परिचय इंसान यदि चाहे तो क्या नहीं कर सकता ? सिर्फ मेहनत व लगन की जरूरत है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिला के कुढनी शराबबंदी के बाद विमला व उसके पति इसका जीता जागता उदाहरण है। जी हां भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी। घर चलाना मुश्किल हो गया। पर, आठवीं पास विमला ने फूलों की खेती करने का निर्णय लिया़ इसमें उसके पति ने भी साथ दिया और एक एकड़ में फूलों की खेती की। आज कल रोज चार से पांच सौ रुपये की आमदनी है और परिवार भी खुशहाली के साथ चल रहा है। समाज में इनका मान-सम्मान भी बढ़ा है। पूर्ण शराबबंदी के निर्णय के बाद फिर खड़ा किया नया व्यवसाय बिहार में जब से पूर्ण शराबबंदी की घोषणा की, तब शराब कारोबारी विमला देवी के समक्ष रोजगार का संकट आ गया। लेकिन, उन्होंने सरकार के फैसले पर सवाल खड़ा करने या विरोध करने के बजाय जीवन जीने के लिए नये रास्ते का चयन किया। एक एकड़ जमीन में फूलों की खेती शुरू की। अब उसके यहां से कई जिलों के व्यापारी फूल ले जाते हैं। विमला के इस फैसले में उनके पति भी साथ दे रहे हैं। विमला अपने पति के साथ फूलों की खेती से परिवार व समाज में सुगंध फैला रही है। मामला कुढ़नी प्रखंड की कि शुनपुर बलौर पंचायत के जगदीश कमतौल गांव का है। स्थानीय जितेंद्र सिंह की पत्नी विमला देवी (50 वर्षीया) फूलों की खेती से परिवार को खुशहाल बनाने में लगी हैं। आठवीं पास विमला देवी कुशलता से चला रही हैं मुनाफे वाला फूलों का व्यापार खेती में मिला पति का भी साथ आठवीं कक्षा पास विमला ने पति जितेंद्र सिंह के साथ सोच- समझ कर फूल की खेती का फैसला लिया। विमला के सुझाव पर पति ने हामी भर दी। इसके बाद दोनों ने करीब एक एकड़ खेत में फूल का पौधा लगाया। खेतों में गेंदा, रजनीगंधा ,चेरी ,चीना समेत कई तरह के फूलों को लगाया है। मात्र एक से डेढ़ महीने बाद इनके खेतों पर फूल की खुदरा बिक्री करनेवाले दुकानदार पहुंचने लगे। फिर विमला के हाथों में रोज चार से पांच सौ रुपये आने लगे। इनके खेतों का फूल लेने के लिए हाजीपुर, वैशाली, गोरौल, लालगंज, मौना, बेल्सर समेत कई जगह के थोक व खुदरा विक्रेता पहुंचते है। विमला कहती हैं कि फूल की खेती पर प्रति कट्ठा दो हजार का खर्च होता है। इसके बदले चार से पांच हजार का मुनाफा होता है। इन्होंने बताया कि शराब बिक्री से कितने ही काल के गाल में असमय समा गये। कितनों का घर उजड़ गये। न जाने कि कितनी महिलाओं की की मांगें सूनी हो गयीं। उन्होंने बताया कि शराबबंदी के बाद हमारे साथ कितने के घरों में खुशियां लौटी और तंग से गुजर रहे परिवार को नयी जिंदगी मिली है। विमला ने बताया कि भविष्य में जीवन का नाश करने वाले शराब का कारोबार कभी नहीं करूंगी। इससे समाज में भी प्रतिष्ठा मिली है। शराब का कारोबार बंद होने पर समस्या आयी, पर नहीं मानी हार। फूलों की खेती को बनाया जीविका का आधार फूलों की खेती को बनाया जीविका का आधार और मिलेगी सब्सिडी प्रखंड कृषि पदाधिकारी का कहना है कि महिला का यह कदम साहसिक और प्रेरणादायक है। इनकी खेती का निरीक्षण के लिए जायेंगे। फूल की खेती करने वाले को सरकार सब्सिडी देती है। हमारा प्रयास होगा की इन्हें भी डेढ़ एकड़ जमीन में लगे फूल से हो रही है बेहतर आमदनी, आस-पास के जिलों से आते हैं व्यापारी। सब्सिडी का लाभ मिले। विमला के पति को भी थी शराब पीने की लत विमला के पति को शराब पीने की लत थी़ वे भी शराब का कारोबार करते थे। पिछले कई वर्षों से इनका जीवन शराब कारोबार के मुनाफे से चलता था। मगर शराबबंदी के बाद इनके समक्ष भुखमरी की समस्या उत्पन्न कर दी थी। मगर कम पढ़ी लिखी महिला ने शराब के कारोबार की जगह फूल के रोजगार को अपना कर जीवन को आसान कर दिया। विमला ने समाज में यह साबित कर दिखाया कि किसी दूसरे रोजगार से भी अपने जीवन का बगिया को महकाया जा सकता है। शराबबंदी के बाद विमला देवी ने फूल की खेती को जीविका का आधार बनाया है। इसके लिए वह महिला बधाई की पात्र है। एक महिला ने सरकार के निर्णय को सही साबित कर दिखाया है। इन महिला का यह आत्मविश्वास अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। लेखन : संदीप कुमार, स्वतंत्र पत्रकार