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लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली

प्रस्‍तावना

1.1 सार्वजनिक वितरण प्रणाली अभाव की स्थिति में खाद्यान्‍नों के प्रबंधन करने और उचित मूल्यों पर वितरण करने के लिए तैयार की गई थी सार्वजनिक वितरण प्रणाली देश में खाद्य अर्थव्यवस्था के प्रबंधन के लिए सरकार की नीति का एक महत्वपूर्ण अंग बन गई है सार्वजनिक वितरण प्रणाली अनुपूरक स्वरूप की है और इसका उद्देश्य किसी परिवार अथवा समाज के किसी वर्ग को इसके अंतर्गत वितरित किसी वस्तु की समस्त आवश्यकता उपलब्ध कराना नहीं है

1.2 सार्वजनिक वितरण प्रणाली केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी के अधीन चलाई जाती है केंद्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण, ढुलाई और बल्क आवंटन करने की जिम्मेदारी ली है राज्य के अंदर आवंटन, लक्षित परिवारों की पहचान करने, राशन कार्ड जारी करने और उचित दर दुकानों के कार्यकरण का पर्यवेक्षण करने सहित अन्‍य प्रचालनात्मक जिम्मेदारियां राज्य सरकारों की होती हैं फिलहाल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को वितरण करने के लिए अर्थात, गेहूं, चावल, चीनी और मिट्टी के तेल जैसी वस्‍तुओं का आवंटन किया जा रहा है कुछ राज्य/संघ राज्य क्षेत्र् सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों के माध्यम से दालें, खाद्य तेल, आयोडीनयुक्‍त नमक, मसाले आदि जैसी आम खपत की अतिरिक्त वस्तुएं भी वितरित करते हैं

सार्वजनिक वितरण प्रणाली की विकास

2.1   अन्तर-युद्ध अवधि के दौरान भारत में आवश्यक वस्तुओं का सार्वजनिक वितरण अस्तित्व में था। 1960 के दशक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली कमी वाले शहरों क्षेत्रों में खाद्यान्नों के वितरण के अपने लक्ष्य के साथ एवं खाद्यान्नों की अत्‍यधिक कमी के परिणामस्‍वरुप प्रारंभ की गई थी। चूंकि हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, इसलिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के पहुंच का विस्तार 1970 और 1980 के दशकों में अत्‍यधिक निर्धनता वाले जनजातीय ब्लॉकों और क्षेत्रों तक किया गया था।

2.2   1992 तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली बगैर किसी विशिष्ट लक्ष्य के सभी उपभोक्ताओं के लिए एक आम हकदारी की योजना थी। पुनर्गठित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (आरपीडीएस) पूरे देश के 1775 ब्लॉकों में जून, 1992 में शुरू की गई थी।

2.3    लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) 1997 से शुरू की गई थी।

पुनर्गठित सार्वजनिक वितरण प्रणाली

3.1   पुनर्गठित सार्वजनिक वितरण प्रणाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने और सुप्रवाही बनाने और इसकी पहुंच दूर-दराज, पहाड़ी, सुदुरवर्ती और दुर्गम क्षेत्रों तक वृद्धि करने की दृष्टि से, जहां गरीबों की बड़ी आबादी रहती है, जून, 1992 में शुरू की गई थी। इसमें 1775 ब्लॉकों को कवर किया गया था, जहां सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम, एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना, मरूस्थल विकास कार्यक्रम और विशेष लक्ष्य हेतु राज्य सरकारों के परामर्श से पहचान किए गए कुछ पहाड़ी क्षेत्र जैसे क्षेत्र विशिष्ट कार्यक्रम कार्यान्‍वित किए गए थे। पुनर्गठित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (आरपीडीएस) में वितरण हेतु खाद्यान्न केंद्रीय निर्गम मूल्य से 50 पैसे कम मूल्य पर जारी किए गए थे। निर्गम की मात्रा 20 किलोग्राम प्रति कार्ड तक थी।

3.2   पुनर्गठित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की जिन्सों की प्रभावी पहुंच, राज्य सरकारों द्वारा पहचान किए गए क्षेत्रों में उचित दर दुकानों द्वार तक उनकी सुपुर्दगी, छोड़ दिए गए परिवारों को अतिरिक्त राशन कार्ड, अतिरिक्त उचित दर दुकान भंडारण क्षमता इत्‍यादि जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी आवश्यकताओं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दुकानों के जरिए वितरण हेतु चाय, नमक, दाल, साबुन आदि जैसे अतिरिक्त वस्तुओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र आधारित दृष्‍टिकोण शामिल थे।

