गेहूं की कटाई के लिए श्रमिकों की कमी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। कटाई में विलम्ब होने के कारण अगली फसल की बुआई में देरी होती है। समय के साथ बढ़ती श्रम लागत भी किसानों के लाभ को कम कर रही है। इन परिस्थितियों में कटाई करने के कृषि यंत्रों को अपनाने से किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। भारत में अधिकतर किसान छोटे और सीमांत हैं। उनके लिए यह संभव नहीं है कि वे कम्बाइन हार्वेस्टर जैसी बड़ी और महंगी मशीन खरीद सकें। इन सबको ध्यान में रखते हुए मोटर संचालित क्रॉप कटर का मूल्यांकन किया गया। मोटर संचालित क्रॉप कटर जैसी छोटी कटाई मशीनों के उपयोग से किसानों को फायदा होगा और श्रमिकों की कमी वाले कटाई के दिनों में कटाई की समयबद्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके अलावा गांव के अन्य छोटे किसानों को इसे किराए पर देकर अतिरिक्त पैसा भी कमा सकते हैं। भारत में धान के बाद गेहूं दूसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल है और इसे लगभग 300 लाख हैक्टर भूमि में बोया जाता है। गेहूं की राष्ट्रीय उत्पादकता 3100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर है और वार्षिक उत्पादन लगभग 997 लाख टन है। यह पारंपरिक रूप से हंसिया से काटा जाता है। गेहूं की कटाई में कुल श्रम का लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक लग जाता है। बिहार में लगभग 50 प्रतिशत गेहूं की फसल, श्रमिकों द्वारा हंसिया से काटा जाती है। राज्य में लगभग 10,000 रीपर बाइंडर्स हैं, जो 30 प्रतिशत फसली क्षेत्र में कटाई करते हैं। शेष 20 प्रतिशत फसल की कटाई 2000 के लगभग कम्बाइन हार्वेस्टर से की जाती है। बिहार में बड़ी संख्या में किसानों के पास छोटी जोत और चकबंदी न होने के कारण जमीन छोटे हिस्सों में बंटी हुई व अलग-अलग जगहों पर स्थित है। इनमें बड़ी मशीनें जैसे कि हार्वेस्टर प्रवेश नहीं कर सकते हैं। मोटर संचालित क्रॉप कटर मशीन का वर्णन मोटर संचालित क्रॉप कटर मशीन पके हुए गेहूं को जमीन से लगभग 15 से 20 सें.मी. की ऊंचाई से काट सकती है। इस मशीन में एक गोलाकार आरा ब्लेड, विंडरोइंग सिस्टम, सेफ्टी कवर, कवर के साथ ड्राइव शॉफ्ट, हैंडल, ऑपरेटर के लिए हैंगिंग बैंड, पेट्रोल टैंक, स्टार्टर नॉब, च लीवर और एयर क्लीनर होते हैं। ब्लेड, इंजन द्वारा संचालित एक लंबी ड्राइव शॉफ्ट के माध्यम से घूमता है। 25 सें.मी. की ऊंचाई और 12 सें.मी. के ब्लेड त्रिज्या के बराबर आधे बेलन के आकार की एक एल्यूमीनियम शीट को काटने वाले ब्लेड के ऊपरी भाग में फिट किया जाता है। फसलों को इकट्ठा करने में आसानी के लिए एक समान पंक्ति बनाने के लिए एक गार्ड लगाया जाता है। गेहूं की कटाई में लागत अनुपात भाकृअनुप के पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर,पटना के फार्म में वर्ष 2020 में मोटर संचालित क्रॉप कटर से लगभग 8 एकड़ में लगे गेहूं की कटाई की गयी। इस मशीन से एक एकड़ गेहूं की कटाई में औसतन लगभग 16 घंटे लगे, जिसमें 12 घंटे के उत्पादक समय की लागत 1716 रुपये और 4 घंटे के अनुत्पादक समय की लागत 210 रुपये थी। हंसिया से एक एकड़ गेहूं की कटाई में लगभग 176 मानव घंटे लगते हैं, जिसका कुल खर्च 7,744 रुपये आता है। इस अध्ययन से पता चलता है कि हंसिया की तुलना में क्रॉप कटर से गेहूं कटाई में श्रम लागत में 4 गुना तक कमी देखी गयी। किसान को उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए समय पर कटाई करना बहुत जरूरी है। कृषि कार्य समय पर पूरा करने में कृषि यंत्र बहुत अहम् भूमिका निभाते हैं। भारत में छोटे एवं मध्यमवर्गीय किसानों के लिए छोटे कृषि यंत्रों को विकसित किया जा रहा है। सरकार द्वारा इनके उपयोग को बढ़ावा भी दिया जा रहा है। छोटे किसानों के बीच इन छोटे कृषि उपकरणों को लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है, जिससे कृषि श्रमिकों और किराए की मशीनों पर उनकी निर्भरता कम की जा सके। सावधानियां घिसे हुए या क्षतिग्रस्त ब्लेड का उपयोग न करें मशीन चलाते समय सुरक्षा उपकरण पहनें काम शुरू करने से पहले सुनिश्चित करें कि पेट्रोल टंकी में पर्याप्त ईंधन हो काम करने के बाद, मशीन को सूखे कपड़े से साफ करें ईंधन भरने के लिए फ्यूल कैर निकालने से पहले इंजन बंद कर दें एक घंटे तक लगातार चलाने के बाद 10 से 15 मिनट का अवकाश लें कटाई में समस्या छोटे खेत में बड़ी मशीनों का न चल पाना महंगे फसल कटाई यंत्र कटाई के मौसम में श्रमिकों और कस्टम हायरिंग पर उपलब्ध मशीनों की कमी मोटर से चलने वाले छोटे कटाई यंत्रों की बाजार में अनुपलब्धता कम्बाइन हार्वेस्टर चालक की कमी होने की वजह से पंजाब एवं हरियाणा जैसे अन्य राज्यों से चालक बुलाया जाना आदि स्त्राेत : खेती पत्रिका, अनुकूल प्र. अनुराग - एसआरएफ, अभिषेक कुमार -तकनीकी अधिकारी, पी.के. सुंदरम- वैज्ञानिक, आशुतोष उपाध्यायविभागाध्यक् भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग , बिकाश सरकार ५ प्रधान वैज्ञानिक और बी.पी. भट्ट 6 निदेशक, भाकृअनुप का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना-800014 (बिहार)