<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify; ">प्रस्तावना</h3> <p style="text-align: justify; ">वस्तु एवं सेवाकर को लागू करना भारत में अप्रत्यक्ष कर के सुधार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। बड़ी संख्या में केंद्र और राज्यों के दवारा लगाए जा रहे करों को मिलाकर अकेला एक कर बना दिए जाने से करों बहुतायता और दोहरे कराधान की समस्या हल हो जाएगी और एक सामान्य राष्ट्रीय बाजार के लिए रास्ता साफ हो जाएगा। उपभोक्ता की दृष्टि से देखें तो, सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि वस्तुओं पर लगने वाले कर के बोझ में कमी आ सकेगी। आज यह कर बोझ 25 प्रतिशत से 30 प्रतिशत के लगभग है। जीएसटी के लागू किए जाने से भारतीय उत्पाद घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि इससे आर्थिक विकास पर भी बहुत उत्साहजनक प्रभाव पड़ेगा और सबसे अंत में यह कहना है कि इस कर को लागू करना आसान होगा क्योंकि इसमें पारदर्शिता रहेगी और नीतियां स्वयं तैयार की जा सकेंगी।</p> <h3 style="text-align: justify; ">उद्भव</h3> <p style="text-align: justify; ">2. जीएसटी के बारे में सबसे पहले तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री के दिमाग में आया था जिसको उन्होंने 2007-08 के बजट में व्यक्त किया था। शुरू-शुरू में जीएसटी के 1 अप्रैल, 2010 से लागू किए जाने का विचार था। राज्यों के वित्त मंत्रियों की शक्ति प्राप्त समिति (इ.सी.), जिसने राज्यों में लगाए जाने वाले वैट की रूपरेखा तैयार की थी, से अनुरोध किया था कि वह जीएसटी के लिए भी मार्ग प्रशस्त करे और उसकी रूपरेखा तैयार करे। अधिकारियों का एक संयुक्त कार्यकारी दल, जिसमें राज्य और केंद्र दोनों के प्रतिनिधि थे, का गठन किया गया था, जिसका कार्य जीएसटी के विभिन्न पहलुओं की जांच-परख करना था और अपनी रिपोर्ट, विशेषकर छूट और निर्धारित (थ्रेशोल्ड) सीमा, सेवाओं पर कर लगाना/करारोपण और अंतर्राज्यीय आपूर्तियों पर करारोपण के बारे में, देना था। इनमें परस्पर तथा इनके और केंद्र सरकार के बीच हुए विचारविमर्श के आधार पर इस शक्ति प्राप्त समिति (ई.सी.) ने नवंबर, 2009 में जीएसटी पर अपना प्रथम विमर्श पत्र (एफडीपी) जारी किया था। इसमें प्रस्तावित जीएसटी की विशेषताओं को बताया गया है और अब तक केंद्र और राज्यों के बीच चलने वाली बात-चीत का आधार तैयार किया गया है।</p> <h3 style="text-align: justify; ">जीएसटी और केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध</h3> <p style="text-align: justify; ">3. इस समय वित्तीय शक्तियों का केंद्र और राज्यों के बीच विभाज संविधान में बिल्कुल स्पष्ट किया गया है और एक-दूसरे के क्षेत्र में किसी का कोई दखल नहीं है। केंद्र को वस्तुओं के विनिर्माण/उत्पादन पर (केवल मानव के दवारा प्रयोग में आने वाले शराब, अफीम, मादक पदार्थों आदि को छोड़कर) पर कर लगाने की शक्ति प्राप्त है जबकि राज्यों को वस्तुओं की होने वाली बिक्री पर कर लगाने की शक्ति प्राप्त है। यदि बिक्री अंतर्राज्यीय होती है तब केंद्र को इस पर कर (केंद्रीय बिक्री कर) लगाने की शक्ति प्राप्त है लेकिन इस प्रकार के संपूर्ण कर को मूल राज्य वसूलता है और पूरा का पूरा अपने पास रख लेता है। जहां तक सेवाओं की बात है, सेवाकर को लगाने की शक्ति केवल केंद्र के पास ही है। चूंकि भारत में आयात किए जाने या भारत से निर्यात किए जाने के दौरान वस्तुओं की होने वाली बिक्री पर राज्यों को कोई कर लगाने की शक्ति नहीं है अत: केंद्र ही वस्तुओं के आयात या निर्यात पर कर लगाता है और वही उसे वसूल भी करता है। यह कर अतिरिक्त सीमा शुल्क के रूप जाना जाता है जोकि आधारभूत सीमा शुल्क के अलावा होता है। इस अतिरिक्त सीमाशुल्क (जिसे सामान्यतया सीवीडी और एसएडी के नाम से जाना जाता है) उत्पाद शुल्क, बिक्री कर, राज्य वैट और अन्य करों को संतुलित कर देता है जोकि इसी प्रकार के घरेलू उत्पादों पर लगाए जाते हैं। जीएसटी को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करने की जरूरत पड़ेगी, जिससे कि जीएसटी के लगाने और उसको वसूलने के लिए केंद्र और राज्यों को समवर्ती शक्तियां प्रदान की जा सके|</p> <p style="text-align: justify; ">3.1 जीएसटी को लगाने के लिए केंद्र और राज्यों का समवर्ती क्षेत्राधिकार दिए जाने के लिए एक ऐसे अदवितीय तथा संस्थागत तंत्र की जरूरत पड़ेगी जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जीएसटी की संरचना और इसके डिजाइन में तथा इसको लागू करने में दोनों और केंद्र और राज्य के दवारा संयुक्त रूप से निर्णय लिए जाएं। इसको कारगर बनाने के लिए ऐसे तंत्र के पास संवैधानिक शक्ति का होना जरूरी है।</p> <h3 style="text-align: justify; ">संविधान (101वां) संशोधन अधिनियम, 2016</h3> <p style="text-align: justify; ">4. इन सभी और अन्य मुद्दों के समाधान के लिए दिनांक 19.12.2014 को 16वीं लोकसभा में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक प्रस्तुत किया गया। इस विधेयक में मानव के उपभोग वाले एल्कोहल के अलावा अन्य सभी प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी के लगाए जाने का प्रावधान है। यह कर दोहरे जीएसटी के रूप में अलग-अलग लगाया जाएगा लेकिन इसे संघ (सीजीएसटी) और राज्य जिनमें संघ राज्य क्षेत्र जिनमें विधान सभा भी है (एसजीएसटी)/ संघ राज्य (यूटीजीएसटी) के दवारा समवर्ती रूप से लगाया जाएगा। संसद को वस्तुओं और सेवाओं के अंतर्राज्यीय व्यापार और वाणिज्य (जिसमें आयात भी शामिल है) पर जीएसटी (आईजीएसटी) को लगाने का अनन्य अधिकार होगा। केंद्र सरकार को तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी के अलावा उत्पादशुल्क को भी लगाने का अधिकार होगा। 5 विनिर्दिष्ट पेट्रोलियम उत्पादों अर्थात क्रूड, हाईस्पीड डीजल, पेट्रोल, एटीएफ और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर कर का उदग्रहण, जीएसटी परिषद की सिफारिश पर बताई जाने वाली किसी बाद की तारीख से किया जाएगा।</p> <p style="text-align: justify; ">4.1 वस्तु एवं सेवाकर परिषद (जीएसटीसी) का गठन किया जाएगा जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री, राज्य मंत्री (राजस्व) और राज्यों के वित्त मंत्री होंगे। इस परिषद का कार्य जीएसटी की दर, इससे छूट और इसकी थ्रेशोल्ड सीमा, के बारे में सिफारिशें देना होगा। इसका कार्य यह भी होगा कि इसमें कौन-कौन से कर मिलाए जाएंगे, साथ ही यह इसकी अन्य विशेषताओं के बारे में भी बताएगा। इस प्रकार के तंत्र से केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्य-राज्य के बीच जीएसटी के विभिन्न संदर्भों में कुछ हद तक एकरूपता लायी जा सकेगी। जीएसटीसी के कुल सदस्यों का आधा हिस्सा, जीएसटीसी की बैठकों का कोरम बनाएगा। जीएसटीसी की बैठकों में कोई भी निर्णय किए जाने वाले भारित मतदान के तीन-चौथाई से कम बहुमत से नहीं किया जाएगा। बहुमत के लिए केंद्र और न्यूनतम 20 राज्यों की आवश्यकता होगी क्योंकि कुल डाले गए मतों में केंद्र का वेटेज एक-तिहाई और सभी राज्यों को मिलाकर उनका वेटेज दो-तिहाई होगा।</p> <p style="text-align: justify; ">4.2 इसके पहले मई, 2015 में संविधान संशोधन विधेयक को लोक सभा दवारा पारित किया गया था। फिर इस विधेयक के 12.05.2015 को राज्यसभा की चयन समिति के पास भेज दिया गया था। इस चयन समिति ने 22.07.2015 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। कुछ संशोधनों के साथ यह विधेयक राज्य सभा में अंतिम रूप से पारित हो गया। उसकेबाद अगस्त 2016 में इसे लोकसभा ने पारित कर दिया। फिर अपेक्षित संख्या में राज्यों द्वारा इसकी अभिपुष्टि भी हो गई और 8 सितंबर, 2016 को इस पर राष्ट्रपति को सहमति भी हो गई और यह 16 सितंबर, 2016 से संविधान (101वां संशोधन अधिनियम, 2016) के रूप में अधिनियमित हो गया है।</p> <h3 style="text-align: justify; ">वस्तु एवं सेवाकर परिषद (जीएसटीसी)</h3> <p style="text-align: justify; ">5. जीएसटीसी को 12 सितंबर, 2016 से अधिसूचित किया जा चुका है। जीएसटीसी की सहायता के लिए इसका एक सचिवालय भी है। अब तक इस जीएसटीसी की 13 बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में जीएसटीसी ने निम्नलिखित निर्णय लिए हैं:-</p> <p style="text-align: justify; ">() छूट की थ्रेशोल्ड सीमा 20 लाख रूपए होगी। संविधानके अनुच्छेद 279क में अतिरिक्त विशेष वर्ग के राज्यों के लिए छूट की थ्रेशोल्ड सीमा 10 लाख रूपए निर्धारित की गई है।</p> <p style="text-align: justify; ">(i) कंपोजीशन थ्रेशोल्ड 50 लाख रूपए होगी। कंपोजीशन स्कीम अंतर्राज्यीय आपूर्ति कर्ताओं, सेवा प्रदाताओं (रेस्तरां संवाओं को छोड़कर) और विशिष्ट वर्ग विनिर्माणकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं है।</p> <p style="text-align: justify; ">(ii) केंद्र या राज्य सरकारों दवारा चलाई जा रही वर्तमान कर प्रोत्साहन योजनाओं को संबंधित सरकारें बजट के माध्यम से प्रतिपूर्ति करके जारी रख सकती है। ये योजनाएं अपने इसी रूप में जीएसटी के अंतर्गत नहीं चल सकती हैं।</p> <p style="text-align: justify; ">(iv) इसमें करों की चार दरें यथा 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत होगी। इसके अलावा, कुछ वस्तुओं और सेवाओं को छूट प्राप्त मदों की सूची में रखा जाएगा। मूल्यवान धातुओं की कीमतों को अभी निर्धारित किया जाना है। जीएसटी को लागू किए जाने से राज्यों को जो राजस्व की हानि होगी उसकी भरपाई किए जाने के लिए पांच वर्ष की अवधि तक विलासिता वाली वस्तुओं पर 28 प्रतिशत की अधिकतम दर से एक सेवाकर लगाया जायेगा I जीएसटी परिषद् ने अधिकारियों की समिति से कहा है कि वह वर्तमान कर संरचना को देखते हुए किस स्लैब में कौन-कौन सी वस्तुएं और सेवाएं आएंगी। इसको निश्चित करें।</p> <p style="text-align: justify; ">(v) पांच प्रकार के कानूनों को यथा सीजीएसटी कानून, यूटीजीएसटी कानून, आईजीएसटी कानून, एसजीएसटी कानून और जीएसटी कंपेंसेशन को मंजूरी मिल गई है।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) सिंगल इंटरफेस सुनिश्चित करने के लिए 90 प्रतिशत करदाताओं पर, जिनका कुल कारोबार 1.5 करोड़ रूपए से कम का होगा, राज्य कर प्रशासन का प्रशासनिक नियंत्रण होगा और 10 प्रतिशत पर केंद्रीय कर प्रशासन का नियंत्रण होगा। इसके अलावा, जिन करदाताओं का कारोबार 1.5 करोड़ रूपए से अधिक है। उन पर 50 प्रतिशत केंद्र और 50 प्रतिशत राज्य कर प्रशासन का नियंत्रण होगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(vii) आईजीएसटी अधिनियम के अंतर्गत शक्तियों को, कुछ अपवादों को छोड़कर सीजीएसटी और एसजीएसटी अधिनियमों की तरह एक दूसरे को भी दी जाएगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(viii) भू-क्षेत्री जल (टेरिटोरियम वाटर) में जीएसटी को वसूल करने की शक्ति राज्यों को प्रदत्त की जाएगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(ix) जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के फार्मूला और तंत्र को अंतिम रूप दे दिया गया है।</p> <p style="text-align: justify; ">(x) इनपुट कर क्रेडिट, संरचना उदग्रहण, संक्रमण प्रावधानों और मूल्य निर्धारण के संबंध में 4 नियमों की सिफारिश की गई है। इसके अलावा पंजीकरण, इनवायस, भुगतान, रिटर्न और रिफंड के संबंध में 5 नियमों को सितंबर, 2016 में अंतिम रूप दिया गया तथा संसद में पुर:स्थापित जीएसटी विधेयकों के आलोक में संशोधित किए अनुसार, की भी सिफारिश की गई है।</p> <h3 style="text-align: justify; ">जीएसटी की प्रमुख विशेषताएं</h3> <p style="text-align: justify; ">6. जीएसटी की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं</p> <p style="text-align: justify; ">(i) जीएसटी को वस्तुओं को विनिर्माण, या वस्तुओं की बिक्री या सेवाओं के प्रावधान पर, जो कर की वर्तमान अवधारणा है, उसके एवज में वस्तुओं और सेवाओं के आपूर्ति पर लगाया जाएगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(ii) जीएसटी उत्पत्ति आधारित करारोपण के वर्तमान सिद्धांत के बदले गंतव्य आधारित उपभोग करारोपण के सिद्धांत पर आधारित होगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(iii) यह एक प्रकार केंद्रीय जीएसटी होगी, जिसमें केंद्र और राज्य एक ही आधार पर साथ-साथ कर लगा सकते हैं। केंद्र के दवारा लगायी जाने वाली जीएसटी को केंद्रीयजीएसटी (सीजीएसटी) और राज्यों के दवारा (इनमें वे संघ राज्य भी आते हैं जिनका अपना विधानमंडल है) लगाए जाने वाले जीएसटी को राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) कहा जाएगा। बिना विधान मंडल वाले संघ राज्यों दवारा लगान जाने वाले जीएसटी को संघ राज्य जीएसटी (यूटीजीएसटी) कहा जाएगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(iv) समेकित जीएसटी(आईजीएसटी) को वस्तुओं और सेवाओं की अंतर्राज्यीय आपूर्ति(जिसमें स्टाक ट्रांफर भी शामिल है) पर लगाया जाएगा। इसे केंद्र दवारा वसूला जाएगा ताकि क्रेडिट चेन में कोई व्यवधान आने पाए।</p> <p style="text-align: justify; ">(v) वस्तुओं के आयात को अंतर्राज्यीय आपूर्ति माना जाएगा और इस पर लागू सीमाशुल्क के अलावा आईजीएसटी लगेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) सेवाओं के आयात को अंतर्राज्यीय- आपूर्ति माना जाएगा और इनपर आईजीएसटी लगेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) सीजीएसटी, एसजीएसटी/यूटीजीएसटी एवं आईजीएसटी को उस दर से लगाया जाएगा जिस पर केंद्र और राज्य जीएसटी परिषद (जीएसटीसी) तत्वावधान में सहमत होंगे।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi)जीएसटी निम्नलिखित करों की जगह लगाया जाएगा जिन्हें इस समय केंद्र लगा रहा है और वसूल रहा है</p> <p style="text-align: justify; ">(क) केंद्रीय उत्पाद शुल्क, (ख) उत्पाद शुल्क (औषधिक एवं प्रसाधन उत्पाद);</p> <p style="text-align: justify; ">(ग) अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विशेष महत्व की वस्तुएं):</p> <p style="text-align: justify; ">(घ) अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (वस्त्र एवं वस्त्र उत्पाद)</p> <p style="text-align: justify; ">(ड) अतिरिक्त सीमाशुल्क (जिसे सामान्यता सीवीडी के नाम से जाना जाता है); (च) विशेष अतिरिक्त सीमाशुल्क (एसएडी); (छ) सेवा कर;</p> <p style="text-align: justify; ">(ज) उपकर और अधिकार, जहां तक कि वे वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित है;</p> <p style="text-align: justify; ">(ix) जो राज्य कर इस जीएसटी में मिलाए जाएंगे वे इस प्रकार हैं(क) राज्य वैट</p> <p style="text-align: justify; ">(ख) केंद्रीय बिक्री कर;</p> <p style="text-align: justify; ">(ग) खरीद कर;</p> <p style="text-align: justify; ">(घ) विलासिता कर;</p> <p style="text-align: justify; ">(ड) प्रवेश कर (सभी प्रकार के);</p> <p style="text-align: justify; ">(च) मनोरंजन कर (उनको छोड़कर जो स्थानीय निकायों दवारा लगाए जाते हैं);</p> <p style="text-align: justify; ">(छ) विज्ञापनों पर लगाया जाने वाला कर; (ज) लाटरी, बेटिंग और गैबलिंग पर लगाए जाने वाला कर; (झ) राज्य सेस और अधिभार जहां तक वे सेवाओं के सामान की आपूर्ति से संबंधित हैं:</p> <p style="text-align: justify; ">(x) लोगों के दवारा उपभोग किए जाने को, एल्कोहल को छोड़कर अन्य सभी प्रकार की वस्तुओं पर जीएसटी लागू होगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(xi) जीएसटी के पांच विशिष्ट पेट्रोलियम उत्पार्टी (कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और प्राकृतिक गैस) पर उस तारीख से लगाया जाएगा जिस तारीख से लगाने के लिए जीएसटी परिषद सिफारिश करेंगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(xii) तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर भी जीएसटी लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त केंद्र इस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगाता रहेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(xiii) एक सामान्य थ्रेशोल्ड छूट सीजीएसटी और एसजीएसटी दोनों पर ही लागू होगी। ऐसे करदाता जिनका कारोबार 20 लाख रूपए (संविधान के अनुच्छेद 279क में यथा विनिर्दिष्ट विशेष वर्ग के राज्यों के लिए 10 लाख रूपए) को जीएसटी से छूट प्राप्त होगी। एक विकल्प कंपाउंडिंग ऑप्शन (जैसे वित्त क्रेडिट के फ्लैट रेट से कर अदा करने के लिए) उन छोटे मोटे करदाताओं को होगा (जिसमें विशिष्ट वर्ग के विनिर्माता और सेवा प्रदाता भी आते हैं) जिनका वार्षिक कारोबार 50 लाख रूपए तक का होगा। थ्रेशोल्ड और कंपाउंडिंग स्कीम वैकल्पिक होगा। (iv)छूट प्राप्त वस्तुओं और सेवाओं की सूची छोटी से छोटी रखी जाएगी और यथा संभव इसे केंद्र और राजन्यों के लिए और सभी राजन्यों में एक समान रखा जाएगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(xv) निर्यात जीरो रेटेड होगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(xvi) इनपुट्स पर भुगतान की गई सीजीएसटी की क्रेडिट का प्रयोग केवल सीजीएसटी के भुगतान में किया जा सकता है और इनपुट पर भुगतान की गई एसजीएसटी/यूटीजीएसटी की क्रेडिट का प्रयोग केवल एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के भुगतान में किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो आईजीएसटी के भुगतानकी अंतर्राज्यीय आपूर्ति को परिस्थितियों के अलावा अन्य किसी स्थिति में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दो प्रकारों एक दूसरेके लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है। इस क्रेडिट का निम्नलिखित तरीके से प्रयोग किया जा सकता है:-</p> <p style="text-align: justify; ">(क) उसी क्रम के तहत सीजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रयोग सीजीएसटी और आईजीएसटी के भुगतान में किया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify; ">(ख) उसी क्रम के तहत एसजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रयोग एसजीएसटी और आईजीएसटी के भुगतान में किया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify; ">(ग) उसी आदेश के दवारा यूजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रडिट का प्रयोग यूटीजीएसटी और आईजीएसटी के भुगतान में किया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify; ">(घ) उसी आदेश के तहत आईजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट का प्रयोग आईजीएसटी, सीजीएसटी और एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के भुगतान में किया जा सकता है। सीजीएसटी के इनपुट क्रेडिट का प्रयोग एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के भुगतान में नहीं किया जा सकता है और न ही इसका उल्टा हो सकता है।