भारत में मशरूम का उत्पादन वर्ष 1960 के दशक से शुरू हुआ। मशरूम में प्रचुर मात्रा में मौजूद प्रोटीन, विटामिन, प्रति-ऑक्सीकारक (सेलेनियम), रेशा तथा अनेक खनिज जैसे-लौह, मैग्नीशियम, जिंक, मैगनीज, पोटेशियम इत्यादि व कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और वसा होते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिये वरदान कहे जा सकते हैं। इनसे शरीर में सभी आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाती है। मशरूम के लगातार उपयोग से शरीर में लगने वाले रोगों से छुटकारा मिल जाता है। कार्बोहाइड्रेट व वसा कम होने के कारण यह दिल के रोगियों, मधुमेह व मोटापे जैसी रोगों से ग्रसित व्यक्तियों के लिये यह एक सुपाच्य एवं बेहतरीन आहार है। मशरूम में मौजूद फोलिक अम्ल व लौह, रक्त में लाल कणिकाएं बनाने में मददगार होते हैं। ये ऑक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाने का काम करते हैं। मशरूम ही एक ऐसा शाकाहारी आहार है, जिसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ‘डी’ पाया जाता है, जो मानव हड्डियों को मजबूत करने में सहायता करता है। कई लोग आज भी मशरूम को मांसाहार मानकर इसे खाना पसंद नहीं करते लेकिन बढ़ती जागरूकता, उत्पादन में वृद्धि व उपलब्धता के कारण यह अनेक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ताजी सब्जियों व उपोत्पाद के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और यह समय की मांग है। इससे बच्चों व महिलाओं में कुपोषण पर नियंत्राण पाया जा सकता है। सस्योत्तर प्रबंधन पौष्टिक तत्वों की खान होने के बावजूद मशरूम की निधानी आयु बहुत ही कम होती है तथा साधारण तापमान पर यह मुश्किल से दो दिनों तक ही रखा जा सकता है। कुछ मशरूम तो कुछ घण्टों में ही खराब हो जाते हैं। इसकी निधानी आयु कम होने का मुख्य कारण इसमें मौजूद 85-90 प्रतिशत पानी, इसके फलन पर कोई छिलका या परत का न होना, फलन की छिद्रयुक्त संरचना, कीटाणुओं का आसानी से प्रवेश व वृद्धि तथा श्वसन क्रिया का अत्याधिक होना है। इन्हीं कारणों से उत्पादन क्षेत्रों से सुदूर उपभोक्ताओं तक मशरूम को पहुंचाना कठिन हो जाता है। इस दौरान सामान्य तापमान पर इसके खराब होने की आशंका अधिक होती है। कई प्रयोगों से पाया गया है कि कुछ रसायनों का इस्तेमाल करके व कम तापमान पर भण्डारण करके बटन मशरूम की निधानी आयु 15-20 दिना तक बढ़ाई जा सकती है, जबकि पुआल (1-2 दिनों) व ढिंगरी मशरूम 6-7 दिनों तक ही रखे जा सकते हैं। मशरूम के सपेफद रंग में कमी तथा बाहर से रंग बदलने व ऊतकों का नरम होना इसकी सस्योत्तर गुणवत्ता को कम करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। श्वसन क्रिया के अधिक होने व मशरूम में मौजूद कुछ कारकों एवं एंजाइम की सक्रियता के कारण ही इसकी निधानी आयु बहुत कम है। इसे बढ़ाने के लिये कई उपचार किए जाते हैं, जिनमें निर्जलीकरण, कैनिंग, उचित पैकिंग, विकिरण मुख्य हैं। तुड़ाई एवं पैकिंग मशरूम की तुड़ाई करते समय फलन को हल्के हाथ (अंगूठे व अंगुली) से घुमाकर निकालना चाहिये। तेज धार वाले चाकू से मिट्टी लगी जड़ को काटना चाहिये। कटे हुए मशरूमों को 0.025 प्रतिशत (2.5 ग्राम प्रति 10 लीटर) पोटेशियम मैटाबाइसल्फाइट या 1 ग्राम ईडीटीए प्रति 10 लीटर पानी के घोल में धोकर पंखे के नीचे सुखाना चाहिये। सुखाने के बाद ही पॉलीथीन या पॉलीप्रोपॉलीन (100gauge) थैलों में पैकिंग(250-500 ग्राम) करें। अगर बटन मशरूम को पैक करके मंडी में भेजना है तो थैले के अंदर की गर्मी व नमी की निकासी के लिये पैक में 5 प्रतिशत छिद्र होने चाहिये। अगर मशरूम को भंडार करना है तो छिद्र मात्रा 0.5 प्रतिशत ही रखें। ऐसा करने से श्वसन के दौरान निकला पानी आसानी से बाहर निकल जाएगा तथा पैक की गयी मशरूम की गुणवत्ता बनी रहेगी। परिवहन के दौरान मशरूम को ऐसे वाहन में भेजना चाहिये, जिसमें ठंडे तापमान की व्यवस्था हो, जिससे भेजा गया उत्पाद खराब न हो तथा यह 3.5 गुना तथा 25 डिग्री सेल्सियस पर 10 गुना तक होती है। इसके लिये ही इसको जल्दी से प्रशीतित क्षेत्र में रखना आवश्यक हो जाता है। जितना जल्दी हो सके तुड़ाई उपरांत मशरूम में विद्यमान ताप को 4-5 डिग्री सेल्सियस तक कर लेना चाहिए। ऐसा करने से मौजूद कीटाणुओं की वृद्धि एवं मशरूम के ऊतकों में चयापचय गतिविधि में कमी तथा नमी का नुकसान रुक जाता है। इससे मशरूम की निधानी आयु काफी बढ़ जाती है। मूल्य संवर्धित उत्पाद ताजी एवं सुखाई गई मशरूम से अनेक मूल्य संवर्धित उपोत्पाद बनाए जा सकते हैं, जिन्हें उचित भण्डारण द्वारा लंबे समय तक बिना खराब हुए रखा जा सकता है। कुछ महत्वपूर्ण उत्पादों का विवरण नीचे दिया गया हैः मशरूम सूप बटन या ढिंगरी मशरूम को धोकर तथा टुकड़े कर कैबिनेट ड्रायर में सुखाने के बाद बारीक पीसकर उत्तम गुणवत्ता वाले पॉलीथीन बैग में भण्डारण करते हैं। इस पाउडर का उपयोग मशरूम सूप बनाने में किया जाता है, जिसमें मशरूम पाउडर (15 प्रतिशत),कॉर्न फ्लोर (5 प्रतिशत), दूध पाउडर (50 प्रतिशत), रिफाइंड तेल (4 प्रतिशत), नमक (10 प्रतिशत), जीरा पाउडर (2 प्रतिशत), काली मिर्च (2 प्रतिशत), चीनी (10 प्रतिशत), तथा मोनोसोडियम ग्लूटैमेट (2 प्रतिशत) मिलाया जाता है। प्रत्येक सामग्री को मिलाकर इसे इतने ही पानी में पकाया जाता है। इससे मशरूम सूप तैयार हो जाता है। बिस्कुट/कुकीज स्वादिष्ट व कुरकुरे बिस्कुट बनाने के लिये 10 ग्राम बटन या ढिंगरी मशरूम के पाउडर को अन्य सामग्रियों जैसे-मैदा (40 ग्राम), चीनी पाउडर (20 ग्राम), बेकरी घी (5 ग्राम), नारियल बुरादा (8 ग्राम), बेकिंग पाउडर (5 ग्राम), अमोनियम बायोक्रोमेट (0.035 ग्राम), दूध पाउडर (4 ग्राम), तथा पानी (8 ग्राम) में मिलाकर अच्छी तरह गूंथा जाता है। थोड़ी देर रखने के बाद गूंथी हुई सामग्री की 1.25 सें.मीचादर बनाकर बिस्कुट के सांचे द्वारा काट लिया जाता है। कटे हुए बिस्कुट को स्टील की ट्रे में डालकर बेकिंग मशीन में 180 डिग्री सेल्सियस पर 20-30 मिनट तक पकाया जाता है। ठंडाहोने के बाद पैकिंग करके सामान्य तापमान पर भंडारण किया जाता है। पाया गया है कि साधारण तापमान पर 3 महीने तथा निम्न तापमान पर 6 महीने तक इन बिस्कुट/कुकीज की गुणवत्ता में कोई बदलाव नहीं आता। बड़ियां साधारणतः उत्तर भारत में बड़ियां दालों जैसे-उड़द, सोयाबीन, चना दाल इत्यादि से बनाई जाती हैं। मशरूम के पाउडर को पिसी दालों के साथ मिलाकर बड़ियो को और भी स्वादिष्ट व पौष्टिक बनाया जा सकते है। सूखे व मोटे पिसे मशरूम पाउडर (10 प्रतिशत) को उड़द या चना दाल पाउडर (80 प्रतिशत), नमक (2 प्रतिशत), लाल मिर्च पाउडर (1 प्रतिशत), सोडियम बाइकार्बोनेट (0.010 प्रतिशत) तथा पानी (7 प्रतिशत)के साथ अच्छी तरह मिश्रित किया जाता है। इस सामग्री से 2-4 सें.मी. आकार के गोल-गोल बाल बना लिये जाते हैं, जिन्हें धूप में सुखाया जाता है। सूखी बड़ियों को तरी वाली सब्जी के रूप में बनाकर स्वाद व पौष्टिक तत्वों का आनन्द लिया जा सकता है। चिप्स ताजा बटन मशरूम को धुलाई के बाद छोटे-छोटे टुकड़ों (2.5-3.0 मि.मी.) में काट लिया जाता है, जिन्हें पतले कपड़े में बांधकर 2 प्रतिशत नमकयुक्त पानी में 2 मिनट के लिये उबाला जाता है। ठंडा होने के बाद इन टुकड़ों को 0.1 प्रतिशत सिट्रिक अम्ल +1.5 प्रतिशत नमक +0.3 प्रतिशत लाल मिर्च पाउडर वाले घोल में एक रात के लिये डुबोकर रखा जाता है। अगले दिन पानी को अलग करके इसको कैबिनेट ड्रायर या धूप में सुखाया जाता है। सूखे मशरूम को रिफाइंड तेल में फ्राई किया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिये गरम मसाला तथा अन्य मसालों का स्वादानुसार छिड़काव किया जा सकता है। फ्राई किए गए चिप्स को पॉलीप्रोपॉलीन थैलों में भरकर सील कर दिया जाता है। मशरूम के चिप्स को 2-3 महीनों के भीतर उपयोग कर लेना चाहिये अन्यथा बासीपन के कारण ये खराब हो सकते हैं। स्त्राेत : फल फूल पत्रिका(आईसीएआर), बृज लाल अत्री, अनुराधा श्रीवास्तव और वी.पी. शर्मा भाकृअनुप-खुम्ब अनुसंधान निदेशालय, सोलन-173213 (हिमाचल प्रदेश)