<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;">श्री रमेश कुमार गाँव उपलाना जिला करनाल का रहने वाला एक सीमान्त किसान था। इसके पास केवल 3 एकड़ जमीन थी। जिससे घर का गुजारा कठिनाई से चलता था। वर्ष 2002 में इससे कृषि विज्ञान केंद्र राष्ट्रीय डेरी अनुसन्धान संस्थान करनाल से <a href="../../../../../../../social-welfare/91794d93093e92e940923-91793094092c940-90992894d92e942932928/90692f93593094d92694d927915-91792493f93593f92793f92f93e901/मधुमक्खी-पालन">मधुमक्खी पालन</a> का प्रशिक्षण लिया तथा इस व्यवसाय को केवल 10 कॉलोनियों के साथ आरंभ किया। वर्ष के अंत में 2.0 क्विंटल शहद का उत्पादन हुआ जिसे 45 रूपये प्रति कि.ग्रा. के भाव से बेचकर 9,000 रूपये की आमदनी की। वर्ष 2003 में इसने इन पैसों से नये मधुमक्खी बक्से खरीदे तथा मधुमक्खी कॉलोनियों का विभाजन कर इनकी संख्या 40 कर ली।</p> <h3 style="text-align: justify;">बढ़ता मधु उत्पादन बना परिवार के सेहत का राज</h3> <p style="text-align: justify;">इनसे 12.0 क्विंटल शहद का उत्पादन हुआ था इसे बेचकर 48,000 रूपये की आय प्राप्त की। इस प्रकार वह मधुमक्खी कॉलोनियों बढ़ाता गया व वर्ष 2005 के अंत तक इनकी संख्या 85 हो गई। इससे कृषक को 20.40 क्विंटल शहद का उत्पादन हुआ जिसे बेचकर 85. 680 रूपये की आय प्राप्त की। इसके अलावा 20 मधुमक्खी कॉलोनियों को 720 रूपये प्रति चार फ्रेम की कालोनी के साथ बेचकर 14,400 रूपये की आय प्राप्त की आय प्राप्त की। मधुमक्खी कॉलोनियों को एक जगह से दूसरी जगह स्थानान्तरण करने, चीनी व दवाइयों आदि पर आने वाल कुल खर्चा 25,000 रूपये था। इस प्रकार सभी खर्चे निकालकर मधुमक्खी पालक को वर्ष में 2005 में 75,000 रूपये की शुद्ध प्राप्त हुई।</p> <p style="text-align: justify;">खेती के अलावा मधुमक्खी पालन से होने वाली अतिरिक्त आय से किसान की आर्थिक दशा में काफी सुधार हुआ है। बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं। वर्ष 2006 में इन कलोनोयों को 150 तक बढ़ाने का इरादा है। जिससे उसे अच्छी प्राप्त हो सके। घर में बच्चे व बूढ़े शहद का रोजाना सेवन करने लगे हैं यथा इस पौष्टिक खाद्य पदार्थ से उनकी सेहत में भी सुधार आया है। इसको देखते हुए गाँव की दो अन्य किसान भी कृषि विज्ञान केंद्र से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण ले चुके हैं व इस व्यवसाय को अपनाना चाहते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत:<a class="external_link ext-link-icon external-link" title="नए विंडाे में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक" href="https://agricoop.nic.in/" target="_blank" rel="noopener"> कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार </a></p> </div>