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परिवार परामर्श केंद्र योजना

भूमिका

केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड द्वारा परिवार परामर्श केंद्र योजना वर्ष 1983 में शुरु की गई। इन केंद्रों में अत्याचार, पारिवारिक विवाद और सामाजिक बहिष्कार की शिकार महिलाओं और बच्चों को परामर्श, रेफरल और पुनर्वास सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा, ये संकट के समय आवश्यक कदम उठाकर हस्तक्षेप करते हैं और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में सदमे से उबरने के लिए परामर्श सेवाएं भी प्रदान करते हैं। ये केंद्र महिलाओं की स्थिति को प्रभावित करने वाले सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता लाने और जनमत बनाने का काम भी करते हैं। परिवार परामर्श केंद्र स्थानीय प्रशासन, पुलिस, न्यायालय, निःशुल्क कानूनी सहायता प्रकोष्ठों, चिकित्सा एवं मनश्चिकित्सा संस्थाओं, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, अल्पावास गृहों आदि के सहयोग से कार्य करते हैं।

योजना का उद्देश्य

  1. संकट के समय हस्तक्षेप करने, दहेज के कारण होने वाली मौतों की स्वतंत्र जांच करने और परिवार में समायोजन न होने पर परामर्श देने संबंधी विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करना।
  2. अलगाव के मामलों में सुलह कराने तथा वैवाहिक मामलों को न्यायालय के बाहर निपटाने का प्रयास करना।
  3. अल्पावास गृहों, निःशुल्क कानूनी सहायता प्रकोष्ठों, पुलिस सहायता आदि जैसी रेफरल सेवाएं प्रदान करना।
  4. अल्पावास गृहों, रिमांड होम्स, अनाथालयों, नशामुक्ति केंद्रों, वृद्धावस्था आश्रमों, आश्रय गृहों, जेलों, गिफ्टेड चिल्ड्रन के स्कूलों इत्यादि में परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराना।
  5. सामाजिक समस्याओं के बारे में जनमत तैयार करना।
  6. समाज कल्याण की उन गतिविधियों के बारे में शिक्षा और सूचनाएं देना जो बेहतर समन्वय और जनता को सेवाएं प्रदान करने के लिए विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी अभिकरणों द्वारा सहायता-प्राप्त हैं और उनके द्वारा चलाई जा रही हैं।
  7. पीड़ितों और उनके आश्रितों के लिए पुनर्वास सेवाओं की समुचित व्यवस्था करना।
  8. परिवार या समुदाय में व्यक्ति विशेष की किसी समस्या के निपटान के लिए हस्तक्षेप करने संबंधी सेवाएं प्रदान करना।

सहायता के लिए पात्रता की शर्ते

इस योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए संस्था/संगठन को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना चाहिए –

  • इसे उचित अधिनियम के तहत पंजीकृत होना चाहिए या पंजीकृत संगठन की नियमित सांविधिक शाखा होना चाहिए (मात्र पंजीकृत निकाय के रुप में संबद्ध होने या केंद्र/राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होना ही इसके लिए पर्याप्त नहीं होगा)।
  • सभी स्वैच्छिक संगठनों को नीति आयोग पोर्टल पर पंजीकृत होना चाहिए और गैर सरकारी संगठनों के पैन तथा पदाधिकारियों के आधार नंबर एवं पैन नंबर सहित उनका यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईडी) उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  • कार्यक्रम के अंतर्गत अनुदान के लिए आवेदन करने की तिथि से पहले संस्था को समाज कल्याण कार्य में तीन वर्षों का अनुभव होना चाहिए। उपर्युक्त में छूट दी जा सकती है यदि
    • संस्था किसी पर्वतीय, दूरवर्ती] सीमावर्ती और पिछड़े जनजातीय क्षेत्र में स्थित है
    • संस्था विशेष सेवाएं उपलब्ध कराती है जो उस क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है।
    • जहां बिल्कुल नई सेवाओं की शुरुआत करनी हो।
    • संस्था की अपनी समुचित रुप से गठित एक प्रबंधन समिति होनी चाहिए जिसके पास अपनी स्पष्ट शक्तियां, कर्तव्य और उत्तरदायित्व होना चाहिए और यह लिखित संविधान के रुप में। होना चाहिए। प्रबंधन समिति में पर्याप्त संख्या में महिला सदस्यों को भी होना चाहिए।
    • प्रबंधन समिति के सभी सदस्यों से इस आशय का प्रमाण पत्र कि वे एक दूसरे के संबंधी नहीं हैं।
    • संस्था के पास स्रोत व्यक्ति, प्रबंधन की कुशलता और योजना को शुरु करने का अनुभव होना चाहिए।
    • संस्था की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होनी चाहिए और आवश्यकतानुसार संस्था के पास उस कार्यक्रम को पूरा करने के लिए आवश्यक अतिरिक्त राशि होनी चाहिए, जिसके लिए बोर्ड द्वारा सहायता दी गई है। इसके अतिरिक्त इसके अपने संसाधनों से सेवाओं के मौजूदा स्तर को बनाए रखने के लिए पर्याप्त राशि हो।
    • संस्था की सेवाएं पंथ (धर्म), नस्ल, जाति या भाषा के आधार पर भेदभाव किए बिना भारत के सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध रहेंगी।

