परिचय श्री नरेश कुमार सुपुत्र श्री मोती राम निवासी तरावडी किले के पास जिला करनाल ने सन 1990 में कृषि विज्ञान केंद्र रा.डे.अनु.सं. करनाल से कृत्रिम गर्भाधान एवं प्राथमिक पशु चिकित्सा नामक प्रशिक्षण प्राप्त किया। श्री नरेश कुमार ने 1992 सबसे पहले 25 गायों का बैंक लोन के.वी.के. से प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनवाकर प्राप्त किया व डेरी फार्म शुरू किया।लेकिन उन्हें अपने इस कार्य में अधिक सफलता प्राप्त नहीं हुई। बाद में श्री नरेश कुमार ने के.वी.के. के स्टाफ से सम्पर्क किया व इनकी सलाह से स्वयं पशुदाना बनाना शुरू किया व अन्य समस्याओं के लिए सलाह ली।देखते ही देखते नरेश कुमार की मेहनत व् लगन रंग लाई व आज नरेश कुमार एक अति पशुपालक है। इस कार्य में उनके बड़े भाई श्री राम सिंह उनको पूरा सहयोग करते हैं। डेरी फार्म में आज की स्थिति आज श्री नरेश कुमार के डेरी फार्म पर पशुओं की संख्या निम्न प्रकार है- होलस्टीन शंकर गायें 62 होलस्टीन शंकर बछड़िया, एक वर्ष से ऊपर 50 होलस्टीन शंकर बछड़िया, एक वर्ष से कम 30 साहिवाल गायें 7 थारपारकर गाएं 2 मुर्राह भैसें 7 मुर्राह कटडियां, एक वर्ष से ऊपर 4 मुर्राह कटडियां, एक वर्ष से ऊपर ३ पशु प्रबंध श्री नरेश कुमार के पास 60 पशुओं के लिए आवास व्यवस्था है साथ ही पशुओं को काफी खुला स्थान भी दिया गया जहाँ पशु समय-समय पर आराम कर सकें व् घूम सकें।गायों के दूध निकालने के लिए श्री राजबीर सिहं ने अपने फार्म पर मशीने लगाईं हुई हैं।भैसों का दूध वे हाथ से ही निकालते हैं।पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए खुर पका मुहँ पका वैक्सीन प्रति वर्ष दो बार व गोलगोटू वैक्सीन प्रति वर्ष एक बार लगाई जाती है।पशुओं की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।पशुओं के लिए साफ पानी की व्यवस्था है।श्री नरेश कुमार अपने पशुओं का अधिक से अधिक हरा चारा उपलब्ध कराते हैं व स्वयं बनाकर दाना उपलब्ध कराते हैं।उनका मानना है कि यदि पशुओं की उचित सफाई रखी जाये और उचित मात्रा में संतुलित आहार उपलब्ध कराया जाए तो पशुओं में बीमारियों स्वयं ही कम हो जाती है।वे अपने पशुओं को अन्तः परजीवी व बाह्य परजीवियों से बचाने के की समय-समय पर उचित दवाइयों का प्रयोग करते हैं। पशु प्रजनन श्री नरेश कुमार अपने फार्म पर सबी गायों व भैसों को कृत्रिम गर्भाधान से गाभिन कराते हैं।वह अपने पशुओं के किए अच्छे रिकार्ड का वीर्य रा.डे.अनु.सं. करनाल, पशुपालन विभाग पंजाब व वीर्य बैंक-हैसर गट्टा (कर्नाटका) आदि स्थानों से प्राप्त करते हैं।श्री नरेश कुमार अपने शंकर पशुओं में विदेश खून का स्तर अधिक से रखने के हिमायती है क्योंकि वे समझते हैं कि पशुओं में अधिक विदेशी खून का स्तर, पशुओं से अधिक दूध प्राप्त करने में मदद करता है।श्री नरेश कुमार के फार्म पर पशुओं का गर्मी में न आना व बार-2 गभित होना जैसी बिमारियों की समस्या बहुत कम है। दूध उत्पादन एवं इससे आर्थिक लाभ श्री नरेश कुमार के फार्म पर जनवरी 2006 माह में 800 किलो गाय का दूध व् 50 किलो भैसों का दूध उत्पादन प्रतिदिन हो रहा था।वे गायों का दूध 10/50 रू. प्रति किलो व भैसों का दूध 14.00 रु. प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं। श्री नरेश कुमार अपने पशुओं का दूध बेचकर प्रतिमाह रु. 1,50,000/- प्राप्त करते हैं जिसमें से वह लगभग रु. 50,0000 से 60,000/- प्रतिमाह शुद्ध लाभ कमाते हैं।श्री नरेश कुमार राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली अनेक प्रतिगिताओं में भाग लेते हैं व अनेक पुरस्कार प्राप्त करते हैं। स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार