पूर्व-स्थिति किसान तिलकधारी प्रसाद कुशवाहा कहते हैं कि मुङो किसान होने पर गर्व है। वह भी मैं सब्जी की खेती करता हूं। गांव जवार के लोग मुझसे सब्जी की खेती के बारे में जानकारी लेने आते हैं तो काफी खुशी होती है। खेती के बदौलत हमारे परिवार के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो रही है। खेती के माध्यम से हमें जीवन में बहुत कुछ सीखने को मिला। खेती के आमदनी ने अपना मकान बनावाया। दो एकड़ जमीन खरीदी व अपने लिए एक बाइक भी खरीदी। खेती करने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित सभी कृषि उपकरण भी खरीदे हैं। खेती से हमें बहुत कुछ मिला है। 5 एकड़ भूमि में अगर सब्जियों की अच्छी तरह से खेती की जाये जो 6 से 12 लाख रुपया तक आमदनी हो सकती है। किसानों का कहना है कि विभिन्न फसलों की खेती करने के लिए वह पुरी तरह अपने पर निर्भर है। वहीं सरकार की तरफ से अभी तक कोई सहायता या अनुदान नहीं मिला है। सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सब्जियों की खेती में थोड़ी परेशानी होती है। पंपसेट से फसलों की सिंचाई करने में अधिक डीजल की खपत होती है। अगर सरकारी स्तर से सोलर पंपसेट मिल जाता तो काफी सुविधा होती। किसानों ने इस संबंध में जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भी भेजा,लेकिन वहां से कोई सुनवाई नहीं हुई। इन्होंने भी बनायी पहचान राधेश्याम यादव, हरिलाल प्रसाद कुशवाहा, चंद्रदेव कुशवाहा, सिंहासन महतो, नंदू कुशवाहा, डोमा महतो, राज किशोर महतो, योगेंद्र महतो, वैद्यनाथ महतो, राजन महतो, भरत यादव, बाबूलाल महतो, रामचंद्र यादव, सुारुज महतो, सज्जन महतो ने अपने परिवार की जिंदगी सब्जी की खेती से सवारी है। इनके बच्चे भी पटना, बेतिया, बगहा के अच्छे स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 4। अपनी बदौलत इलाके के लोगों को खेती के लिए किया प्रेरित गोपालगंज जिले के हथुआ के एक विकलांग (पैर) के बुलंद हौसले ने इलाके की किस्मत बदल दी है। विकलांग किसान ने सब्जी की खेती कर न सिर्फ अपनी किस्मत संवारी है, बल्कि आसपास के गांवों के किसानों के भी प्रेरणास्नेत बन गये हैं। फुलवरिया प्रखंड की मजीरवां कला ग्राम पंचायत के भरपुरवां गांव निवासी राम प्रसाद सिंह ने सब्जी की खेती कर मिसाल कायम की है। 60 वर्षीय राम प्रसाद ने 25 वर्ष की उम्र से ही सब्जी की खेती करनी शुरू कर दी। गरीबी के कारण शुरू में तो काफी परेशानी हुई। लेकिन समय के साथ हालात भी बदलते गये। बैंक से मिल गया ऋण : हिम्मत न हारी तो बैंक भी मदद करने को आगे आया। सब्जी की खेती करने के लिए ऋण मिल गया और ढाई एकड़ में खेती शुरू कर दी, जिसमें सालों भर लौकी, करैला, भिंडी, गोभी, हरी मिर्च, टमाटर, नेनुआ एवं आलू की खेती कर करीब 12 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। फिर खेती से उसने न सिर्फ अपने लिए पक्का मकान बनाया, बल्कि परिवार के मुखिया होने के नाते 17 बच्चों की शादी भी की। दो भाइयों को शिक्षा दिलाने के साथ ही उन्हें खेती के गुर भी सिखाये। आज उसके दोनों भाई दीनानाथ सिंह एवं रामानंद सिंह भी अच्छे सब्जी उत्पादक हैं। गांव में शहर की सुविधा : सब्जी की खेती ने इलाके की तसवीर को पिछले एक दशक में बदल दिया है। हर किसान खाने के लिए धान-गेहूं की खेती करता है। नकदी फसल के रूप में सब्जी की खेती कर रहे हैं। आमदनी अच्छी होने के कारण आज करीब हर घर में टीवी, डिस, इंटरनेट, लैपटॉप, चार पहिया वाहन उपलब्ध है। किसान भले ही गांव में रहते हैं। लेकिन सुविधाएं शहर से कम नहीं है। पढ़-लिख कर बेटे भी कर रहे व्यवसाय : राम प्रसाद को चार बेटियां है और दो बेटे हैं। विकलांग होने के बाद भी राम प्रसाद कड़ी मेहनत कर बेटे को को पढ़ाया-लिखाया। एक बेटा शारदा लाल पढ़ाई पूरी कर पिता के साथ अब सब्जी की खेती करता है, जबकि दूसरा दीपक मजीरवां में कारोबार संभालता है। बाजार शुरू होते ही आने लगे यूपी के व्यापारी इलाके के लोग विकलांग राम प्रसाद से खेती के गुर सीख अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। लोगों की आय बढ़ने के साथ ही सब्जी की खेती से लगाव और इसे व्यावसायिक रूप देने के लिए श्री प्रसाद ने मजीरवां कला नहर पुल पर सब्जी का बाजार शुरू कराया। सुबह-सुबह यहां दर्जनों व्यापारी आते हैं और सब्जी खरीद कर ले जाते हैं। इससे किसानों को बाहर भी जाना नहीं पड़ता। अब यहां प्रतिदिन लाखों रुपये की सब्जी की खरीद-बिक्री होती है। यूपी एवं दूसरे जिले के व्यापारी भी यहां सब्जी की खरीदारी करने आते हैं। राम प्रसाद उन लोगों के लिए आदर्श बने हैं, जो खेती को घाटा का सौदा मानते हैं। सुबह हर किसान मजीरवां नहर पर अपने खेतों से सब्जी निकाल कर लाते हैं, जहां उन्हें प्रतिदिन पांच-सात हजार तक की आमदनी होती है। स्त्रोत : संदीप कुमार,स्वतंत्र पत्रकार,पटना बिहार ।