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स्मार्ट सिटी मिशन

भूमिका

स्मार्ट सिटी की ऐसी कोई परिभाषा नहीं है जिसे सर्वत्र स्वीकार किया जाता है। अलग-अलग लोगों के लिए इसका आशय अलग-अलग होता है। अतः स्मार्ट सिटी की संकल्पना, शहर-दर-शहर और देशदर-देश भिन्न होती है जो विकास के स्तर, परिवर्तन और सुधार की इच्छा, शहर के निवासियों के संसाधनों और उनकी आकांक्षाओं पर निर्भर करता है। ऐसे में, स्मार्ट सिटी का भारत में अलग अर्थ होगा, जैसे कि यूरोप से। भारत में भी स्मार्ट सिटी को परिभाषित करने का कोई एक तरीका है।

इस मिशन में शहरों के मार्गदर्शन करने के लिए कुछ पारिभाषिक सीमाएं अपेक्षित हैं। भारत में किसी भी शहर निवासी की कल्पना में, स्मार्ट शहर तस्वीर में ऐसी अवसंरचना एवं सेवाओं की अभीष्ट सूची होती है जो उसकी आकांक्षा के स्तर को वर्णित करती है। नागरिकों की आकांक्षाओं और जरूरतों को पूरा करने के लिए, शहरी योजनाकार को लक्ष्य आदर्श तौर पर पूरे शहरी पारिस्थितिकी तंत्र का इस प्रकार विकास करना होता है, जो व्यापक विकास के चार स्तंभों-संस्थागत, भौतिक, सामाजिक और आर्थिक अवसंरचना में दिखाई देता है। यह दीर्घावधिक लक्ष्य हो सकता है और शहर स्मार्टनेस की परते जोड़ते हुए संवर्धित रूप से ऐसी व्यापक अवसंरचना तैयार करने की दिशा में कार्य कर सकते हैं।

स्मार्ट सिटी मिशन की अप्रोच में, उद्देश्य ऐसे शहरों को बढ़ावा देना है जिनमें मूलभूत अवसंरचना है और अपने नागरिकों को शानदार गुणवत्ता वाला जीवन, स्वच्छ और स्थिर वातावरण और स्मार्ट समाधानों की प्रयोजनीयता दे सके। इसमें स्थिर और समावेशी विकास पर फोकस किया गया है और विचार है कि छोटे क्षेत्रों पर फोकस किया जाए, प्रतिकृति मॉडल बनाए जाएं जो अन्य आकांक्षी शहरों के लिए दीपस्तंभ का काम करें। सरकार का स्मार्ट सिटिज मिशन एक साहसी, नई पहल है। इसका उद्देश्य ऐसे उदाहरण स्थापित करना है जिनकी स्मार्ट सिटी के भीतर और बाहर, दोनों जगह नकल की जा सके, जिनसे देश के विभिन्न प्रदेशों एवं भागों में सदृश स्मार्ट सिटीज के सृजन उत्प्रेरित हों।

स्मार्ट शहर में मूलभूत अवसंरचना तत्व

स्मार्ट शहर में मूलभूत अवसंरचना तत्वों में शामिल हैं-

  1. पर्याप्त जल आपूर्ति,
  2. बिजली आपूर्ति का आश्वासन,
  3. स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित,
  4. कुशल शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन,
  5. किफायती आवास, विशेष रूप से गरीबों के लिए,
  6. मजबूत आईटी कनेक्टिविटी और डिजिटलीकरण,
  7. सुशासन, विशेष रूप से ई-गवर्नेस और नागरिकों की भागीदारी,
  8. सतत पर्यावरण,
  9. सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों, तथा
  10. स्वास्थ्य और
  11. शिक्षा।

 

स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य

स्थानीय क्षेत्र के विकास को साकार कर और तकनीक का उपयोग कर, विशेषकर ऐसी तकनीकी जिसके स्मार्ट परिणाम मिले, आर्थिक विकास को बढावा देना और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। क्षेत्र-आधारित विकास से मलीन बस्तियों को बेहतर नियोजित शहरों में रूपांतरित करने सहित मौजूदा क्षेत्रों का कायांतरण (पुनः संयोजन और पुनः विकास) होगा। शहरी क्षेत्रों की बढ़ती आबादी को समायोजित करने के लिए शहरों के ईर्द-गिर्द नए क्षेत्र (हरित-क्षेत्र) विकसित किए जाएंगे। स्मार्ट समाधानों के प्रयोग से शहर सवसंरचना और सेवाओं में सुधार करने हेतु तकनीक, सूचना और आंकड़ों का उपयोग कर सकेंगे। इस तरह से व्यापक विकास से जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा, रोजगार सृजित होगा और सभी, विशेषकर गरीब एवं उपेक्षित लोगों की आय में बढ़ोत्तरी होगी जिससे शहर समावेशी बनेंगे।

स्मार्ट सिटी सुविधाएँ

स्मार्ट शहरों में व्यापक विकास के कुछ प्रारूपी विशेषताएं इस प्रकार से हैं -

  1. क्षेत्र आधारित घटनाक्रमों में मिश्रित भू-उपयोग को बढ़ावा देना-अनियोजित क्षेत्रों के लिए नियोजन जिसमें भू-उपयोग को अधिक कुशल बनाने के लिए बहुत-सी संगत गतिविधियां और एक-दूसरे के सन्निकट भू-उपयोग निहित हैं। राज्‍य भू-उपयोग में कुछ लोचशीलता ला सकते हैं और ऐसे उप-कानून बना सकते है ताकि परिवर्तन के अनुसार ढल सकें;
  2. हाउसिंग और समावेशिता- हाऊसिंग के अवसरों का सभी के लिए विस्‍तार करना;
  3. पैदल चलने योग्य लोकलिटी का निर्माण- भीड़भाड, वायु प्रदूषण और संसाधनों की कमी को कम करना, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, अंतक्रिया को बढ़ावा देने और सुरक्षा सुनिश्चित करना। सड़क नेटवर्क को केवल वाहनों एवं सार्वजनिक परिवहन के लिए ही नहीं बल्कि पैदल यात्रियों और साईकिल चालकों के लिए भी बनाया अथवा सुसज्जित किया जाता है और पैदल या साईकिल से तय की जाने वाली दूरियों के लिए आवश्‍यक प्रशासनिक सेवाएं प्रदान की जाती हैं;
  4. नागरिकों के जीवन की गुणवत्‍ता में बढ़ोत्‍तरी करने, शहरी क्षेत्रों में ताप के प्रभावों में कमी लाने और आमतौर पर पारिस्थितिकीय संतुलन को बढ़ावा देने के लिए खुले स्‍थानों - पार्क, खेल के मैदान, मनोरंजन के स्‍थानों का संरक्षण और विकास करना;
  5. परिवहन के विभिन्‍न विकल्पों को बढ़ावा देना- ट्रांजिट उन्मुख विकास(टीओडी), सार्वजनिक परिवहन और अंतिम गंतव्‍य स्‍थल पर परिवहन कनेक्टिविटी;
  6. सेवाओं की कीमतों में कमी लाने और नगर निगम के कार्यालयों में जाए बिना सेवाएं प्रदान करने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाईन सेवाओं पर अधिकाधिक आश्रित शासन को नागरिक-मैत्री और किफायती बनाना, विशेषकर मोबाईल उपयोग को। लोगों को सुनने और सुझाव लेने एवं कार्यस्‍थलों के साईबर दौरे की मदद से कार्यक्रमों व कार्यकलापों की ऑनलाईन निगरानी का उपयोग करने के लिए ई-समूहों का गठन करना;
  7. अपने मुख्य आर्थिक कार्यकलापों जैसे स्थानीय भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कला और शिल्प, संस्कृति, खेल के सामान, फर्नीचर, होजरी, कपड़े, डेयरी आदि पर आधारित शहर को पहचान प्रदान करना;
  8. अवसंरचना और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए क्षेत्र आधारित विकास में उनके लिए स्‍मार्ट समाधान का उपयोग करना। उदाहरण के लिए, कुछेक संसाधनों का उपयोग कर और सस्‍ती सेवाएं प्रदान कर क्षेत्रों को आपदा के प्रति कम असुरक्षित बनाना।

