बछिया पालन में ध्यान देने योग्य बातें यदि उचित देखभाल की जाये तो लगभग 19 महीने (डेढ़ वर्ष) के अंदर बाछी पाल खाने लायक हो जाती है। इसके लिए बचपन से ही चारा-दाना, देख-रेख की उचित व्यवस्था रखनी चाहिए। यदि इस बीच इनके शरीर की उचित वृद्धि नहीं हुई तो इनके बाढ़, बियान और दूध की पैदावार पर बहुत बुरा असर पड़ता है। बाछी कई वर्ष तक गरम नहीं होती अथवा आसानी से गाभिन नहीं होती, दुध भी कम होता है। अपने पशु को नियमित रूप से मिनरल मिक्सचर अवश्य खिलायें, इससे स्वास्थ्य, दूध उत्पादन और बाढ़-बियान पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। गाय, बाछी को गरम होने के लगभग 12 घंटे बाद पाल खिलायें। यदि गाय बच्चा देने के 80 दिन बाद तक गरम नहीं होती है तो उसका शीघ्र ही इलाज कराना चाहिए। अगर बच्चा देने के 12 घंटे बाद तक जर नहीं निकलता है तो पशु चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। यदि आपकी बाछी, गाय लगातार दो बार पाल खिलाने या गाभिन होने के लिए सूई दिलाने के बाद भी गाभिन न हो, तो उसे अस्पताल में अवश्य लाकर अच्छी तरह जांच करा लें। पाल खिलाने के ढाई महीने बाद जांच करा लें कि गाय गाभिन है या नहीं। यदि संकर गाय/बाछी हो तो उन्नत किस्म के संकर सांढ से ही पाल खिलायें, शुद्ध विलायती सांढ से नही। खुरहा रोग से बचाने के लिए साल में अपने पशु को दो बार टीका/सूई दिलवा दें। इसकी विभागीय कीमत 5/- रूपये और बाजार में 10/- रूपये है। अपने पशु के शरीर से प्रतिदिन: (क) हाथ से चमोकन निकालकर जला या गाड़ दें। ये बहुत सी बीमारियों की जड़ है।(ख) साल में 1-2 बार गोबर की जांच करा लें। मई-जून में छुआछुत से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों (तड़का, डकहा, लंगड़ी आदि) से बचने के लिए प्रतिवर्ष टीका लगवा लें। बच्चा देने के लगभग दो महीने बाद गाय को पाल खिलायें। बच्चा देने के लगभग दो महीने पहले धीरे-धीरे दूध दुहना बंद कर गाय सूखा दें। स्वास्थ्य,रोग, बाढ़, वियान सम्बन्धी जानकारी और सहायता अस्पताल में आकर प्राप्त करें। राँची पशुचिकित्सा महाविद्यालय में उपलब्ध दवा, दाना, पाल खिलाना, जांच एवं अन्य सभी सुविधाएं आपकी सेवा में है। इनकी पूरी जानकारी रखें। फ्रीजियन एवं जर्सी नस्ल से प्राप्त संकर गाय (विशेषत: फ्रीजियन नस्ल से) इस क्षेत्र में किसानों के लिए विशेष लाभकारी और लोकप्रिय हो रही है। एक गाय प्रति माह कम से कम 1.5-2 हजार रूपये की आमदनी का स्त्रोत है। स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखंड सरकार