साथ विकलांगनजनों के लिए विशेष खण्ड सृजित किये जायें।

जन शिक्षण कार्यक्रम द्वारा विकलांग लोगों, (विशेषकर जो गांव में रहते हैं) दाता, खेल एवं सांस्कृतिक प्रबंधकों को विकलांगो के लिए भिन्न-भिन्न खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति जागरूक करना।

विकलांगजनों के लिए खेल को मुख्यधारा से जोड़ा जाए ताकि अधिक से अधिक दाता मिले। अन्य शब्दों में इसे सीधे मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

राष्ट्रीय स्तर, विशेष, ओलम्पिक, पारा ओलम्पिक या अन्य राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम हेतु चिन्हित विकलांगजनों एवं को राज्य से वित्तीय सहयोग का प्रावधान हो।

  • राज्य स्तरीय ओलम्पिक, पारा ओलम्पिक आदि के प्रबंधक समिति में क्षेत्रीय, गैर सरकारी संस्थाओं, विकलांगजनों, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी के प्रतिनिधि शामिल हो।

जीतने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को राज्य में उचित रोजगार प्राप्त हो।

खेल/संस्कृति अनुदान संबंधी समितियों में अनिवार्यता कम से कम एक विकलांग सदस्य

अथवा ऐसे लोगों के प्रतिनिधि का मनोनित किया जाये।

गणना

यह आवश्यक है कि सभी इकठ्‌ठा किए गए डाटा, अनुसंधान और जानकारियाँ जो विकलांगजनों से संबंधित है उनकी निम्नवत्‌  विस्तृत जानकारी जैसे- वर्गीकरण, परिभाषा और मापदंड- जीवचिकित्सा पहलू के साथ-ही-साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक जानकारियाँ भी देती है। इसलिए विकलांगजन अनुसंधान एवं सर्वे का मुख्य  भाग बने। सरकार, गैर सरकारी संस्था और निजी क्षेत्रो को अनेक प्रकार के विकलांगजनों से संबंधित जानकारी लेती है, ताकि वे योजना और आवश्यकतानुसार संसाधन का इस्तेमाल हेतु लक्ष्य बना सके। विकलांगों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य, द्गिाक्षा, सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक स्थिति जो उनके जीवन को प्रभावित करती है, उन्हें उसकी पूरी जानकारी प्राप्त हो। सभी रणनीति और तकनीकी जो लोगो ंको जानकारी देने के लिए बने हैं उसे फार्मेट में बनाया जाए जो विकलांगजनों एवं संस्थाओं के इस्तेमाल करने योग्य एवं लचीला हो।

क- विकलांगजनों के डाटाबेस के सुरक्षा हेतु नीति वक्तव्य

सरकार सूचना प्रणाली का विकास एवं सुरक्षा विकलांगजनों के सामाजिक एवं मानव अधिकार मॉडल के आधार पर करे।

  • रणनीति के तहत-

सरकार राष्ट्रीय जनगणना और गृह सर्वे के आंकड़े को संग्रह करने में विद्गवविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, गैर सरकारी संस्थानों, जिला समाज कल्याण कार्यालयों के साथ-साथ विकलांगजनों को भी आंकडे़ इकठ्‌ठा करने में शामिल करे।

अनुभवी संस्था के द्वारा आंकड़े की जांच हो।

  • आंकड़े का विकास किया जाए जो विकलांगता के कारण, सेवाऍ, मौजूद अनुसंधान, विकलांगजनों के जरूरतों और नुकसान के घटनाओं की जानकारी दे।

विकलांगजनों के जीवन को प्रभावित करने वाली प्रत्येक जानकारी प्राप्त हो।

  • सभी एकत्रित आंकड़ों का दक्ष समिति, पुनर्वास विशेषज्ञों और विकलांगजनों द्वारा विश्लेषण कर, उनका विचार लेते हुए सार्वजनिक दस्तावेज तैयार करे।