</p> <p style="text-align: justify; ">(Xvii) केंद्र और राज्य के बीच समय-समय पर लेखा-जोखा होता रहेगा ताकि आईजीएसटी के भुगतान में प्रयोग किए जाने वाले एसजीएसटी के क्रेडिट का उद्धव-राज्य से केंद्र को अंतरण सुनिश्चित हो सके। इसी प्रकार एसजीएसटी के भुगतान में किए जाने वाले क्रेडिट का केंद्र से गंतव्य राज्य का अंतरणहो कसे इसकेअलावा बी2सी सप्लाई में वसूले गए वसूलेगए आईजीएसटी के एसजीएसटी वाले हिस्से का केंद्र से गंतव्य राज्य के अंतरण होगा। इस प्रकार पैसे का अंतरण करदाताओं दवारा दायर रिटर्न में दी गई जानकारी के आधार पर किया जाएगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(Xviii) इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का आधार विस्तृत होगा क्योंकि इसे किसी व्यापर के दौरान या इसको आगे बढ़ाने के दौरान वस्तु या सेवाओं या दोनों की किसी भी आपूर्ति पर भुगतान किए जाने वाले कर के संबंध में उपलब्ध कराया जाएगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(xix) विभिन्न कटऑफ तारीख तक विभिन्न वर्ग के व्यक्तियों दवारा अपने रिटर्न को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भरना होगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(xx)कर अदा करने के लिए करदाताओं के पास कई तरीके होंगे जैसे कि इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, और नेशनल इलेक्ट्रानिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी)/रीयल टाइम ग्रोस सेटेलमेंट (आरटीजीएस);</p> <p style="text-align: justify; ">(xxi) ऐसे कतिपय व्यकृति जो कि आपूर्ति को प्राप्त करने वाले होंगे जैसे कि, जिसमें सरकारी विभाग, स्थानीय प्राधिकारी और सरकारी एजेंसियां भी आती हैं, यह दायित्व होगा कि वे जहां किसी अनुबंध के अंतर्गत आपूर्ति का कुल मूल्य दो लाख पचास हजार रूपए (2.50 लाख रूपए) से अधिक हो, किए गए भुगतान में से या आपूर्तिकर्ता के क्रेडिट में से एक प्रतिशत की दर से कर की कटौती कर ले।</p> <p style="text-align: justify; ">(xxii) करदाता और ऐसे अन्य व्यक्तियों जिन्होंने कर के भार का वहन किया है, को करों का रिफंड मांग सकती है।</p> <p style="text-align: justify; ">(xxiii) इलेक्ट्रानिक कॉमर्स आपरेटरों का यह दायित्व बनता है कि वे अपने पोर्टलों के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ताओं को किए गए भुगतान में से स्रोत पर कर की कटौती कर लें जोकि कर वाले आपूर्तियों के निवल मूल्य के एक प्रतिशत से अधिक नहीं हो।</p> <p style="text-align: justify; ">(xxiv) पंजीकृत व्यक्तियों दवारा भुगतान किए जाने वाले करों का स्व-आकलन।</p> <p style="text-align: justify; ">(XXV) इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन का सत्यापन करने के लिए पंजीकृत व्यक्तियों की लेखा-परीक्षा कराना।</p> <p style="text-align: justify; ">(XXvi) मांग किए जाने की अवधि की सीमा वार्षिक रिटर्न को दायर किए जाने की अंतिम तारीख से या त्रुटि संबंधी रिटर्न की तारीख से तीन वर्ष की होगी या त्रुटि संबंधी रिटर्न भुगतान का कम होने या करों का भुगतान न होने या त्रुटिपूर्ण रिफंड और सामान्य मामलों में इसका न्यायनिर्णयन से संबंधित होगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(XXvii) मांग किए जाने की अवधि की सीमा वार्षिक रिटर्न को दायर किए जाने की अंतिम तारीख से अथवा धोखा-धड़ी, अधिक्रमण या जानबूझ कर की गई गलत बयानी के मामलों में त्रुटि संबंधी रिटर्न भुगतान का कम होने या करों का भुगतान न होने के त्रुटिपूर्ण रिफंड और इसके न्यायनिर्णयन की तारीख से पाँच वर्ष की होगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(XXViii) विभिन्न तरीकों को अपनाकर कर के बकाया की वसूली करना जिसमें कर जमा नहीं करने वाले व्यक्तियों के सामानों/चल और अचल सम्पतियों को जब्त करना और उनकी विक्री करना भी शामिल है।</p> <p style="text-align: justify; ">ix) अधिकारियों को निरीक्षण, तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी का अधिकार देना।</p> <p style="text-align: justify; ">(XXX) अपीली प्राधिकरणों और पुन:रीक्षण आदेशों के दवारा पारित आदेशों के खिलाफ अपीलों की सुनवाई के लिए केंद्र सरकार दवारा वस्तु एवं सेवाकर अपीलीय न्यायधीकरण की स्थापना करना। राज्य, संबंधित एसजीएसटी अधिनियम में प्राधिकरण के संबंध में प्रावधानों को अंगीकार करेंगे।</p> <p style="text-align: justify; ">(XXXi) प्रस्तावित विधान के प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में ठंड लगाने का प्रावधान।</p> <p style="text-align: justify; ">(XXXii) एडवांस रूलिंग ऑथिरीटी की स्थापना जिससे कि करदाता विभाग से कर संबंधी मामलों में अनिवार्यत: सुस्पष्टता का पता लग सके।</p> <p style="text-align: justify; ">(XXXiii) लाभ प्रतिरोधी प्रावधान किए गए हैं जिससे कि वस्तुओं या सेवाओं या दोनों पर करों में जो कटौती हो उसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलना सुनिश्चित हो सके।