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बिहार में सामाजिक कल्याण व सुरक्षा नीतियाँ

बिहार में सामाजिक कल्याण व सुरक्षा नीतियाँ

  1. भूमिका
  2. राष्ट्रीय वृद्धजन नीति, 1999
  3. नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995
  4. स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क अंगघात, मानसिक मंदता और बहुविकलांगताग्रस्त व्यक्तियों  के कल्याणार्थ राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999
  5. भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम, 1992 और संशोधन अधिनियम, 2000
  6. स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क अंगघात, मानसिक मंदता और बहुविकलांगताग्रस्त व्यक्तियों  के कल्याणार्थ राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999
  7. बिहार नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण एवम् पूर्ण भागीदारी) नियमावली, 2004
  8. बिहार नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण एवम् पूर्ण भागीदारी) संशोधित नियमावली, 2010

भूमिका

विभाग का मुख्य अधिदेश समाज के सीमांतीकृत वर्गों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों एवं निःशक्तों के हितों और अधिकारों की रक्षा करना है। इन समूहों का समेकित विकास सुनिश्चित करने के लिए विभाग भारत के संविधान, विभिन्न कानूनों, राज्य के आदेशों और मार्गनिर्देशों को आधार बनाते हुए कार्यक्रम और  नीतियाँ बनाता है।

 

राष्ट्रीय वृद्धजन नीति, 1999

राष्ट्रीय वृद्धजन नीति वृद्धजनों और विशेषकर निर्धन और निराश्रय लोगों की जरूरतों, सरोकारों और मुद्दों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य समाज में उनके यथोचित स्थान का उपयोग करने और उद्देश्यपूर्ण रूप से, गरिमा और शांति के साथ जीने के उनके अधिकार को मजबूती प्रदान करना है।

यह नीति वृद्ध होती आबादी के निहितार्थों को स्वीकार करती है तथा समाज के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने में तेजी से होने वाले बदलावों -औद्योगीकरण, शहरीकरण, शिक्षा और मूल्यों तथा जीवन शैलियों में बदलाव के कारण वृद्धजनों की असुरक्षाओं और असहायताओं को स्पष्ट करती है।

यह नीति वृद्धजनों की वित्तीय सुरक्षा, स्वास्थ्य देखरेख, आश्रय और कल्याण संबंधी तथा अन्य जरूरतों के लिए सहायता पर विचार करती है। यह वृद्धजनों के पक्ष में सकारात्मक कार्रवाई की जरूरत को मान्यता देती है; यह आयु-समेकित समाज को महत्व देती है और वृद्धजनों को एक संसाधन मानकर चलती है। यह वृद्धजनों के सशक्तीकरण का समर्थन करती है ताकि वे अपने जीवन पर बेहतर नियंत्रण हासिल कर सकें, और सामाजिक विकास में समान साझेदारों के अपने को प्रभावित करने वाले मामलों में तथा अन्य मुद्दों पर निर्णय प्रक्रिया में भाग ले सकें। इसमें नीति द्वारा निर्धारित आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए राज्य, नागरिकों, परिवारों, समुदायों और सामाजिक संस्थाओं के बीच सहयोगपूर्ण साझेदारी का आह्वान किया गया है। नीति में शामिल हस्तक्षेप के मुख्य क्षेत्रों और कार्य रणनीतियों में वृद्धजनों की वित्तीय सुरक्षा, स्वास्थ्य देखरेख और पोषण, आश्रय, शिक्षा, कल्याण और जीवन और संपदा की रक्षा शामिल है। कार्य के अन्य क्षेत्र इस प्रकार हैं: विभिन्न लाभों के लिए वृद्धजनों को पहचान पत्र जारी करना, यात्रा के सभी साधनों में किराये में रियायत; स्थानीय सार्वजनिक प्रशासन में सीटों का आरक्षण; आसानी से प्रवेश और विकास के सार्वजनिक वाहनों के डिज़ाइन में सुधार।

इस नीति के कार्यान्वयन के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की अगुवाई में मई 1999 में एक राष्ट्रीय वृद्धजन परिषद (एनसीओप) का गठन किया गया। एनसीओपी एक उच्चतम न्यास है जो वृद्धजनों के लिए नीति और कार्यक्रमों के सूत्रीकरण और कार्यान्वयन में सरकार को परामर्श देने की भूमिका निभाती है।

