परिचय श्री मंगत राम गाँव बड़थल जिला करनाल के किसान के पास 13 एकड़ जमीन है। वह धान व गेंहूँ की फसल में उगने वाले खरपतवारों से बहुत परेशान तथा जबकि उनके क्षेत्र में एक चीनी मिल है। वह 1999 में कृषि विज्ञान केंद्र (राष्ट्रीय डेरी अनुसन्धान संस्थान) करनाल के सम्पर्क में आया उसने अपनी समस्या विषय विशेषज्ञ से बतायी कि खरपतवार नाशी से भी खरपतवारों का सफाया नहीं हो पा रहा था व उसका खर्चा लगातार बढ़ रहा था। वैज्ञानिक पद्धति से पाया खरपतवारों से मुक्ति का रास्ता केंद्र में उपस्थित विशेषज्ञों ने उसको फसल चक्कर बदलने की सलाह ही। उसने गन्ने की फसल की वैज्ञानिक विधि से खेती में प्रशिक्षण प्राप्त किया और गन्ने की फसल को 5 एकड़ भूमि में लगाया। फसल चक्र में बदलाव वह अपने फसल चक्र में आधी जमीन पर गन्ने की फसल भी खेत बदल-बदल का उगाता है व आधी जमीन पर धान व गेहूँ की ही फसल उगाता है। धान व गेंहूँ की फसल भी वह आधुनिक तरीके से करता है। वह समय-समय पर कृषि विज्ञान केंद्र में आता रहता है। वह नई-नई किस्मों की व उत्पादन की आधुनिक जानकारियाँ लेता रहता है। खरपतवार से मुक्ति एवं लाभ में बढ़ाेत्तरी जहाँ उसकी खतपतवार की समस्या कम हुई, वहीं पर उसका खतपतवार की समस्या कम वहीं पर उसका प्रति एकड़ लाभ भी अधिक हुआ। जहाँ उसकी 13 एकड़ जमीन में कुल आय लगभग रूपये 2,50,000 थी अब वह बढकर रु. 3,50,000 तक हो गई है। स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार