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छत्तीसगढ़ राज्य में कल्याणकारी योजनायें

छत्तीसगढ़ राज्य में कल्याणकारी योजनायें

भूमिका

राज्य के समाज कल्याण विभाग के द्वारा जहां एक ओर वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों के संरक्षण हेतु नियमों का क्रियान्वयन कराया जाता है वहीं दूसरी ओर जो बच्चे परिस्थितियों वश आपराधिक गतिविधियों से जुड़े हैं अथवा जिन्हें देखरेख की अपेक्षा है, उनके पुनर्वास के लिये योजनाएं संचालित की जा रहीं हैं। राज्य में समूहों को संरक्षण एवं सुरक्षा प्रदान करना राज्य शासन का उत्तरदायित्व है। समाज कल्याण विभाग अपने सीमित संसाधनों से निःशक्त व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं, निराश्रित व्यक्तियों के लिये योजनाओं का क्रियान्वयन करता है। प्रदेश में निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995, माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007, राष्ट्रीय न्यास (स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क अंगाघात, मानसिक मंदता एवं बहुनिःशक्तता से ग्रसित व्यक्ति कल्याण) अधिनियम 1999, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2000 के प्रावधानों का क्रियान्वयन सकारात्मक एवं व्यावहारिक रूप में किया जा रहा है। राज्य में निःशक्त व्यक्तियों की शीघ्र पहचान से लेकर उनके सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास के लिये योजनाएं संचालित हैं। वरिष्ठ नागरिकों के दीर्घकालीन अनुभवों तथा उनके द्वारा किये गये उत्कृष्ट कार्यों के प्रति समाज में कृतज्ञता ज्ञापन स्वरूप 01 अक्टूबर को अन्तर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत से राज्य स्तर तक वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया जाता है। माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के प्रावधानों पर तत्परता से कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में 12 लाख से अधिक व्यक्तियों को पेंशन प्रदान कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा दी जा रही है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में आपातकालीन स्थिति के लिये खाद्यान्न की व्यवस्था की गई है। समाज कल्याण विभाग अपने दायित्वों के अनुरूप राज्य में वंचित एवं पीडि़त वर्ग के लिये कार्य कर रहा है।

सामाजिक सहायता कार्यक्रम

सामाजिक सहायता कार्यक्रम अन्तर्गत निम्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं-

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना

राज्य शासन द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत प्रदेश के मूल निवासी को रूपये 200/- प्रतिमाह पेंशन दी जाती है, जो निम्न में से किसी एक श्रेणी का हो:-

60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निराश्रित वृद्ध।

50 वर्ष या उससे अधिक आयु की निराश्रित विधवा परित्यक्त महिलाएं।

6 से 14 वर्ष के निराश्रित निःशक्त, शालेय छात्र एवं गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार के निःशक्त बच्चे चाहे वे निराश्रित न हो।

14 वर्ष से अधिक आयु के निराश्रित निःशक्त व्यक्ति।

सुखद सहारा योजना

राज्य में 18 से 50 वर्ष तक की निराश्रित विधवा/परित्यक्त महिलाओं को रूपये 200/- प्रतिमाह की दर से पेंशन भुगतान की जाती है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के द्वारा पुनर्वासित होने तक सहायता प्रदान करना है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना 2 अक्टूबर 1995 से संचालित की जा रही है। योजनांतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 65 वर्ष या अधिक आयु के वृद्ध व्यक्तियों को रूपये 300/- प्रतिमाह की दर से पेंशन भुगतान स्थानीय निकायों के माध्यम से किया जाता है। जिसमें रूपये 100/- के अंशदान की पूर्ति राज्य शासन तथा रूपये 200/- के अंशदान की पूर्ति केन्द्र शासन से अतिरिक्त सहायता प्राप्त कर की जाती है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना फरवरी 2009 से संचालित की जा रही है। योजनांतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले 40 से 64 वर्ष आयु वर्ग की विधवा को रूपये 200/- प्रतिमाह की दर से पेंशन भुगतान स्थानीय निकायों के माध्यम से किया जाता है। रूपये 200/- केन्द्र शासन से अतिरिक्त सहायता प्राप्त कर पेंशन भुगतान की जाती है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना फरवरी 2009 से संचालित की जा रही है। योजनांतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 18-64 वर्ष आयु वर्ग के गंभीर (एक प्रकार की विकलांगता जो 80 प्रतिशत से अधिक हो) एवं बहुविकलांग को रूपये 200/- प्रतिमाह की दर से पेंशन भुगतान स्थानीय निकायों के माध्यम से किया जाता है। रूपये 200/- केन्द्र शासन से अतिरिक्त सहायता प्राप्त कर पेंशन भुगतान की जाती है।

राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना

राष्ट्रीय परिवार सहायता योजनांतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार के ऐसे मुखिया स्त्री या पुरूष जिनकी आमदनी से परिवार का अधिकांश खर्च चलता है तथा जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक 65 वर्ष से कम हो प्राकृतिक/आकस्मिक मृत्यु हो जाने पर परिवार के वारिस मुखिया को रूपये 10,000/- की एक मुक्त  सहायता प्रदान की जाती है।

समाज रक्षा

सामाजिक सहायता कार्यक्रम अन्तर्गत निम्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं-

किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2000 यथा संशोधित 2006

किशोर न्याय अधिनियम 2000 के अंतर्गत विधि अवरूद्ध एवं देखरेख की अपेक्षा रखने वाले बच्चों के लिये कार्यक्रम-किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2000, 1 अप्रेल 2001 से सम्पूर्ण भारत के साथ-साथ राज्य में प्रभावशील है। इस अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष तक की आयु के विधि अवरूद्ध एवं देख-रेख की अपेक्षा रखने वाले बालक/बालिकाओं के संरक्षण, भरण-पोषण, विकास, चिकित्सकीय देखरेख एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जाना प्रावधानित है। विभाग द्वारा अधिनियम के तहत् नियम 2006 अधिसूचना क्रमांक 312, दिनांक 19.12.2006 से अधिसूचित किये गये हैं।

किशोर न्याय अधिनियम 2000 के क्रियान्वयन हेतु राज्य में रायपुर, बिलासपुर, अम्बिकापुर (सरगुजा), जगदलपुर (बस्तर) एवं दुर्ग जिले में विधि अवरूद्ध बालकों के लिए सम्प्रेक्षण गृह तथा विधि अवरूद्ध बालिकाओं के लिए सम्प्रेक्षण गृह राजनांदगांव जिले में स्थापित है। वर्तमान में उक्त संस्थाओं में 247 हितग्राही निवासरत हैं। प्रकरणों के निराकरण हेतु अधिनियम के प्रावधान के अनुसार प्रदेश के 16 जिलों में किशोर न्याय बोर्ड एवं बालक कल्याण समिति का गठन किया गया है। अधिनियम के प्रावधान अनुसार अनुपलब्ध संस्थाओं की व्यवस्था के तहत राज्य में स्वैच्छिक संस्था की सहभागिता केन्द्र/राज्य योजनांतर्गत अनुदान की व्यवस्था कर छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद् द्वारा प्रमाणन उपरान्त अग्रलिखित संस्थाओं का संचालन किया जा रहा है:-

अनुरक्षण गृह, (पष्चातवर्ती) बालिका, रायगढ़।

अनुरक्षण गृह, (पष्चातवर्ती) बालक, सरगुजा।

विशेष गृह (बालक) दुर्ग।

विशेष गृह (बालिका) पेण्ड्रा बिलासपुर।

बाल गृह (बालिका) कांकेर।

देखरेख की अपेक्षा रखने वाले बच्चों को सेवायें प्रदान करने हेतु 11 स्वैच्छिक संस्थाओं का प्रमाणन किया गया है।

किशोर न्याय निधि का गठन

किशोर न्याय अधिनियम 2000 के प्रावधानों के क्रियान्वयन हेतु बालकों के व्यवसायिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास हेतु आर्थिक सहायता दिये जाने का प्रावधान है। राज्य शासन ने इस हेतु बजट राशि रूपये 10.00 लाख का प्रावधान किया है।

अपराधी परिवीक्षा अधिनियम 1958 का क्रियान्वयन

इस अधिनियम के अंतर्गत ऐसे अपराधी जो आजीवन कारावास अथवा मृत्युदंड से दण्डनीय न हो तथा जिनकी आयु 21 वर्ष हो को कारावास के स्थान पर सदाचार की परिवीक्षा पर छोड़ने का प्रावधान है। न्यायिक दण्डाधिकारी द्वारा प्रकरणों पर परिवीक्षा अधिकारी से अपराधी व्यक्ति के संबंध में जांच रिर्पोट प्राप्त कर परिवीक्षा पर छोड़ने का आदेश पारित किया जाता है तथा निर्धारित अवधि तक परिवीक्षा अधिकारी की देखरेख में रखने का आदेश भी दिया जाता है। इस अधिनियम के अंतर्गत प्रदेश में विभाग द्वारा परिवीक्षा अधिकारियों की सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए कार्यक्रम

