<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;">श्री सुनील कुमार गाँव सांतडी, जिला करनाल का रहने वाल बेरोजगार किसान था। सन 1990 में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा उसके गाँव एक दिन का ऑफ़ कैम्पस ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया। चूँकि गाँव में सरसों व अन्य दलहनी फसलों के अलावा सफेद (युक्लिप्टस) वृक्षों की बहुतायात थी इसलिए गाँव के कुछ किसानों ने इस काम को आरंभ करने के लिए अपनी रूचि दिखाई। श्री सुनील कुमार ने अन्य किसानों एक साथ अक्टूबर, 1990 में कृषि विज्ञान केंद्र एन.डी.आर.आई. करनाल से एक सप्ताह का प्रशिक्षण लिया तथा फरवरी 1991 में 15 मधुमक्खी बक्से एवं कालोनियों खरीद कर इस कार्य को आरंभ कर दिया। वर्ष के अंत तक 1.83 क्विंटल शहद का उत्पादन 4.575 रु. आय प्राप्त की।</p> <h3 style="text-align: justify;">अधिक उत्पादन पश्चात बढ़ाया <a href="../../../../../../../social-welfare/91794d93093e92e940923-91793094092c940-90992894d92e942932928/90692f93593094d92694d927915-91792493f93593f92793f92f93e901/मधुमक्खी-पालन">मधुमक्खी पालन</a> का व्यापार</h3> <p style="text-align: justify;">वर्ष 1992 में श्री सुनील कुमार ने 20,000 रु. खर्च कर 20 नये मधुबक्से खरीदें। इस प्रकार प्रत्येक वर्ष इनकी संख्या बढ़ती गई व मधुमक्खी कालोनियों के बढ़ने का क्रम जारी रहा। वर्ष 2000 में इनकी संख्या 175 तक पहुँच गई। इससे इन्होने 3.15 किवंटल शहद का उत्पादन किया जिससे बेचकर कुल 1. 26 लाख रूपये की आय प्राप्त की।</p> <p style="text-align: justify;">इसके अलावा श्री सुनील कुमार ने वर्ष 2005 में 26 मधुमक्खी कॉलोनियों प्रति चार फ्रेम के बेचीं जिससे इन्हें 18.720 रूपये की आमदनी हुई।</p> <p style="text-align: justify;">तकनीकी ज्ञान के लिए श्री सुनील कुमार हमेशा कृषि विज्ञान केंद्र के सम्पर्क में रहता है जिसमें अधिक से अधिक शहद का उत्पादन किया जा सकें।</p> <p style="text-align: justify;">सन 1995 में श्री सुनील कुमार ने मधुमक्खियों के ली मोमिधार छत्ता बनाने वाली मशीन 13.500 रु. में खरीदी। पहले तो वह इससे अपनी ही मधुमक्खी कालोनियों के लिए छत्ता बनता था परन्तु बाद में इन्होने इस काम को बढ़ाया व सन 1997 से 2005 तक 579.2 क्विंटल मोमीधार छत्ता का निर्माण किया। इन्हें हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान तथा ऊतरप्रदेश के मधुमक्खी पालकों को बेचकर लगभग 5.80 लाख रुल की आय प्राप्त की।</p> <p style="text-align: justify;">इस समय श्री सुनील कुमार मधुमक्खी पालन से सभी खर्चे निकालकर प्रतिवर्ष लगभग 2.0 लाख रूपये की शुद्ध आय प्राप्त कर रहा है। इससे किसान की आर्थिक दशा में तो सुधार हुआ ही है साथ में आसपास के कई किसानों ने इससे प्रेरणा लेकर इस व्यवसाय को अपना लिया है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार।</p> </div>