कार्यक्रम की रणनीति

स्मार्ट सिटी मिशन में क्षेत्र-आधारित विकास के कार्यनीतिक घटक नगर सुधार (पुन: संयोजन), शहर का नवीकरण (पुनर्विकास) और शहर का विस्तार (हरित क्षेत्र का विकास) और पैन-‍सिटी की पहल है जिसमें शहर के बडे हिस्‍सों को कवर करते हुए स्‍मार्ट समाधानों का उपयोग  किया जाता है। नीचे क्षेत्र-आधारित स्मार्ट सिटी के विकास के तीन मॉडलों के विवरण दिए गए हैं-

  1. पुनः संयोजन (रेट्रोफिटिंग) से मौजूदा क्षेत्र और अधिक कुशल और रहने योग्य बनाने के लिए अन्‍य उद्देश्यों के साथ-साथ स्मार्ट सिटी के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मौजूदा निर्मित क्षेत्र में नियोजन की शुरूआत होगी। पुनः संयोजन में, नागरिकों के साथ विचार-विमर्श करके शहर के समीपस्‍थ ऐसे क्षेत्र की पहचान की जाएगी जो 500 एकड़ से अधिक हो। पहचाने गए क्षेत्र में अवसंरचना सेवाओं के मौजूदा स्‍तर और निवासियों के विजन के आधार पर, शहरों को स्‍मार्ट बनाने के लिए कार्यनीति बनाई जाएगी। चूंकि इस मॉडल में मौजूदा संरचनाओं को काफी हद तक वैसा ही बरकरार रखा जाएगा, उम्मीद है कि पुनः संयोजित स्‍मार्ट सिटी में अधिक गहन अवसंरचनागत सेवा स्‍तर और स्मार्ट एप्‍लीकेशन्‍स होंगी। इस कार्यनीति को अधिक छोटी समय-सीमा में भी पूरा किया जा सकता है, जिससे शहर के अन्‍य हिस्‍सों में इसकी नकल की जाएगी।
  2. पुनर्विकास से मौजूदा निर्मित पर्यावरण का प्रतिस्थापन प्रभाव पडेगा और मिश्रित भू-उपयोग एवं वर्धित घनत्व का उपयोग करते हुए संवर्धित अवसंरचना वाले नए विन्‍यास का सह-सृजन होगा। पुनर्विकास में नागरिकों के परामर्श से शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) द्वारा की पहचाने गए 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र की परिकल्‍पना की गई है। उदाहरण के लिए, पहचाने गए क्षेत्र का मिश्रित भू-उपयोग, उच्‍चतर एफएसआई और उच्‍च भूमि कवरेज से नई विन्‍यास योजना बनाई जाएगी। पुनर्विकास मॉडल के दो उदाहरण राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम द्वारा निष्‍पादित किए जा रहे मुंबई में सैफी बुरहानी उत्थान परियोजना (जिसे भिंडी बाजार परियोजना भी कहा जाता है) और नई दिल्ली में पूर्व किदवई नगर का पुनर्विकास हैं।
  3. हरित क्षेत्र के विकास से किफायती हाऊसिंग, खासतौर पर गरीबों के लिए हाऊसिंग के प्रावधान सहित नव-प्रवर्तनकारी नियोजन, आयोजनागत वित्‍तपोषण और आयोजनागत कार्यान्‍वयन (उदाहरणार्थ भूमि की पूलिंग/भूमि पुनः निर्माण) के उपयोग से पूर्व में खाली पड़े क्षेत्र (250 एकड़ से अधिक) में अधिकांश स्‍मार्ट समाधान लागू होंगे। बढ़ती आबादी की जरूरतें पूरी करने के लिए शहरों के ईर्द-गिर्द हरित क्षेत्र विकसित करना अपेक्षित है। इसका एक जाना माना उदाहरण गुजरात में गिफ्ट सिटी है। पुनः संयोजन और पुनर्विकास से अलग, हरित क्षेत्र का विकास शहरी स्‍थानीय निकायों के दायरे के भीतर अथवा स्‍थानीय  विकास प्राधिकरण (यूडीए) के दायरे के भीतर किया जा सकता है।
  4. पैन-सिटी के विकास के लिए पूरे शहर में मौजूदा अवसंरचना में चुनिंदा स्‍मार्ट समाधानों के प्रयोग की परिकल्पना है। स्‍मार्ट समाधानों के प्रयोग में अवसंरचना और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए तकनीक, सूचना और आंकडों का उपयोग शामिल होगा। उदाहरण के लिए, परिवहन क्षेत्र में स्मार्ट समाधानों (इंटेलीजेंट यातायात प्रबंधन प्रणाली) का उपयोग करने और औसत आवाजाही समयावधि अथवा नागरिकों द्वारा खर्च की जाने वाली कीमत में कमी करने का नागरिकों की उत्‍पादकता और उनके जीवन की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसका एक अन्य उदाहरण अपशिष्ट जल का पुनः चक्रण और स्मार्ट मीटरिंग हो सकता है जिससे शहर में बेहतर जल प्रबंधन में काफी अधिक योगदान हो सकता है।

