संकर धान बीज उपचार 20 कि.ग्रा. संकर बीज को 18 से 20 घंटे तक डुबाकर रखें। पहले से भिगाकर रखे हुए बीजो को 4 ग्राम/कि.ग्रा. कार्बाडजिम से उपचारित करें। बीज शोधन रोपाई विधि में एजोक्टोबेक्टर/ एजोस्पाईरलम का घोल ( 3 कि.ग्रा. 150 लीटर पानी में -ज्ञतनजप क्मअ 010अमय एक हेक्टेयर के रोपा के लिए बनाए। रोपा को 10 मिनट तक डुबाए और फिर रोपाई करें। बीज दर और बोनी नर्सरी संकर नर्सरी 750-800 वर्ग मीटर की नर्सरी एक हेक्टेयर के लिए पर्याप्त होती है। 1-1.25 मीटर चौडाई में सीडबेड बनाए। जल निकास की उचित व्यवस्था करें। 10-15 टन सड़ी हुई खाद मिलाए। 1 कि.ग्रा. नत्रजन 0.6 कि.ग्रा. फास्फोरस एवं 0.4 कि.ग्रा. पोटाश प्रति 100 वर्ग मीटर में डालें। अंकुरण के लिए बीजों को गनी बैग में रखें। अंकुरित बीजों को एकसमान बोयें। सीड बेड को सूखने न दें। अंकुरित पौधे जब दो से.मी. के हो जाए तो पानी की पतली परत खेत में रहने दें। बोनी के 15 दिन बाद 0.5 कि.ग्रा. नत्रजन खेत में डालें। सिंचित धान बीज उपचार बुआई के बीज के चयन के लिए नमक के पानी के घोल का उपयोग करें। ( 1.65 कि.ग्रा. नमक 10 लीटर पानी में) जो बीज तैर कर ऊपर आ जाए उनका उपयोंग न करें। बीज उपचार 2.5- 3.0 ग्राम मोनोसॉन / थाईरम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से करें। रोपाई विधि में बीजोपचार इस प्रकार करें। 50-60 कि.ग्रा. चुने हुए बीज 1000 वर्ग मीटर सीड बेड के लिए लें एवं उन्हें पूसोक्यूलॉन (फ्यूरीगोरन 50 डब्लू.पी. या ट्राईक्लाजॉल बिम 75 डब्लू.पी. 1ग्राम/कि.गाम बीज की दर से करे बीज शोधन रोपाई विधि में एजोक्टोबेक्टर/ एजोस्पाईरलम का घोल ( 3 कि.ग्रा. 150 लीटर पानी में एक हेक्टेयर के रोपा के लिए बनाए। रोपा को 10 मिनट तक डुबाए और फिर रोपाई करें। बीज दर और बोनी 0.1 हेक्टेयर की नर्सरी एक हेक्टेयर के लिये पर्याप्त होती हैं नर्सरी में रोपाई के लिये 50-60 किलो बीज पर्याप्त हौं 25-30 दिन के रोपा की रोपाई करों नर्सरी रोपा शुष्क या गीले या मेट नर्सरी द्वारा उगाया जा सकता है। शुष्क नर्सरी असिंचित अवस्था में बनाया जाता है। गर्मी में पहली वर्षा होने पर खेत को तीन- चार बार 5 दिन के अंतराल से जुताई करें। प्रमाणित बीजों का उपयोग करें। इसके बाद 100 वर्ग मीटर खेत में 0.5 से 1 कि.ग्रा. यूरिया 0.5 कि.ग्रा. फास्फोरस पेन्टाऑक्साइड एवं 0.5 कि.ग्रा. पोटैशियम ऑक्साइड डालें। इसके बाद बीजों की बुआई करें। सूखी क्यारियों की सिंचाई करें। नर्सरी की जमीन सूखी होने पर रोपा को नहीं निकालना चाहिए। 25-30 दिन के रोपा की रोपाई करें। गीली क्यारी इस विधि द्वारा पौध तैयार करने के लिए खेत में पानी भरकर दो तीन जुताईयां करें ताकि खेत की मिट्टी मुलायम व लेवयुक्त हो जाए तथा खेत में उगे खरपतवार आखिरी जुताई के बाद पाटा फेरकर खेत को समतल बना लें। इसके एक दिन बाद जब मिट्टी की सतह पर पानी न रहे तब खेत को एक मीटर चौड़ी तथा सुविधाजनक लम्बाई वाली क्यारियों में बांट ले, इससे नर्सरी क्षेत्र में इसके बाद खेत में 500 ग्राम अमोनियम सल्फेट या 225 ग्राम यूरिया तथा 500 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 100 ग्राम म्यूरेट पोटॉश प्रति 10 मीटर क्षेत्रफल की गीली क्यारी विधि में अंकुरित बीजों की बुआई की जाती है। इसके लिए शुद्ध एवं प्रमाणित बीज की उपयुक्त मात्रा को साफ पानी में 24 घंटे तक भिगोएं। पानी के ऊपर तैरने वाले बीजों को छान कर अलग कर लें। 24 घंटे तक भिगोने के बाद बीज को निकालकर फर्श पर इकट्ठा रखकर गीले बोरे या कपड़े से ढक दे ताकि गर्मी पाकर बीज शीघ्र अंकुरित हो जाए। बीच बीच में बीज को हिलाते रहे जिससे ढेर में हवा का संचार हो सके। लगभग 36 घंटे में बीज अंकुरित हो जाते हैं। अंकुरित बीजों को लेव किए गये खेत की मिट्टी के ऊपर समान रूप से छिड़ककर बुआई करें। बुआई के 4-5 दिन तक चिड़ियों से बीज की रखवाली करना आवश्यक है। चिड़ियों से नुकसान न हो इसके लिए कम्पोस्ट या भुरभुरी मिट्टी की पतली परत से बीज ढक दें। मूंगफली बीज उपचार बीज जनित रोगों से मुक्त करने के लिए कैपटन या एग्रासन जी. एन. से बीजोपचार करें। एक किलो बीज के लिए 2 से 3 ग्राम फंफूदनाशक पर्याप्त है। बीज शोधन बीज को पहले फंफूदनाशक दवा से उपचारित करना चाहिए। इसके बाद राईजोनियम कल्चर के पांच पैकेट प्रति हेक्टेयर का उपयोग करना चाहिए। इसको लगाने के लिए 5 प्रतिशत गुड़ का घोल बनाकर ठण्डा करके उसमें बीज डालकर हल्के से हिला लें। तत्पश्चात बीज को छाया में सूखायें। राईजानियम कल्चर के साथ पी.एस.बी.का भी उपयोग कर सकते हैं। बीज दर और बोनी फैलने वाली किस्म के लिए 60 किलोग्राम और गुच्छेदार किस्म के लिए 85 किलोग्राम बीज पर्याप्त हैं। यदि कर्नल का आकार बढ़ा हो तो बीज दर 7 से 10 कि.ग्रा./हे बढ़ा देनी चाहिए। बोनी के पहले खेत को अच्छी तरह से समतल कर लेना चाहिए और खेत को 10 से 12 मीटर चौड़े पट्टों में बांट लें। दो पट्टों के बीच 40-60 से.मी. चौड़ी पट्टी सिंचाई के लिए रखें। हाथ से जुताई कर 5 से 7 से.मी. गहरे गडढे 10 से 15 से.मी. की दूरी पर करें। बोनी के बाद गडढों को आसपास की मिट्टी से भर दें। खेत में पर्याप्त नमी होने पर ही बोनी करें। स्त्रोत : एमपीकृषि,किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग,मध्यप्रदेश सरकार