परिचय फूलों की खेती से आसपास के क्षेत्रों में खुशबू फैल रही है। फूलों की खुशबू से वातावरण भी सुगंधित हो रहा है। इस रास्ते से गुजरने वाले आम राहगीर भी इस खुशबू का आनंद उठा रहे हैं। फूलों की खुशबू ऐसी फैली है कि हवा के साथ इसकी सुगंध दूर-दूर तक पहुंच रही है। यह फूल की खेती इंजीनियर की नौकरी छोड़कर फूलों की खेती कर आसपास के लोगों के बीच खुशबू फैलाने में अरुण कुमार लगे हैं। बिहारशरीफ के जिला मुख्यालय से उत्तर-पूरब दिशा में अविस्थत बिन्द प्रखंड मुख्यालय में स्थित श्रीराम कृष्ण भावामृत संघ आश्रम बना है। आश्रम के पास करीब दो कट्ठे से अधिक जमीन में आश्रम के महात्मा अरुण कुमार ने गेंदा के फूल की खेती कर रखी है। यह खेती व्यवसाय दृष्टिकोण से नहीं की गयी है। बल्कि गेंदा फूल की खेती सामाजिक दृष्टिकोण से की गयी है। यहां पर उपजाये जा रहे फूल लेने के लिए आमलोगों के लिए बराबर द्वार खुले रहते हैं। जिन्हें इसकी जरूरत पड़ती है। वे लोग आश्रम के पास पहुंचकर सहज रूप से फूल लेते हैं। आमतौर पर लोग पूजा अर्चना के लिए इस फूल का उपयोग करने में लगे हैं। आश्रम की ओर से आमलोगों को नि :शुल्क फूल उपलब्ध कराये जाते हैं। इस परोपकार की चर्चा क्षेत्र में सभी लोगों के जेहन पर है कि आश्रम के महात्मा अरुण कुमार समाजसेवा में तत्पर हैं। मोटरपंप से होती है फूलों की सिंचाई आश्रम के पास की जा रही फूलों की खेती की पटवन की व्यवस्था स्वयं अरुण कुमार ने अपने स्तर से कर रखी है। समय पर फूलों की सिंचाई हो इसके लिए मोटर पंप लगाये गये हैं। ज़रूरत के अनुसार फूलों की सिंचाई इसी पंप के माध्यम से की जाती है। वैसे तो आश्रम में पहुंचने वाले हर श्रद्धालु महात्मा जी के इस परोपकारी काम में अपना हाथ भी बंटाते हैं। यानी की सिंचाई से लेकर अन्य कार्यों में लोग महात्मा जी के सहयोग करने से नहीं चूकते हैं। अरुण कुमार इंजीनियर की नौकरी छोड़कर इन दिनों अपने पैतृक गांव में ही आश्रम बनाकर लोगों की सेवा करने में जुटे हैं। आश्रम के पास पहुंचने पर लोगों को फूलों की खुशबू से एक अलग तरह की अनुभूति प्राप्त होती है। लोग सहज रूप से आश्रम के पास बैठकर फूलों की खुशबू का आनंद उठाते हैं। साथ ही घरों में पूजा-पाठ के लिए फूल आश्रम से ले जाते हैं। अरुण कुमार बताते हैं कि फूलों की खेती करने में उन्हें काफी मन लगता है। बने आसपास के ग्रामीणों के प्रेरणास्रोत फूलों के बेहतर पैदावार को देख आस-पास के गांववाले भी इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। इनके पास आते हैं और खेती के गुर सीखते हैं। कई किसानों ने फूलों की खेती शुरू कर दी है। इससे बेहतर आमदनी भी हो रही है। खास कर शादी-विवाह के समय फूलों की डिमांड बढ़ जाती है। स्थानीय बाजार में इसकी काफी मांग है। लेखन : संदीप कुमार, स्वतंत्र पत्रकार