उम्‍मीद है कि प्रत्‍येक चयनित शहर के स्‍मार्ट सिटी के प्रस्‍ताव में पुनः संयोजन अथवा पुनर्विकास अथवा हरित क्षेत्र के विकास अथवा इनके मिश्रण और स्‍मार्ट समाधान (समाधानों) वाले पैन-सिटी की विशेषताएं शामिल होंगी। यह ध्यान रखना महत्‍वपूर्ण है कि पैन-सिटी प्रदान की जाने वाली अतिरिक्‍त विशेषता है। चूंकि स्मार्ट सिटी में छोटे क्षेत्र की अप्रोच अपनाई जा रही है, यह जरूरी है कि शहर के सभी निवासी यह महसूस करें कि इसमें उनके लिए कुछ न कुछ है। अतः स्‍कीम को समावेशी बनाने के लिए इसमें पूरे शहर के लिए कुछ (कम से कम एक) स्‍मार्ट समाधान की व्‍यवस्‍था की गई है।

पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए, विकसित किए जाने के लिए प्रस्‍तावित क्षेत्र वैकल्पिक मॉडलों- पुनः संयोजन, पुनर्विकास या हरित-क्षेत्र विकास में से किसी के लिए भी विनिर्धारित का आधा होगा।

स्मार्ट सिटी मिशन की चुनौतियां

ऐसा पहली बार हुआ है, शहरी विकास मंत्रालय कार्यक्रम में निधियन के लिए शहरों के चयन करने के लिए चुनौती अथवा प्रतिस्पर्धा विधि का उपयोग कर रहा है और क्षेत्र-आधारित विकास की कार्यनीति का उपयोग कर रहा है। यह प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद के भाव को दर्शाता है।

राज्य और शहरी स्थानीय निकाय स्मार्ट शहरों के विकास में महत्वपूर्ण सहायक भूमिका निभाएंगे। इस स्तर पर स्मार्ट नेतृत्व एवं दूरदृष्टि और निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता महत्‍वपूर्ण कारक होंगे जो मिशन की सफलता निर्धारित करेंगे।

नीति निर्माताओं, कार्यान्वयनकर्ताओं एवं अन्य हितधारकों द्वारा विभिन्न स्तरों पर पुन: संयोजन, पुनर्विकास और हरित-क्षेत्र के विकास की अवधारणाओं को समझने के लिए क्षमता सहायता अपेक्षित होगी।

चुनौतियों में भागीदारी से पूर्व नियोजन चरण के दौरान समय और संसाधनों में प्रमुख निवेश करने होंगे। यह परंपरागत डीपीआर- संचालित से भिन्न है।

स्मार्ट सिटी मिशन के लिए स्मार्ट लोग अपेक्षित हैं जो प्रशासन और सुधारों में सक्रिय रूप से भाग लें। नागरिकों की भागीदारी शासन में एक औपचारिक भागीदारी से कहीं बढ़कर है।  स्मार्ट लोग स्मार्ट शहर के विकास क्रमों को स्थिर बनाने के लिए कार्यान्वयन एवं परियोजना-उपरांत संरचनाओं के दौरान स्मार्ट सिटी की परिभाषा, स्मार्ट समाधानों के उपयोग करने संबंधी निर्णयों, सुधारों को लागू करने, कम संसाधनों से अधिक काम लेने और पर्यवेक्षण में स्वयं शामिल होते हैं। आईसीटी, विशेषकर मोबाईल-आधारित उपकरणों के अधिक उपयोग के जरिए एसपीवी द्वारा स्मार्ट लोगों की भागीदारी हो सकेगी।

निधि का जारी किया जाना

चुनौती के स्तर 1 के बाद, प्रत्येक संभावित स्मार्ट सिटी को रु. 2 करोड़ की अग्रिम राशि सीएसपी की तैयारी के लिए प्रदान की जाएगी जो कि एएंडओई निधियों के शहर के हिस्से में से आएगी तथा इसे शहर के हिस्से में समायोजित किया जाएगा।

प्रथम वर्ष में, सरकार ने प्रत्येक चयनित स्मार्ट सिटी को रु. 200 करोड़ प्रदान करने हेतु प्रस्ताव किया है जिससे कि उच्चतम प्रारंभिक पूंजी का सृजन किया जा सके। अग्रिम के रु. 2 करोड़ तथा शहरी विकास मंत्रालय के एएंडओई हिस्से की कटौती करने के उपरान्त, प्रत्येक स्मार्ट सिटी को रु. 200 करोड़ में से रु. 194 करोड़ की राशि प्रथम वर्ष में दी जाएगी, जिसके उपरान्त प्रत्येक वर्ष 100 करोड़ रु. में से रु. 98 करोड़ आगामी तीन वर्षों में प्रदान किये जाएंगे।

कार्यक्रम की निगरानी

राष्ट्रीय स्तरीय निगरानी

राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी दो प्रकार की होगी-

  • शीर्ष समिति
  • राष्ट्रीय मिशन निदेशालय

शीर्ष समिति

शीर्ष समिति (एसी), जिसके अध्यिक्ष सचिव, शहरी विकास मंत्रालय होंगे और जिसमें संबंधित मंत्रालयों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, स्मार्ट सिटी मिशन के लिए प्रस्ताव को मंजूरी देगी, उनकी प्रगति की निगरानी करेगी एवं निधियां जारी करेगी। इस शीर्ष समिति में निम्न लिखित सांकेतिक सदस्य होंगे-

सचिव, आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय सदस्य

सचिव (व्यय) सदस्य

संयुक्त सचिव, वित्त, शहरी विकास मंत्रालय सदस्य

निदेशक, एनआईयूए सदस्य

मुख्य नियोजक, नगर एवं ग्राम नियोजन सदस्य

राज्यों के प्रमुख सचिव सदस्य

एसपीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सदस्य

मिशन निदेशक सदस्य सचिव

  • अध्यक्ष के अनुमोदन से संयुक्त राष्ट्र पर्यावास, विश्व बैंक, टेरी, सेंटर फॉर डवलपमेंट ऑफ एडवान्ड्य   कंप्यूतटिंग (सी-डैक), सेंटर फॉर स्मार्ट सिटीज (सीएससी), बंगलौर या अन्य द्विपक्षीय और बहुपक्षीय एजेंसियों और शहरी नियोजन विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जा सकता है।
  • शीर्ष समिति समग्र मार्गदर्शन प्रदान करेगा और मिशन के लिए परामर्शदात्री की भूमिका अदा करेगी। इसकी प्रमुख जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं-
  • चरण 1 के बाद राज्यग सरकारों द्वारा भेजे गए शहरों के नामों की सूची की समीक्षा।
  • चरण 2 के बाद विशेषज्ञों के पैनल द्वारा मूल्यांकित प्रस्तावों की समीक्षा।
  • कार्यान्वयन में प्रगति के आधार पर निधियां जारी करने के लिए अनुमोदन।
  • जैसे और जब भी अपेक्षित हो, कार्यान्वयन उपकरण में मध्य-मार्ग त्रुटिसुधार की अनुशंसा करना।
  • बजट, कार्यान्वयन और अन्य मिशन/योजनाओं एवं विभिन्न मंत्रालयों की गतिविधियों के साथ समन्व य सहित योजना की गतिविधियों की तिमाही समीक्षा करना।

राष्ट्रीय मिशन निदेशालय

इसमें राष्ट्रीय मिशन निदेशक होगा जिसका पद भारत सरकार के संयुक्त सचिव के स्तर से कम नहीं होगा और जो मिशन की सभी संबंधित गतिविधियों का समग्र प्रभारी होगा। मिशन निदेशालय विषय विशेषज्ञों और ऐसे कर्मचारियों से सहायता लेगा जिन्हेंय आवश्य क समझे। मिशन निदेशालय की प्रमुख जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं-