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली

 

4.1   भारत सरकार ने गरीबों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए जून, 1997 में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली शुरू की थी। लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन राज्यों के लिए यह अपेक्षित था कि वे खाद्यान्नों की सुपुर्दगी देने और उचित दर दुकान स्तर पर इनका पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से वितरण करने के लिए गरीबों की पहचान करने की पुख्ता व्यवस्था बनाए और क्रियान्वित करें।

4.2   जिस समय यह योजना लागू की गई थी उस समय इसका उद्देश्य लगभग 6 करोड़ गरीब परिवारों को लाभान्वित करना था जिनके लिए वार्षिक रूप से 72 लाख टन खाद्यान्न निर्दिष्ट किए गए थे। योजना के अंतर्गत गरीबों की पहचान प्रो0 लाकड़ावाला की अध्यक्षता में " गरीबों का अनुपात और संख्या के अनुमान संबंधी विशेषज्ञ समूह " की विधि पर आधारित वर्ष 1993-94 के लिए योजना आयोग के राज्यवार निर्धनता अनुमानों के अनुसार राज्यों द्वारा की गई थी। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को खाद्यान्नों का आवंटन विगत औसत खपत अर्थात् लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली आरंभ करते समय पिछले दस वर्षों के दौरान लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन खाद्यान्नों के औसत वार्षिक उठान के आधार पर किया गया था।

4.3   गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की आवश्यकता से अधिक खाद्यान्नों की मात्रा राज्य को  "अस्थायी आवंटन"  के रूप में प्रदान की गई थी जिसके लिए वार्षिक तौर पर 103 लाख टन खाद्यान्न विनिर्दिष्ट किए गए थे। लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के आवंटन के अतिरिक्त राज्यों को अतिरिक्त आवंटन भी दिया गया था। अस्थायी आवंटन गरीबी रेखा से ऊपर की आबादी को राजसहायता प्राप्त खाद्यान्नों के लाभ को जारी रखने के लिए था क्योंकि उनको सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले मौजूदा लाभ को अचानक समाप्त करना वांछनीय नहीं समझा गया था। अस्थायी आवंटन ऐसे मूल्यों पर जारी किया गया था जो राजसहायता प्राप्त थे परन्तु खाद्यान्नों के गरीबी रेखा से नीचे के कोटा के मूल्यों से अधिक थे।

4.4   गरीबी रेखा से नीचे की आबादी को खाद्यान्नों के आवंटन में वृद्धि करने पर सर्वसम्‍मति को ध्‍यान में रखते हुए और खाद्य सब्सिडी को बेहतर तरीके से लक्षित करने के लिए, भारत सरकार ने दिनांक 1.4.2000 से गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को खाद्यान्नों का आवंटन आर्थिक लागत के 50% पर 10 किलोग्राम से बढ़ाकर 20 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति मास कर दिया गया और गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को आर्थिक लागत पर आवंटन किया था। गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों के लिए आवंटन को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के शुरू होने के समय में किए गए आवंटन के स्तर पर बनाए रखा गया लेकिन उनके लिए केन्द्रीय निर्गम मूल्य को उक्त तारीख से आर्थिक लागत के 100% पर निर्धारित कर दिया गया ताकि समस्त उपभोक्ता राज सहायता गरीबी रेखा से नीचे की आबादी के लाभ के लिए दी जा सके। तथापि बीपीएल तथा अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) हेतु दिसम्बर 2000 में निर्धारित केन्‍द्रीय निर्गम मूल्‍यों और एपीएल हेतु जुलाई, 2002 में निर्धारित केन्‍द्रीय निर्गम मूल्‍यों में तब से कोई वृद्धि नहीं की गई है, हालांकि खरीद की लागत में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है।

4.5   गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की संख्या में दिनांक 01.12.2000 से वृद्घि की गई जिसमें वर्ष 1995 के पूर्ववर्ती जनसंख्या अनुमानों के स्थान पर दिनांक 01.03.2000 की स्थिति के अनुसार महा पंजीयक के आबादी संबंधी अनुमानों को आधार बनाया गया। इस वृद्घि से बीपीएल परिवारों की कुल संख्या 596.23 लाख परिवारों की मूल रूप से अनुमानित संख्या, जब वर्ष 1997 में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली लागू की गई थी, की तुलना में 652.03 लाख हो गई है।

4.6.   मौजूदा लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली  के अंतर्गत अंतिम खुदरा मूल्य, थोक/खुदरा विक्रेताओं के मार्जिन, ढुलाई प्रभार, लेवी, स्थानीय कर आदि पर विचार करते हुए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा निर्धारित किया जाता है। अंत्योदय अन्न योजना, जिसमें अंतिम खुदरा मूल्य को गेहूं के लिए 2 रूपये प्रति किलोग्राम और चावल के लिए 3 रूपये प्रति किलोग्राम रखा जाना है, को छोड़कर लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन खाद्यान्नों का वितरण करने के लिए खुदरा निर्गम मूल्य निर्धारित करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को लचीला रुख अपनाने का अधिकार दिया गया है।

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन बीपीएल परिवारों की पहचान

 

5.1   टीपीडीएस के अधीन गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या की गणना के लिए अगस्त, 1996 में आयोजित खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन में यह आम राय थी कि स्व0 प्रो0 लाकडावाला की अध्यक्षता में योजना आयोग द्वारा गठित विशेषज्ञ समूह  द्वारा प्रयोग  की गई विधि को अपनाया जाए। बीपीएल परिवारों का निर्धारण 1995 के भारत के महापंजीयक के जनसंख्या अनुमानों तथा वर्ष 1993-94 के लिए योजना आयोग के राज्‍यवार गरीबी अनुमानों के आधार पर निर्धारित किया गया था ।इस प्रकार बीपीएल परिवारों की कुल संख्या 596.23 लाख निर्धारित की गयी थी। टीपीडीएस के कार्यान्वयन हेतु मार्गदर्शी सिद्धान्त जारी किए गए थे जिसके लिए राज्य सरकारों को सलाह दी गई थी कि वे ग्राम पंचायत तथा नगर पालिका को शामिल करते हुए बीपीएल परिवारों की पहचान करें। ऐसा करते समय समाज के वास्तविक रूप से निर्धन और कमजोर वर्ग जैसे ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले भूमिहीन खेतिहर मजदूर, सीमांत किसान और झुग्गी-झोंपड़ी बस्तियों में रहने वाले ग्रामीण कारीगर जैसे कुम्हार, टैपर, बुनकर, लोहार, कारपेंटर आदि तथा ऐसे लोग जो अनौपचारिक क्षेत्र में अपने जीवन के लिए दैनिक आधार पर अपनी जीविका चलाते हैं जैसे पोटर्स, रिक्षा चलाने वाले, ठेला खींचने, पटरियों पर फल एवं फूल बेचने वालों पर ध्‍यान दिया जाना था। पात्र परिवारों की पहचान के लिए ग्राम पंचायत तथा ग्राम सभा को भी शामिल किया जाना था।

5.2   1995 से पूर्व के जनसंख्या अनुमानों के स्थान पर 1.3.2000 को महापंजीयक के जनसंख्या अनुमानों का आधार अपनाने से 1.12.2000 से बीपीएल परिवारों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस दृष्‍टि से बीपीएल परिवारों की कुल लक्षित संख्या 652.03 लाख है जबकि मूलत: 596.23 लाख परिवारों का अनुमान लगाया गया था जब जून,1997 में टीपीडीएस प्रारम्भ की गई थी।

अंत्योदय अन्न योजना

 

6.1   लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अंत्योदय अन्न योजना को लागू करना गरीबी रेखा से नीचे की आबादी के निर्धनतम वर्ग के बीच भुखमरी को कम करने  की दिशा में उठाया गया एक कदम है। राष्‍ट्रीय नमूना सर्वेक्षण ने इस तथ्‍य की ओर संकेत किया था कि देश में कुल आबादी का लगभग 5% भाग दो वक्‍त का भोजन किए बिना सोता है। आबादी के इस भाग को ‘भूख ग्रस्‍त’ कह सकते हैं। लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आबादी के इस वर्ग के प्रति और अधिक केंद्रित और लक्षित करने के लिए एक करोड़ निर्धनतम परिवारों के लिए दिसम्बर, 2000 में  अंत्योदय अन्न योजना ' शुरू की गयी थी।