</p> <p style="text-align: justify; ">(XXXiv) वर्तमान करदाता से जीएसटी की व्यवस्था के सहज अंतरण के लिए विस्तृत परिवर्तनीय प्रावधान|</p> <h3 style="text-align: justify; ">जीएसटी से लाभ</h3> <p style="text-align: justify; ">7. (क) मेक इन इंडिया</p> <p style="text-align: justify; ">(i) से भारत में एक सामान्य राष्ट्रीय बाजार पैदा होगा जिससे विदेशी निवेश को और 'मेक इन इंडिया' अभियान को बढ़ावा मिलेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(ii) से करों के प्रपात को रोका जा सकेगा क्योंकि इनपुट टैक्स क्रेडिट सभी प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं पर तथा इनकी आपूर्ति के हर स्तर पर उपलब्ध होगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(iii) से कानूनी प्रक्रियाओं और कर की दरों में एकरूपता आएगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(iv) से निर्यात और उत्पादन क्रियाकलापों को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार का और अधिक सूजन हो सकेगा। इस प्रकार जीडीपी में बढ़ोतरी होगी तथा लाभप्रद रोजगार पैदा होगा जिससे पर्याप्त आर्थिक विकास हो सकेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(v) से अंततः गरीबी के उन्मूलन में मदद मिलेगी क्योंकि इससे और अधिक रोजगार पैदा होंगे तथा और वित्तिय संशाधन विकसित किए जा सकेगे।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) से करों को संतुलित किया जा सकेगा विशेषकर निर्यात को माध्यम से क्योंकि इससे हमारे उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा ले सकेंगे तथा भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) देश में समग्र निवेश के परिवेश में सुधार आएगा जिससे राज्यों के विकास में मदद मिलेगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(viii) एसजीएसटी और आईजीएसटी की एक समान दरों से अपवंचन में कमी आएगी क्योंकि इससे पड़ोसी राज्यों में मनमाना दर नहीं लागू होगा तथा राज्य के भीतर तथा राज्य-राज्य की बिक्री में भी मनमानी दरें नहीं लागू होंगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(ix) से कंपनियों पर औसत कर भार भी कम हो सकेगा जिससे कीमतों में भी कमी आने की संभावना है और कीमतों में कमी होने का मतलब है खपत में बढ़ोतरी होगा जिससे उत्पादन बढ़ेगा और उदयोगों के विकास में मदद मिलेगी। इससे भारत एक 'मैन्युफेक्चरिंग हब के रूप में उभरकर सामने आएगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(ख) इज ऑफ डूइंग बिजनेस</p> <p style="text-align: justify; ">(i) कर व्यवस्था आसान होगी और छूटों की संख्या बहुत कम होगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(ii) करों की बहुलता में कमी आएगी जोकि इस समय अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था पर हावी है। इससे सरलता और एकरूपता आएगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(ii) अनुपालन लागत में कमी आएगी- क्योंकि तरह-तरह के करों को बनाए रखने के लिए ढेर सारे रिकार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी- इससे रिकाडों को बनाए रखने के लिए संशाधनों और श्रमशक्ति में ज्यादा निवेश नहीं करना पड़ेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(iv) विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओं जैसे कि पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, करभुगतान इत्यादि की प्रक्रियाएं सरल और स्वचालित हो सकेंगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(v) सारी बातचीत जीएसटीएन के सामान्य पोर्टल पर हो सकेगी। इससे करदाताओं और कर प्रशासन के बीच परस्पर बातचीत की जरूरत कम पड़ेगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) इससे ऑनलाइन दायर किए जाने वाले सभी प्रकार के रिटर्न के अनुपालन के परिवेश में सुधार आएगा। इनपुट टैक्स क्रेडिट का ऑनलाइन सत्यापन हो सकेगा।Iऔर कागज रहित संव्यवहार को बढ़ावा मिलेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) करदाताओं के पंजीकरण, करों के रिफंड, करों के रिटर्न के एक समान फारमेट, करों के सामान्य आधार वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य वर्गीकरण आदि से कर प्रणाली में ज्यादा से ज्यादा सुनिश्चितता आएगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(viii) पंजीकरण, रिफंड आदि जैसे प्रमुख क्रियाकलापों को समय से पूरा किया जा सकेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(ix) पूरे भारत वर्ष में इनपुट टैक्स क्रेडिट की इलैक्ट्रॉनिक मेंचिग की जा सकेगी और इस प्रकार की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी तथा उत्तरदायी होगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(ग) उपभोक्ताओं को लाभ</p> <p style="text-align: justify; ">(i) उपभोक्ताओं, खुदरा विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं के बीच इनपुट टैक्स क्रेडिट के निर्वात प्रवाह के कारण वस्तुओं की अंतिम कीमतें कम हो सकेंगी।</p> <p style="text-align: justify; ">(ii) ऐसी आशा है कि छोटे विक्रेताओं की संख्या तुलनात्मक रूप से बड़ी होने से या तो इनको कर से छूट मिल सकेगी या इन पर कम दर से कर लगाया जा सकेगा। ऐसा एक संयुक्त योजना के तहत हो सकेगा- क्योंकि इन लोगों से खरीद करने में उपभोक्ताओं को ज्यादा व्यय नहीं करना पड़ेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">(iii) कंपनियों पर औसत कर भार कम होगा जिससे कीमतों में कमी आने की उम्मीद है और कीमतों में कमी होने का मतलब है इनकी खपत में बढ़ोतरी होना।</p> <h3 style="text-align: justify; ">वस्तु एवं सेवाकर नेटवर्क</h3> <p style="text-align: justify; ">8. सरकार द्वारा एतश्मिन पूर्व कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के अंतर्गत एक निजी कंपनी के रूप में वस्तु एवं सेवाकर नेटवर्क (जीएसटीएन) की स्थापना की गई है। यह जीएसटीएन तीन तरह की सेवाएं प्रदान करेगा जैसे कि करदाताओं के पंजीकरण, भुगतान और रिटर्न संबंधी सेवा। करदाताओं को इन सेवाओं को प्रदान करने के अलावा जीएसटीएन 25 राज्यों के लिए बैक-एंड आईटी मॉड्यूल्स स्थापित करेगा। यह राज्यों के लिए वैकल्पिक होगा। वर्तमान करदाताओं का माइग्रेशन नवंबर 2016 से शुरू हो गया है। केंद्र और राज्य दोनों के ही राजस्व विभाग इस समय के पंजीकृत करदाताओं को इस बात के लिए राजी कर रहा है कि वे वस्तु एवं सेवाकर नेटवर्क दवारा संचालित आईटी सिस्टम में अपनी सारी औपचारिकताएं पूरी कर ले ताकि उनका सफलतापूर्वक माइग्रेशन हो सके। लगभग 60 प्रतिशत वर्तमान पंजीकर्ताओं ने जीएसटी सिस्टम में पहले ही माइग्रेट कर लिया है। जीएसटीएन ने पहले ही मैसर्स इनफोसिस को मैनेज्ड सर्विस प्रोवाइडर के रूप में पाँच वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त कर लिया है और इस पर लगभग 1380 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।</p> <p style="text-align: justify; ">8.1 जीएसटीएन ने 34 आईटी, आईटीईएस और वित्तीय प्रौदयोगिकी कंपनियों का चयन किया है। जिनको जीएसटी सुविधा प्रदाता (जीएसपी) कहा जाएगा। जीएसपी ऐसा आवेदन तैयार करेगा जिसका कि करदाता जीएसटीएन के साथ संपर्क के लिए प्रयोग कर सकेंगे।</p> <h3 style="text-align: justify; ">अन्य विधायी आवश्यकताएं</h3> <p style="text-align: justify; ">9. संसद ने सीजीएसटी एक्ट, यूटीजीएसटी एक्ट, आईजीएसटी एक्ट और जीएसटी (राज्यों को क्षतिपूर्ति) एक्ट पारित किया है और इनको 12 अप्रैल, 2017 से अधिसूचित भी कर दिया गया है। तेलंगाना, बिहार, राजस्थान, झारखंड राज्यों तथा चंडीगढ संघ राज्य ने भी एसजीएसटी एक्ट पारित किया है। आशा की जाती है कि अन्य राज्य भी मई 2017 के महीने में इन एक्ट को पारित कर देंगे।</p> <p style="text-align: justify; ">9.1 करों की वसूली तभी शुरू की जा सकती है जब सभी विधानमंडल जीएसटी कानून को पारित कर देंगे। इसके अलावा, स्टेट वैट के विपरित इस कर को वसूलने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच तालेमेल बेठाना होगा। ऐसा इसलिए है कि आईजीएसटी मंडल तब तक काम नहीं कर सकता है जब तक केंद्र और राज्य सरकार एक साथ मिलकर काम नहीं करेंगे।</p> <h3 style="text-align: justify; ">सीबीईसी की भूमिका</h3> <p style="text-align: justify; ">10. सीबीईसी जीएसटी कानून और प्रक्रियाओं, विशेषकर सीजीएसटी और आईजीएसटी कानून को तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। जोकि अनन्य रूप से केंद्र के कार्य क्षेत्र में आता है। इसके अलावा सीबीईसी को इसके क्रियान्वयन की चुनौतियों का भी पहले से ही सामना करना होगा जोकि काफी परेशानी वाला है। करदाताओं की संख्या में भी काफी वृद्धि होने की संभावना है। सीबीईसी का वर्तमान आईटी और संरचना में उपयुक्त सुधार करने की जरूरत है जिससे कि इतने भारी-भरकम आंकड़ों का प्रसंस्करण किया जा सके। जीएसटी के विधिक प्रावधानों और इसकी प्रक्रियाओं के आधार पर वर्क-फ्लो सॉफ्टवेयर जैसे कि एसीईएस (ऑटोमेटेड सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स) की विषय वस्तुओं की रिइंजिनियरिंग किए जाने की जरूरत होगी। डीजी, सिस्टम में सीबीईसी के जीएसटी सिस्टम को क्रियान्वित करने के लिए एक संचालन समिति का गठन किया है। जीएसटी के अंतर्गत सीबीईसी की आईटी परियोजना को मंत्रिमंडल ने 28 सितंबर 2016 को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना का नाम सक्षम है और इस परियोजना का कुल मूल्य 2256 करोड़ रुपया है।</p> <p style="text-align: justify; ">10.1 यह भी महसूस किया गया था कि संगठनात्मक संरचना और मानव संसाधनों की तैनाती की समीक्षा की जरूरत है ताकि जीएसटी का सरल और कारगर क्रियान्वयन हो सके। एक कार्यकारी दल ने विस्तृत विचार-विमर्श और अध्ययन के पश्चात अपनी रिपोर्ट दे दी है जिसको सरकार ने अनुमोदित भी कर दिया है।