  • शहर की चुनौती के विस्तृदत डिजाईन सहित स्मार्ट सिटी मिशन की विस्तृत कार्यनीतिक रूपरेखा तैयार करना और कार्यान्वयन करना।
  • यह सुनिश्चित करने के लिए केन्द्र, राज्य, शहरी स्थानीय निकाय और बाहरी हितधारकों में समन्वयय करना कि एससीपी, डीपीआर तैयार करने, सर्वश्रेष्ठा विधियों को साझा करने, स्मामर्ट समाधान विकसित करने आदि के लिए बाह्य एजेंसियों का कुशल इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • क्षमता निर्माण की देखरेख करना और एसपीवी, राज्य और शहरी स्थानीय संगठनों की सहायता करना।
  • इसमें सर्वश्रेष्ठक विधि निक्षेप (मॉडल आरएफपी दस्तावेज, ड्राफ्ट डीपीआर, वित्तीय मॉडल, भूमि मौद्रीकरण के विचार, एसपीवी के गठन में सर्वोत्तम विधियां, वित्तीय लेखों और जोखिम न्यूनीकरण तकनीकों का उपयोग) और राज्यों और शहरी स्थानीय संगठनों में ज्ञान साझा करने (प्रकाशनों, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों के माध्यम से) का तंत्र विकसित करना एवं इसे बनाए रखना है।

राज्य स्तरीय निगरानी

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय उच्च अधिकार प्राप्त  संचालन समिति (एचपीएससी) होगी जो मिशन के कार्यक्रम का समग्र संचालन करेगी। उच्च अधिकार प्राप्ति संचालन समिति में राज्य सरकार के विभागों के प्रतिनिधी होंगे। स्मार्ट सिटी से संबंधित यूएलबी के मेयर और नगर आयुक्त इस उच्च अधिकार प्राप्तप संचालन समिति का प्रतिनिधित्व  करेंगे। इसमें राज्यआ सरकार द्वारा नामित राज्य मिशन निदेशक भी होगा जो कम से कम सचिव के पद का अधिकारी होगा। राज्य मिशन निदेशक, राज्य उच्च अधिकार प्राप्तम संचालन समिति के सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करेंगे। उच्च अधिकार प्राप्त संचालन समिति का सांकेतिक गठन नीचे दिया गया है-

प्रमुख सचिव, वित्त

प्रमुख सचिव, योजना

प्रमुख सचिव/निदेशक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग, राज्य/संघ राज्य सरकार।

शहरी विकास मंत्रालय के प्रतिनिधि।

राज्य में एसपीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों का चयन।*

शहरी स्थानीय निकायों के महापौर और नगर आयुक्त/मुख्य कार्यपालक का चयन, और राज्य के संबंधित विभागों के प्रमुख।

सचिव/इंजीनियर-इन-चीफ या समकक्ष, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग।

प्रमुख सचिव, शहरी विकास - सदस्य सचिव

उच्च अधिकार प्राप्ती संचालन समिति की प्रमुख जिम्मेदारियां नीचे दी गई हैं-

  • मिशन का मार्गदर्शन करना और स्मार्ट शहरों के विकास के संबंध में विचारों के आदान-प्रदान के लिए राज्या स्तरीय मंच प्रदान करना।
  • चरण 1 के मानदंडों के आधार पर प्रथम चरण की अंतर-राज्यीय प्रतिस्पर्धा की प्रक्रिया की देखरेख।
  • एससीपी की समीक्षा करना और चुनौती में भाग लेने के लिए शहरी विकास मंत्रालय के पास भेजना।

शहर के स्तर पर निगरानी

विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग के परामर्श और उन्हें  इसमें समर्थ बनाने के लिए सभी 100 स्मार्ट शहरों के लिए स्मार्ट सिटी परामर्शी मंच स्था)पित किया जाएगा और इसमें जिला कलेक्टीर, सांसद, एमएलए, मेयर, एसपीवी के प्रधान कार्यकारी अधिकारी, स्थालनीय युवक, तकनीकी विशेषज्ञ और ऐसे क्षेत्र से कम से कम एक सदस्य् जो-

पंजीकृत निवासी कल्याण संघों का प्रतिनिधित्व करने वाले अध्यक्ष/सचिव

पंजीकृत करदाता संघों/दर अदाता संघों का सदस्यक है।

स्लम स्तरीय महासंघ का अध्यक्ष/सचिव है, और

एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के सदस्य या महिला मंडल/वाणिज्य मंडल/युवा संघों के सदस्य।

स्मार्ट सिटी परामर्शी मंच के संयोजक एसपीवी के मुख्य कार्यकारी अभियंता (सीईओ) होंगे।

 

स्मार्ट सिटी मिशन का अद्यतन

स्‍मार्ट सिटी मिशन – 50,626 करोड़ रुपये की 1,333 परियोजनाएं पूरी हुईं या क्रियान्वित की जा रही हैं/निविदा चरण में हैं

स्मार्ट सिटी मिशन अमृत जैसे कई दूसरे मिशनों का सम्मिलन है और इसकी कुछ परियोजनाएं सरकारी-निजी साझेदारी के तहत पूरी कराई जा रही हैं। 50,626 करोड़ रुपयों की 1333 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं या क्रियान्वित की जा रही है/निविदा चरण में हैं। देश भर में सभी 99 स्मार्ट सिटी के लिए 2,03,979 करोड़ की परियोजनाएं चल रही हैं।

अब तक चुने गए 99 स्मार्ट सिटी में से 91 स्मार्ट सिटी में एसपीवी (स्पेशल पर्पस विहिकल्स) शामिल हो चुके हैं। 9 स्मार्ट सिटी अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, विशाखापट्टनम, भोपाल, पुणे, काकिनडा, सूरत और नागपुर में एकीकृत सिटी कमान और नियंत्रण कक्ष (आईसीसीसी) स्थापित किए जा चुके हैं। 14 और स्मार्ट सिटी में कार्य प्रगति पर है और 32 स्मार्ट सिटी निविदा चरण में हैं।

चार स्मार्ट सिटी में 228 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट सड़क परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 40 स्मार्ट सिटी में 5,123 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं। 6 स्मार्ट सिटी में स्मार्ट सौर परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 49 स्मार्ट सिटी में परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं। 6 स्मार्ट सिटी में स्मार्ट जल परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 43 स्मार्ट सिटी में परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं। इसी तरह 46 स्मार्ट सिटी में स्मार्ट गंदा जल परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं या क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं। 13 स्मार्ट सिटी में 734 करोड़ रुपये की निजी-सरकारी साझेदारी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 52 स्मार्ट सिटी में 7,753 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं। इसके अलावा, 13 स्मार्ट सिटी में 107 करोड़ रुपये की लागत से विरासत संरक्षण, जल घाट विकास, सार्वजनिक स्थल विकास जैसी अन्य अहम परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 5,865 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं।

जनवरी, 2018 में 9 स्मार्ट सिटी के साथ ही स्मार्ट सिटी का चुनाव विभिन्न चरणों में पूरा हो चुका है। यहां यह बताना प्रासंगिक होगा कि किसी शहर के स्मार्ट सिटी के रूप में चयन के बाद वहां स्पेशल पर्पस विहिकल शुरू करने, परियोजना प्रबंधन सलाहकार की नियुक्ति, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और निविदा के बाद काम सौंपने में 12 से 18 महीने लग जाते हैं। स्मार्ट सिटी के चुनाव के चरणों के अनुसार उन्हें पूरा करने की समय सारणी निम्न प्रकार है।

चरण 1 सिटी- 2019-20 से 2020-21

चरण 2 सिटी- 2019-20 से 2021-22

चरण 3 सिटी- 2020-21 से 2021-22

चरण 4 सिटी- 2020-21 से 2022-23

(अद्यतन स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय)

 

स्मार्ट सिटी दिशानिर्देश

स्मार्ट सिटी दिशानिर्देश को जानने के लिए इस लिंक पर देखें

स्मार्ट सिटी का वित्त पोषण

स्मार्ट सिटी वित्त पोषण को जानने के लिए इस लिंक पर देखें

 

स्रोत: स्मार्ट सिटी, भारत सरकार का आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय



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