कृषि क्षेत्र प्रयोगों का खजाना है। इसमें जितने भी नवाचार किए जाएं कम हैं। कोई नई तकनीकी का प्रयोग करता है तो कोई नई फसल को सफलतापूर्वक उपजाता है। ऐसे नित्य नए प्रयोग करने वाले नवाचारी किसान किसी वैज्ञानिक से कम नहीं होते। कृषि शास्त्रा में जितनी भी तकनीकें ईजाद हुई हैं, किसानों ने इन्हें स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। नवाचार वही किसान कर सकता है, जो जागरूक हो और जिन्हें भीड़ से अलग रहकर कुछ नया करना है। दिनोंदिन जलस्तर नीचे चला जा रहा है, ऐसे में प्रत्येक किसान को जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि खेती को बचाना है तो जल बचाना अनिवार्य है। इसलिए अधिक से अधिक वर्षा जल का संग्रह करें। खेत तलाई व बड़े जल हौज बनाकर यह कार्य किया जा सकता है। इसके लिए सरकार अनुदान भी देती है। जल संरक्षण से आप अपने खेत में सिंचाई कर सकते हैं। अनिवार्य है बूंद-बूंद सिंचाई सिंचाई की अन्य विधियों की अपेक्षा यह विधि जल का खर्च बहुत ही कम करती है। टपक सिंचाई पद्धति से आप मनचाही खेती कर सकते हैं। आदि तो टपक सिंचाई के बिना संभव ही नहीं हैं। स्थापित करें सोलर पंप सिस्टम बार-बार बिजली की कटौती भी खेती में बाधाएं लाती हैं। ऐसे में यदि आपके पास सोलर पंप सिस्टम हो तो सारी समस्याएं ही खत्म हो जाएंगी। जब चाहे आप अपने खेत पर खेत तलाई पर लगे टपक सिस्टम से खेती कर सकते हैं। इसके साथ ही ट्यूबवेल से भी इसकी सहायता से सिंचाई की जा सकती है। अच्छे नस्ल के पशु टिकाऊ व स्मार्ट खेती के लिए पशुपालन का हाेना अति आवश्यक है। पशुपालन आपकी खेती की लागत को घटाता है। इससे अच्छी खाद मिल जाती है। इसे वर्मीकम्पोस्ट व अन्य विधि से कम्पोस्ट बनाकर जब आवश्यक हो। खेत में काम ले सकते हैं। इसके अलावा दूध उत्पादन से अच्छा मुनापफा कमा सकते हैं, जिससे किसान के छोटे-छोटे दैनिक खर्चे चल सकते हैं। पशपुालन में गिर नस्ल की गाय, मुर्रा नस्ल की भैंस व बकरी पालन बेहद फायदेमंद रहता है। समय का प्रबंध और पूर्व योजना होगी निर्णायक एक आदर्श किसान को अपने खेत के किस हिस्से में कौन सी फसल अब लगानी है, इसकी पूर्व योजना तय कर लेनी चाहिए और उसके अनुरूप संसाधनों को एकत्रित कर लेना चाहिए। इससे समय रहते किसी भी आपदा, कीट-रोग आदि से बचाव कर अच्छी गुणवत्ता की उपज प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही मृदा की गुणवत्ता को भी बनाए रखने के लिए किसान को हरी खाद आदि के अलावा खेत की जुताई समय पर करनी चाहिए। सहायक होगा फलोत्पादन व सब्जी उत्पादन आजकल देश के प्रत्येक क्षेत्र में फलाेउत्पादन संभव है, चाहे राजस्थान के मरूस्थली जिले क्यों न हों। बेर, अनार, पपीता आदि का फल बेहतर गुणवत्ता की कृषि उपज बगीचा स्थापित किया जा सकता है। इसके अलावा अपने छोटे से फार्म में मल्चिंग व लो टनल आदि आधुनिक तकनीकियों के सहारे वर्ष के तीनों मौसमों में सब्जी उत्पादन करके किसान आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं। सब्जी उत्पादन एक ऐसा कार्य है, जो वर्षपर्यन्त आपको आमदनी देता है। दूध उत्पादन और सब्जी उत्पादन जिन किसानों के पास है वे अपने आप आर्थिक रूप से मजबूत हैं। सीखें फसलों की प्रोसेसिंग केवल फसलें उपजाना ही स्मार्ट खेत नहीं है। इसके साथ-साथ अपनी फसलाें से तैयार होने वाले अन्य प्रसंस्करित उत्पादों की भी जानकारी एवं प्रशिक्षण लेना चाहिए, जिससे आय को दोगुना करने में आसानी रहे। नजर रखें बाजार पर जागरूक किसान हमेशा बाजार की मांग के अनुरूप फसलें उपजाता है। इसलिए यदि अपनी खेती में स्मार्टनेस लाना चाहते हैं तो आपको बाजार की गतिविधियों और मांग का पूरा ज्ञान होना चाहिए कि किस मौसम में कौन सी फसल और कौन सी सब्जी की मांग रहती है। बाजार में सबसे पहले अपने उत्पाद भेज देने चाहिए। अपनाएं कृषि वानिकी व आधुनिक चारा प्रणाली प्रत्येक मेड़ पर पेड़ की तर्ज पर खते की मेड़बंदी व बाड़ के सहारेआ मदनी देने वाले कृषि वानिकी के पेड़ लगाएं, जिसमें थारशोभा खेजड़ी, सहजन, कुमंट आदि का नाम लिया जा सकता है। चारा उत्पादन के लिए नैपियर, गिनी घास के अलावा अजोला यूनिट स्थापित की जा सकती है। खेजड़ी से मिलने वाली सांगरी व सहजन से प्राप्त होने वाली फलियों से अच्छा मुनाफा मिल जाता है। इसके साथ ही सहजन और खेजड़ी की पत्तियां पशुओं के लिए चारे के रूप में काम ले सकते हैं। स्त्राेत : खेती पत्रिका(दिस.) अरविंद सुथार, कृषि विशेषज्ञ, जालाैर, राजस्थान।