অসমীয়া   বাংলা   बोड़ो   डोगरी   ગુજરાતી   ಕನ್ನಡ   كأشُر   कोंकणी   संथाली   মনিপুরি   नेपाली   ଓରିୟା   ਪੰਜਾਬੀ   संस्कृत   தமிழ்  తెలుగు   ردو

बिहार किशोर न्याय (बालको की देखरेख एवं संरक्षण) नियमावली, 2012

बिहार किशोर न्याय (बालको की देखरेख एवं संरक्षण) नियमावली, 2012

परिचय

इस पृष्ठ पर बिहार किशोर न्याय (बालको की देखरेख एवं संरक्षण) नियमावली, 2012 का परिचय दिया गया है।

भूमिका

सं. 10/ प्र.गृ. स्था. -21/2022-1695 किशोर न्याय (बालको की देखरेख एवं संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2006 (2006 का 33) द्वारा यथासंशोधित की धारा 68 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार सरकार नियम बनाती है ।

प्रारंभिक

 

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

(1) यह नियमावली “बिहार किशोर न्याय (बालको की देखरेख एवं संरक्षण) नियमावली, 2012” खी जा सकेगी ।

2. इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा ।

3. यह नियमावली राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू होगी ।

2. परिभाषा

जब तक सन्दर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो इस नियमावली में

(क) “अधिनियम” से अभिप्रेत है किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2000 (2000 का 56) द्वारा यथासंशोधित किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2006 (2006 का 33);

(ख) “परित्यक्त” से ऐसा लावारिस और परित्यक्त बालक से अभिप्रेत है, जो समिति द्वारा सम्यक जाँच के पश्चात परित्यक्त घोषित किया गया है;

(ग) “बालक के सर्वोत्तम हित” से अभिप्रेत है किशोर या बालक का शारीरिक, भावनात्मक, बौद्धिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा नैतिक विकास सुनिश्चित करने के लिए लिया गया निर्णय;

(घ) “बाल दुरूपयोग” से अभिप्रेत है बुरा बर्ताव करना जिसमें निम्नलिखित में से कोई भी सम्मिलित है:-

(i) शारीरिक, मानसिक, यौन, या भावनात्मक बुरा बर्ताव,

(ii) शब्द या कार्य के माध्यम से ऐसा कोई कार्य करना जिससे बालक की गरिमा तिरस्कृत होती हो,

(iii) जीने की बुनियादी आवश्यकताओं से उन्हें वचित करना ।

(ड.) “हितैशी” से अभिप्रेत है ऐसी कोई प्रक्रिया और निर्वचन, दृष्टिकोण, वातावरण एवं व्यवहार जो मानवीय विचारशील एवं बच्चे के सर्वोतम हित में हो;

(च) “सामुदायिक सेवा” का अभिप्राय है काननू का उल्लंघन करने वाले किशोरों द्वारा अन्य न्यायिक उपचार और शक्तियों के स्थान पर समाज को प्रदान की जाने वाली सेवा, जो तिरस्कारपूर्ण और अमानवीय न हो ।

 

जिसके उदाहरण निम्नलिखित हो सकेंगे (सिर्फ गैर जोखिम भाग)

(i) पार्क की सफाई करना/बाग़ लगाना ।

(ii) परिचर्या गृहों/वृद्धाश्रमों में वृद्धों की सेवा करना ।

(iii) स्थानीय अस्पताल या परिचर्या गृह की सहायता करना ।

(iv) विकलांग बच्चों की सेवा करना ।

(v) सामुदायिक स्तर पर वृद्धजनों की देखभाल करना ।

(vi) सामूहिक कार्य ।

(vii) अपने आवास क्षेत्र में मानवता से सबंधित कार्यों में सम्मिलित होना।

(छ) "निरोध" से अभिप्रेत है विधि का उल्लंघन करने वाले किशोरों के मामले में सुधारात्मक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप "सरंक्षणात्मक अभिरक्षा";

(ज) "प्रपत्र" से अभिप्रेत है इन नियमों के साथ सलंग्न प्रपत्र;

(झ) "पोषक देखरेख" से अभिप्रेत है बाल कल्याण समिति के आदेशनुसार सीमित अवधि के लिए देख-रेख एवं सरंक्षण के जरुरतमन्द बालक को पोषक माता-पिता की देख-रेख में रखा जाना;

(ट) "सामूहिक परामर्श" से अभिप्रेत है राज्य सरकार या किसी मान्यता प्राप्त स्वयं सेवी सगंठन द्वारा आयोजित किसी सामूहिक परामर्श योजना में किशोर को भाग लेने हेतु किशोर न्याय बोर्ड द्वाराअधिनियम की धारा-16 के अधीन दिया गया आदेश;

(ठ) "वैयक्तिक देखरेख योजना" किसी किशोर या बालक के लिए ऐसी व्यापक विकास योजना है, जो उस किशोर या बालक की आयु विशिष्ट और लिगं विशिष्ट आवश्यकताओं तथा उस किशोर और बालक के मामले के पूर्ववृत पर आधारित हो, जिसे किशोर या बालक का खोया आत्मसम्मान, गरिमा और स्वाभिमान लौटाने और उसे जिम्मेदार नागरिक बनाने के उद्देश्य से उसके और माता-पिता/अभिभावक (यदि उपलब्ध हो तो) के साथ परामर्श करके तैयार किया गया हो और इस योजना में किशोर अथवा

बालक की निम्नलिखित आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी

1. स्वास्थ्य सबंधी आवश्यकताएँ;

2. भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक आवश्यकताएँ;

3. शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण सबंधी आवश्यकताएँ;

4. विश्राम, सृजनात्मकता एवं खेल कूद;

5. भावनात्मक लगाव और नातेदारी;

6. सभी प्रकार के शोषण, उपेक्षा एवं दुर्व्यवहार से सरंक्षण;

7. समाज की मुख्यधारा में शामिल करना; तथा

8. निर्मुक्ति तथा प्रत्यावर्तन के पश्चात उसका अनुवर्तन ।

(ड) "संस्था" से अभिप्रेत है इस अधिनियम की कर मश: धारा 8, धारा 9, धारा 34, धारा 34 की उपधारा (3) तथा धारा 37 के अधीन स्थापित, प्रमाणित या मान्यता प्राप्त एवं रजिस्ट्रीकृत कोई पर्यवेक्षण गृह या कोई विशेष गृह या कोई बाल गृह या कोई आश्रम गृह;

(ण) "अधीक्षक" से अभिप्रेत हिया ऐसा व्यक्ति जो संस्था के नियत्रण एवं प्रबन्धन के लिए नियुक्त हो;

(त) "अनाथ" से अभिप्रेत है ऐसा बालक जिसका माता-पिता या इच्छुक एवं सक्षम विधिक अथवा नैसर्गिक सरंक्षक नहीं है;

(थ) "सुरक्षित स्थान" से अभिप्रेत है विधि का उल्लंघन करने वाले किशोर अथवा बालक के लिए अधिनियम की धारा 12 की उपधारा (3) और धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित एवं मान्यता प्राप्त कोई संस्था;

(द) "मान्यता प्राप्त व्यकित", "मान्यता प्राप्त संस्था" से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 2 के खण्ड (ज) और (झ) के अनुसार मान्यता प्रदान किए गए व्यक्ति, जिसको सक्षम प्राधिकारी द्वारा उपयुक्त माना गया हो या वे संस्थाएँ, जिनको सक्षम प्राधिकारी की सिफारिश पर राज्य सरकार द्वारा उपयुक्त माना गया है । यह किसी विशिष्ट बच्चे के लिए प्रत्येक मामले के आधार पर अस्थायी अवधि के लिए किया जायेगा । ये संस्थान किसी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हो सकते है;

(ध) "पंजीकरण" से अभिप्रेत है वैसी सभी संस्थाएँ या अभिकरण या स्वैच्छिक संगठन जो धारा 34 की उपधारा (3) के अधीन देख-रेख और संरक्षण के जरुरतमन्द बालकों को आवासीय देखभाल या कोई अन्य देखभाल प्रदान करने के लिए पंजीकृत है;

(न) "राज्य सरकार" से अभिप्रेत है बिहार सरकार;

(प) "निराश्रित और कामकाजी बालक" से अभिप्रेत है वे बालक जो इस अधिनियम की धारा 2 के खण्ड (घ) (1) के अधीन अधिकथित उपबंधों के अनुसार जीवन-निर्वाह, देखरेख, संरक्षण एवं सहायता के दृश्यमान साधनों से रहित हों;

(फ) "अभ्यर्पित बच्चें से अभिप्रेत है समिति की राय में शारीरिक, भावनात्मक एवं ऐसे सामाजिक कारणों से त्यागा गया बालक जो माता-पिता या अभिभावक के वर्ष में नही है;

(3) उन सभी शब्दों और पदों, जो अधिनियम में परिभाषित और प्रयुक्त है किन्तु इस नियमावली में परिभाषित नहीं हैं, के वही अर्थ होगें, जो अधिनियम में उनके लिए दिए गए है ।

 

स्रोत: समाज कल्याण विभाग,बिहार सरकार



© 2006–2019 C–DAC.All content appearing on the vikaspedia portal is through collaborative effort of vikaspedia and its partners.We encourage you to use and share the content in a respectful and fair manner. Please leave all source links intact and adhere to applicable copyright and intellectual property guidelines and laws.
English to Hindi Transliterate