सहायता का प्रकार एवं विस्तार

वह संस्थाएं जो उद्देश्यों को पूरा करने में सक्षम हैं वे बजट सहित अपने प्रस्ताव को संबंधित राज्य समाज कल्याण बोर्डों के माध्यम से भेज सकती हैं। इनकी मैरिट के आधार पर जांच की जाएगी।

परिवार परामर्श केंद्र कार्यक्रम के बजट का विवरण

क्र.सं.

मद

संशोधित बजट

 

1.

 

दो परामर्शदाताओं के लिए मानदेय@रू.10,000 प्रतिमाह प्रति परामर्शदाता (केंद्र की अवस्थिति का विचार किए बिना)

रू.2,40,000/-

2.

(क) किराये पर व्यय@ 3000/- प्रतिमाह

(ख) आकस्मिक व्यय@ रू.44,000/-प्रति वर्ष

रू.80,000/-

 

कुल

रू.3,20,000/-

 

टिप्पणी- केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड द्वारा 90 प्रतिशत अंशदान अर्थात 2,88,000/- प्रतिवर्ष। स्वैच्छिक संगठन द्वारा 10 प्रतिशत मैचिंग अंशदान अर्थात रू.32000/-प्रति वर्ष ।

अनदान की मंजूरी के लिए नियम एवं शर्ते

अनदान-

  1. सहायक अनुदान की मंजूरी, योजना में वर्णित नियमों के अनुसार संतोषजनक कार्य-निष्पादन की शर्त के अधीन अनंतिम (प्रोविज़नल) रुप से दी गई है।
  2. परामर्शदाताओं के मानदेय और परिवार परामर्श केंद्र को अनावर्ती मदों के लिए पूर्ण अनुदान दिया गया है। अन्य आवर्ती व्यय के लिए 90 प्रतिशत अनुदान दिया गया है, जो अधिकतम रु.80,000/-प्रतिवर्ष के शर्ताधीन है। संगठन को अपने संसाधनों से अन्य आवर्ती मदों, पर 10 प्रतिशत मैचिंग अंशदान करना होगा।
  3. अनुदानग्राही संस्था को किसी अन्य स्रोत से इसी उद्देश्य के लिए न तो अनुदान राशि मंजूर की गई है और न ही उसे यह राशि प्राप्त होने की संभावना है। लाभार्थियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
  4. अनुदान राशि का उपयोग निर्धारित समयावधि में उसी उद्देश्य के लिए किया जाएगा, जिसके लिए इसे मंजूरी दी गई है।
  5. संस्था की सेवाएं भारत के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या पंथ के आधार पर भेदभाव किए बिना खुली रहेंगी।
  6. मंजूरी पत्र की प्राप्ति/स्वीकृति और परिवार परामर्श केंद्र की स्थापना के बाद परिवार परामर्श केंद्र चालू समझा जाएगा।
  7. प्रबंधन समिति के सदस्य आपस में संबंधी नहीं होने चाहिए।

रिकॉर्डों का रखरखाव

परिवार परामर्श केंद्र को निम्नलिखित रिकार्ड रखना अपेक्षित है, जो हमेशा अद्यतन हों और सत्यापन हेतु परिवार परामर्श केंद्र में सहज रूप से उपलब्ध हों-

  • परामर्शदाताओं के शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण-पत्रों की फोटोकापी सहित उनकी वैयक्तिक फाइल
  • उपस्थिति पंजिका
  • छुट्टियों का रिकार्ड (यदि परामर्शदाता छुट्टी पर है/दौरे पर है, इसकी सूचना फाइल में उपलब्ध होनी चाहिए)
  • बोर्ड के अनुदान से खरीदी गई परिसंपत्तियों के संबंध में सामान्य वित्तीय नियम (जी.एफ.आर.)-19 के फॉर्म में रजिस्टर
  • उपसमिति के सदस्यों का विवरण और उन सभी सदस्यों द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित उपसमिति की बैठक के कार्यवृत्त
  • रोकड़ बही, वाउचर इत्यादि सहित लेखा बही
  • अनुदान के संबंध में अलग लेखा विवरण होना चाहिए। लेखा विवरण को प्राप्ति एवं भुगतान, आय एवं व्यय तथा तुलन पत्र तीनों रूपों में लेखा परीक्षित विवरण तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र की मूल प्रति इस वित्तीय वर्ष के छह माह के भीतर केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड को भेजें।
  • प्रत्येक आवेदक/क्लाइंट की अलग-अलग केस फाइले हों जिनमें आवेदन-पत्र, सभी बैठकों, दुखी व्यक्तियों की सहायता के लिए क्लाइंट या उसके संबंधियों के साथ काउंसलिंग सत्र इत्यादि का तिथि-वार विवरण हो। प्रत्येक मामले में पुनर्वास के रिकॉर्ड और मामले के अनुपालन को भी दर्शाया जाना चाहिए।
  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पिछड़े/सामान्य वर्ग के | लाभार्थियों का अलग-अलग रिकॉर्ड रखा जाए।

परिसंपत्तियां

  • संस्था बोर्ड के अनुदान से पूर्णतः या आंशिक रूप से अर्जित स्थायी या अर्धस्थायी परिसंपत्तियों का ब्योरा सामान्य वित्तीय नियम (जी.एफ.आर.)-19 के अनुसार रखेगी तथा इस ब्योरे की एक प्रति इस कार्यालय को प्रत्येक वित्त वर्ष की समाप्ति पर भेजेगी तथा प्रत्येक वस्तु जिसकी कीम 10,000/- से कम है, के विवरण को संस्था अलग से भेजेगी।
  • बोर्ड के अनुदान से अर्जित या निर्मित सभी परिसंपत्तियों को केंद्रीय बोर्ड की पूर्व-मंजूरी के बिना बेचा नहीं जाएगा, ऋणग्रस्त नहीं किया जाएगा, न ही गिरवी रखा जाएगा या जिन उद्देश्यों के लिए उसको मंजूर किया गया है, उसके अलावा अन्य किसी भी उद्देश्य के लिए इसका उपयोग नहीं किया जाएगा। ऐसी परिसंपत्तियों को केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड/राज्य बोर्ड को वापस कर दिया जाएगा या भारत सरकार के नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

कर्मचारी

  • दो प्रशिक्षण प्राप्त परामर्शदाता जो समाज कार्य/मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर हों, और उन्हें विपत्ति से घिरी महिलाओं और परिवारों के साथ कार्य करने और उनकी काउंसलिंग करने में दो वर्ष का अनुभव हो, को परिवार परामर्श केंद्र के लिए नियुक्त किया जाएगा। इसमें से एक परामर्शदाता के पद पर केवल महिलाओं को नियुक्त किया जाए। परिवार परामर्श केंद्र में नियुक्त किए जाने वाले परामर्शदाताओं को समझदार होना चाहिए और उनमें संवेदनशील प्रकृति के मामलों से निपटने की योग्यता होनी चाहिए।
  • सभी परामर्शदाताओं को उस स्वैच्छिक संगठन का कर्मचारी माना जाएगा जहां वे नियुक्त हैं। उनकी नियुक्ति चयन समिति द्वारा की जाएगी। इस चयन समिति में नजदीकी समाज कार्य स्कूल या मनोविज्ञान विभाग के प्रमुख तथा संगठन के सदस्य शामिल होंगे।
  • केंद्रीय बोर्ड द्वारा प्रत्येक परामर्शदाता को रूपये 10,000/- प्रतिमाह की दर से मानदेय दिया जाएगा।
  • पर्वतीय, जनजातीय और दूरवर्ती क्षेत्रों में परामर्शदाताओं की योग्यता में छूट केवल केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड द्वारा अपवाद वाले मामले में प्रत्येक मामले के लक्षणों के आधार पर दी जाएगी। संगठन को एक वचनबंध देना होगा कि उनके जिले में मौजूद विश्वविद्यालयों में समाज कार्य या मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि उपलब्ध नहीं है। परिवार परामर्श केंद्र के परामर्शदाताओं के पद के लिए स्नातकों पर विचार नहीं किया जाएगा। राज्य बोर्ड के माध्यम से चयन समिति द्वारा छूट की सिफारिश की जा सकती है।

संगठनात्मक ढांचा

  • परिवार परामर्श केंद्र के लिए समाज कार्यकर्ताओं, स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधियों, पुलिस, निःशुल्क कानूनी सहायता प्रकोष्ठों और अन्य स्वैच्छिक संगठनों की उपसमिति का निर्माण करना अनिवार्य है, जो अल्पावास गृह और इसी तरह के अन्य संगठनों जो परित्यक्त महिलाओं के पुनर्वास में उपयोगी हों, की सुविधा प्रदान कर सकें।
  • योजना के उद्देश्यों को हासिल करने और केंद्र को उसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मार्गदर्शन देने हेतु उपसमिति द्वारा एक कार्य योजना बनाई जाए। केंद्र अपने उद्देश्यों की पूर्ति के संबंध में अपने कार्यनिष्पादन को जानने के लिए तीन महीने में कम से कम एक बार बैठक करे। काउंसलिंग, गृह का दौरा करने या मूल संगठन के माध्यम से विपत्ति में घिरी महिलाओं को आवश्यक साहस प्रदान करते समय सदस्यों को भी शामिल किया जा सकता है।

परामर्श केंद्र

  • परिवार परामर्श केंद्र ऐसे क्षेत्र में स्थित होना चाहिए जहां । विपत्ति में घिरी महिलाओं के पुनर्वास के लिए रेफरल सेवाएं जैसे पुलिस सहायता, निःशुल्क कानूनी सहायता एवं अन्य सुविधाएं । आसानी से उपलब्ध हों तथा जो व्यक्ति परिवार परामर्श केंद्र से सहायता प्राप्त करना चाहते हों वे यहां आसानी से पहुंच सकें।
  • परिवार परामर्श केंद्र का वातावरण विपत्ति में घिरे व्यक्तियों की काउंसलिंग करने के लिए सहायक होना चाहिए। काउंसलिंग के लिए एक अलग कमरा होना चाहिए जिसमें परामर्श हेतु सभी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हों।
  • केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड के पूर्व अनुमोदन के बिना केंद्र की अवस्थिति में परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
  • जिला कलेक्टर और पुलिस जिला आयुक्त को केंद्र का पूरा पता/अवस्थिति सहित काउंसलिंग सेंटर की स्थापना के बारे में सूचना दी जाए ताकि जब भी आवश्यकता हो खासकर रेफरल सेवाओं के समय उनके साथ सक्रिय रुप से सहयोग/समन्वय किया जा सके।

निरीक्षण

  • परिवार परामर्श केंद्र केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड/राज्य बोर्ड/नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक/राज्य सरकार/भारत सरकार के नामितों द्वारा निरीक्षण के लिए खुला रहेगा।
  • निरीक्षण के समय मार्गदर्शन/सुझाव को लिखा जाए और इसका तत्काल पालन किया जाए और निरीक्षण के एक माह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट को केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड/राज्य बोर्ड को भेजा जाए I
  • संस्था मामलों के सारवृत्त सहित परिवार परामर्श केंद्र की अप्रैल से सितंबर और अक्तूबर से मार्च तक की अवधि की अर्धवार्षिक प्रगति रिपोर्ट को निर्धारित प्रारूप में एक माह के भीतर भेजेगी।

अनुदान पर रोक

  • यदि किसी भी समय यह पता चले कि इनमें से किसी शर्त का पालन नहीं किया जा रहा है अथवा अनुदानग्राही अनुदान-राशि का उपयोग उस उद्देश्य के लिए करने में असमर्थ है, जिसके लिए इसे मंजूर किया गया था या योजना के नियमों से हटती है, तो इस अनुदान को रद्द किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संस्था को पूरी अनुदान राशि लौटानी होगी तथा राशि प्राप्त होने की तिथि से मौजूदा बैंक दर से उस पर ब्याज भी देना होगा।
  • यदि संस्था योजना के अनुसार कार्यक्रम का कार्यान्वयन करने में सक्षम नहीं है और निरीक्षण के समय बोर्ड के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर मार्गदर्शन देने के बावजूद संस्था का कार्य-निष्पादन असंतोषजनक है तो परिवार परामर्श केंद्र योजना के अंतर्गत अनुदान को रद्द कर दिया जाएगा।
  • नई मंजूरी के मामले में मंजूरी पत्र प्राप्त होने के तीन माह के भीतर परिवार परामर्श केंद्र को अपना कार्य शुरु कर देना चाहिए। ऐसा न करने पर यह समझा जाएगा कि संस्था परिवार परामर्श केंद्र चलाने की इच्छुक नहीं है। मंजूर अनुदान को रद्द कर दिया जाएगा और राशि प्राप्त होने की तिथि से मौजूदा बैंक दर से उस पर ब्याज भी देना होगा।

 

स्रोत: केंद्रीय समाज कल्यामण बोर्ड, महिला व बाल कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार



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