विश्व के अधिकांश देशों में 80-90 के दशक में मशरूम के बारे में काफी कुछ जान लेने के कारण उनमें चेतना जागृत हुई कि मशरूम पर अनुसंधान व विकास की कई योजनाएं भारत वर्ष में चलायी जाय, जिससे लोगों में मशरूम के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हो। इसी प्रकार इनकी उत्पादन क्षमता, बाजार मूल्य व मांग भी भिन्न-भिन्न है। इन सभी का विवरण इस प्रकार है। श्वेत बटन मशरूम हमारे भारत में श्वेत बटन मशरूम का उत्पादन अन्य मशरूमों की अपेक्षा अधिक होता है और यह हमारे स्वदेशी एवं विदेशी बाजारों में भी सर्वाधिक लोकप्रिय है। इस मशरूम की छोटी एवं मध्यम इकाइयों हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली में स्थित है जिससे उत्पादित मशरूम का विक्रय दिल्ली, लुधियाना, चंडीगढ़ एवं अन्य कई बड़ों शहरों में नियमित रूप से हो रहा है। श्वेत बटन मशरूम की खेती कम्पोस्ट (माध्यम) पर नियंत्रित वातावरण या प्राकृतिक समय अक्टूबर से फरवरी तक की जा सकती है। ढ़िगरी मशरूम भारत में यह मशरूम उत्पादन की दृष्टि से दूसरे स्थान पर है यह मशरूम उगाने में सरल एवं वर्ष के दो महीने (मई-जून) छोड़कर बाकी दस महीनों में आसानी से उत्पादन किया जा सकता है। इसके लिए 20-30 डिग्री सेल्सियस तापक्रम की आवश्यकता पड़ती है। जो इन महीनों में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इस मशरूम की (ठपवसवहपबंस म्पिबपमदबल) 50-100 प्रतिशत (भोज्य पदार्थ का) तक है। इस मशरूम को उगाने में कम समय, कम लागत एवं आसानी से उगायी जा सकती है, यह मशरूम ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आसानी से उगायी जा सकती है व बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का साधन बन सकती है। दुग्ध छत्ता मशरूम यह मशरूम गेहूँ का भूसा (तूड़ी), धान का पैरा पर ढ़िगरी मशरूम की तरह पॉलीथीन की थैलियों में या रेक्स पर आसानी से उत्पादित किया जा सकता है। इसके लिए 30-35 डिग्री सेल्सियस तापक्रम की जरूरत पड़ती है। इसकी खेती आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु एवं कर्नाटक में अधिक लोकप्रिय है। इस मशरूम का रंग दुधिया सफेद एवं स्ट्राइप लम्बी तथा रेशा से युक्त होता है। इस मशरूम की विशेषता यह है कि अच्छी गुणवत्ता में अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। धान का पैरा मशरूम (पैडीस्ट्रा मशरूम) इस मशरूम की खेती भारतवर्ष में सर्वप्रथम 1943 में कोयम्बटूर कृषि महाविद्यालय तमिलनाडु में की गई थी। यह मशरूम व्यावसायिक स्तर पर तमिलनाडु, उड़ीसा व असम में उगाया जाता है। यह मशरूम अधिक तापक्रम 30-40 डिग्री सेल्सियस पर आसानी से उगायी जा सकती है। वर्तमान में इसकी सर्वाधिक खेती उड़ीसा मे होती है। इसका स्वाद खाने में उत्तम तथा जीवन चक्र छोटा होता है। इस मशरूम की तुड़ाई अण्डाकार स्थिति में छतरी खुलने से पहले की जानी चाहिए। इसे धान को पराली पर बहुत ही आसानी से कुछ अन्य कार्बनिक पदार्थ मिलाकर अच्छी पैदावार ली जा सकती है। रिशी मशरूम (गैनोडमी ल्यूसीडम) यह मशरूम पूरे विश्व में औषधीय मशरूम के नाम से प्रसिद्ध है। इसे हमारे }षि-मुनि प्राचीन काल से दवा के रूप में प्रयोग करते आ रहे है। इसीलिए इसका नाम रिशी मशरूम पड़ा। इस मशरूम को अब लकड़ी के बुरादे पर उगाने के तकनीक विकसित कर ली गई है। इसके लिए 30-35 डिग्री सेल्सियस तापक्रम एवं 90 प्रतिशत से ज्यादा की आद्रता की आवश्यकता पड़ती है। ब्लैक इयर (आरकुलेरिया) इस मशरूम को कनकचड़ा मशरूम भी बोलते है। यह चीन में चीनी सम्प्रदाय द्वारा बहुत पसन्द किया जाता है। यह एक समशीतोष्ण मशरूम है। यह लकड़ी के बुरादे पर एवं गेहूँ के भूसे पर आसानी से उगाई जा सकती है। इसके लिए तापक्रम 22-28 डिग्री सेन्टीग्रेट तथा 90 प्रतिशत से ज्यादा आर्द्रता की जरूरत पड़ती है। स्त्राेत : फल फूल पत्रिका(आईसीएआर), बृज लाल अत्री, अनुराधा श्रीवास्तव और वी.पी. शर्मा भाकृअनुप-खुम्ब अनुसंधान निदेशालय, सोलन-173213 (हिमाचल प्रदेश)