परिचय जिला करनाल के मुख्यतः गाँवों में धान-गेहूँ फसल चक्र करने का तरीका प्रचलित है। धान की दो फसलें लेने के लिए बहुत प्रयोग होता है। धान की जगह अन्य फसल लेने के लिए जिसके 9 विभिन्न गांवों में भिन्डी की पूसा ए-4 किस्म पर फार्म पर प्रशिक्षण गये। गाँव कैलाश के सत्यबीर के आधा एकड़ भूमिजोत पर अप्रैल में किए गये परीक्षणों में पाया कि में बोई गई भिन्डी की यह किस्म में पहली उत्पादकता में दी तथा माह सितम्बर तक इस भिन्डी से फसल प्राप्त होती रही। भिन्डी की खेती से पाया अधिक लाभ सत्यवीर के अनुसार उसे इस खेती से सारे खर्चे निकालकर 35,000 रु. की आमदनी तथा धान की खेती की अपेक्षा पानी के प्रयोग में भी काफी कमी थी। भिन्डी को तोड़ने गाँव की महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त हुआ। भिन्डी की किस्म पूस ए-4 से प्राप्त फसल सत्यवीर ने आसपास के कई गाँव वासियों के साथ साझा किया। सर्वेक्षण उपरांत सत्यवीर व उसके अन्य साथी भिन्डी की खेती लगातार करके लाभ कमा रहे हैं जो कि दृष्टि से भिन्डी की अन्य प्रचलित किस्मों तथा धान की खेती से लाभकारी हैं। स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार