परिचय श्री जागीर सिंह गाँव जनसेरो जिला करनाल का रहने वाल किसान खेती का काम करके अपने परिवार की देखभाल करता था। चूँकि जमीन कम थी इसलिए आर्थिक दशा इतनी अच्छी नहीं थी। नबम्वर 1992 में इन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, करनाल से मधुमक्खी कॉलोनियों के साथ व्यवसाय को आरंभ किया। मधुमक्खी पालन फसल की बढ़ोतरी के साथ बना आमदनी का साधन सन 1994 में 10 नयी कॉलाेनी खरीदीं। इसके बाद प्रति वर्ष मधुमक्खी कॉलोनियों की संख्या बढ़ती गईं व वर्ष 2005 के अंत तक उसके पास 200 मधुमक्खी कॉलोनी हो गईं। इससे उसने 42,00 क्विंटल शहद का उत्पादन किया इसे 42 रु. प्रति कि.ग्रा. की दर से बेचकर, 1,76,400 रू. आय प्राप्त की। इसके अलावा मधुमक्खी पालक द्वारा 35 मधुमक्खी कॉलोनियों 170 रु. प्रति कॉलाेनी के हिसाब से बेचीं तथा 25,000 रु. की आय प्राप्त की। मधुमक्खी कॉलोनियों के स्थानान्तरण, चीन तथा कॉलोनियों के उपचार हेतु प्रयोग की गयी दवाइयों आदि पर कुल खर्चा 21,400 रु. हुआ। इस प्रकार सभी खर्चे निकालकर मधुमक्खी पालक को 1,80,000 रु. की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इसके अलावा मधुमक्खियों के परागण द्वारा उसकी फसल की पैदवार से भी लगभग 10% की बढ़ोतरी हुई । इस प्रकार श्री जागीर सिंह की आर्थिक दशा में काफी सुधार हुआ था मधुमक्खी कॉलोनियों को और अधिक बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार।