<h3>नूडल्स </h3> <p style="text-align: justify;">मशरूम के नूडल्स बनाने के लिए मशरूम के पाउडर (20 प्रतिशत), गेहूं के आटे (40 ग्राम), आलू के पाउडर (20 ग्राम), व स्वीट कॉर्न के आटे (20 ग्राम) को छानने के बाद अच्छी तरह मिलाया जाता है। मिली हुई सामग्री में 0.2 प्रतिशत बेकिंग पाउडर तथा 2.0 मि.ली. रिफाइंड तेल मिलाया जाता है। पानी डालकर इस सामग्री को अच्छी तरह गूंथ लेने के बाद 20-30 मिनट तक छोड़ दिया जाता है। गूंथे आटे के मिश्रण को सेवियां बनाने वाली मशीन, जिसकी छननी के छिद्र 3 मि.मी. के हों, में डालकर सेवियां बनायी जाती हैं।</p> <p style="text-align: justify;">इन्हें 3-4 मिनट तक स्टीमिंग उपरांत धूप में अच्छी तरह सुखाकर सीलबंद डिब्बों में रखा जाता है। खाने के समय नूडल्स को उबलते पानी, जिसमें एक चम्मच तेल हो, में 3 मिनट तक पकाया जाता है। ठंडा करने के उपरांत इन्हें अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर उपयोग किया जा सकता है। पकाने के लिये बर्तन में एक बड़ा चम्मच तेल डालकर गरम करके प्याज, मौसमी सब्जियां, नमक स्वादानुसार, लाल मिर्च, सोया सॉस तथा सिरका इत्यादि मिलाया जाता है। इस मिश्रण में उबाली हुई नूडल्स को मिलाकर टमाटर की सॉस के साथ परोसा जाता है। </p> <h3>मशरूम अचार </h3> <p style="text-align: justify;">मशरूम का अचार बनाने के लिये बटन मशरूम को साफ पानी में 3-4 धुलाई के बाद छोटे कटे टुकड़ों को 0.05 प्रतिशत पोटेशियम मैटाबाइसलफाइटयुक्त उबलते पानी में 3 मिनट तक उबाला जाता है। ताकि मौजूद एंजाइम निष्क्रिय एवं कीटाणु खत्म हो जाएं। उबालने के बाद इन्हें ठंडे पानी में डालकर ठंडा कर लेते हैं अन्यथा ज्यादा पकने से अचार की बनावट खराब हो सकती है। उबाली गई मशरूम में 6.5 प्रतिशत नमक डालकर एक रात के लिये छोड़ दिया जाता है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccdownload2.jpg" width="207" height="175" /></p> <p style="text-align: justify;">अगले दिन तक मशरूम में मौजूद पानी नमक के कारण बाहर आ जाता है, जिसे अलग कर लेते हैं। पिसी हुई राई (35 ग्राम), हल्दी पाउडर (20 ग्राम), लाल मिर्च पाउडर (10 ग्राम), जीरा पाउडर (1.5 ग्राम), सौंफ पाउडर (1.5 ग्राम), अजवाइन (10 ग्राम), कलौंजी (10 ग्राम) तथा सरसों तेल (150 मि.ली.) को उबली मशरूम के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है। अचार में अच्छा रंग लाने के लिये जब सरसों तेल गर्म किया जाता है तो उसमें रतनजोत के छिलके भी डाल दिये जाते हैं। सभी सामग्री को मिलाने के बाद 750 पी.पी.एम. (0.75 ग्राम/कि.ग्राम) सोडियम बेन्जोयेट तथा 0.5-0.6 प्रतिशत एसिटिक अम्ल डाला जाता है। अच्छी तरह मिलाने के बाद बने अचार को प्लास्टिक की बोतलों/जार में डालकर सील कर दिया जाता है। यह अचार साधारण तापमान पर 6 महीने तक खराब नहीं होता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : फल फूल पत्रिका(आईसीएआर), बृज लाल अत्री, अनुराधा श्रीवास्तव और वी.पी. शर्मा भाकृअनुप-खुम्ब अनुसंधान निदेशालय, सोलन-173213 (हिमाचल प्रदेश)</p>