परिचय पोषण वाटिका या रसोईघर बाग़ या फिर गृह वाटिका उस वाटिका को कहा जाता है, जो घर के अगल बगल में घर के आंगन में ऐसी खुली जगह पर होती हैं, जहाँ पारिवरिक श्रम से परिवार के इस्तेमाल हेतु विभिन्न मौसमों में मौसमी फल तथा विभिन्न सब्जियाँ उगाई जाती है| पोषण वाटिका का मकसद पोषण वाटिका का मकसद रसोईघर के पानी व कूड़ा करकट का इस्तेमाल कर के घर की फल व साग सब्जियों की दैनिक जरूरतों को पूरा करना है| आजकल बाजार में बिकने वाली चमकदार फल सब्जियों को रासायनिक उर्वरक प्रयोग कर के उगायाजाता है| रसायनों का इस्तेमाल खरपतवार, कीड़े व बीमारियों रोकने के लिए किया जाता है| इन रासायनिक दवाओं का कुछ अंश फल सब्जी में बाद तक बना रहता है, जिस के कारण उन्हें इस्तेमाल करने वालों में बीमारियाँ से लड़ने की ताकत कम होती जा रही हैं| इस के अलावा फलों व सब्जियों के स्वाद में अंतर आ जाता है, इसलिए हमें अपने घर के आंगन या आसपास की खाली जगह में छोटी छोटी क्यारियां बना कर जैविक खादों का इस्तेमाल कर के रसायन रहित फल सब्जियों को उगाना चाहिए| स्थान का चयन इस के लिए स्थान चुनने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती, क्योंकि अधिकतर ये स्थान घर के पीछे या आसपास ही होते हैं| घर से मिले होने के कारण थोड़ा कम समय मिलते पर भी कम करने में सुविधा रहती है| गृह वाटिका के लिए ऐसे स्थान का चुनाव करना चाहिए, जहाँ पानी पर्याप्त मात्रा में मिल सके, जैसे नलकूप या कूएँ का पानी, स्नान का पानी, रसोईघर में इस्तेमाल किया गया पानी पोषण वाटिका तक पहुँच सके| स्थान खुला हो ताकि उस में सूरज की भरपूर रोशनी आसानी से पहुँच सके| ऐसा स्थान हो, जो जानवरों से सुरक्षित हो और उस स्थान की मिट्टी उपजाऊ हो| पोषण वाटिका का आकार जहाँ तक पोषण वाटिका के आकार का संबंध है, तो वह जमीन की उपलब्धता, परिवार के सदस्यों की संक्या और समय की उपलब्धता पर निर्भर होता है| लगातार फल चक्र, सघन बागबानी आर अंत: फसल खेती को अपनाते हुए एक औसत परिवार, जिस में 1 औरत, 1 मर्द व 3 बच्चे यानी कुल 5 सदस्य हों, ऐसे परिवार के लिए औसतन 250 ववर्ग मीटर की जमीन काफी है| इसी से अधिकतम पैदावार ले कर पूरे साल अपने परिवार के लिए फल सब्जियों की प्राप्ति की जा सकती है| बनावट आदर्श पोषण वाटिका के लिए उत्तरी भारत विशेषकर उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में उपलब्ध 250 वर्ग मीटर क्षेत्र में बहुवर्षीय पौधों पौधों को वाटिका के उस तरफ लगाना चाहिए, जिस से उन पौधों की अन्य दूसरे पौधों पर छाया न पड़ सके| साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि ये पौधे एकवर्षीय सब्जीयों के फसल चक्र और उन के पोषक तत्त्वों की मात्रा में बाधा न डाल सकें| पूरे क्षेत्र को 8-10 वर्ग मीटर की 15 क्यारियों में विभाजित कर लें और इन बातों का ध्यान रखें – वाटिका के चारों तरफ बाड़ का प्रयोग करना चाहिए, जिस में 3 तरफ गर्मी व वर्षा के समय कद्दूवर्गीय पौर्धों को चढ़ाना चाहिए तथा बची हुई चौथी तरफ सेफ लगानी चाहिए| फसल चक्र व सघन फसल पद्धति को अपनाना चाहिए| 2 क्यारियों के बीच की मेड़ों पर जड़ों वाली सब्जियों को उगाना चाहिए| रास्ते के एक तरफ टमाटर तथा दूसरी तरफ चौलाई या दूसरी पत्ती वाली सब्जी उगानी चाहिए| वाटिका के 2 कोनों पर कहद के गड्ढे होने चाहिए, जिन में से एक तरफ वर्मीकंपोस्ट यूनिट और दूसरी उर कंपोस्ट खाद का गड्ढा हो, जिस में घर का कूड़ाकरकट व फसल अवशेष डाल कर खाद तैयार की जा सके| इन गड्ढों के ऊपर छाया के लिए सेम जैसी बेल चढ़ा कर छाया बनाए रखें| इस से पोषक तत्त्वों की कमी भी नहीं होगी तथा गड्ढे भी छिपा रहेंगे| पोषण वटिका के लाभ जैविक उत्पाद (रसायन रहित) होने के कारण फल व सब्जियों में काफी मात्रा में पोषक तत्त्व मौजूद रहते हैं| बाजार में फल ससब्जियों की कीमत अधिक होती है, जिसे न खरीदने से अच्छी खासी बचत होती हैं| परिवार के लिए ताजा फल सब्जियाँ मिलती रहती हैं| वाटिका की सब्जियाँ बाजार के मुकाबले अच्छे गुणों वाली होती है| गृह वाटिका लगा कर महिलाएं अपनी व अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं| पोषण वाटिका से प्राप्त मौसमी फल व सब्जियों को परिरक्षित कर के सालभर इस्तेमाल किया जा सकता है| यह बच्चों के प्रशिक्षण का भी अच्छा साधन है| यह मनोरंजन और व्यायाम का भी एक अच्छा साधन है| मनोबैज्ञानिक दृष्टि से भी खुद उगाई गई फल सब्जियाँ बाजार की फलसब्जियों से अधिक स्वादिष्ठ लगती हैं| फसल की व्यवस्था पोषण वाटिका में बोआई करने से पहले योजना बना लेनी चाहिए, ताकि पूरे साल फल सब्जियां मिलती रहें| योजना में निम्नलिखित बैटन का उल्लेख होना चाहिए | क्यारियों की स्थिति उगाई जाने वाली फसलों के नाम व किस्में बोआई का समय अंत: फसल का नाम प्रजाति बोन्साई तकनीक का इस्तेमाल पोषण वाटिका में इस प्रकार सालभर फसल चक्र अपनाने से अधिक फल सब्जियाँ प्राप्त होती हैं- प्लाट नंबर फल सब्जियों के नाम इन के अलावा अन्य सब्जियों को भी जरूरत के के मुताबिक उगा सकते हैं 1 आलू, लोबिया, अगेती फूल गोभी मेंड़ों पर मूली, गाजर, शलजम, चुकन्दर, बाकला, धनिया, पोदीना, प्याज व हरे साग वगैरह लगाने चाहिए| बेल वाली सब्जियों जैसे लौकी, तुराई, चप्पनकद्दू, परवल, करेला सीताफल वगैरह को बाड़ के रूप में किनारों पर ही लगाना चाहिए| वाटिका में पपीता, अनार, नींबू, करौंदा, केला, अंगूर, अमरुद वगैरह के पौधों को सघन विधि से इस प्रकार किनारे की तरफ लगाएं, जिस से सब्जियों पर छाया न पड़े और पोषक तत्त्वों के लिए मुकाबले न हो| इस फसल चक्र में कुछ यूरोपियन सब्जियाँ भी रखी गई हैं, जो कुछ अधिक पोषण युक्त होती हैं व कैंसर जैसी बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक कूवत रखती हैं| पोषण वाटिका को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए उस में कुछ सजावटी पौधे भी लगाए जा सकते हैं| 2 पछेती फूल गोभी, लोबिया, लोबिया (वर्षा) 3 पत्ता गोभी, ग्वार, फ्रेंच बीन, 4 मटर, भिंडी टिंडा 5 फूलगोभी, गांठगोभी, (मध्यवर्ती), मूली, प्याज 6 बैगन के साथ पालक, अंत: फसल के रूप में खीर 7 गाजर, भिंडी, खीरा 8 ब्रोकली, चौलाई, मूंगफली 9 स्प्राउट ब्रसेल्स, बैगन (लंबे वाले) 10 खीरा, प्याज 11 लहसुन, मिर्च, शिमला मिर्च 12 चाइनीज कैबेज, प्याज (खरीफ) 13 अश्वगंध (सालभर), अंत:फसल लहसुन 14 मटर, टमाटर, अरबी 15 पौधशाला के लिए (सालभर) डिजिटल यंत्रों के द्वारा कैसे पायें विभिन्न सेवाएं स्रोत: फार्म एन फ़ूड/ जेवियर समाज संस्थान, राँची