यह नीति केंद्र और राज्य सरकारों के समवर्ती दायित्व के रूप में सामाजिक सुरक्षा का अधिदेश देती है।

बिहार सरकार वृद्धजनों के लिए राज्य नीति सूत्रित करने हेतु प्रयासरत है।

 

नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995

इस अधिनियम का उद्देश्य नि:शक्त लोगों का सशक्तीकरण करना और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। यह नि:शक्तता को — जो सामान्य कार्य क्षमताओं के कम से कम 40 प्रतिशत की शारीरिक और मानसिक क्षमता को क्षति ग्रस्त करता है — परिभाषित करता है और दृष्टि, श्रवण, संचालन और मानसिक क्षति जैसी विशेष नि:शक्तताओं को स्पष्ट करता है।

यह अधिनियम नि:शक्त लोगों के लिए विभिन्न पदों पर आरक्षण और विशेष रोजगार कार्यालय की स्थापना द्वारा उनके लिए रोजगार के बेहतर अवसरों का प्रावधान भी करता है।

यह अधिनियम केंद स्तर पर एक राष्ट्रीय समन्वय समिति एवम् कार्यपालिका समिति और राज्य स्तर पर राज्य समन्वय समितियों एवम् कार्यपालिका समितियों के गठन का अधिदेश भी देता है।

अधिनियम के भाग III में राज्य समन्वय समिति और राज्य कार्यकारिणी समिति के गठन का प्रावधान किया गया है और इस समितियों के संयोजन, कार्यों और भूमिकाओं की जानकारी दी गई है। राज्य समन्वय समिति में अन्य के अलावा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, राज्य विधानमंडलों के सदस्य, नि:शक्त व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाली गैर-सरकारी संस्थाएं और नि:शक्त व्यक्तियों के लिए कार्य करने वाले संगठन शामिल होंगे। राज्य समन्वय समिति नि:शक्तता के मुद्दों पर केंद्र बिंदु के रूप में कार्य करेगी। यह समिति सरकार के संबंधित विभागों और गैर-सरकारी संस्थाओं के कार्यकलापों की समीक्षा और समन्वय करेगा। राज्य समन्वय समिति नि:शक्त व्यक्तियों की समस्याओं को दूर करने के हेतु उनके लिए बनाई जाने वाली नीतियों के बारे में परामर्श भी देगी। राज्य कार्यकारिणी समिति राज्य समन्वय समिति के निर्णयों का निष्पादन करेगी। राज्य समनव्य समिति एवं राज्य कार्यपालिका समिति का पुनर्गठन प्रक्रियाधीन है।

 

स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क अंगघात, मानसिक मंदता और बहुविकलांगताग्रस्त व्यक्तियों  के कल्याणार्थ राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999

यह अधिनियम विशेष प्रकार की मानसिक नि:शक्तता वाले व्यक्तियों के कल्याण के लिए एक राष्ट्रीय न्यास के गठन का प्रावधान करता है। इसमें ऐसे व्यक्तियों, और विशेषकर उन व्यक्तियों जिन्हें पारिवारिक सहायता प्राप्त नहीं है, की देखरेख और संरक्षण की संस्थाओं के विकास के लिए शर्तें अनुबंधित की गई हैं। इसके साथ ही इसमें ऐसे मानसिक विकलांगताओं वाले लोगों को समान अवसर हासिल कराने और उनके अधिकारों की रक्षा के बारे में भी शर्तें अनुबंधित की गई हैं।

इसमें नि:शक्त लोगों से संबंधित विधिक/कानून अभिभावकत्व (लीगल गार्डियनशिप ) के मामलों को निबटाने के लिए स्थानीय स्तरीय समितियों (लोकल कमिटी लेवल ) के गठन का आह्वान किया गया है। राष्ट्रीय न्यास अधिनियमक की धारा 13 में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहुनि:शक्तताग्रस्त वाले व्यक्तियों के कल्याण के लिए हर जिले में एक तीन सदस्यीय स्थानीय समिति के गठन तथा एक कानूनी अभिभवक की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।

इस अधिनियम के अंतर्गत राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष, सचिव, समाज कल्याण है और राज्य आयुक्त, नि:शक्तजन तथा स्टेट नोडल एजेंसी सेन्टर तथा निदेशक, सामाजिक सुरक्षा एवम् नि:शक्तता इस समिति के सदस्य हैं।

भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम, 1992 और संशोधन अधिनियम, 2000

यह अधिनियम पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के प्रशिक्षण के नियमन और मान्यता प्राप्त पुनर्वास योग्यताएं रखने वाले पेशेवर पुनर्वास कर्मियों का नामांकन करने के लिए एवं केंद्रीय पुनर्वास पंजिका के संधारण के लिए भारतीय पुनर्वास परिषद के गठन की व्यवस्था करता है। अधिनियम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि नि:शक्त व्यक्तियों का उपचार योग्य कार्मिकों द्वारा किया जाये और यह प्रत्यायन (एक्रीडीशन) तथा गुणवत्ता नियंत्रण सुविधा के रूप में कार्य करता है। यह अधिनियम परिषद के गठन, सदस्यता और कार्यों का विस्तार से प्रतिपादन करता है। इस अधिनियम की एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता है - पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के लिए विश्वविद्यालय या अन्य संस्था द्वारा प्रदान की गई योग्यताओं को मान्यता देना। इस अधिनियम में पाठयक्रमों और विश्वविद्यालयों संस्थाओं के नामों के साथ मान्यता प्राप्त पुनर्वास योग्यताओं की विस्तृत सूची दी गई है। इसके साथ ही यह अधिनियम सरकार में या किसी संस्था में पद-ग्रहण की दृष्टि से और देश के किसी भी भाग में पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के रूप में कार्य करने के मान्यता-प्राप्त योग्यताओं वाले पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के अधिकारों को निर्धारित करता है। अधिनियम के अनुसार पुनर्वास परिषद के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं - पुनर्वास योग्यता को मान्यता देने के लिए शिक्षा के न्यूनतम स्तर सुनिश्चित करना, केंद्रीय पुनर्वास पंजिका में पेशेवर कर्मियों का पंजीकरण करना, पेशेवर आचार संहिता के मानदंड निर्धारित करना और केंद्रीय पुनर्वास पंजिका से नामों को हटाना।

भारतीय पुनर्वास परिषद (संशोधन) अधिनियम, 2000 को पिछले अधिनियम में सुधार करने और उसके कार्यान्वयन कार्यतंत्र में सुधार हेतु लाया गया था। इस अधिनियम में शामिल महत्वपूर्ण संशोधनों में पेशेवर पुनर्वास कर्मियों के अनुश्रवण और प्रशिक्षण के तथा पुनर्वास और विशेष शिक्षा में शोध के घटक निगरानी के द्वारा, इस परिषद के कार्य के दायरे का विस्तार करना शामिल है। इसके अलावा इसमें नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 में दी गई नि:शक्तता की परिभाषा को अपनाया गया है और यह उल्लेख किया गया है कि परिषद् का अध्यक्ष नि:शक्तता के क्षेत्र में अनुभव रखने वाला पेशेवर योग्यता वाला व्यक्ति होना चाहिए।

भारतीय पुनर्वास परिषद ने बिहार में पुनर्वास योग्यता प्रदान करने के लिए अनेक संस्थाओं को प्रमाणीकृत किया है |

बिहार में पुनर्वास पाठ्यक्रमों वाली मान्यता-प्राप्त संस्थाओं की सूची

क्र.सं.

कोड

संस्था का नाम व पता

कार्यक्रम

अवधि

1.

बीआर001

भारतीय स्वास्थ्य शिक्षा और अनुसंधान संस्थान
हेल्थ इंस्टीटयूट रोड
निकट: सेंट्रल जेल, बेउर, पटना-800 002

1. बीपीओ 
2. बीएएसएलपी 
3. बी.एड 
(स्पे. शिक्षा) एचआई

1) 2007-08, 2008-09, 2009-10, 2010 -11, 2011-12, 2012-13
2) 2007-08,2008-09, 2009-10 और 2010-11
3) 2008-09, 2009-10, 2010-11, 2011-12, 2012-13

2.

बीआर 002

जे.एम. इंस्टीटयूट ऑफ स्पीच एण्ड हियरिंग
इंद्रपुरी, पोस्ट-केशरी नगर, 
पटना: 800 023
फोन: 0612-2264805,
फैक्स: 0612-2264805
ईमेल: jmishpat@cal2.vsnl.net.in

1. डी.एड.स्पे. एज्यू. (डीएचएच)
2. डीएचएलएस
3. डीवीआर (एमआर)
4. डीईसीएसई (एमआर)
5. बीएएसएलपी
6. डी.एड.स्पे.एज्यू. (एमआर)

1) 2002-03 से 2006-07, 2007-08 से 2011-12
2) 2004-05 से 2008 -09, 2009-10 से 2013-14
3) 2008-09, 2009-10, 2011-12, 2012-13, 2013-14
4) 2008-09 से 2009-10
5) 2008-09 से 2012-13
6) 2011-12, 2012-13

3.

बीआर 003

ट्रेनिंग सेंटर फॉर द टीचर्स आफॅ द ब्लाइंड
कदम कुंआ, पटना-03

1. डी.एड.स्पे.एज्यू. ( VI)

1) 2006-07 से 2007 -08, 2008-09, 2009-10, 2010-11, 2011-12, 2012-13

4.

बीआर 005

आयुर्वेदिक और मैग्नेटोथेरेपी अनुसंधान संस्थान (एएमआरआई)
एनएमसीएच रोड, अगमकुंआ
पोस्ट: गुलजारबाग, 
पटना: 800007
फोन: 09304281167, 09835686208
फैक्स: 0612-2631285

1. डी.एड.स्पे.एज्यू. (एमआर)

1) 2010 - 11, 2011-12, 2012-13

5.

बीआर 006

दीपालय मानसिक स्वास्थ्य एवं नि:शक्त पुनर्वास संस्थान
कैलाशपुरी, पुर्णिया
बिहार: 854301

1. सर्टिफिकेट कोर्स इन केयर गिविंग

1) 2009-10 और 2010-11

6.

बीआर 007

ईसीओवीआईसी (पर्यावरण परामर्श विकास केंद्र)
साउथ लख्खीनाघ, निकट लक्ष्मी नारायण मंदिर, मनपुर
गया: 823003
फोन: 0631-6523422
फैक्स: 0631-2229702
ईमेल:erigaya@gmail.com

1. डी.एड.स्पे.एज्यू. (एमआर)

1) 2008-09 2009-10 से 2010-11, 2011-12, 2012-13 
(के लिए स्वीकृति नहीं मिली)

7.

बीआर 008

भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग
पटना मेडिकल कॉलेज,
पटना: 800004, 
फोन: 0612-2300343

1. डीपीओ

1) 2008-09, 2009-10 और 
2010-11

8.

बीआर 009

जे.एम. इंस्टीटयूट ऑफ स्पीच एण्ड हियरिंग
मनारिया छग्गन टर्की
जिला: मुज्जफरपुर
फोन: 0612-3209820 
फैक्स: 0612-3209300
ईमेल: jminstitute1@rediffmail.com, infor@jminstitute.com; Website-www.jminstitute.com, jminstitute.in

1. डी.एड.स्पे.एज्यू. (एमआर)
2. डी.एड.स्पे.एज्यू. (डीएचएच)
3. डीएचएलएस

1) 2010 -11, 2011-12, 2012-13
2) 2010 -11, 2011-12, 2012-13
3) 2010 - 11, 2011-12, 2012-13

9.

बीआर 010

कम्पोस्ट रिजनल सेंटर (सीआरसी)
रेडक्रॉस भवन, नार्थ गांधी मैदान
पटना: 800001
ईमेल: mail@nioh.in,www.nioh.in

1. डीआरटी
2. डीएचएलएस

1) 2010 - 11, 2011-12 से 2015-16 
2) 2010-11, 2011-12, 2012-13, 2013-14

10.

बीआर 011

मनोविज्ञान विभाग
मगध यूनिवर्सिटी
बोध गया: 824234
फोन: 0631-2201251
फैक्स: 2200491

6. बी.एड. (स्पे.एज्यू.) VI
2. पीजीडीआरपी

1) 2009-10
2) 2009-10

11.

बीआर 012

डीएलएचएस स्टडी सेंटर ऑफ आल इंडिया इंस्टीटयूट ऑफ स्पीच एण्ड हियरिंग
मनसागंगोत्री, मैसूर-570006
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और हास्पिटल, मायागंज, भागलपुर
फैक्स: 0641-2300830
ईमेल: anup@berlin.com

1. डीएचएलएस
टेलिकॉफ्रेंस मोड

1) 2010-11 से 2014-15

स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क अंगघात, मानसिक मंदता और बहुविकलांगताग्रस्त व्यक्तियों  के कल्याणार्थ राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999

यह अधिनियम विशेष प्रकार की मानसिक नि:शक्तता वाले व्यक्तियों के कल्याण के लिए एक राष्ट्रीय न्यास के गठन का प्रावधान करता है। इसमें ऐसे व्यक्तियों, और विशेषकर उन व्यक्तियों जिन्हें पारिवारिक सहायता प्राप्त नहीं है, की देखरेख और संरक्षण की संस्थाओं के विकास के लिए शर्तें अनुबंधित की गई हैं। इसके साथ ही इसमें ऐसे मानसिक विकलांगताओं वाले लोगों को समान अवसर हासिल कराने और उनके अधिकारों की रक्षा के बारे में भी शर्तें अनुबंधित की गई हैं।

इसमें नि:शक्त लोगों से संबंधित विधिक/कानून अभिभावकत्व के मामलों को निबटाने के लिए स्थानीय स्तरीय समितियों के गठन का आह्वान किया गया है। राष्ट्रीय न्यास अधिनियमक की धारा 13 में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहुनि:शक्तताग्रस्त वाले व्यक्तियों के कल्याण के लिए हर जिले में एक तीन सदस्यीय स्थानीय समिति के गठन तथा एक कानूनी अभिभवक की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।

इस अधिनियम के अंतर्गत राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष, सचिव, समाज कल्याण है और राज्य आयुक्त, नि:शक्तजन तथा स्टेट नोडल एजेंसी सेन्टर तथा निदेशक, सामाजिक सुरक्षा एवम् नि:शक्तता इस समिति के सदस्य हैं।

बिहार नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण एवम् पूर्ण भागीदारी) नियमावली, 2004

इस अधिनियम के अतिरिक्त धारा 73 में अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन हेतु सरकार को नियम बनाने के अधिकार दिये गये हैं। ये नियम नि:शक्तता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया, नि:शक्त व्यक्तियों के लिए राज्य आयुक्त की नियुक्ति की कार्य-प्रक्रिया , राज्य समन्वय समिति और राज्य कार्यकारिणी समिति के नियमों, कार्य-प्रक्रियाओं और कार्यों को स्पष्ट करते हैं।

बिहार नि:शक्त व्यक्ति नियमावली, 2004 में विभिन्न नि:शक्तताओं के मूल्यांकन और आकलन की प्रक्रिया का वर्णन किया गया है और उन अधिकारियों को मान्यता दी गई है जो नि:शक्तता प्रमाणपत्र जारी करते हैं। किसी विशेष प्रकार की नि:शक्तता के लिए चिकित्सा बोर्ड को नि:शक्तता प्रमाण पत्र देने के प्राधिकारी के रूप में पदनामित किया गया है। नियम एक उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा हर नि:शक्त व्यक्ति को पहचान पत्र जारी करने का प्रावधान करते हैं। साथ ही ये नियम राज्य समन्वय समिति और राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठकों के आयोजन की कार्य-प्रक्रिया, विशेष रोज़गार कार्यालयों में रिक्तियों की अधिसूचना की कार्य-प्रक्रिया, नि:शक्त व्यक्तियों द्वारा की गई शिकायतों को निबटाने के लिए नि:शक्त व्यक्ति आयुक्त द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, नि:शक्त व्यक्ति आयुक्त का वेतन और सत्रों तथा उसके द्वारा वार्षिक रिपोर्ट जमा करने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है।

बिहार नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण एवम् पूर्ण भागीदारी) संशोधित नियमावली, 2010

बिहार नि:शक्त व्यक्ति नियमावली 2010 को बिहार नि:शक्त व्यक्ति नियमावली, 2004 को सुदृढ़ बनाने वाले प्रावधानों को शामिल करने के लिए तैयार किया गया था। ये संशोधित नियम नि:शक्तता प्रमाण पत्र प्राप्त करने की कार्य-प्रक्रिया; नि:शक्तता प्रमाणपत्र के आवेदन की अस्वीकृति के मामलों की समीक्षा की प्रक्रिया को स्पष्ट करती है। इसके अलावा इन नियमों में नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों की रक्षा और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 में उल्लिखित किये अनुसार नि:शक्तता और अनेक नि:शक्तताओं की परिभाषाओं को भी शामिल किया गया है।

 

स्रोत: समाज कल्याण विभाग, बिहार, समाज कल्याण निदेशालय व सामाजिक सुरक्षा और निःशक्त्तता निदेशालय, बिहार, समाज कल्याण मंत्रालय व सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार|



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