पाचन शक्ति काे बढ़ाने वाला मशरूम की कुछ प्रजातियों का आयुर्विज्ञान तथा होम्योपैथी में प्रयोग किया गया है। जैसा कि सर्वविदित है कि रोग किसी भी तरह का हो हमारे शरीर के सभी संरचनाओं को प्रभावित करता है। रोग के कारण भूख न लगना, पाचन शक्ति में अवरोध आ जाना सामान्य रूप से देखने में आता है। मशरूम में उपस्थित क्षारीय राख पाचन शक्ति को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है जिससे भूख लगना शुरू हो जाता है तथा कब्ज आदि भी ठीक हो जाता है। विभिन्न बीमारियाें में उपयाेगी जिस प्रकार पूर्व में मशरूम के पौष्टिक गुणों का विवरण दिया गया है उसके अनुसार उच्च रक्तचाप एवं हाइपर टेंशन रोगियों के लिए कब्ज या अजीर्ण रोग, मोटापा, हृदय रोग, कैंसर रोगियों तथा कुपोषण रोगियों के लिए मशरूम का सेवन इनके लिए अति लाभप्रद है। जैसा कि भारतवर्ष में सर्वाधिक पीड़ित मजदूर, महिलाएँ एवं बच्चे है। प्रोटीन एवं विटामिन की कमी इनमें बहुतायत रूप से देखी जाती है। मशरूम में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन एवं खनिज उपलब्ध है। मशरूम का सेवन पुलाव, अचार, सब्जी अथवा मिश्रित सब्जी किसी भी रूप में किया जा सकता है। फूड एवं एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन (FAO) संयुक्त राष्ट्र के फूड एवं एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन (FAO) ने विकासशील देशों की बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए मशरूम को सम्पूरक आहार के तौर पर उपयोग करने की सिफारिश की है। सारणी संख्या 5 : औषधीय मशरूम एवं उनके गुण क्रं. मशरूम रोग 1 रिशी (गैनोडरमा ल्यूलियन) कैंसर 2 मेटाके (ग्राइफोला फोन्डोसा) हृदय रोग 3 शिटाके (लेंटाइनस इडोड्स) वृक्क रोग 4 कार्डोसेस मधुमेह 5 हेरिसियम रक्तचाप, एलर्जी, आक्सीडेज 6 अमेनिटा मस्केरिया मिरगी 7 ओटिकुलेरिया औरिकुला आंखों की सूजन एवं जलन तथा गले की सूजन स्त्राेत : भारत में मशरुम उत्पादन, कृषि विज्ञान केंद्र (राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान), उजवा, नई दिल्ली।