6.2   अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) में राज्य में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन कवर किए गए गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों में से एक करोड़ निर्धनतम परिवारों की पहचान करने और उन्हें 2 रुंपये प्रति किलोग्राम गेहूं और 3 रुंपये प्रति किलोग्राम चावल की अत्यधिक राजसहायता प्राप्त दरों पर खाद्यान्न प्रदान करने की परिकल्पना की गई थी। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से यह अपेक्षित है कि वे डीलरों और खुदरा विक्रेताओं के मार्जिन सहित वितरण लागत और ढुलाई लागत वहन करें। इस प्रकार, इस स्कीम  के अधीन सम्पूर्ण खाद्य राजसहायता उपभोक्ताओं तक पहुचाई जा रही है।

6.3   निर्गम की मात्रा जो प्रारंभ में 25 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह थी, उसे 1 अप्रैल, 2002 से बढ़ाकर  35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह कर दिया गया है।

6.4   इसके बाद अंत्योदय अन्न योजना में 2.50 करोड़ निर्धनतम परिवारों को कवर करने के लिए विस्तारित किया गया है जो निम्‍नानुसार है:-

(i)    प्रथम विस्तार

गरीबी रेखा से नीचे के 50 लाख अतिरिक्त परिवारों को शामिल करके 2003-04 में अंत्योदय अन्न योजना का विस्तार किया गया।  इसमें वे परिवार शामिल किए गए थे, जिनकी मुखिया विधवा अथवा असाध्यरोगी या अपंग व्‍यक्‍ति अथवा 60 वर्ष या उससे अधिक की आयु के व्‍यक्‍ति थे और जिनकी जीविका का सुनिश्चित साधन नहीं था या जिन्हें सामाजिक सहायता प्राप्त नहीं थी। इस वृद्धि के साथ अंत्योदय अन्न योजना के अधीन 1.5 करोड़ परिवार (अर्थात् गरीबी रेखा से नीचे का 23%) कवर किए गए।

(ii)   दूसरा विस्तार

केन्द्रीय बजट 2004-05 में की गई घोषणा के अनुसार इस योजना का और विस्तार किया गया जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ भुखमरी के खतरे वाले सभी परिवारों को शामिल करके गरीबी रेखा से नीचे 50 लाख के और परिवार इस योजना में शामिल किए गए। इस बारे में दिनांक 3 अगस्त, 2004 को आदेश जारी किए गए। इन परिवारों की पहचान करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों में निम्नलिखित मानदंड निर्धारित किए गए:-

क.   ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में भूमिहीन कृषि श्रमिक, सीमांत किसान,ग्रामीण दस्‍तकार, शिल्‍पी कुम्हार, मोची, बुनकर, लोहार,बढ़ई, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले जैसे ग्रामीण दस्तकार और कुली, रिक्शाचालक, हथठेला चालक, फल और फूल विक्रेता, सपेरे, कबाड़ी, मोची जैसे अनौपचारिक क्षेत्र में दिहाड़ी आधार पर जीविका अर्जित करने वाले व्यक्ति, निराश्रित और इसी प्रकार की अन्य श्रेणियों के परिवार।

ख.   वे परिवार जिनकी मुखिया विधवा अथवा असाध्य रोग ग्रस्त व्‍यक्‍ति या अपंग व्‍यक्‍ति अथवा 60 वर्ष या उससे अधिक की आयु के व्‍यक्‍ति अथवा अकेली महिला या पुरूष हैं और जिनकी जीविका का कोई सुनिश्चित साधन नहीं है अथवा जिन्हें पारिवारिक अथवा सामाजिक सहायता प्राप्त नहीं है।

ग.    विधवाएं अथवा असाध्य रोग ग्रस्त अथवा विकलांग व्‍यक्‍ति या 60 वर्ष अथवा उससे अधिक की आयु के व्यक्ति या अकेली महिला अथवा अकेला पुरुष जिन्हें कोई पारिवारिक अथवा सामाजिक समर्थन प्राप्त नहीं है या जिनकी जीविका का कोई सुनिश्चित साधन नहीं है।

घ.    सभी आदिम आदिवासी परिवार।

इस वृद्धि के साथ अंत्योदय अन्न योजना परिवारों की संख्‍या बढ़कर 2 करोड़ परिवार (अर्थात् गरीबी रेखा से नीचे का 30.66%) हो गई।

(iii)   तीसरा विस्तार

केंद्रीय बजट 2005-06 में की गयी घोषणा के अनुसार अंत्योदय अन्न योजना का और विस्तार किया गया ताकि गरीबी रेखा से नीचे के और 50 लाख और परिवारों को कवर किया जा सके। इस प्रकार इसका कवरेज बढ़कर 2.5 करोड़ परिवार (अर्थात् गरीबी रेखा से नीचे का 38 प्रतिशत) हो गया है।

दिनांक 30.06.2014 की स्थिति के अनुसार, राज्यों /संघ राज्य क्षेत्रों ने 242.128 लाख अंत्योदय अन्न योजना परिवारों की पहचान की है और अंत्योदय अन्न योजना राशन कार्ड जारी किए हैं। एएवाई परिवारों की अनुमानित संख्‍या और जिन परिवारों की पहचान की गई हैं और राशन कार्ड जारी किए गए हैं, उनका राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्रवार ब्‍यौरा अनुबंध-1 में दिया गया है।

6.5  अंत्योदय परिवारों की पहचान करने और इन परिवारों को विशिष्‍ट राशन कार्ड जारी करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है। अंत्योदय परिवारों और विस्‍तारित अंत्‍योदय अन्न योजना के अधीन अतिरिक्त अंत्योदय परिवारों की पहचान करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। पहचान किए गए अंत्योदय परिवारों को  अंत्योदय अन्न योजना के अलग प्रकार के जारी राशन कार्डों के आधार पर राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को इस योजना के अधीन आवंटित खाद्यान्न रिलीज किए जा रहे हैं। वर्ष 2013-14 हेतु अंत्योदय अन्न योजना  के अंतर्गत खाद्यान्‍नों का आवंटन लगभग 13.82 लाख टन था।

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन खाद्यान्न जारी करने की मात्रा

 

1997 से गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए निर्गम की मात्रा को 10 किलोग्राम से  धीरे-धीरे बढ़ाकर 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह कर दिया गया है। 1.4.2000 से निर्गम की मात्रा को 10 किलोग्राम से बढ़ाकर 20 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह कर दिया गया था। गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए खाद्यान्नों के आवंटन को जुलाई, 2001 से 20 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह से और बढ़ाकर 25 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह कर दिया गया। प्रारंभ में इस योजना की शुरूआत के समय अंत्योदय परिवारों को 25 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति परिवार प्रति माह दिया जाता था। परिवार स्तर पर खाद्य सुरक्षा में वृद्धि करने की दृष्टि से गरीबी रेखा से ऊपर, गरीबी रेखा से नीचे और अंत्योदय अन्न योजना के अधीन निर्गम की मात्रा को 1.4.2000 से संशोधित कर 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह कर दिया गया है।

 

केन्‍द्रीय निर्गम मूल्‍य (सीआईपी)

 

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत आपूर्ति किए जा रहे खाद्यान्‍नों के केन्द्रीय निर्गम मूल्य (सीआईपी) निम्‍नानुसार है।

केन्‍द्रीय निर्गम मूल्‍य (सीआईपी)

(रुपये प्रति किलोग्राम)

खाद्यान्न

गरीबी रेखा से ऊपर

(ए.पी.एल)

गरीबी रेखा से नीचे

(बी.पी.एल.)

अंत्योदय अन्न योजना

(ए.ए.वाई.)

चावल

8.30

(ग्रेड ए)

 

 

7.95

(सामान्य)

5.65

3.00

गेहूं

6.10

4.15

2.00

मोटा अनाज

4.50

3.00

1.50

 

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 को दिनांक 10.09.2013 को अधिसूचित किया गया है। राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत कवरेज, खाद्यान्नों के हकदारी आदि में ऊपर संदर्भित मौजूदा लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लोगों की तुलना में परिवर्तन आया है। इस अधिनियम में अन्‍य बातों के सा‍थ-साथ लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अखिल भारतीय स्‍तर पर 75 प्रतिशत तक ग्रामीण जनसंख्‍या तथा 50 प्रतिशत तक शहरी जनसंख्‍या  को कवर किए जाने का प्रावधान हैं। राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत प्राथमिकता वाले परिवार चावल के लिए 3 रूपए किलोग्राम,  गेहूं के लिए 2 रूपए किलोग्राम और मोटे अनाज के लिए 1 रूपए किलोग्राम के निर्गम मूल्‍यों पर 5 किलोग्राम प्रति व्‍यक्‍ति प्रति माह खाद्यान्‍न प्राप्‍त करने के हकदार हैं। तथापि, अंत्‍योदय अन्‍न योजना के मौजूदा परिवार 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह खाद्यान्‍न प्राप्‍त करते रहेंगे।

 

स्रोत: खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग, भारत सरकार

 



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