<h3 style="text-align: justify;">सिविल इंजीनियर श्रीमती अंजनाबेन गामित</h3> <p style="text-align: justify;">पेशे से सिविल इंजीनियर श्रीमती अंजनाबेन गामित समाज में सामान्य व्यक्ति की तरह रहती थीं। लेकिन जैसा कि नियत था, वह विशेष रूप से भूमि/सीमांत भूमि के बिना, सामान्य और जनजातियों में आजीविका सुरक्षित करने के अपने सपने को साकार करने में सफल रही। कृषि विज्ञान केंद्र, तापी द्वारा कृषि संदेश में प्रकाशित सीप मशरूम की खेती पर एक लेख ने उनके सपनों को दिशा दी। इसके बाद उन्होंने केवीके का दौरा किया और केवीके वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में मशरूम की खेती का विकल्प चुना।</p> <h3 style="text-align: justify;">मशरूम खेती के माध्यम से उद्यमिता विकास</h3> <p style="text-align: justify;">अपने सपने को साकार करने के लिए आगे बढ़ते हुए, वह केवीके, तापी में “मशरूम खेती के माध्यम से उद्यमिता विकास” पर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुई और केवीके, व्यारा के तकनीकी मार्गदर्शन के साथ उपलब्ध संसाधनों पर 2017 के दौरान मशरूम की खेती शुरू करने का फैसला किया। इसके लिए उसने चारो तरफ बाँस और हरे शेड के जाल का उपयोग करके पार्किंग शेड में एक मशरूम उगाने वाला घर तैयार किया। उन्हें केवीके वैज्ञानिकों द्वारा निरंतर दौरा और तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ स्पॉन (मशरूम बीज), पॉलीथिन बैग, बीज और रसायन (कार्बेन्डाजिम और फॉर्मेलिन) जैसे सभी आदनों की भी आपूर्ति की गई थी।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC.jpg" width="383" height="137" /></p> <h3 style="text-align: justify;">मशरूम उत्पादन</h3> <p style="text-align: justify;">एक साधारण छोटे-से कम लागत वाले शेड (साइज 15' x 10') और उत्पादन लागत के रूप में 11,000 रुपए के निवेश के साथ उन्होंने अक्टूबर, 2017 में पहली बार मशरूम की खेती शुरू की। 2.5 महीने के भीतर 28,000 रुपए मूल्य के बराबर उन्होंने लगभग 140 किलोग्राम मशरूम की कटाई की।</p> <p style="text-align: justify;">अक्टूबर, 2017 से मार्च, 2019 तक मशरूम उत्पादन में श्रीमती अंजनाबेन की सफलता और मशरूम की खेती में 18 महीने के अनुभव ने उन्हें मशरूम उत्पादन इकाई का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया। इसलिए उन्होंने 2019-20 के दौरान अतिरिक्त 1,72,000 रुपए का निवेश करके अपने मशरूम हाउस (23'x80’) का आकार बढ़ा दिया।</p> <p style="text-align: justify;">अप्रैल, 2019 से दिसंबर, 2019 तक उन्होंने 250 किलोग्राम मशरूम बीज का इस्तेमाल किया और 3,08,500 रुपए की सकल आय के साथ 1,234 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन किया। उत्पादन की कुल लागत 88,350 रुपए थी। इस तरह से उन्होंने 2019-20 के दौरान 2,20,150 रुपए का शुद्ध लाभ कमाया।</p> <h3 style="text-align: justify;">मशरूम विपणन </h3> <p style="text-align: justify;">रिश्तेदारों, सामाजिक संपर्कों और मांग के आधार पर सभी के समर्थन के साथ उसने 100 से 200 ग्राम के पैकेट बनाकर उन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, खुदरा दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं के माध्यम से व्यारा शहर में बेचने का काम किया। मशरूम की टेलीफोनिक बुकिंग ने विपणन को आसान बना दिया।</p> <h4 style="text-align: justify;">जैविक बाजार डेस्क</h4> <p style="text-align: justify;">उन्होंने कलेक्टर, तापी जिले द्वारा शुरू किए गए “जैविक बाजार डेस्क - जैविक उत्पादक से प्रत्यक्ष उपभोक्ता को जैविक उत्पाद बेचने’ के माध्यम से भी मशरूम की बिक्री शुरू की।</p> <p style="text-align: justify;">अपनी उपलब्धियों के लिए श्रीमती अंजनाबेन को न केवल अपने आस-पास के क्षेत्रों में मान्यता मिली, बल्कि भारत सरकार द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ( एवं कृषि विज्ञान केंद्र, नवसारी कृषि विश्वविद्यालय, तापी, गुजरात) कृषि भवन, राजेंद्र प्रसाद राेड, नई दिल्ली। </p>