विकलांगों के लिए ऑनलाइन आंकड़ा को उपलब्ध कराने हेतु प्रावधान हो।

विशेष ध्यान

उपरोक्त सभी विकलांगता को सरकार अपना ध्यान विशेषकर उन निम्न वर्गो पर रखें जो अत्यधिक भेदभाव के कारण दयनीय स्थिति में हैं।

क-मानसिक रोग

मानसिक रोगी अधिकतर समाज से अलग, उपलब्धता शर्म एवं खराब जीवन तथा अधिकांश मृत्यु के शिकार हो जाते हैं। व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में बडे बदलाव के बावजूद भी इस समस्या का समाधान नहीं हुआ है। प्रशिक्षित कार्यकर्ता, इलाज हेतु सुविधा में कमी, दवा की उपलब्धता और व्यय करना, कारण, इलाज और बीमारी से निजात हेतु जागरूकता और शिक्षा में कमी इनके कारण हैं। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 में उद्‌घृत है परन्तु इसका क्रियान्वयन नगण्य के बराबर है। कानून विकलांगता सुविधा देती है परन्तु यह बहुत ही सीमित है। बहुत कम ही गैर सरकारी संस्था मानसिक रोगी के समर्थन, इलाज, पुनर्वास हेतु कार्यक्रम चला रही है, वह भी प्रारंभिक स्तर में है।

ख- मानसिक स्वास्थ्य पर नीति वक्तव्य

सरकार मानसिक स्वास्थ्य कानून को अपनाए और इसे क्रियान्वित करे तथा साथ-ही-साथ मानव संसाधन, सेवाऍ और विकास, आवद्गयक दवा का वितरण और उपयोगिता को सुनिश्चित करें ताकि मानसिक रोग से छुटकारा मिले। सरकार सामुदायिक सेवा और क्रमबद्ध तरीके से हाफवे होम को हर जिले में स्थापित करे।

  • रणनीति के तहत-

मानसिक स्वास्थ्य पर उपयुक्त बजट।

  • जिला स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और राज्य में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति के क्रियान्वयन की शुरूआत।
  • मानसिक रोगी को प्रमाणित किया जाए तथा विकलांगता कानून के अंतर्गत सही सुविधा सुनिश्चित किया जाये।
  • मानसिक रोगी हेतु समुदाय आधारित कार्यक्रम या उन्हें अन्य समुदाय आधारित कार्यक्रम से तादात्म्य हेतु जागरूक करना।
    • राज्य में मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में अच्छे पुनर्वास सेवा की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाए।

मेडिकल कॉलेज एवं द्गिाक्षण अस्पताल में मनोचिकित्सा विभाग को सशक्त बनाया जाये।

मानसिक स्वास्थ्य के हर स्तर में मानव संसाधन का विकास को प्रोत्साहन मिले।

मानसिक स्वास्थ्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र/सरकारी स्टॉफ का उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र/जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी सुविधा के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवा स्थापित करना एवं चलाना।

  • मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले संस्था का गठन हेतु प्रोत्साहन।
    • दो विभागों जैसे -स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा सामाज कल्याण विभाग के बीच मानसिक रोगी से संबंधित सेवाएँ हेतु सही लिंकेज हो।

परित्यक्त मानसिक रोगियों के लिए आवास, इलाज और पुनर्वास की विशेष सुविधा हो।

सेनसरी (सम्वेदना) एवं बहुविकलांगता

बहुविकलांगता वह विकलांगता है जिसमें एक से अधिक विकृतियॉ निहित होती हैं। संस्थाओं में अक्सर विकृतियों/विकलांगता को परखने और ठीक करने की तकनीक बहुत जटिल होती है। उदारहण स्वरूप बधिर सह दृष्टिहीन विकलांग बच्चों की देख-रेख का तरीका सिर्फ बधिर या सिर्फ दृष्टिहीन से बिल्कुल अलग है। इसमें व्यक्तियों के दोनों अंग बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। उसी तरह मानसिक मंदता (मस्तिष्क से संबंधित) विकलांग या चलंत विकलांगता को विशेष यंत्र की जरूरत होती है जो उन्हें सही तरीके से प्राप्त नही हो पाता है। प्रत्येक भिन्न-भिन्न विकलांगता से प्रभावित लोगों के जटिल समस्या के लिए अलग-अलग चिकित्सकों की भागीदारी आवश्यक है।

क- बहु विकलांग से ग्रसित विकलांगजनों के लिए नीति वक्तव्य

सरकार विशेष पहल करें ताकि बहु विकलांगजनों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सरंक्षण और समाज में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित हो सके, इस लिए कार्य के वातावरण निर्माण सरकार करने में विशेष रूचि दिखाए।

  • कार्ययोजना के तहत-
  • जिला स्तर पर जाँच सुविधाऍ, विशेष कर छोटे बच्चों हेतु जॉच सुविधा सुनिश्चित करना।
  • श्रवण यंत्र न केवल खर्चीला होता है बल्कि लगातार मरम्म्त की भी जरूरत होती है। तकनीकी दक्षता और पैसों की जरूरत को भी ध्यान देना होता है। अतः सरकार को अनिवार्य रूप से इसके रखरखाव और मरम्मत के लिए प्रखंड और जिला स्तर पर व्यवस्था करनी चाहिए।
  • प्रखंड और जिला स्तर के अस्पतालों में फिजियोथेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट और अन्य सेवा अनिवार्य रूप से हों क्योंकि उक्त बातें विकलांगजनों के पुनर्वास से सीधा जुड़ा है।
  • मेडिकल/चिकित्सीय पाठ्‌यक्रम में विकलांग के पहचान और रोक के उपाय को शामिल करने के लिए अलग से स्नातक विषय चिकित्सक को छात्रों के लिए बुलाया जाए।
  • समाज कल्याण पदाधिकारियों के प्रशिक्षणकार्यक्रम में श्रवण दोष की पहचान क्षेत्रीय तरीकों से किया जाना चाहिए।
  • स्वास्थ्य विभाग द्वारा बहुविकलांगता जैसे मानसिक मंदता से ग्रसित, बधिर, दृष्टिहीन, विकलांगजनों को प्रमाण पत्र दिया जाए ताकि केन्द्र एवं राज्य में सरकार की सुविधाओं का लाभ उन्हें प्राप्त हो सके।
  • बहुविकलांगता के क्षेत्र में और उचित कोष देने हेतु मानव संसाधन को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था हेतु रास्ता निकालना आवश्यक है।

बहुविकलांगता के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्ंवयसेवी संस्थाओं को प्रोत्साहित करना एवं उन्हें बढ़ावा देकर सहयोग करना अपेक्षित है।

विकलांग महिलाएँ एवं लड़कियाँ

पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं के समक्ष अनेक चुनौतियाँ हैं। विकलांग महिलाओं के लिए यह चुनौतियाँ और भी दोगुनी हो जाती है। महिलाऍ, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक हानि की शिकार होती हैं जो उनके विकास जैसे- स्वास्थ्य सेवा, द्गिाक्षा, व्यवसायिक प्रशिक्षणऔर रोजगार में बाधक बनती है। यदि, वे शारीरिक और मानसिक विकलांगता से ग्रसित होते है तो इससे उबरने की चेष्टा खत्म हो जाती है, जिसके कारण उन्हें समाज में मिलकर रहना मुश्किल हो जाता है। परिवार में विकलांग अभिभावकों की देखभाल की जिम्मेवारी महिलाओ पर ही होती है, जो उन्हें अन्य गतिविधियों में भाग लेने की संभावनाओं की स्वतंत्रता से छिन भिन्न करती है।

क- विकलांग महिलाओं एवं लड़कियों पर नीति वक्तव्य

विकलांग महिलाओं एवं लड़कियों को अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सरकार को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से विकलांग लड़कियों एवं महिलाओं के समान अधिकारों के अवसर सृजन करने होंगे जिसके लिए विशेष कदम उठाने पड़ेंगे, तभी विकलांग लड़कियाँ एवं महिलाओं के प्रति होने वाले भेदभाव और प्रताड़ना को समाप्त किया जा सकता है।

इस नीति के अन्तर्गत -

विकलांग लड़कियों के लिए विशेष, समेकित और/व्यापक द्गिाक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं ऐसी गतिविधियों के नामांकन को केन्द्रित किया जाय।

  • विकलांग लड़कियों एवं महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के यातना या प्रताड़ना के खिलाफ दोषियों के प्रति सखत कार्रवाई हो सके तथा इसकी विशेष अनुश्रवण हो।
  • विकलांग महिलाओं को स्वरोजगार ऋण/योजना एवं साथ ही आरक्षित पद पर रोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • महिलाओं की जिम्मेवारी, परिवार, समुदाय, राष्ट्र और विद्गव में उनके योगदान के प्रति विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाना अनिवार्य हो।
  • विकलांग महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना अर्थात्‌ विशेष कर यौन स्वास्थ्य संबंधित सेवा।
    • विकलांग महिलाओं एवं लड़कियों को प्रत्येक पुनर्वास आधारित गतिविधियों और कार्यक्रमों से जोड़ना।
    • विकलांग महिलाओं के लिए यौन उत्पीड़न से सुरक्षा हेतु विशेष प्रावधान हो।

विकलांग लड़कियों एवं महिलाओं के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का गठन करने को बढ़ावा देना अनिवार्य हो एवं उनके द्वारा गतिविधियों को उचित सहयोग प्राप्त हो। विकलांग महिलाओं के आंदोलन को बहुत सारे प्रोत्साहन, सहयोग, सकारात्मक भेदभाव, समान अवसर और बाद में सशक्तीकरण और नेतृत्व की आवश्यकता है। यह नीति उन सबको पाने हेतु रास्ता बना सकती है!

प्रमाणीकरण

हक/अधिकार लेने हेतु प्रमाणता ही रास्ता है। प्रमाणता की प्रक्रिया जटिल होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के विकलांगजनों को प्रमाण पत्र पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी वे बिचौलियों के घेरे में आसानी से आ जाते हैं।

क- विकलांगता प्रमाण पत्र हेतु नीति

सरकार यह सुनिश्चित करे कि सभी विकलांगजनों को प्रमाण पत्र मिले और आवेदन देने के पश्चात्  निश्चित समय तक सभी विकलांगजनों को प्रमाण पत्र प्राप्त हो।

  • रणनीति के तहत-
    • प्रखंड स्तर में विकलांगता प्रमाण पत्र देने हेतु एवं आकलन का प्रावधान हो।
    • विकलांगता प्रमाणपत्र का नियमित आकलन हेतु जिला मुख्यालय  में एक निश्चित स्थान/केन्द्र का प्रावधान हो।

तीन दिन के भीतर विकलांगता प्रमाणपत्र का नवीकरण करने का प्रावधान हो।

केन्द्र सरकार के नियम के तहत विकलांगता प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान एवं परिवर्तन लाया जाए।

