कैसे राजापाकर बना जैविक ग्राम कृषि क्षेत्र में पहले की अपेक्षा अब बदलाव दिखने लगा है। घाटे का कार्य होने के बाद भी राज्य में कुछ ऐसे भी किसान हैं, जो जैविक खेती का नये प्रयोग कर मिट्टी से सोना उपजा रहे हैं। साथ ही अभावों के बीच सफलता की नयी ऊंचाइयों को छू रहे हैं। ऐसे ही सफल किसानों में से एक हैं वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड के निवासी किसान देवेंद्र प्रसाद सिंह। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कड़ी मेहनत व लगन से खेती की जाये, तो निश्चित ही किसान अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर कर सकता है। वे पांच एकड़ जमीन पर खुद सब्जी की खेती की बदौलत सालाना तीन से चार लाख रुपये कमा रहे हैं। साथ ही सौ से अधिक किसानों को प्रेरित भी किया है। उन्हें कई जिला व राज्य स्तरीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं। क्या है जैविक खेती के फायदे देवेंद्र प्रसाद सिंह का कहना है कि कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से खेती को भारी नुकसान हो रहा है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो गयी है और खेतों में पैदा होने वाले अनाज में जहर घुलता जा रहा है। धीमे जहर के रूप में यही अनाज आज जनता खा रही है और असमय जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रही है। रासायनिक उर्वरक एवं दवाओं की बढती कीमतों ने भी खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। लेकिन जैविक खेती को सफलतापूर्वक अपना कर किसानों को एक नई राह दिखाई है। धान की परंपरागत खेती को छोड़कर केवल सब्जियों की खेती कर अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बन गये है। उन्होंने कहा कि जैविक से खेती करने पर 40 प्रतिश्त से अधिक वृद्धि हुई है। इसके अलावा कई अंतर दिखायी दिये जैसे : स्वादों में परिवर्तन (पहले कि अपेक्षा स्वाद अच्छा लगेगा)- उत्पादन क्षमता में वृद्धि, मिट्टी की उत्पादन क्षमता में वृद्धि - पौधे में हरापन में वृद्धि, सिंचाई में पानी की जरूरत कम होती है पौधे स्वस्थ्य और अधिक जड़ निकलना। एक 55 वर्षीय इस किसान ने बदली लोगों की किस्मत 55 वर्षीय इस किसान की खेती राजापाकर के आसपास के आदि गांवों में फैली है। इनकी दिनचर्या सुबह चार बजे से शुरू होकर रात के आठ बजे तक चलती रहती है। वैसे ये पांच से सात एकड़ में ही खेती करते हैं। लेकिन इनके खेती से प्रभावित होकर प्रखंड के कई किसान 100 से अधिक एकड़ में सब्जियों व धान व गेहूं की खेती कर अधिक मुनाफा कमा रहे है। ये एक किसान सलाहकार भी हैं। देवेंद्र प्रसाद कहते हैं कि पंचमूर्ति एग्रो प्रोडूयसर कंपनी लिमिटेड समूह के माध्यम से 1800 से अधिक किसानों को जैविक खाद बनाने व खेती करने का प्रश्क्षिण मुफ्त दिया गया। जिसकी वजह से आज यहां के किसान कम खर्च में जैविक खेती को अपनाकर अधिक लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 300 से अधिक किसानों को कृषि योजना के तहत जैविक संसाधन उपलब्ध कराया गया। वही राज्य सरकार की ओर से जैविक खाद पर सब्सिडी दी जा रही है। जिसका लाभ स्थानीय किसान उठा भी रहे हैं। देवेंद्र का कहना है कि इसका मुख्य श्रेय पंचमूर्ति एग्रो प्रोडयूसर कंपनी लिमिटेड को जाता है। इस कंपनी के एमडी राजदेव ने किसानों को क्लब बना कर जिले में कंपनी का रूप दिया। नतीजा यह है कि जिले सभी किसान जैविक खेती करने में लगे है। वही कंपनी के प्रबंध निदेशक राजदेव राय से बात कि तो उन्होंने कहा कि जिला को जैविक ग्राम बनाना मेरा मुख्य लक्ष्य था। नार्बड की सहयोग से मैनें इस कार्य को पूरा किया । नार्बाड के अधिकारी ने मिथिलेश जी से काफी मदद मिला। राजदेव ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से अभी तक जैविक उत्पादक का प्रमाणीकरण नहीं दिया गया। जिसकी वजह से जैविक उत्पादक का जैविक मूल्य किसानों को नहीं मिला पा रहा है। दूसरी बात कि सरकार की ओर से जिले में एक भी उत्पादक प्रमाण केंद्र नहीं है। हम चाहते है कि जिले के आसपास किसान जैविक खेती की ओर तभी आगे आएंगे जबतक कि केंद्र व राज्य सरकार इन जरूतों को पूरा नहीं कर देती। राज्य सरकार से है उम्मीदें जैविक खाद ब्रिकी की समुचित व्यवस्था करना खाद की गुणवत्ता जांच कर उसका प्रमाण पत्न निर्गत करना जैविक खाद उत्पादन को उद्योगी करण का दर्जा देना। बीजोंत्पादन प्रशिक्षण देकर बीजोत्पादन पर बल देना । राजापाकर में कृषि परार्मशा केंद्र की स्थापना करना जहां किसानों वैज्ञानिक जानकारी तथा सरकार से मिलने वाली योजनाओं का मुहैया आसानी से करायी जा सके। कृषि शाखा बेंक का राजापाकर में निर्माण करना । बैंकों में किसान समूह का गठन करना। राजापाकर प्रखंड स्थित भलूई में कॉलेज में प्रश्क्षिण केंद्र तथा एक र्सिच सेंटर की स्थापना की जाय । जहां केंचुआ के अनस्थानीय प्रजाति पर भी शोध किया जा सके। उन्होंने ने कहा कि यदि सरकार इन पर ध्यान दें तो जल्द ही यह जैविक ग्राम एक अनुपम ग्राम के रूप में प्रचिलत होगा। राजदेव कहते है कि कंपनी का लक्ष्य है कि बिहार में किसान जैविक खेती ही करें। इसके लिए हम सतत प्रयास कर रहे हैं। स्त्रोत : संदीप कुमार, वरिष्ठ पत्रकार, पटना,बिहार