<h3 style="text-align: justify;">उच्च गुणवत्ता वाली जेली </h3> <p style="text-align: justify;">शहतूत जेली शहतूत के फलों के रस से उच्च गुणवत्ता वाली जेली तैयार की जाती है। शहतूत के एक आकर्षक रंगीन फल होने के कारण और इसमें उपस्थित प्राकृतिक रंग वर्णक एंथोसाइनिन की अधिक उपलब्धता से इससे तैयार जेली अत्यधिक आकर्षक एवं रंगयुक्त होने के साथ-साथ पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्द्धक होती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">विभिन्न तत्वाें का मिश्रण</h3> <p style="text-align: justify;">जेली में कम से कम 45 प्रतिशत फलों का रस और 65 प्रतिशत कुल घुलनशील ठोस होने चाहिए। इसमें लगभग 0.5-1.0 प्रतिशत की दर से वाणिज्यिक पैक्टिन होनी चाहिए। इसमें 0.75 प्रतिशत अम्लता (सिट्रिक एसिड) होती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">स्वाद के साथ रंग में आकर्षक</h3> <p style="text-align: justify;">जेली पारदर्शी अच्छी तरह से सैट मध्यवर्ती नमी खाद्य उत्पाद होता है, जोकि फलों के मूल स्वाद के साथ रंग में भी आकर्षक होता है। जेली आकर्षक रंग की होनी चाहिए, जो सांचे से हटाए जाने पर भी अपना आकार बनाए रखें।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="172" height="151" /></p> <h3 style="text-align: justify;">तैयार करने की विधि</h3> <p style="text-align: justify;">शहतूत जेली तैयार करने के लिए सामग्री (अन्तिम उत्पाद 1 लीटर के लिए) शहतूत रस - 500 मि.लीकलु घलु नशील ठासे - 66 प्रतिशत चीनी - 378.75 ग्राम पेफक्टिन - 8.6 ग्राम सिट्रिक एसिड - 5.3 ग्राम सोडियम बेंजोएट - 200 मि.ग्रायह शहतूत के फलों को पानी और चीनी के उचित अनुपात के साथ उबालकर/ पकाकर तैयार की जाती है। मिश्रण को इस तरह की स्थिरता तक उबाल लिया जाता है कि ठंडा होने के बाद ठीक से जैम के रूप में तैयार हो। इस मिश्रण को लगातार पकाया जाता है कि जब तक उत्पाद के कुल घुलनशील ठोस 65 प्रतिशत के करीब नहीं पहुंचे तब तक उत्पाद के अन्तिम बिन्दु परिरक्षण से पहले सिट्रिक एसिड, रंग और सोडियम बेंजोएट भी मिलाया जाता है।</p> <p style="text-align: justify;">उबलने का अंतिम ड्रॉप परीक्षण से और शीट एवं परत परीक्षण से आंका जा सकता है। इसमें एक कांच के गिलास में पानी डाला जाता है और पकते समय एक चम्मच से थोड़ा हिस्सा जेली का लिया जाता है। इसे ठण्डा होने के बाद धीरे-धीरे गिलास में डाला जाता है। यह गिलास की सतह बिन्दु का संकेत होता है। इसके बाद तैयार जेली को साफ सुखाये कांच के जारों में भर दिया जाता है और ठण्डे होने पर पिघली हुई मोम की परत डालकर सेट होने पर ढक्कन लगा दिया जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">भण्डारण </h3> <p style="text-align: justify;">शहतूत से तैयार जेली का लंबे समय तक शुष्क एवं ठण्डे स्थानों पर भण्डारण किया जा सकता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : हामिद और नारायण सिंह ठाकुर खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, डा. यशवन्त सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन-173230, हिमाचल प्रदेश</p>