कृषि-रसायन वे पदार्थ हैं, जिनका उपयोग मनुष्य कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन हेतु करता है। कृषि रसायनों का इस्तेमाल फसल उत्पादन में सुधार के लिए शुरू हुआ था, लेकिन वर्तमान में इन रसायनों का अधिक एवं असंतुलित मात्रा में प्रयोग हो रहा है। ये रसायन आसपास मृदा और जल निकायों में रिसते हैं और पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। कृषि रसायनों के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क में आने वाले किसानों तथा उनके परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य भी गंभीरता से प्रभावित होता है। कृषि रसायनों में रासायनिक उर्वरक, मृदा का पी-एच बदलने के लिए उपयोग में आने वाले रसायन (लिमिडिंग और एसिडिंग एजेंट), मृदा कंडिशनर, कीटनाशक, खरपतवारनाशी, जीवाणुनाशक, फफूंदनाशी, कृन्तकनाशी (चूहामार) और पशुधन के उपयोग में आने वाले रसायन (एंटीबायोटिक्स और हार्मोन) आदि रसायन शामिल हैं। कृषि रसायनों में सबसे अधिक हानिकारक पीड़कनाशी होते हैं। पौधों या पशुओं के लिए हानिकारक कीटों या अन्य जीवों को नष्ट करने के लिए उपयोग किया जाने वाला पदार्थ पीड़कनाशी कहलाता है। कीटनाशक, जीवाणुनाशक, फफूंदनाशक, खरपतवारनाशी (शाकनाशी), कृंतकनाशी आदि पीड़कनाशी रसायन हैं। कृषि रसायन की नुकसान करने या रोगी करने की क्षमता उसकी विषाक्तता कहलाती है। यह दो प्रकार की होती हैः तीव्र विषाक्तता और दीर्घकालिक विषाक्तता। तीव्र विषाक्तता किसी जीव को एक अल्प या सीमित समय में नुकसान तथा रोगी कर सकती है। दीर्घकालिक विषाक्तता किसी रसायन या कीटनाशक के लंबे समय तक छोटे खुराकों के ग्रहण करने से होती है। कीटनाशक की विषाक्तता की जानकारी लेबल के माध्यम से देना सभी निर्माताओं के लिए अनिवार्य है। विषाक्तता में चार अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। लाल, पीले, नीले एवं हरे रंग का लेबल क्रमशः अत्यंत विषाक्तता, अत्यधिक विषाक्तता, मध्यम विषाक्तता एवं न्यूनतम विषाक्तता का प्रतिनिधित्व करता है। कृषि रसायनों का मानव शरीर एवं पर्यावरण में प्रवेश मानव शरीर में पीड़कनाशी या अन्य रसायनों का प्रवेश मुख्यत: तीन तरह से होता है: कृषि रसायनों का त्वचा एवं आंखों से सीधा संपर्क कृषि रसायनों का हवा के साथ फेफड़ों में प्रवेश कृषि रसायनयुक्त खान-पान(अन्न, फल, सब्जी, मांस, मछली, दूध, पानी आदि) से मुंह द्वारा शरीर में प्रवेश पर्यावरण में कृषि रसायन मुख्य रूप से प्रारंभिक तैयारी और अनुप्रयोग के दौरान हवा, सतह के जल निकाय, भूजल, मृदा, फसल, फल, सब्जी, अलग-अलग जीव आदि में प्रवेश करते हैं। कृषि रसायनों का पर्यावरण पर प्रभाव कीटनाशकों ने हमारे पर्यावरण के लगभग प्रत्येक हिस्सों को दूषित कर दिया है। कीटनाशक, मृदा, हवा, पानी ;सतह तथा भूजलद्ध और गैर-लक्षित जीवों में आम संदूषक के रूप में पाए जाते हैं। कीटनाशक पौधे, पशु, गैर-लक्षित पौधे, मछली एवं अन्य जलचर, पक्षी, वन्यजीव, फायदेमंद या तटस्थ सूक्ष्मजीव एवं कीट आदि में जोखिम पैदा करते हैं तथा नुकसान पहुंचाते हैं। पीड़कनाशी के प्रयोग से मृदा में उपस्थित लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या घट जाती है। इस स्थिति में मृदा स्वास्थ्य, उपजाऊपन, पैदावार आदि बुरी तरह से अनिश्चित समय के लिए प्रभावित होते हैं। कुछ पीड़कनाशी जैविक अपघटन के प्रतिरोधी होते हैं। इस कारण इनकी सांद्रता वर्ष दर वर्ष बढ़ती जाती है और वे जीवों के ऊतकों में संचयित हो जाते हैं। यह पर्यावरणीय पारिस्थितिकी तंत्रा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। कृषि रसायनों का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव जहरीले कृषि रसायन जिन पीड़कों पर लक्षित किये जाते हैं, दुर्भाग्य से वे उन पीड़कों से अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। इन रसायनों के संपर्क में आने पर निम्न प्रकार के तत्काल स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैंः श्वसन मार्ग का दाह/जलन गले में खराश और खांसी एलर्जी संवेदीकरण आंख और त्वचा में जलन आंख और त्वचा में सूजन एवं लाल होना मिचली, उल्टी, दस्त सिरदर्द, अचेत होना अत्यधिक कमजोरी, दौरे पड़ना और मृत्यु कृषि रसायनों की कम सांद्रता से तत्काल प्रभाव नहीं देते जाते है बल्कि समय के साथ, वे बहुत गंभीर रोगों का कारण बनते हैं। पीड़कनाशक सामान्यतः कार्सिनोजेनिक (कैंसर) उत्पन्न करने वाले) टैराटोजेनिक (विकृति उत्पन्न करने वाले) तथा ट्यूमरोजेनिक (ट्यूमर तथा सिस्ट उत्पन्न करने वाले) प्रभाव के लिए जाने जाते हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि कृषि रसायनों से कैंसर होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। इनमें ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मस्तिष्क, गुर्दे, स्तन, प्रोस्टेट, अग्न्याशय, यकृत, फेफड़े और त्वचा के कैंसर शामिल हैं। पंजाब और हरियाणा में कृषि श्रमिकों के बीच कैंसर की बढ़ी हुई दर इस बात का प्रमाण है। किसान, श्रमिक, निवासी और इनसे जुड़े उपभोक्ता विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में, दैनिक गतिविधियों द्वारा कीटनाशकों के संपर्क में आते हैं, इसलिए उन्हें इन रसायनों से अधिक जोखिम होता है। कृषि रसायनों का सुरक्षित इस्तेमाल एवं प्रबंधन निम्न उपायों से कृषि रसायनों का सुरक्षित इस्तेमाल एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकता हैः खरीद और भंडारण हमेशा प्रतिष्ठित एवं ब्रांडेड कपंनी द्वारा निर्मित कृषि रसायन केवल आवश्यक मात्रा में खरीदें। उचित/अनुमोदित लेबल के बिना कृषि रसायन न खरीदें। खरीदते समय लीक, ढीले, सील खुले हुए कंटेनर/डिब्बे/या पफटे बैग न खरीदें। कृषि रसायनों की खरीद के बाद पक्का बिल अनिवार्य रूप से प्राप्त कर लें और बिल को संबंधित कृषि रसायनों के परिणाम प्राप्त होने तक सुरक्षित रखें। कृषि रसायनों का भण्डारण, बच्चों एवं पशुओं की पहुंच से बाहर, घर के परिसर से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर करें। ध्यान रहे कि भण्डारित कृषि रसायन प्रत्यक्ष सरूज की किरण, बारिश, पानी आदि के संपर्क में न आएं। कृषि रसायनों के भण्डारण के स्थान पर अन्य सामग्रियां जैसे-पशुओं का चारा, भूसा, पशु खाद्य, फसल या फसल का कोई भी हिस्सा आदि संग्रहित न करें। कृषि रसायनों को हमेशा अपने मूल कंटेनर में रखें तथा किसी भी स्थिति में उन्हें अन्य कंटेनर में स्थानांतरित न करें। खरपतवारनाशी/शाकनाशी रसायनों को कीटनाशक, फफूंदनाशक, जीवाणु नाशक आदि के साथ संग्रहित न करें। प्रयोग कृषि रसायन किसी भी स्थिति में खाद्य सामग्री के साथ तथा सिर, कंधे या पीठ पर न ले जायें। कृषि रसायनों के कंटेनर/डिब्बे/बैग या अन्य पैकिंग खोलने के पूर्व अपने हाथ, नाक, कान, आंखें तथा मुंह को जाग दस्ताने, मुखौटा, रूमाल, कपड़े का मास्क, टोपी, सुरक्षा चश्मा आदि से ढकें। हमेशा पूरे कपड़े पहनें ताकि पूरा शरीर ढका रहे। कृषि रसायनों के कंटेनर/डिब्बे/बैग या अन्य पैकिंग खोलते समय ध्यान रखें कि रसायन या पाउडर का संपर्क शरीर के किसी भी हिस्से के साथ न हो तथा खुले हुए कृषि रसायनों की गंध न लें। कृषि रसायनों का घोल बनाने के पूर्व कंटेनर पर दी गयी जानकारी ध्यान से पढ़ें और आवश्यकतानुसार घोल तैयार करें। छिड़काव के लिए हमेशा अनुशंसित मात्रा एवं साद्रंता का ही घोल बनायें। घोल बनाने के लिए स्वच्छ पानी का उपयोग करें। कृषि रसायनों के प्रयोग के लिए सही उपकरणों का चयन करें तथा उनकी साफ-सफाई सुनिश्चित कर लें। टपकते और दोषपूर्ण उपकरण का उपयोग न करें। उपकरण की साफ-सफाई तथा सुधार के लिए दांतों का इस्तेमाल, मुंह द्वारा हवा फूंकना, आंखों द्वारा निकट निरीक्षण आदि क्रियाएं करने से बचें। विपरीत हवामान की स्थिति जैसे-गर्म धूप, तेज हवा, बारिश से ठीक पहले, बारिश के तुरंत बाद और हवा की विरु( दिशा में कृषि रसायनों का छिड़काव न करें। कृषि रसायनों के छिड़काव के तुरंत बाद खेतों में पशुओं और श्रमिकों का प्रवेश प्रतिबंधित करें। कृषि रसायनों के प्रयोग के दौरान अन्न, पानी, फल, धूम्रपान, तम्बाखू, पान, गुटखा, दवाई आदि का सेवन न करें। कृषि रसायनों के प्रयोग एवं इस्तेमाल के पश्चात कृषि रसायनों के छिड़काव के पश्चात उपकरण में बचे हुए घोल को तालाबों, कुओं, पानी के विभिन्न स्रोतों में या इनके पास नहीं बहाया जाना चाहिए। कृषि रसायनों के खाली कंटेनर किसी भी स्थिति में अन्य उद्देश्य/उपयोग के लिए इस्तेमाल न करें। इन्हें हमेशा पत्थर या छड़ी से कुचल कर पानी के स्रोत से दूर मिट्टी में गहरा गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए। कृषि रसायनों के छिड़काव के लिए इस्तेमाल की गयी सभी चीजों को प्रयोग करने के बाद साबुन के पानी से अच्छी तरह धो लें। इनका इस्तेमाल घरेलू उद्देश्यों एवं पशुओं के लिए किसी भी स्थिति में न करें। कृषि रसायनों के इस्तेमाल या प्रयोग के पश्चात उपयोगकर्ता अपने शरीर तथा सभी अंगों जैसे-आंख, नाक, कान, मुंह आदि की सपफाई साबुन और पर्याप्त जल के साथ सुनिश्चित करें कृषि रसायनों से संपर्क/दुर्घटना के पश्चात प्राथमिक उपायों के तुरंत बाद नजदीकी चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें तथा सम्बंधित कृषि रसायन साथ में अवश्य ले जायें। स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), सतीश भागवतराव आहेर-वैज्ञानिक-बी (पर्यावरण विज्ञान), गोन्ड्रू रमेश-वैज्ञानिक-बी (रसायन विज्ञान) , सुब्रोतो नंदी-वैज्ञानिक-ई (चिकित्सा विज्ञान), राजनारायण तिवारी-निदेशक एवं वैज्ञानिक-जी, आईसीएमआर-राष्ट्रीय पयार्वरणीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान, भौरी, भोपाल-462030 (मध्यप्रदेश)