<h3 style="text-align: justify;">बाजरा-सरसों फसल प्रणाली</h3> <p style="text-align: justify;">बाजरा-सरसों फसल प्रणाली में, बाजरे की पत्तियों और सूखे डंठलों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है। जबकि, सरसों की पत्तियों और सूखे डंठलों का इस्तेमाल ग्रामीण घरों के साथ-साथ ईंट के भट्टों के लिए ईंधन के रूप में किया जाता है। मृदाजैव कार्बन के निर्माण, जैविक गतिविधियों का समर्थन करने और दो फसलों द्वारा हटाए गए पोषक तत्वों की भरपाई के लिए बहुत कम कार्बनिक पदार्थों को मिट्टी में वापस किया जाता है। परिणामस्वरूप मृदाजैव कार्बन में गिरावट की सूचना मिलती है जो मिट्टी के क्षरण और मिट्टी के स्वास्थ्य की समस्याओं का कारण बनती है। किसानों के लाभस्वरूप उत्पादकता में सुधार के लिए सरसों की फसल में फली फसल आधारित रिले फसल प्रणाली के माध्यम से विविधता लाना आवश्यक समझा गया। </p> <h3 style="text-align: justify;">बरसीम की रिले (अतिरिक्त पूर्ति) फसल </h3> <p style="text-align: justify;">फसलों की उपज और आय बढ़ाने के लिए बाजरा आधारित प्रणाली में सरसों में बरसीम की रिले (अतिरिक्त पूर्ति) फसल का प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन वर्ष 2016-19 के दौरान मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में भागीदारी मोड में आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र के “किसान प्रथम कार्यक्रम परियोजना” के चयनित गाँवों में किए गए थे। विश्वविद्यालय की प्रथाओं के अनुशंसित पैकेज को अपनाने के साथ सरसों (ब्रासिका जुनसी) फसल की खड़ी फसल में बरसीम (ट्राइफोलियम एलेक्जेंड्रिनम) की रिले क्रॉपिंग स्थापित की गई थी।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPic.jpg" width="178" height="156" /></p> <p style="text-align: justify;">बरसात (खरीफ) के मौसम के दौरान फसल बाजरा की किस्म - हाइब्रिड और सरसों की किस्म आरएच-749 स्थापित की गई थी। सरसों के 30-35 दिन की स्थापना के बाद हर साल सरसों की पहली सिंचाई से पहले 20 किलो प्रति हेक्टेयर बीज एक समान बिखेर या फैला के बरसीम (किस्म - वरदान) की बुवाई की जाती थी। बरसीम के बीज का प्रबंध जैव उर्वरकों, राइजोबियम ट्राइफोली और स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस के साथ कैप्टन (2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) के साथ किया गया था।</p> <h3 style="text-align: justify;">सिंचाई</h3> <p style="text-align: justify;">सरसों की कटाई के बाद टिलरिंग, हेड फॉर्मेशन और बीज भरने के चरणों में तीन सिंचाई का प्रयोग किया गया। फली बेधक (हेलीकोवर्पा आर्मिगेरा) को हरेक साल मिस्र की तिपतिया घास (क्लोवर) की फसल में एक आम पॉलीफागोस छिटपुट कीट के रूप में देखा गया था और इसे आर्थिक स्तर पर 150 मिलीलीटर/हेक्टेयर की दर से छिड़काव करते हुए स्पिनोसाद के माध्यम से नियंत्रित किया गया था। परिपक्व बरसीम चारे की फसल हर साल मई के तीसरे से चौथे सप्ताह तक काटी जाती थी।</p> <h3 style="text-align: justify;">बाजरा और सरसों की उत्पादकता</h3> <p style="text-align: justify;">दूसरे वर्ष के दौरान रिले फसल के साथ बाजरा और सरसों की उत्पादकता की बीज उपज पर अभिनव प्रदर्शनों के परिणाम बिना रिले फसल क्षेत्रों की तुलना में 14 से 27% और 11 से 26% तक बढ़ गए। 7.2 टन/हेक्टेयर बिना रिले फसल की तुलना में बाजरा की समान प्रणाली उत्पादकता के समान रुझान रिले फसल के साथ 50 से 73 प्रतिशत तक बढ़ गया। बिना रिले फसल और रिले फसल के प्रदर्शनों में खेती की लागत क्रमशः 57,220रुपए/हेक्टेयर और 76,740रुपए/हेक्टेयर थी, जबकि शुद्ध लाभ क्रमशः 63,170 रुपए/हेक्टेयर और 1,00,670/हेक्टेयर था।</p> <h3 style="text-align: justify;">मिट्टी की उर्वरता में सुधार </h3> <p style="text-align: justify;">सरसों में बरसीम फलियों की फसल के प्रदर्शनों के नतीजों से एन-फिक्सेशन के द्वारा मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है और रोगाणुओं को पनपने के लिए एक सब्सट्रेट के रूप में अवशेषों के माध्यम से एसओसी में सुधार होता है। मैक्रो और सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की उपलब्धता बरसीम अवशेषों (1.8-2.2 हेक्टेयर/वर्ष) की अवधारण के कारण बढ़ गई या जुताई कार्यों द्वारा हल परत में शामिल हो गई। सरसों आधारित प्रणाली में बरसीम फसल की रिले फसल को शामिल करना जो अवशेषों को छोड़ देता है, कुछ भूजल/नहर जल सहायता में एक बहुत ही लाभदायक प्रस्ताव प्रतीत होता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्रोत: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), कृषि भवन, राजेंद्र प्रसाद राेड, नई दिल्ली। (किसान प्रथम कार्यक्रम परियोजना, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय - क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, मुरैना, मध्य प्रदेश)</p>