प्रमाणपत्र वितरण कैम्प हेतु मानदेय पर अनुभवी लोगों का संसाधन तैयार किया जाए।

ख- गैर सरकारी संस्थाओं के प्रोत्साहन हेतु नीति वक्तव्य

  • राज्य सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे सरकार की गतिविधियों को संचालित करने के लिए संस्थागत तकनीकी उपलब्ध कराने हेतु गैर सरकारी संस्थाओं को चिन्हित किया जाये जो जरूरी और वैकल्पिक सेवा प्रदान कर सके। विकलागजनों के लिए सेवा प्रावधान में महत्वपूर्ण जिम्मेवारी हो। कुछ संस्थाऍ स्वयं मानव संसाधन विकास और अनुसंधान गतिविधियों को कर रही हैं। सरकार उनके साथ मिल कर नीति निर्माण, नियोजन, क्रियान्वयन, अनुश्रवण और विकलांगता से जुडे़ विभिन्न मुद्‌दों पर विचार -विमर्द्गा करे। गैर सरकारी संस्था के साथ संपर्क कर विकलांगता से जुडे़़ मुद्‌दे, नीति निर्माण और क्रियान्वयन को बढ़ावा दिया जाए। नेटवर्किंग, जानकारियों का आदान-प्रदान और संस्था के अच्छे अभ्यासों को संस्थाओं से मिलकर बढावा दे। इसके अन्तर्गत निम्नांकित बातों को महत्ता प्रदान की जाये|
  • विकलांगता के क्षेत्र में कार्यकरने वाले गैर सरकारी संस्थाओं का निर्देशिका बनाई जाए जिसमें   भौगोलिक आधार के साथ-साथ मुख्य  गतिविधियों को भी दर्शाया जाए। विकलांगों के संगठन, परिवारिक एसोसिएशन और पैरवीकार समूह की पहचान भी निर्देशिका में शामिल कर अलग-अलग बताये जाएँ।

गैर सरकारी संगठनों के क्षेत्रीय/राज्य स्तरीय आन्दोलन के विकास में असमानता है। सुदूर इलाकों में कार्य करने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित करने हेतु पहल की जाए। प्रतिष्ठित संस्थाओ को भी उन क्षेत्रों में परियोजना लेने हेतु प्रोत्साहित किया जाए।

  • संस्था को न्यूनतम मानक, व्यवहार और मूल्यों का विकास करने हेतु जागरूक किया जाए।
  • संस्थाओं को अपने मानव संसाधन का विकास हेतु उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण का अवसर दिया जाए। प्रबंधन दक्षता में जो प्रशिक्षण दिए गए हैं, उन्हें सद्गाक्त किया जाए। गैर सरकारी संस्था एवं सरकार के बीच साझेदारी को मजबूत बनाने हेतु पारदर्शिता, जवाबदेही, प्रक्रिया इत्यादि मार्गदर्शन तत्त्व होंगे।
  • विकलांगता के क्षेत्र में कार्य कर रहे संस्थाओं को राज्य सरकार वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी।
    • विकलांगो के लिए विशेष विद्यालय हेतु सहयोग (कुल पारित खर्च का 90 प्रतिशत) एवं भवन निर्माण में 10 लाख तक के खर्च कर सकने की अनुमति।

अच्छे गैर सरकारी संस्थाओं जिला समाज कल्याण पदाधिकारियों, अभिभावक समूह, सरकारी विभाग, सरकारी पदाधिकारियों, विशेषज्ञों, नियोक्ता, कर्मी, समाचारपत्र/किताब इत्यदि को पुरस्कृत किया जाए।

राज्य विकलांगता नीति का सही क्रियान्वयन

  1. राज्य विकलांगता नीति का सही क्रियान्वयन के तिए राज्य स्तर पर मुख्य  समूह (कोर ग्रुप) का गठन होना चाहिए। जिसकी अध्यक्षता राज्य निःशक्तता आयुक्त करेंगे। साथ ही इसमें सरकारी विभाग, गैर सरकारी संगठन, प्रोफेशनल, अभिभावक समिति के प्रतिनिधि रहेंगे। जो सदस्य राज्यकर्मी नहीं होगें उन्हें राज्य के नियमानुसार उचित मानदेय दिया जाएगा। राज्य मुख्य  समूह (कोर ग्रुप) के कार्य इस प्रकार होंगे-
  2. विकलांगता नीति के क्रियान्वयन को सुगमता, समन्वय और अनुश्रवण करे।

समाज एवं सरकार के बीच कड़ी का काम करे।

बडे़ स्तर पर जुड़ाव हेतु प्रबंधन प्रणाली का विकलांगता योजना, क्रियान्वयन और विभागों के बीच तालमेल तैयार करना ।

जिला स्तरीय क्रियान्वयन ढाँचा स्थापित किया जाए जो कार्यक्रम संचालन में सहयोग और अनुश्रवण एवं निःशक्तता आयुक्त को प्रतिवेदन देने में सुगमता प्रदान करे।

  1. विकलांगता नीति को क्रियान्वित करने हेतु व्यापक जन शिक्षा का प्रसार हो तथा साथ ही साथ विकलांगता आंदोलन एवं सरकारी विभागों की क्षमता का विकास त्वरित हो।

सूचना तंत्र को विकलांगजनों के आँकडे़ सहित उचित प्रयोग एवं अनुसंधान के लिए उपयोग किया जाए।

अनुश्रवण

विकलांगजनों के मानव अधिकारों को बनाए रखने के लिए अनुश्रवण एक मुख्य  कारक है। विकलांगजनों के अधिकारों के हनन को ठीक करने के लिए इसे एक साधन के रुप में प्रयुक्त किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल इस नीति के ढाँचे के क्रियान्वयन के साथ-साथ प्रचलित पद्धतियों को मापने में भी हो सकता है। झारखण्ड में तमाम अनुश्रवण ढाँचों में अधिकारों का अनुश्रवण को उनके नियम में शामिल करना चाहिए जिसकी विशेष जिम्मेवारी राज्य निःद्गाक्तता आयुक्त की होगी। अनुश्रवण समिति का गठन राज्य एवं जिला स्तर पर हो ताकि विकलांगजनों के लिये संचालित योजनाओं का अनुश्रवण हो सके।

राज्य विशेष समूह, (स्टेटकोर ग्रुप) में समाज के साझेदारों साथ ही सरकारी विभाग का अनुश्रवण में महत्त्वपूर्ण जिम्मेवारी हो।

बजट तैयारी

राज्य के संभी संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके बजट का कम-से-कम तीन प्रतिशत विकलांगजनों की जरूरतों को पूरा करने में खर्च हो। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, माँ और बच्चों के विकास, विकलांगता और पुनर्वास के लिए विशेष प्रावधान बनाया जाए। इस प्रक्रिया के तहत्‌ राष्ट्रीय मापदंडों का विशेष रूपेण ध्यान रखना चाहिए।

 

राज्य सरकार के रोजगार के सभी क्षेत्रों में विकलांगो के लिए आरक्षण एवं ऊपरी आयु सीमा में छुट कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के अधिसूचना सं0-2096 दिनांक-25.04.2011 के आलोक में देय होगी।

विकलांगजनों के लिए खेल, चित्रकारी एवं संस्कृति की जानकारी रखनेवाले प्रशिक्षक एवं कोच को ब्रेल लिपि/साइन लेंग्वेज का प्रशिक्षण  मिले।

सभी विकलांगजनों के लिए खेल एवं सांस्कृतिक सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो तथा सभी खेल/ संस्कृति विधाओं की हर स्तर की प्रतियोगिताओं में सामान्य के साथ-साथ विकलांगनजनों के लिए विशेष खण्ड सृजित किये जायें।

खेल/संस्कृति अनुदान संबंधी समितियों में अनिवार्यता कम से कम एक विकलांग सदस्य अथवा ऐसे लोगों के प्रतिनिधि का मनोनित किया जाये।

स्रोत: समाज कल्याण विभाग, झारखण्ड सरकार|



© 2006–2019 C–DAC.All content appearing on the vikaspedia portal is through collaborative effort of vikaspedia and its partners.We encourage you to use and share the content in a respectful and fair manner. Please leave all source links intact and adhere to applicable copyright and intellectual property guidelines and laws.
English to Hindi Transliterate