गेहूं की उन्नतिशील प्रजाति गेहूं की कौन सी उन्नतिशील प्रजाति है, जो कम समय में ली जा सकती हैं ? पी.वी.डब्ल्यू. 343 यू.पी.2338 एच.यू. डब्ल्यू. 234 के. 9465, राज 3765 लोक ऊसर क्षेत्रों की प्रजातियां क्षेत्रों हेतु कौन-कौन सी प्रजातियां उपयुक्त हैं ? के. आर. एल. 1-4, राज 3077, लोक-1, पी.वी.डब्ल्यू. 651 कन्डुआ रोग गेहूं की कौन-कौन सी प्रजातियां में हैं ? नरेन्द्र - 1014 गेहूं की फसल में सिंचाई औसतन गेहूं की फसल में कितनी सिंचाई की जाय तथा उसका उपचार कैसे करें ? 4 से 6 सिंचाइयां आवश्यकतानुसार ताज मूल अवस्था 20 से 25 दिन पर कल्ला निकलते समय 40'45 दिन पर गांव बनते समय 60 से 65 दिन पर पुष्प अवस्था 80 से 85 दिन पर दुग्घावस्था 100 से 105 दिन पर दाना भरते समय 115 से 120 दिन पर गेहूं पौधे की पहचान गेहूं का मामा और गेहूं पौधे में क्या पहचान है तथा उसका उपचार कैसे करें ? गेहूं के पत्ते हल्के हरे होते हैं जबकि गेहुंसा के पत्ते हरे रंग के होते है। गेहूं के तने की गाठ हल्का सा लाल रंग लिये होती है। उपचार पहली सिंचाई के बाद एक माह की फलस पर आइसोप्रोटयूरान 75 डब्ल्यू. पी. की 1 किलोग्राम मात्रा 700 से 800 लीटर पानी में मिलाकर फलैट फैन नाजिल से छिड़काव किया जाय। हाथ द्वारा निराई कराकर चारा के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। बीज बनने से पहले खरपतवार के पौधे खेत से बाहर कर लें ताकि गेहूं के मामा का प्रसार न होने पाये । गेरूई के प्रकार गेरूई कितने प्रकार की होती है गेहूं की फसल में इसका उपचार क्या है ? गेरूई तीन प्रकार की होती है, पीली, भूरी और काली गेरूई । उपचार 2.5 ग्राम थीरम या कार्बेडाजिम द्वारा 1किलो बीज की दर से बीज शोधन। मैनको जेब 2 किलो या जिनेब 2.5 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर 700-800 लीटर पानी के साथ छिड़काव किया जाय। दवा का छिड़काव यदि एक माह से ज्यादा दिन की गेहूं की फसल हो जाय तो क्या उस समय आइसो- पोट्यूरान दवा का छिड़काव हो सकता है ? केवल 30 से 35 दिन की फसल पर इस दवा का छिड़काव उपयोगी है। बहुत देर से छिड़काव करने पर खरपतवार नष्ट नहीं होते तथा गेहूं की बालियां टेड़ी मेढ़ी हो जाती है। सिंचाई की सुविधा न हो तो प्रजाति यदि सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो गेहूं की कौन सी प्रजाति बोयी जाय ? राज 3077 के. 78 के. 8027 (मगहर) सी.306 पी.वी. डब्ल्यू. 175 के. 8962 के. 9465 गेहूं का भण्डारण गेहूं के अनाज भण्डारण में कौन सी दवा डाली जाय ताकि कीड़े आदि न लगें ? ई.डी.वी. एम्पुल या अल्युमिनियम फास्फाइड की टिकिया/ अधिक जानकारी के लिए कृषि रक्षा इकाईयों से अथवा जिला कृषि रक्षा अधिकारी से सम्पर्क स्थापित किया जाय। थ्रेशर पर अनुदान क्या थ्रेशर पर अनुदान की सुविधा उपलब्ध है यह यंत्र कहां पर मिलते हैं ? हां, मूल्य का 25 प्रतिशत अनुदान अधिकतम 10,000/- रूपये प्रति यन्त्र कृषक। यू.पी. स्टेट एग्रो इन्ड0 कारपोरेशन के विक्रय केन्द्रों पर कृषि यन्त्र अनुदान पर मिलते हैं। चूहों के नियत्रंण चूहों के नियत्रंण हेतु क्या-क्या किया जाय ? पहले दिन खेत के सभी बिलों को बन्द कर दिया जाय दूसरे दिन जो बिल खुली मिले तो यह निश्चित हो जाता है कि इसी बिल में चूहा रहता है तीसरे दिन उस बिल में प्रात: अल्यूमीनियम की टिकिया डालकर बिल बन्द कर दे। जहरीली गैस बनने पर चूहा अन्दर ही मर जाता है। जहरीली चारा बनाकर खेत में बिखेर दें। जिंक फास्फास्इड या बेरियम कार्बोनेट लेकर कड़वा तेल मिलाकर भुना हुआ चना या अनाज में मसल कर कागज के टुकड़ों में खेत में रख दें जब चूहा खायेगा तो मर जायेगा। अकुंरित गेहूं हुत देर से गेहूं बोने की अवस्था में क्या अकुंरित गेहूं बोया जा सकता हैं ? हॉं परन्तु बुआई कूड़ों में की जाय। जौ की प्रजातियां जौ की देर से बोयी जाने वाली प्रजातियां कौन-कौन सी हैं ? लखन ज्योति जागृति आर.एस.6 ऊसर में बोयी जाने वाली जौ की प्रजातियां जौ की ऊसर में बोयी जाने वाली प्रजातियां कौन-कौन सही हैं ? विजय आजाद। जौ में सिंचाई जौ में कितनी सिंचाइयों की आवश्यकता होती है ? कुल 2 सिंचाईयों की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई 30 से 35 दिन पर। दूसरी सिंचाई बाली की दुग्धावस्था पर| स्रोत: कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार