खुद नए तरीके की खेती के मॉडल को अपनाकर अब किसानों को जोड़ने का प्रयास बिहार के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहे 86 वर्षीय डॉ. गोपालजी त्रिवेदी किसानों को लाभकारी खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे किसानों को केवल सलाह ही नहीं देते बल्कि खुद भी मछलीपालन, पौधरोपण और मक्का की खेती के मॉडल को अपना रहे हैं। पांच साल पहले बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मतलुपुर गांव में चौर की जमीन यूं ही परती और बेकार पड़ी थी। उन्होंने प्रयास किया तो 22 किसानों ने मिल कर वहां 86 एकड़ में तालाब बना लिया। इससे यहां के किसानों की आय बढ़ गई। उनकी प्रेरणा से मछलीपालन, मक्का की खेती, मधुमक्खी पालन और फल-सब्जी की खेती कर लगभग 7 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। देश-विदेश में मक्का के सफल खेती का है लक्ष्य उनका लक्ष्य है कि बिहार में अमेरिका से अधिक मक्का की उत्पादकता मिले। इसके लिए उन्होंने किसानों को मॉडल दिया है।मक्का उत्पादन का उनका मॉडल है कि बरसात से अधिक जाड़े के दिनों में मक्का लगाया जाए। जाड़ा, गर्मी और बरसात तीनों मौसम में मक्का उत्पादन लिया जा सकता है। वे मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय आदि के किसानों को अच्छी क्वालिटी का मक्का बीज चौथाई दर पर उपलब्ध करा रहे हैं। 300 से 400 रुपए किलो बिकने वाले यह बीज किसानों को 100 रुपए किलो मिल रहे हैं। निचली भूमि वाले खेतों में तालाब बनवा रहे हैं, तो समतल जमीन में मक्का की साल में तीन फसल लेने की सलाह दे रहे हैं। मक्का की है अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मांग बिहार में मक्का उत्पादकता 5 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि देश की उत्पादकता 3 टन है। अमेरिका में मक्का उत्पादकता 10 टन प्रति हेक्टेयर है। प्रति कट्ठा दो क्विंटल से अधिक मक्का उत्पादन कर लिया जाए, तो अमेरिका को मात दिया जा सकता है। वे कहते हैं-अमेरिका की समृद्धि का बडा कारण मक्का उत्पादन है। यहां 122 से अधिक उत्पाद मक्का के हैं, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत मांग है। समेकित खेती को भी दे रहे हैं बढ़ावा तालाब के साथ ही वे समेकित खेती की भी सलाह देते हैं। तालाब के किनारे फल और सब्जी उत्पादन के लिए उन्होंने किसानों को मॉडल बताया। वे कहते हैं कि किसान तो खुद ही बड़ा कृषि वैज्ञानिक होता है। प्रयोग के आधार पर वे बेहतर खेती कर सकते हैं। उन्हें उन्नत बीज और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करानी होगी। बरसात में मेड़ पर करें मक्का की खेती डॉ.त्रिवेदी कहते हैं कि जाड़े के दिनों में यहां के बंगरा, पूसा, गायघाट बोचहा, बेगूसराय, समस्तीपुर और हाजीपुर में तो किसान प्रति कट्ठा डेढ़ से दो क्विंटल मक्का उत्पादन कर रहे हैं। इसे तीन क्विंटल तक ले जाना है। किसानों के उत्पाद की बिक्री की भी व्यवस्था कराई जा रही है। हरित क्रांति में मिलेगा योगदान बिहार सहित पूर्वी राज्यों से ही दूसरी हरित क्रांति लाने की योजना है। डॉ. त्रिवेदी कहते हैं कि धान और गेहूं की तुलना में मक्का उत्पादन से किसानों को अधिक लाभ होता है। बिहार अधिक मक्का उत्पादन कर हरित क्रांति में सहयोग किया जा सकता है। जमीन के अनुसार खेतों के चारों ओर फलदार पौधे भी लगाए जा सकते हैं। इससे जहां फसल भी मिलेगी, वहीं फल उत्पादन भी होगा। लेखक: संदीप कुमार, स्वतंत्र पत्रकार