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सफल ग्राम सभा-एक केस अध्ययन

ग्राम पंचायत पिंपरी गावली

पिंपरी गावली महाराष्ट्र राज्य का एक आदर्श ग्राम है। इस गांव ने महाराष्ट्र सरकार के आदर्श गांव योजना को प्रभावी रूप से क्रियान्वित कर बहुत कम समय में ही जल सुरक्षा की स्थिति को प्राप्त कर लिया है यह गांव महाराष्ट्र के वर्षापोषित क्षेत्र में पड़ता है। वाटर-शेड विकास के कामों में सहभागिता आधारित कार्यपद्धति के लिए ग्राम सभा ने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । भूगर्भीय जल के दोहन को रोकने के लिए ग्राम सभा द्वारा पारित ‘भूगर्भीय जल नियमन एवं प्रबंधन प्रस्ताव’ नामक प्रस्ताव के जरिए ग्राम पंचायत ने नलकूपों पर रोक लगाई गयी है। ग्राम सभा ने शराब पर भी प्रतिबंध लगाया,जंगलों को बचाने के लिए खुले स्थान में चराई को रोका और खुले में शौच को प्रतिबंधित करने जैसे अन्य कार्य भी किए है ।

गरिबा ग्राम पंचायत - पूर्वी चंपारण, बिहार

पटना जिले के कल्याणपुर ब्लॉक में स्थित गरिबा एक ग्राम पंचायत है जो गरीबी उन्मूलन और ग्रामवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने को प्रेरित है। पंचायत ने गांव की अधोसंरचना में सुधार लाने के लिए अग्रणी भूमिका निभाई और साथ ही साथ स्थानीय लोगों को इन गतिविधियों में सहभागी बनाया और उन्हें काम करने का भरपूर अवसर मुहैया कराया। ग्राम सभा की बैठकों में घोषित उपायों का लक्ष्य गरिबा गांव का पूर्ण समावेशी और संरचित विकास था। यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि गरिबा पंचायत के द्वारा किए गए कार्यों के सकारात्मक परिणाम ने इसकी ग्राम सभा में अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित किया। लगभग 40% महिलाएं और 50% से अधिक निर्वाचित पंचायत सदस्य अनेक सरकारी अधिकारियों के साथ इन बैठकों में उपस्थित होते थे। गरिबा ग्राम पंचायत को संसाधन के रूप मे अपने स्थानीय लोग ही दिखे जिनका सहयोग गांव की संरचनात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा सकता था। ग्राम सभा में उचित चर्चा के बाद कई सारी निर्माण परियोजनाएं चालू की गईं। क्रॉस ओवर रोड के रूप में एक छोटी पुलिया का निर्माण किया गया, गांव के चौराहे तक सड़कों का निर्माण किया गया और गांव में इस पार से उस पार तक ईंट और मिट्टी का काम हुआ जो पंचायत द्वारा किए गए विभिन्न प्रकार कार्यों के उदाहरण हैं। खुलापन और पारदर्शी शासन गवर्नेंस के अति महत्वपूर्ण गुण हैं और ये एक दक्ष प्रशासन की गारंटी देते हैं। मनरेगा योजना के तहत गरिबा ग्राम सभा द्वारा किए गए कार्यों और गतिविधियों का ग्राम सभा में विस्तार से विश्लेषण और समीक्षा की गई और उनके संपूर्ण क्रियान्वयन का समुचित सत्यापन किया गया। ग्राम सभा में भाग लेने वाले विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सदस्यों को मनरेगा के तहत वर्ष 2012-13 के लिए विभिन्न लाभकारी योजनाओं के बार में जानकारी दी और एक विस्तृत चर्चा तथा परिस्थिति के विश्लेषण के बाद ग्रामीणों की आवश्यकताओं के आधार पर जरूरी परियोजनाएं और उनका स्व निर्धारण किया गया। गरिबा की ग्राम सभा ने गांव को स्वच्छ रखने पर बहुत बल दिया है। सुरक्षित पेय जल और स्वच्छ शौचालय संबंधी मुद्दों की चर्चा और उन पर काम करने के लिए ग्राम स्वच्छता समिति की स्थापना की गई। इस समिति के सदस्यों ने ग्राम सभा में उपस्थित लोगों से स्वच्छता पर विशेष बल देने का अनुरोध किया क्योंकि इस मामले में लापरवाही बरतने से बीमारियां और महामारी फैलने का खतरा होता है। ग्रामीणों को कुछ आधारभूत स्वच्छता नियमों के बारे में भी बताया गया और उनके अनुपालन का अनुरोध किया गया। गरिबा ग्राम सभा ने स्कूलों में बच्चों के नामांकन कराने के लिए बहुत सक्रियता दिखाई और साथ ही अभिभावकों को भी इस मामले में जागरुक किया है कि शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है। नेतृत्वकर्ताओं के समर्पित समूह तथा ऐसे ही सहयोगी लोगों के साथ, गरिबा ग्राम पंचायत द्वारा अल्प समय में नई-नई उपलब्धियां हासिल की जा रही हैं।

मुख्य बिंदु

  • ग्राम सभा में महिलाओं तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सरहानीय उपस्थिति ।
  • गांव भर में वृक्षारोपण कार्य किए गए ।
  • गांव की आधारभूत संरचनाओं में भरपूर सुधार।
  • वार्ड सभा और महिला सभा की बैठकें सक्रिय रूप से आयोजित की गईं।

सारांश

प्राचीन काल से ग्राम सभा की भारतीय प्रशासनिक ढांचे में प्रमुख भूमिका रही है। ऐसी लोकतांत्रिक संस्थाओं की उपस्थिति प्रशासन की एक अति विकसित प्रणाली का संकेत करती है। ग्राम सभा प्रत्यक्ष लोकतंत्र की क्रियाविधि का एक बेहतरीन उदाहरण है। आज की ग्राम सभा विकेंद्रीकरण के इस सिद्धांत को सिद्ध करती है कि “प्रशासन का अधिकार इस तरह हस्तांतरित किया जाना चाहिए कि प्रशासन के हर स्तर को ऐसी शक्तियां मिलें जिनके निष्पादन में वह सक्षम हो।” संवैधानिक रूप से भी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और व्यक्तिगत स्वंत्रता प्रदान करने में ग्राम सभा की महती भूमिका होती है। वह केवल नागरिक अधिकारों की रक्षक ही नहीं होती हैं बल्कि मौलिक कर्तव्यों की प्रहरी भी होती है। ग्राम सभा की अवधारणा भरोसे पर आधारित होती है और इसमें सहयोग कर तथा और इसकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होकर ग्रामीण विकास को साकार किया जा सकता है।

स्त्रोत : राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान



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