प्रदेश के निराश्रितों एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता अधिनियम 1970 अंतर्गत अशासकीय संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों को वृद्धाश्रम संचालन हेतु जिले में संग्रहित निराश्रित निधि की ब्याज राशि से पात्रता अनुसार 90 प्रतिशत राशि प्रदाय की जाती है। प्रदेश में 17 वृद्धाश्रम संचालित हैं जहां 362 वृद्धजन लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश में निराश्रित निधि की ब्याज राशि से जिला राजनांदगांव, बस्तर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, सरगुजा, धमतरी, कबीरधाम, कांकेर एवं दन्तेवाड़ा में वृद्धाश्रम स्वैच्छिक संस्थाओं/स्थानीय निकायों द्वारा संचालित किये जा रहे हैं।

नशाबंदी कार्यक्रम

प्रदेश में नशामुक्ति के पक्ष में जनजागृति निर्मित करने के लिये विभागीय क्षेत्रीय अधिकारियों के माध्यम से विभिन्न प्रचार-प्रसार के कार्यक्रम ग्राम स्तर तक संचालित किये जाते हैं, जिनमें मुख्यतः रैली, पोस्टर, होर्डिंग्स, नुक्कड़ नाटक, गीत, नृत्य, प्रदर्शनी , प्रतियोगिताएं, प्रश्नमंच  तथा शासकीय/अशासकीय कलाकारों के आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। मादक द्रव्य एवं नशीले  पदार्थों के दुष्परिणामों के विचार हेतु जन सामान्य में जागरूकता विकसित की जाती है। नशाबंदी कार्यक्रम अन्तर्गत निम्न दिवसों का आयोजन किया गया:-

31 मई 2010 को अंतर्राष्ट्रीय धुम्रपान निषेध दिवस,

26 जून 2010 को नशा निवारण दिवस,

2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2010 तक मद्य निषेध सप्ताह,

18 दिसम्बर 2010 मद्य निषेध दिवस

30 जनवरी 2011 नशामुक्ति संकल्प एवं शपथ दिवस

राज्य में 02 नशामुक्ति केन्द्र जिला रायपुर एवं बिलासपुर में केन्द्रीय अनुदान से स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा संचालित है।

कलापथक योजना

 

शासन की संवेदनशील एवं विकासोन्मुखी जन कल्याणकारी योजनाओं को प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक नाट्य, गीत एवं नृत्य के माध्यम से क्षेत्रीय बोली में जन सामान्य तक पहुंचाने के लिये राज्य के 07 जिलों में शासकीय कलाकारों की नियुक्ति की गई है, जो सभी 18 जिलों में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करते हैं। प्रत्येक दल में 01 प्रमुख कलाकार तथा 07 कलाकार होते हैं।

वर्ष 2010-2011 में कलापथक दलों द्वारा दहेज प्रथा, नशाबंदी, बाल विवाह, छुआछूत उन्मूलन, परिवार कल्याण, निःशक्त कल्याण, एड्स, मलेरिया, ग्रामीण स्वच्छता तथा अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं पर केन्द्रित 630 कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। 15 जिलों में विभागीय मान्यता प्राप्त 146 अशासकीय कला मण्डली तथा 6 सांस्कृतिक संगठन कार्यरत हैं। विभागीय मान्यता प्राप्त कलामण्डली/ सांस्कृतिक संगठन को जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से करने हेतु प्रतिवर्ष सहायक अनुदान प्रदाय किया जाता है। राज्य में लोक-संस्कृति, परम्परा, लोकषैली के माध्यम से विकासात्मक गतिविधियों के प्रचार-प्रसार करने के लिये राज्य स्तरीय लोकोत्सव का आयोजन जिला मुख्यालय अंतर्गत किया जाता है।

निःशक्त कल्याण योजना

दीनदयाल निःशक्तजन पुनर्वास कार्यक्रम

निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर अधिकारों का संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के प्रावधानों के क्रियान्वयन के तहत राज्य में सर्वेक्षण एवं जनगणना में प्राप्त निःशक्तजनों की संख्या में से 40 प्रतिशत से ऊपर वाले निःशक्तजनों को प्रमाणित करने हेतु दीनदयाल निःशक्तजन पुनर्वास कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में निःशक्तजनों का प्रमाणीकरण, पंजीयन एवं परिचय पत्र का वितरण किया जा रहा है। निःशक्तजनों का परीक्षण किया जाकर पात्र हितग्राही प्रमाण पत्र वितरित किये गये हैं। विभाग द्वारा समस्त पात्र निःशक्त व्यक्तियों को प्रमाणीकरण हेतु शिविर  आयोजन कर सतत् कार्यवाही की जा रही है।

इसके अतिरिक्त राज्य में निःशक्तों के लिए ये कार्यक्रम चलाये जा रहें हैं -

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना

जिला पुनर्वास केन्द्र एवं जिला निःशक्त पुनर्वास केन्द्र

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना

राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना

अधिक जानकारी के लिए राज्य के संबंधित विभाग कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है|

स्रोत: समाज कल्याण विभाग, भारत व छत्तीसगढ़ सरकार|



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