असिंचित अपलेन्ड धान बोनी बीज उपचार बुआई के बीज के चयन के लिए नमक के घोल का उपयोग करें।( 1.65 कि.ग्रा. नमक 10 लीटर पानी में) जो बीज तैर कर ऊपर आ जाए उनका बुआई के लिए उपयोग न करें। बीज उपचार के लिए 0.065 ग्राम ट्राईसाईक्लाजोल या 1 ग्राम कार्बंडाजिम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपयोग करें। बीज शोधन बीज शोधन की आवश्यकता नहीं है। बीज दर और बोनी ड्रिलिंग एवं डिबलिंग के लिए बीज दर 60-80 कि.ग्रा./हे। छिटकवा पद्धित के लिए बीज दर 100 कि.ग्रा/हे कतार बुआई में कतार से कतार की दूरी 20 से.मी. रखें। 10 से 12 दिन के बाद रिक्त स्थानों में पौधे लगाए जिससे कि सही पौध संख्या मिल सके। असिंचित लोलेन्ड धान बोनी बीज उपचार बुआई के बीज के चयन के लिए नमक के पानी के घोल का उपयोग करें। ( 1.65 कि.ग्रा. नमक 10 लीटर पानी में जो बीज तैर कर ऊपर आ जाए उनका बुआई के लिए उपयोग न करें। बीज उपचार 2.5- 3.0 ग्राम मोनोसॉन थाईरम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से करें। रोपाई विधि में बीजोपचार इस प्रकार करें। 50-60 कि.ग्रा. चुने हुए बीज 1000 वर्ग मीटर सीड बेड के लिए लें एवं उन्हें पूसोक्यूलॉन फ्यूरीगोरन 50 डब्लू.पी. या ट्राईक्लाजॉल ( बिम 75 डब्लू.पी.) 1 ग्राम/ कि.ग्रा. बीज की दर से करें। बीज शोधन रोपाई विधि में एजोक्टोबेक्टर एजोस्पाईरलम का घोल ( 3 कि.ग्रा. 150 लीटर पानी में एक हेक्टेयर के रोपा के लिए बनाए। रोपा को 10 मिनट तक डुबाए और फिर रोपाई करें। बीज दर और बोनी असिंचित लोलेन्ड में उथली भूमि ( पानी जमाव 15 से.मी.- तथा अर्ध्द गहरी एवं गहरी भूमि ( पानी जमाव 30 से.मी. से ज्यादा रख़ते हें। असिंचित उथली लोलेन्ड भूमि में सीधी बुआई की जाती है। बुआई सीडड्रिल द्वारा खेतों में की जाती है। केरा एवं पोरा विधि द्वारा भी बुआई की जाती है। उपर्युक्त विधियों में बीज दर 60-100 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर किस्मों के प्रकार पर होता है। जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए कतार से कतार की दूरी 15 से.मी ओर पौध से पौध की दूरी 15 से.मी. रखनी चाहिए। मध्यम एवं देर से पकने वाली किस्मों के लिए कतार से कतार की दूरी 20 से.मी ओर पौध से पौध की दूरी 15 से.मी. रखनी चाहिए। छिड़का विधि द्वारा बुआई के लिए बीज दर 80-100 कि.ग्रा. होना चाहिए। वर्षाधारित मध्यम गहरी एवं गहरी भूमि में रोपा लगाए जा सकते हैं। 0.1 हे की नर्सरी एक हेक्टेयर के लिए पर्याप्त होती है। नर्सरी में रोपाई के लिए 50-60 कि.ग्रा. बीज पर्याप्त हैं। 25-30 दिन के रोपा की रोपाई करें। कतार बुआई के लिए कतार से कतार की दूरी 10 से.मी ओर पौध से पौध की दूरी 15 से.मी. रखते हुए प्रति पेढ़ी दो से तीन पौधे लगाना चाहिए। रोपाई के 7 एवं 15 दिन बाद रिक्त स्थानों को भरना चाहिए। नर्सरी रोपा शुष्क या गीले या मेट नर्सरी द्वारा उगाया जा सकता है। शुष्क नर्सरी असिंचित अवस्था में बनाया जाता है। गर्मी में पहली वर्षा होने पर खेत को तीन- चार बार 5 दिन के अंतराल से जुताई करें। प्रमाणित बीजों का उपयोग करें। इसके बाद 100 वर्ग मीटर खेत में 0.5 से 1 कि.ग्रा. यूरिया 0.5 कि.ग्रा. फास्फोरस पेन्टाऑक्साइड एवं 0.5 कि.ग्रा. पोटैशियम ऑक्साइड डालें। इसके बाद बीजों की बुआई करें। सूखी क्यारियों की सिंचाई करें। नर्सरी की जमीन सूखी होने पर रोपा को नहीं निकालना चाहिए। 25-30 दिन के रोपा की रोपाई करें। गीली क्यारी इस विधि द्वारा पौघ तैयार करने के लिए खेत में पानी भरकर दो तीन जुताईयां करें ताकि खेत की मिट्टी मुलायम व लेवयुक्त हो जाए तथा खेत में उगे खरपतवार नष्ट हो जाए। आखिरी जुताई के बाद पाटा फेरकर खेत को समतल बना लें। इसके एक दिन बाद जब मिट्टी की सतह पर पानी न रहे तब खेत को एक मीटर चौड़ी तथा सुविधाजनक लम्बाई वाली क्यारियों में बांट ले, इससे नर्सरी क्षेत्र में बुआई, निराई, सिंचाई, छिड़काव इत्यादि कृषि क्रियाओं को सम्पन्न करने में सुविधा रहती है। इसके बाद खेत में 500 ग्राम अमोनियम सल्फेट या 225 ग्राम यूरिया तथा 500 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 100 ग्राम म्यूरेट पोटॉश प्रति 10 मीटर क्षेत्रफल की दर से मिट्टी के ऊपरी भाग में डाल दें। गीली क्यारी विधि में अंकुरित बीजों की बुआई की जाती है। इसके लिए शुध्द एवं प्रमाणित बीज की उपयुक्त मात्रा को साफ पानी में 24 घंटे तक भिगोए। पानी के ऊपर तैरने वाले बीजों को छान की अलग कर लें। 24 घंटे तक भिगोने के बाद बीज को निकालकर फर्श पर इकट्ठा रखकर गीले बोरे या कपड़े से ढक दे ताकि गर्मी पाकर बीज शीघ्र अंकुरित हो जाए। बीच बीच में बीज को हिलाते रहे जिससे ढेर में हवा का संचार हो सके। लगभग 36 घंटे में बीज अंकुरित हो जाते है। अंकुरित बीजों को लेव किए गये खेत की मिट्टी के ऊपर समान रूप से छिड़ककर बुआई करें। बुआई के 4-5 दिन तक चिड़ियों से बीज की रखवाली करना आवश्यक है। चिड़ियों से नुकसान न हो इसके लिए कम्पोस्ट या भुरभुरी मिट्टी की पतली परत से बीज ढक दें। स्त्रोत : एमपीकृषि,किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग,मध्यप्रदेश सरकार