शहतूत (मारस अल्बा) एक अल्पविकसित फल है, जिसे विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे-शहतूत, तूत, चिली और तुतरी। इसके फल लंबे, अंडाकार या बेलनाकार होते हैं। ये सफेद, गुलाबी या बैंगनी काले रंग के होते हैं। शहतूत अपने उच्च पोषण और पारम्परिक चिकित्सा के लिए भी जाना जाता है। इसके आकर्षक रंग के फल मीठे होते हैं, जिन्हें अधिकांश ताजा ही खाया जाता है। इसमें जल की मात्रा कम होती है इसलिए इन्हें क्षतिग्रस्त और गुणवत्तारहित होने से बचाने के लिए इनका परिरक्षण और प्रसंस्करण करना आवश्यक है। इस फल में आवश्यक फैटी एसिड, विटामिन, पॉलीफेनोल, एंथोसाइनिन, एस्कॉर्बिक एसिड, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, राइबोफ्लेविन, खनिज, कैरोटीन होते हैं। ये मानव आहार के आवश्यक घटक हैं। इसके बायोएक्टिव यौगिक जैव रासायनिक गतिविधियों जैसे-एंटीऑक्सीडेंट, एंटीयूटाजेनिक, एंटीडायबिटिक और एंटीइंफ्लेमेटरी में सहायक होते हैं अर्थात शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। शहतूत के फलों को विभिन्न उत्पादों जैसे पेय पदार्थ, फल रस या जूस, गूदा या पल्प, आरटीएस, स्क्वैश, क्षुधवर्क, शरबत, जैली, सॉस पाउडर, वाइन, सिरका आदि रूप में प्रसंस्करित किया जा सकता है। इन्हें बाजार में पूरे वर्ष उपलब्ध करवाया जा सकता है। शहतूत एक मौसमी फल है। इसके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्द्धन के जरिये आमदनी एवं रोजगार के अवसरों को भी बढ़ाया जा सकता है। वैज्ञानिक विधि द्वारा शहतूत के फलों के विभिन्न उत्पाद तैयार किये जा सकते हैं और प्रसंस्करण के माध्यम से फलों के प्रभावी उपयोग को भी बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ इन उत्पादों में मौजूद पोषक और औषधीय तत्व होने से इन्हें बाजारों में भी आसानी से लोकप्रिय किया जा सकता है। फल का रस शहतूत के फलों का रस आसान विधि द्वारा कम समय में निकाला जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले फलों को साफ पानी से धोकर साफ किया जाता है। इसके बाद इसको साफ कपड़े में बांधकर हाइड्रोलिक प्रैस मशीन की मदद से दबाकर रस निकाला जाता है। निकाला हुआ ताजा रस लंबे समय के लिए विभिन्न विधियों द्वारा सुरक्षित रखा जा सकता है। इनमें से एक विधि द्वारा कम तापमान-18 डिग्री सेल्सियस बनाए रखकर इनका भण्डारण सुरक्षित लंबे समय तक किया जा सकता है। दूसरी विधि द्वारा ताजे जूस को पाश्चुरीकृत (85 डिग्री सेल्सियस) किया जाता है और इसके बाद तैयार रस को कांच की बोतलों में भरकर सीलबन्द, क्राउन कारमिंग मशीन (क्राउन कार्क लगाकर) से किया जाता है। इससे पहले बोतलों को अच्छी तरह से गर्म पानी में साफ किया जाता है। इसके बाद सीलबन्द बोतलों को गर्म पानी में पाश्चुरीकृत विधि द्वारा 20-25 मिनट तक प्रॉसेस किया जाता है। ठण्डा होने पर सीलबन्द शहतूत का जूस/रस का सामान्य तापमान पर भण्डारण किया जाता है। इस विधि द्वारा रस निकालने के बाद सुरक्षित रखने की अवधि में सामान्य तापमान पर लगभग 14.25 प्रतिशत कुल घुलनशील ठोस, 0.44 प्रतिशत अम्लता, लगभग 0.28 प्रतिशत प्रोटीन और एंथोसाइनिन 22.17 मि.ग्रा./100 ग्राम फल में होता है। पेय उत्पाद संग्रहित शहतूत फल का रस विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है। इसमें तुरन्त परोसे जाने वाले पेय पदार्थ जैसे-आरटीएस, स्क्वैश, शहतूत, क्षुधावर्धक, शरबत, जेली इत्यादि शामिल हैं। ये पेय पदार्थ गर्मियों में लू लगने के खतरे को कम करते हैं। इससे बनने वाले विभिन्न उत्पादों को सामान्य तापमान पर 6 महीने जबकि कम तापमान पर लंबे समय तक सुरक्षित भंडारित किया जा सकता है। आरटीएस अथवा तुरन्त परोसने हेतु पेय पदार्थ शहतूत के फलों के रस का आरटीएस या फ्रूट ड्रिंक तैयार किया जा सकता है। यह एक मीठा तुरन्त परोसे जाने वाला पेय पदार्थ होता है। इसमें भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के अनुसार कम से कम 10 प्रतिशत रस या गूदा, 10 प्रतिशत कुल घुलनशील ठोस और 0.3 प्रतिशत अम्लता होनी चाहिए। इस में प्रसंस्करण विधि के अनुसार शहतूत रस, चीनी, सिट्रिक एसिड और परिरक्षक सोडियम बेन्जोएट (120 मि.ग्रा./लीटर) मिलाया जाता है। इसके बाद पेय पदार्थ को पॉलीथीलीन टेरेपथालेट (पीईटी) की बोतलों में तुरन्त पैक कर लंबे समय तक सुरक्षित भण्डारण करते हैं। दूसरी विधि में तैयार पेय पदार्थ बिना परिरक्षक के पाश्चुरीकरण प्रणाली द्वारा संरक्षण कांच की बोतलों में किया जाता है। इस विधि द्वारा पेय पदार्थ के मिश्रण को उबाल आने से पहले के तापमान (85 डिग्री सेल्सियस) तक गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया में पेय पदार्थ को गर्म धुली बोतलों में भरकर मशीन से क्राउन कार्क (ढक्कन) लगाकर सीलबन्द किया जाता है। इसके बाद तुरन्त स्टेनलेस स्टील के पतीले में पानी को उबलने के तापमान से कम (85 डिग्री सेल्सियस) पर गर्म किया जाता है। इसमें सीलबन्द बोतलों को 25-30 मिनट तक उपचारित किया जाता है। शीशे की बोतलों को गर्म पानी में डालने से पहले एक परत मलमल के कपड़े की अवश्य लगानी चाहिए। उपरोक्त समय के बाद बोतलों को पानी से निकाला जाता है और सामान्य तापमान पर ठण्डा होने दिया जाता है। इसके बाद बोतलों को ठण्डे व शुष्क स्थान पर भण्डारित करें। इसका सेवन बिना पानी मिलाए ही किया जाता है। दोनों विधियों द्वारा शहतूत आरटीएस की लंबे समय तक गुणवत्ता बनाई रखी जा सकती है। उच्च गुणवत्ता का पेय पदार्थ नीचे दी गई सामग्री से बनाया जा सकता है। आरटीएस पेय तैयार करने की सामग्री (अंतिम उत्पाद 1 लीटर के लिए) शहतूत रस - 140 मि.ली कुल घुलनशील - 14 प्रतिशत ठोस पदार्थ (0ब्रिक्स) सिट्रिक एसिड - 2.4 ग्राम चीनी - 110 ग्राम रंग - 0.002 प्रतिशत सोडियम बेन्जोएट - 120 मि.ग्रा पानी- 747.60 मि.ली शहतूत क्षुधावर्धक यह भी एक स्क्वैश जैसा ही फल पेय है। इसमें फलों के रस के साथ विभिन्न मसालों का अर्क, अदरक, पुदीने का रस और नमक का इस्तेमाल कर इसे क्षुधावर्धक बनाया जाता है। शहतूत से अधिक गुणवत्ता वाला क्षुधावर्धक आसान विधि द्वारा तैयार किया जा सकता है। यह पौष्टिक होने के साथ-साथ पाचन क्रिया को बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है। क्षुधावर्धक तैयार करने की सामग्री (अन्तिम उत्पाद 1 लीटर के लिए) शहतूत रस -400 मि.ली. कुल घुलनशील - 40 प्रतिशत ठोस पदार्थ चीनी - 343 ग्राम सिट्रिक एसिड - 1.24 ग्राम बड़ी इलायची - 1 ग्राम- 2.5 ग्राम काली मिर्च- 2.5 ग्राम अदरक का रस - 15 मि.ली. पुदीना रस- 10 मि.ली. नमक- 2.5 ग्राम काला नमक- 0.025 ग्राम सोडियम बेंजोएट - 600 मि.ग्रा. पानी- 245.70 मि.ली. शहतूत का रस निकालें। पिसे हुए मसालों (बड़ी इलाइची, काली मिर्च, जीरा) में लगभग डेढ़ गुना पानी मिलाकर उसे थोड़ी देर तक आंच पर रखें और उसके बाद मिश्रण को तुरंत मलमल के कपड़े में छान लें। अदरक और पुदीने का रस भी कदूकस कर आसानी से निकाला जा सकता है। उपरोक्त सामग्री के अनुसार स्टेनलेस स्टील के पतीले में चीनी और पानी मिलाकर आंच पर रखे।। दो-तीन उबाल आने पर सिट्रिक अम्ल मिला दें और चाशनी को मलमल के कपड़े से छान लें। ठण्डा होने पर इसमें शहतूत रस, पुदीने व अदरक का रस और मसालों के अर्क के साथ नमक भी मिलाएं। तैयार क्षुधावर्धक में सोडियम बेंजोएट मिलाने के बाद साफ बोतलों में भरकर सीलबन्द करें। स्त्राेत : हामिद और नारायण सिंह ठाकुर खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, डा. यशवन्त सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन-173230, हिमाचल प्रदेश।