परिचय हिमाचल के जिला सोलन के परवाणु क्षेत्र से मार्च 2004 में दो विभिन्न समूहों में 56 प्रतिभागियों को वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन विषय पर प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण उपरांत किये गए सर्वेक्षण में पाया गया कि गायों से दुग्ध उत्पादकता 2.66 से 4.01 प्रति लीटर प्रति गाय तथा भैसों में दूध में वृद्धि 2.52 लीटर से 4.16 लीटर प्रतिधीन हुई हिया। पशुओं को स्टाल फीडिंग में 11% की वृद्धि हुई। कुछ प्रशिक्षणार्थियों ने सिखाई गई पद्धति से पशु आहार बनाकर पशुओं को खिलाने के लिए अपनाया है। महिलाओं के समूह ने किया कमाल महिलाओं के एक समूह ने खनिज लवण मिश्रण बनाकर न केवल पशुओं को खिलाने अपितु इसे अन्य लोगों को बेचकर धन लाभ भी कमाया है। सहायक परियोजना निदेशक, सामेकित जलागम परियोजना के अनुसार कुछ ग्रामीण महिलाओं ने दूध से पनीर बनाने की विधि से अपनाया है तथा इसे बेचकर वह धन अर्जित कर रही है। सर्वेक्षण अनुसार पाया कि प्रशिक्षणार्थियों के पशुपालन सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान एवं कौशलता में बढ़ाया हुआ जिसके उनके घर की पशुशाला से उन्हें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ हुआ है। पशुपालन में प्राप्त प्रशिक्षण से मिला लाभ इन प्रशिक्षणार्थियों ने अन्य गांववासियों के साथ भी साँझा किया जिसके चलते वैज्ञानिक विधियों से पशुपालन कर उन्हें भी लाभ पंहुचा है। स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार