समेकित प्रणाली की ओर रुख 2008 के पहले अनिता देवी अपने पति के साथ परंपरागत खेती कर रही थी। गांव के लोग भी इस तरह की खेती को जैसे-तैसे खींच रहे थे। इससे परिवार की जरूरतें पूरी करने में कठिनाई को देखते हुए कुछ अलग करने की ठान ली। उन्होंने सबसे पहले मशरूम का उत्पादन शुरू किया। 2010 में आत्मा नालंदा से निबंधित होकर मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग लेने के लिए कई प्रदेशों में अनिता को जाने का मौका मिला। प्रशिक्षण के लिए कई प्रदेशों के भ्रमण के क्रम में अनिता को जो अनुभव हुआ उसके आधार पर उसने परंपरागत कृषि के साथ-साथ समेकित कृषि प्रणाली की ओर रूख किया। समेकित कृषि प्रणाली ने अनिता व उसके परिवार की स्थिति ही बदल दी। आज अनिता देवी बदहाली की जिंदगी से निकल कर खुशहाल जिंदगी गुजर-बसर कर रही है। आज अनिता देवी मशरूम उत्पादन, मशरूम बीज उत्पादन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन आदि के व्यवसाय के साथ अन्य खेती भी कर रही है। मशरूम व मशरूम बीज की पांच जिलों में बिक्री : अनिता देवी आज मशरूम उत्पादन कक्ष, मशरूम बीज लैब की स्थापना कर चुकी है। अनिता के यहां प्रतिदिन 20 किलो मशरूम का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा प्रतिदिन 100 किलो मशरूम बीज का उत्पादन हो रहा है। मशरूम व मशरूम के बीजों को पांच जिलों भागलपुर, पटना, हाजीपुर, नालंदा व मुंगेर में सप्लाई हो रहा है। अनिता देवी का मशरूम सप्ताह में तीन दिन 20-20 किलो मुंगेर जा रहा है। इसके अलावा सप्ताह में एक-एक दिन पटना व हाजीपुर जा रहा है। इसी तरह अन्य जिलों में मशरूम भेजा जा रहा है। पटना के 575 घरों में हो रही होम डिलीवरी : अनिता मशरूम का अचार भी बना रही है। उसका क्षितिज एग्रोटेक सेटाई अप हुआ है। इसके माध्यम से पटना के 575 घरों में मोबाइल से होम डिलीवरी हो रही है। इसमें शहर, अचार, सत्तू, आटा, चावल, दाल, मसूर दाल, चना दाल, अरहर दाल व बासमती चावल की डिलीवरी की जा रही है। मुरगी व मछलीपालन से भी अच्छी आमदनी सुनीता देवी अंडा देने वाली मुरगी का पालन भी कर रही है। एक-एक मुरगी 125 से 150 अंडे देती है। स्थानीय स्तर पर काफी डिमांड रहने से घर पर ही इसकी बिक्री हो जाती है। एक बीघा में तालाब बना कर अनिता मछली पालन भी कर रही है। इस तालाब में चार तरह की मछली रेहू, कतला, नैली, ग्लॉस्कर है। इससे भी अच्छी आमदनी हो रही है। प्रति वर्ष तीन क्विंटल शहद का उत्पादन अनिता देवी ने मधुमक्खी पालन में भी कदम रखा है। मधुमक्खी के 18 बक्से से अनिता को प्रतिवर्ष तीन क्विंटल शहद प्राप्त हो जा रहा है। इससे करीब 45 हजार रुपये प्रतिवर्ष की आमदनी हो जा रही है। सम्मान से काम करने का बढ़ा जोश अनिता के कार्य को अब तवज्जो मिल रही है। 2012 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर द्वारा नवाचार कृषक पुरस्कार से नवाजा गया। 2015 में अनिता को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा जगजीवन राम अभिनव किसान पुरस्कार से नवाजा गया है। इन सम्मानों से नवाजे जाने पर अनिता देवी कहती है कि यह काम का पुरस्कार है। यह पुरस्कार मिलने से नया जोश व उत्साह पैदा हुआ है और भविष्य में और बेहतर करने की प्रेरणा मिली है। स्त्रोत: संदीप कुमार,स्वतंत्र पत्रकार,पटना बिहार।