</p> <p style="text-align: justify; ">10.2 मानव संसाधनों को बढ़ाया जाना जरूरी होगा ताकि देश भर में फैले जीएसटी में करदाताओं के बने आधार को देखा जा सके। क्षमता निर्माण विशेषकर विभागीय अधिकारियों के लेखा और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, एक बड़ा कार्य है। नासेन के नेतृत्व में एक चार स्तरीय व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस प्रशिक्षण परियोजना का उद्देश्य सीबीईसी के 60 हजार अधिकारियों और राज्य सरकारों के वाणिज्य कर अधिकारियों को जीएसटी के कानून और प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षण देना है। सीएजी के कार्यालय के अधिकारी भी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। 50000 से अधिक अधिकारी (इसमें राज्यों से तकरीबन 20000 अधिकारी शामिल हैं) प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।</p> <p style="text-align: justify; ">10.3 यह उम्मीद की जाती है कि जीएसटी जैसा एक महत्वपूर्ण सुधार, व्यापार और उद्योग के लिए लोकप्रिय है और इससे वे भली-भांति परिचित हैं जोकि इस सुधार के सुफल कार्यन्वयन में महत्वपूर्ण पणधारी हैं। सीबीईसी के विभिन्न कार्यालयों दवारा आयोजित किए जा रहे बड़े सार्वजनिक पहुंच और ज्ञान को साझा किए जाने संबंधी कार्यक्रम, मॉडल जीएसटी कानून के सार्वजनिक डोमेन में रखे जाने के पश्चात, बीस हजार से अधिक दर्शकों तक पहुंच चुके हैं।</p> <p style="text-align: justify; ">10.4 सीबीईसी, सीजीएसटी और आईजीएसटी कानून के अधिशासन के लिए जिम्मेवार होगा। इसके अतिरिक्त पाँच विनिर्दिष्ट पेट्रोलियम उत्पादों तथा तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क के उदग्रहण और संग्रहण, के संबंध में उत्पाद शुल्क व्यवस्था, सीबीईसी दवारा अधिशासित की जाना जारी रहेगी। सीबीईसी सीमाशुल्क इयूटी के उदग्रहण और संग्रहण से संबंधित कार्य भी देखता रहेगा।</p> <p style="text-align: justify; ">10.5 सीबीईसी की वेबसाइट <a class="external_link ext-link-icon external-link" href="http://www.cbec.gov.in/resources//htdocs-cbec/gst/faq-gst-hindi.pdf" target="_blank" title=" भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय (नए विंडोज में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक)"> भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय </a> पर निम्नलिखित सूचनाएं उपलब्ध है</p> <p style="text-align: justify; ">(i) जीएसटी का प्रदर्शन</p> <p style="text-align: justify; ">(ii) जीएसटी - अवधारणा और वस्तु स्थिति</p> <p style="text-align: justify; ">(iii) अंग्रेजी तथा हिंदी में जीएसटी पर एफएक्यू</p> <p style="text-align: justify; ">(iv) सीजीएसटी, आईजीएसटी, यूटीजीएसटी तथा जीएसटी (राज्यों को क्षतिपूर्ति अधिनियम)</p> <p style="text-align: justify; ">(v) प्रारूप नियमावली</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) संविधान संशोधन अधिनियम</p> <h3 style="text-align: justify; ">आगे का रास्ता</h3> <p style="text-align: justify; ">11. आगे देखते हुए, ऐसे कई लक्ष्य हैं जिन्हें, देश में जीएसटी के लागू किए जाने से पूर्व पूरा किए जाने की आवश्यकता है। निम्नलिखित कार्यों को परिभाषित समय-सीमा के भीतर पूरा किए जाने की आवश्यकता है।</p> <p style="text-align: justify; ">(i) सभी राज्य विधान मंडलों दवारा एसजीएसटी कानूनों का पारित किया जाना।</p> <p style="text-align: justify; ">(ii) जीएसटी परिषद दवारा मॉडल जीएसटी नियमों की सिफारिश।</p> <p style="text-align: justify; ">(ii) जीएसटी नियमावली की अधिसूचना।</p> <p style="text-align: justify; ">(iv) जीएसटी परिषद दवारा जीएसटी टैक्स दरों की सिफारिश।</p> <p style="text-align: justify; ">(V) सूचना प्रौदयोगिकी ढांचे का गठन और अपग्रेडेशन।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) कार्यान्वयन चुनौतियों को पूरा करना।</p> <p style="text-align: justify; ">(vi) केंद्र और राज्य कर प्रशासनों के बीच प्रभावकारी समन्वय स्थापित करना।</p> <p style="text-align: justify; ">(viii) फील्ड कार्यालयों का पुनर्गठन करना।</p> <p style="text-align: justify; ">(ix) कर्मचारियों का प्रशिक्षण और</p> <p style="text-align: justify; ">(X) व्यापार और उदयोग जगत सहित सभी पणधारियों के लिए आउटरीच कार्यक्रम।</p> स्रोत: <a class="external_link ext-link-icon external-link" href="http://www.cbec.gov.in/resources//htdocs-cbec/gst/faq-gst-hindi.pdf" target="_blank" title=" भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय (नए विंडोज में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक)"> भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय </a></div>